
पलों को संजोए रखें
सू डाँगपो(Su Dongpo) चीन के सबसे बड़े कवियों और निबंधकारों में से एक थे l निर्वासन में और पूर्णिमा के चाँद को एक टक देखते हुए, उन्होंने यह वर्णन करने के लिए एक कविता लिखी कि वे अपने भाई को कितना याद कर रहे हैं l वे लिखते हैं, “हम आनंद करते और शोक करते हैं, इकठ्ठा होते और अलग होते हैं, जब चाँद बढ़ता और घटता रहता है l बीते समयों से, कुछ भी सम्पूर्ण नहीं रहता l काश हमारे प्रियजन लम्बी आयु पाएं, और हज़ारों मील एक दूसरे से दूर रहने के बावजूद इस खूबसूरत दृश्य को देखते रहें l”
उनकी कविता में सभोपदेशक की पुस्तक की विषय-वस्तु पायी जाती है l लेखक, जो उपदेशक के रूप में जाना जाता है (1:1), ने ध्यान दिया कि “रोने का समय, और हँसने का भी समय . . . गले लगाने का समय, और गले लगाने से रुकने का भी समय है” (3:4-5) l दो विपरीत गतिविधियों को जोड़कर, उपदेशक, इस कवि की तरह, यह सुझाव देता कि आखिरकार सभी अच्छी चीजों का अंत होगा l
जैसा कि चीनी कवि ने चाँद के बढ़ने और घटने को एक और संकेत के रूप में देखा, कि कुछ भी सम्पूर्ण नहीं है उसी प्रकार उपदेशक ने भी परमेश्वर के संसार में संभावित क्रम के निर्माण में देखा जो उन्होंने बनाया था l परमेश्वर घटनाओं की देख-रेख करता है, और “उसने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं” (पद.11) l
जीवन अप्रत्याशित हो सकता है और कभी-कभी दर्दनाक अलगाव से भरा हो सकता है, लेकिन हम उत्साहित हो सकते हैं कि सब कुछ परमेश्वर की निगाह में है l हम जीवन का आनंद ले सकते हैं और क्षणों को संजो सकते हैं – अच्छे और बुरे – हमारे प्रिय परमेश्वर हमारे साथ हैं l

मुर्खता करना
मेरा सबसे अपमानजनक अनुभव वह दिन था जब मैंने अपनी पचासवीं वर्षगाँठ पर एक सेमिनरी के संकाय, छात्रों और दोस्तों को संबोधित किया था l मैं व्याख्यान के लिए भाषण-मंच पर अपने हाथ से लिखित नोट्स के साथ पहुंचा और एक विशाल भीड़ को देखा, लेकिन मेरी नज़र सामने की पंक्ति में बैठे प्रतिष्ठित प्रोफेसरों पर पड़ी, जो अकादमिक गाउन पहने हुए थे और बहुत गंभीर दिख रहे थे l मेरा होश उड़ गया l मेरा मुँह सूख गया और मेरे मस्तिष्क से उसका सम्बन्ध टूट गया l मैंने पहले कुछ वाक्य पढ़े और फिर मैं उसे तत्काल सुधारना शुरू किया l चूँकि मुझे पता नहीं था कि मैं अपने व्याख्यान में कहाँ पर था, मैंने निरर्थक रूप से पृष्ठों को पलटना शुरू कर दिया, और साथ में बकवास करने लगा जिससे सभी चकित हो गए l किसी तरह मैंने इसे पूरा किया, अपनी कुर्सी पर लौट आया, और फर्श पर एक टक देखने लगा l मैं मरना चाहता था l
हालाँकि, मैंने यह सीखा कि अपमान एक अच्छी बात हो सकती है अगर यह विनम्रता की ओर ले जाए, क्योंकि वह परमेश्वर का दिल खोलनेवाली कुंजी है l शास्त्र कहता है “परमेश्वर अभिमानियों का विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है” (याकूब 4:6) l वह अनुग्रह के साथ विनम्रता दिखाता है l स्वयं परमेश्वर ने कहा, “मैं उसी की ओर दृष्टि करूँगा जो दीन और खेदित मन का हो, और मेरा वचन सुनकर थरथराता हो” (यशायाह 66:2) l जब हम सब खुद को परमेश्वर के सामने नम्र दीन करते हैं, वह हमें शिरोमणि करता है (याकूब 4:10) l
अपमान और शर्म हमें परमेश्वर के पास ला सकता है कि वह हमें आकार दे सके l जब हम दीन होते हैं, हम परमेश्वर के हाथों में गिरते हैं l

ऊपर देखें!
जब फिल्म निर्माता वाईली ओवरस्ट्रीट ने अजनबियों को चंद्रमा की एक जीवित तस्वीर दिखाई, जैसा कि उनके शक्तिशाली दूरबीन के द्वारा देखा गया था, वे फुसफुसाहट और खौफ के साथ प्रतिक्रिया करते हुए, बहुत कम दूरी के दृश्य पर दंग रह गए थे l इस तरह के शानदार नज़ारे को देखने के लिए, उन्होंने समझाया, “यह हमें आश्चर्य से भर देता है कि कुछ हम लोग से बहुत बड़ा भी है l”
भजनकार दाऊद ने भी परमेश्वर के स्वर्गिक प्रकाश पर अचम्भा किया l “जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तारागन को जो तू ने नियुक्त किये हैं, देखता हूँ; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले? (भजन 8:3-4) l
दाऊद का विनम्र प्रश्न हमारे खौफ को परिप्रेक्ष्य में ला देता है, जब हम सीखते है कि परमेश्वर के अपने नए स्वर्ग और पृथ्वी को बनाने के बाद, हमें चाँद या सूरज की आवश्यकता नहीं होगी l इसके बजाय, प्रेरित यूहन्ना ने कहा, कि परमेश्वर की झिलमिलाती महिमा समस्त आवश्यक प्रकाश प्रदान करेगी l “उस नगर में सूर्य और चाँद के उजियाले की आवश्यकता नहीं, क्योंकि परमेश्वर के तेज़ से उस में उजियाला हो रहा है, और मेम्ना उसका दीपक है . . . और रात वहां न होगी” (प्रकाशितवाक्य 21:23-25) l
यह कितना अद्भुत विचार है! फिर भी हम अभी उसकी स्वर्गिक ज्योति का अनुभव कर सकते हैं – केवल मसीह को ढूँढने के द्वारा, जो जगत की ज्योति है l ओवरस्ट्रीट के दृष्टिकोण में, “हमें अक्सर ऊपर देखना चाहिये l” जब हम ऐसा करते हैं, काश हम परमेश्वर को देखें l

अलगाव में एकता
अपने सहयोगी तरुण के साथ एक परियोजना में लगाएं गए, अशोक को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा : उसके और तरुण के बहुत अलग विचार थे कि कैसे कार्य आरंभ करें l जबकि वे एक दूसरे के मत का सम्मान करते थे, उनके दृष्टिकोण इतने अलग थे कि संघर्ष आसन्न लग रहा था l इससे पहले कि संघर्ष शुरू हुआ, हालाँकि, दोनों लोग अपने मालिक के साथ अपने मतभेदों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए, जिन्होंने उन्हें अलग-अलग टीमों में डाल दिया l यह एक समझदारी भरा कदम था l उस दिन, अशोक ने यह सबक सीखा : एकजुट होना का मतलब हमेशा एक साथ काम करना नहीं है l
अब्राहम को इस सच्चाई का एहसास हुआ होगा जब उसने सुझाव दिया था कि वह और लूत बेतेल में अपने अलग मार्ग को चुन लें (उत्पत्ति 13:5-9) l यह देखते हुए कि उनके दोनों झुंडों के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी, अब्राहम ने समझदारी से साहचर्य छोड़ दी l लेकिन पहले, उसने बल देकर कहा कि वे “बाई-बंधू” (पद.8) हैं, लूत को आपसी सम्बन्ध याद दिलाया l फिर, अत्यधिक विनम्रता के साथ, उन्होंने अपने भतिजे को पहली पसंद (पद.9) दी, भले ही वह अब्राहम, वरिष्ठ व्यक्ति था l यह वैसे था, जैसा कि एक पास्टर ने वर्णन किया है, “एक सामंजस्यपूर्ण अलगाव l”
परमेश्वर द्वारा अद्वितीय रूप से बनाए जाने के कारण, हम पाते हैं कि हम एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कभी-कभी अलग रहकर बेहतर काम करते हैं l विविधता में एक एकता है l हालाँकि, हम कभी नहीं भूलते, कि हम अभी भी परमेश्वर के परिवार में भाई-बहन हैं l हम चीजों को अलग तरीके से कर सकते हैं, लेकिन हम उद्देश्य में एकजुट रहते हैं l
