मेरे पिता की सन्तान
उन्होंने धुंधली तस्वीर को देखा, फिर मुझे देखा, फिर मेरे पिता की ओर देखा, फिर से मेरी ओर देखा, और उसके बाद फिर से मेरे पिता की ओर l उनकी आँखें विस्मय के साथ पूरी तौर से खुल गयीं l “पापा, आप बिलकुल दादा के समान दिखते हो जब वे जवान थे!” मेरे पिता और मैं दांत दिखाते हुए मुस्कुराए क्योंकि यह कुछ ऐसा था जिसे हम लम्बे समय से जानते थे, लेकिन यह हाल ही तक ज्ञात नहीं था जब तक कि मेरे बच्चों को यह पता नहीं चला l जबकि मेरे पिता और मैं अलग-अलग लोग हैं, मुझे देखने के लिए एक बहुत ही वास्तविक अर्थ में मेरे पिता को एक छोटे आदमी के रूप में देखना है : लम्बी दुबली पतली बनावट; काले बालों का पूरा सिर; बाहर की ओर निकली हुई नाक, और अपेक्षा से बड़े कान l नहीं, मैं मेरा पिता नहीं हूँ, परन्तु मैं निश्चित रूप में अपने पिता का बेटा हूँ l
यीशु के एक शिष्य, फिलिप्पुस ने एक बार पुछा, “हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे” (यूहन्ना 14:8) l और जब कि यह पहली बार नहीं था जब यीशु ने संकेत दिया था, उसकी प्रतिक्रिया अभी भी उसके ठहरने का कारण थी : “जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है” (यूहन्ना 14:9) l अपने पिता और मेरे बीच शारीरिक समानता के विपरीत, जो यीशु यहाँ कहता है वह क्रांतिकारी है : “क्या तू विश्वास नहीं करता कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है?” (पद.10) l उसका बिलकुल वही तत्व और चरित्र उसके पिता के समान ही था l
उस क्षण यीशु अपने प्रिय शिष्यों और हम सब से बहुत ही स्पष्ट बोल रहा था : यदि तुम जानना चाहते हैं कि परमेश्वर कैसा है, मुझे देखो l

पवित्र सहभागिता
हमारे स्कूली मित्रों के समूह ने एक सुन्दर झील के किनारे पर एक साथ लम्बे सप्ताहांत के लिए पुनर्मिलन किया l दिन पानी में खेलने और भोजन साझा करने में बिताए जाते थे, लेकिन मेरे लिए शाम के समय की बातचीत सबसे कीमती थी l जैसे जैसे शाम होती थी, हमारे हृदय असामान्य गहराई और भेद्यता के साथ एक-दूसरे के लिए खुलते थे, लड़खड़ाते हुए विवाह का दर्द और उसके बाद का आघात जो हमारे कुछ बच्चे सहन कर रहे थे l अपनी वास्तविकताओं के अधूरेपन को छिपाए बिना, हमने ऐसे चरम कठिनाइयों के दौरान एक दूसरे को परमेश्वर और उसकी विश्वासयोग्यता की ओर इंगित किया l
मैं उन रातों को को उसके सदृश देखता हूँ जो परमेश्वर का अभिप्राय था जब उसने अपने लोगों को हर वर्ष झोपड़ियों के पर्व के लिए इकठ्ठा होने का निर्देश दिया था l अन्य पर्वों की तरह यह पर्व, इस्राएलियों से यरूशलेम जाने की मांग करती थी l एक बार उनके पहुँचने एक बाद, परमेश्वर ने अपने लोगों को आराधना में एक साथ इकठा होने और पर्व के दौरान – लगभग एक सप्ताह “परिश्रम का कोई काम न [करने] (लैव्यव्यवस्था 23:35) का निर्देश दिया था l झोपड़ियों का पर्व परमेश्वर के प्रावधान का और मिस्र को छोड़ने के बाद जंगल में बिताए गए उनके समय का उत्सव मनाना था (पद.42-43) l
इस सभा ने परमेश्वर के लोगों के रूप में इस्राएलियों की पहचान को मजबूत किया और उनकी सामूहिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद उसकी अच्छाई को प्रमाणित किया l जब हम उन लोगों के साथ इकठ्ठा होते हैं जो परमेश्वर के प्रावधान और प्रबंध को हमारे जीवनों में स्मरण करना पसंद करते हैं, तो हम भी विशवास में मजबूत होते हैं l

क्षमा करने के लिए चुने गए
जनवरी 23, 1999 को ग्रैहम स्टेंस और उनके दो छोटे बेटे फिलिप और टिमोथी को, उनकी जीप में जहाँ वे सो रहे थे, आग लगाकर जला दिया गया था l उस समय तक भारत के ओडिशा में गरीब कुष्ठ रोगियों के बीच उनकी समर्पित सेवा के विषय बाहरी संसार बहुत कम जानता था l इस तरह की त्रासदी के बीच, उनकी पत्नी ग्लेडिस और बेटी एस्तर ने सबको चकित कर दिया l उन्होंने नफरत से नहीं बल्कि क्षमा के साथ प्रत्युत्तर देने का चुनाव किया l
बराह वर्षों के बाद जब मुक़दमा समाप्त हुआ, तो ग्लेडिस ने एक ब्यान जारी किया जिसमें कहा गया था कि “मैंने हत्यारों को माफ़ कर दिया है और मुझे उनके खिलाफ कोई कड़वाहट नहीं है . . . मसीह में परमेश्वर ने मुझे क्षमा कर दिया है और वह अपने अनुयायियों से भी ऐसा ही करने की उम्मीद करता है l” परमेश्वर ने ग्लेडिस को दिखाया कि क्षमा करने की कुंजी यह है कि दूसरों ने हमारे साथ जो किया है उस पर ध्यान केन्द्रित करना बंद करें और यीशु ने हमारे लिए जो किया है उस पर ध्यान केन्द्रित करें l मसीह के सतानेवालों के प्रति उसके शब्द थे “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं” (लूका 23:34) इस प्रकार यीशु की क्षमा के विषय जकर्याह की याजकीय नबूवत पूरा हुआ (1:77) l
जबकि हम में से अधिकांश एक अकल्पनीय त्रासदी को सहन नहीं करेंगे जैसा कि ओडिशा में हुआ, हम में से हर एक के साथ किसी न किसी तरह से अन्याय हुआ है l कोई पति या पत्नी धोखा देती है l कोई बच्चा विद्रोह करता है l कोई कर्मचारी अनुचित व्यवहार करता है l हम किस तरह व्यवहार करते हैं? शायद हम अपने उद्धारकर्ता के आदर्श की ओर देखते हैं l तिरस्कार और क्रूरता के सामने, वह क्षमा करता है l यह यीशु के द्वारा हमारे पापों की क्षमा ही है कि हम, हम लोग, उद्धार पाते हैं, जिसमें दूसरों को क्षमा करने की योग्यता शामिल है l और ग्लेडिस स्टेंस की तरह, हम अपनी कड़वाहट को त्यागकर क्षमा करने के लिए अपने हृदय खोल सकते हैं l

ज़रूरत उसके मार्गदर्शन की
अंकल ज़ाकी विद्वान केनेथ बैली के मित्र से अधिक थे; वे विशाल सहारा रेगिस्तान में चुनौतीपूर्ण भ्रमण में उनके विश्वसनीय मार्गदर्शक थे l अंकल ज़ाकी का अनुसरण करते हुए, बैली कहते हैं कि वे और उनकी टीम उन पर अपना पूरा भरोसा रख रहे हैं l संक्षेप में, वे पुष्टि कर रहे थे, “हम नहीं जानते कि हम कहाँ जा रहे हैं, और यदि आप हमें गलत मार्ग पर छोड़ देते हैं तो हम सब मर जाएंगे l हमने आपके मार्गदर्शन में अपना पूरा भरोसा रखा है l”
अत्यधिक थकान और मनोव्यथा के समय, दाऊद ने किसी भी मानव मार्गदर्शक से परे देखा, उस परमेश्वर के मार्गदर्शन को खोजा जिसकी वह सेवा करता था l भजन 61:2 में हम पढ़ते हैं, “मूर्छा खाते समय मैं पृथ्वी की छोर से भी तुझे पुकारूँगा, जो चट्टान मेरे लिए ऊंची है, उस पर मुझ को ले चल l” वह कामना करता था कि वह परमेश्वर की उपस्थिति में फिर से सुरक्षा और आराम प्राप्त कर सकेगा (पद.3-4) l
जीवन में लोगों को परमेश्वर के मार्गदर्शन की सख्त ज़रूरत है, जो पवित्रशास्त्र में उन भेड़ों के रूप में वर्णित हैं जो “भटक गए हैं” (यशायाह 53:6) l यदि हम अपने ऊपर छोड़ दिए जाएँ, हम टूटे संसार के रगिस्तान में निराशाजनक ढंग से खो जाएंगे l
लेकिन हम अपने ऊपर नहीं छोड़े गए हैं! हमारे पास एक चरवाहा है जो हमें “सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है,” हमारी आत्माओं को तरोताज़ा करता है, और हमारा मार्गदर्शन करता है (भजन 23:2-3) l
आज आप कहाँ पर उसकी अगुवाई चाहते हैं? उसे पुकारें l वह आपको कभी नहीं छोड़ेगा l

आराम से कर सकते हैं
मेरे पिता और मैं पेड़ों को काटते थे और दो मुठ वाले आरा से उन्हें नाप में काटते थे l युवा और ऊर्जावान होने के नाते, मैंने आरी को काटने के लिए मजबूर करने की कोशिश की l “आराम से कर सकते हो,” मेरे पिता कहते थे l “आरी को काम करने दो l”
मैं फिलिपिन्स में पॉल के शब्दों के विषय सोचता हूँ : “यह परमेश्वर ही है जो आप में काम करता है” (2:13) l आराम से कर सकते हैं l उसे हमें बदलने का काम करने दें l
सी.एस. ल्युईस ने कहा कि मसीह ने जो कहा था उसे पढ़ने और करने की तुलना में विकास कहीं अधिक है l उन्होंने समझाया, “एक वास्तविक व्यक्ति, मसीह, . . . आपके लिए कार्य कर रहा है . . . धीरे-धीरे आपको स्थायी रूप से . . . एक नए छोटे मसीह में बदल रहा है, एक प्राणी जो . . . उसकी सामर्थ्य, आनंद, ज्ञान और अनंतता में भागीदारी करता है l
परमेश्वर आज उस प्रक्रिया को पूरा कर रहा है l यीशु के चरणों में बैठें और जो कुछ वह कहना चाहता है उसे ग्रहण कर लें l प्रार्थना करें l “अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखें” (यहूदा 1:21), खुद को दिन भर याद दिलाते रहें कि आप उसके हैं l इस आश्वासन में विश्राम करें कि वह धीरे-धीरे आपको बदल रहा है l
“लेकिन क्या हमें धार्मिकता की भूख और प्यास नहीं लगनी चाहिये? आप पूछेंगे l मन में कल्पना करें कि एक छोटा बच्चा एक ऊंचे ताखे पर से एक उपहार उठाने का प्रयास कर रहा है, प्राप्त करने की इच्छा के साथ उसकी आँखें चमक रही हैं l उसके पिता उसकी इच्छा को भांपते हुए, उपहार को उतार कर उसे दे देता है l
कार्य परमेश्वर का है; आनंद हमारा है l आराम से कर सकते हैं l हम किसी दिन वहां पहुँचेंगे l