रंगों का प्रदर्शन
दशकों तक, लन्दन दुनिया के सबसे महानगरीय शहरों में से एक रहा है l 1933 में, एक पत्रकार ने इंग्लैंड की महान राजधानी के बारे में लिखा था, “मुझे अभी भी लगता है कि लोगों का भीड़ और रंग और भाषा लन्दन की सबसे अच्छी बात है l” यह “भीड़” आज भी मिश्रित महक, आवाज़ और एक वैश्विक समुदाय के दर्शनीय स्थलों में दिखाई देते हैं l विविधता की सुन्दरता दुनिया के महानतम शहरों में से एक लुभावनी अपील का हिस्सा है l
जैसा कि किसी भी शहर में जहाँ मनुष्य बसे हुए है, हालाँकि, लन्दन अपनी समस्याओं के बिना नहीं है l बदलाव चुनौतियाँ लाता है l संस्कृतियाँ कभी-कभी टकराती हैं l और यह एक कारण है कि मानव हाथों द्वारा निर्मित कोई भी शहर हमारे शास्वत घर के आश्चर्य की तुलना नहीं कर सकता है l
जब प्रेरित यूहन्ना परमेश्वर की उपस्थिति में पहुँचाया गया, स्वर्गिक आराधना का एक अंश विविधता थी, जैसे कि छुटकारा पाए हुए लोग गा रहे थे, “तू इस पुस्तक को लेने, और इसकी मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तूने वध होकर अपने लहू से हर एक कुल और भाषा और लोग और जाति में से परमेश्वर के लिए लोगों को मोल लिया है, और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिए एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं” (प्रकाशितवाक्य 5:9-10) l
स्वर्ग की कल्पना करें : जीवित परमेश्वर की संतान होने के आश्चर्य का – मिलकर - उत्सव मनाता हुआ संसार के प्रत्येक समूह की एक भीड़! यीशु में विश्वासी होकर, हम आज भी उस विविधता का उत्सव मनाएं l

गलत फायदा नहीं उठाना
कई कैदी अपने जेल के समय को कम करने के लिए सड़क के किनारे का कचरा इकठ्ठा कर रहे थे जब उनके पर्यवेक्षक/जेलर, जेम्स अचानक गिर गए l वे उनकी सहायता के लिए दौड़े और महसूस किया कि वह एक चिकित्सीय आपात स्थिति में है l एक कैदी ने मदद के लिए जेम्स का फोन लिया l पुलिस विभाग ने बाद में अपने पर्यवेक्षक को तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के लिए कैदियों को धन्यवाद दिया, विशेष रूप से इसलिए कि वे उनकी उपेक्षा कर सकते थे – उनकी बड़ी हानि में क्योंकि उन्हें आघात(stroke) पहुंचा था – या भागने के लिए स्थिति का खुद लाभ उठा सकते थे l
कैदियों की दया के कार्य पौलुस और सीलास के विपरीत नहीं है जब वे जेल में थे l जब उनके कपड़े उतारकर, बेंत लगाकर, उन्हें जेल में डाल दिया गया, एक बड़ा भूकंप आया जिससे उन के सब बंधन खुल गए और जेल की नींव हिल गयी और उसके दरवाजे खुल गए (प्रेरितों 16:23-26) l जब जेलर जागा, वह स्वाभाविक रूप से अनुमान लगाया कि कैदी भाग गए होंगे, इसलिए उसने अपने आप को मार डालने की तयारी की (कल्पना करके कि उनके भागने के लिए उसको क्या सज़ा मिलेगी) l जब पौलुस ने ऊंचे शब्द से पुकारा , “हम सब यहीं है!” (पद.28) जेलर उनके व्यवहार से द्रवित हो गया – कैदियों के विषय जो असामान्य था – कि वह उस परमेश्वर के विषय उत्सुक हो गया जिसके वे उपासक थे, और अंततः वह भी उसमें विश्वास कर लिया (पद.29-34) l
जिस प्रकार हम दूसरों के साथ व्यवहार करते हैं दर्शाता है कि हम क्या विश्वास करते हैं और किसको महत्व देते हैं l जब हम हानि के बदले भलाई करने का निर्णय करते हैं, हमारे व्यवहार उनको उस परमेश्वर के विषय जिसको हम जानते और प्रेम करते हैं सोचने के लिए प्रेरित करेंगे l

नए जीवन का मुर्ख मार्ग
कुछ चीजें जब तक आप उनको अनुभव न करें बिलकुल समझ में नहीं आती हैं l जब मैं अपने पहले बच्चे के साथ गर्भवती थी, तो मैंने बच्चे के जन्म के बारे में कई किताबें पढ़ीं और दर्जनों महिलाओं से उनकी प्रसव पीड़ा की कहानियाँ सुनीं l लेकिन मैं अभी भी वास्तव में कल्पना नहीं कर सकती थी कि अनुभव कैसा होगा l मेरा शरीर जो करने वाला था वह असंभव लग रहा था!
1 कुरिन्थियों में पौलुस लिखता है कि परमेश्वर के राज्य में जन्म लेना, उद्धार जो परमेश्वर मसीह के द्वारा हमें देता है, समान रूप से उनके लिए समझ से परे है जिन्होंने उसका अनुभव नहीं किया है l यह कहना “मुर्खता” सी लगती है कि क्रूस के द्वारा उद्धार मिल सकता था – निर्बलता, हार और अपमान द्वारा चिन्हित एक मृत्यु l फिर भी यह “मुर्खता” ही वह उद्धार था पौलुस ने जिसका प्रचार किया!
यह ऐसा नहीं था जिसकी कोई कल्पना कर सकता है l कुछ लोगों ने सोचा कि उद्धार एक मजबूत राजनैतिक नेता या एक चमत्कारी संकेत के द्वारा आयेगा l दूसरों ने सोचा कि उनकी अपनी शैक्षिक या दार्शनिक उपलब्धियां उनका उद्धार बनेंगी (1 कुरिन्थियों 1:22) l लेकिन परमेश्वर ने सभी को इस तरह से उद्धार दिलाकर आश्चर्यचकित कर दिया, जो केवल उन लोगों की समझ में आता है जिन्होंने इसे अनुभव किया l
परमेश्वर ने कुछ शर्मनाक और दुर्बल वस्तु लिया – क्रूस पर एक मृत्यु – और उसे बुद्धिमत्ता और सामर्थ्य का आधार बना दिया l परमेश्वर अकल्पनीय करता है l वह जगत के मूर्खों और निर्बलों को चुनता है कि ज्ञानवानों को लज्जित करे (पद.27) l
और उसका चकित करनेवाले, असंगत तरीके हमेशा ही सर्वोत्तम तरीके होते हैं l

विफलता में एक मित्र
27 नवम्बर, 1939 को, तीन निधि खोजी(treasure hunters) तीन कर्मी दल के साथ अमेरिका में “हॉलीवुड” नामक प्रसिद्ध फिल्म निर्माण स्थल के बाहर गड्ढा खोदे l वे गड़ा हुआ धन ढूँढ रहे थे, जिसमें सोना, हीरे, और मोती थे जिसके वहां पचहत्तर साल पहले गाड़े जाने की अफवाह थी l
उनको वह कभी नहीं मिला l चौबीस दिनों तक खोदने के बाद, उनको एक शिलाखंड मिला और वे रुक गए l उनकी उपलब्धि धरती में केवल नौ फीट चौड़ा, बयालीस फीट गहरा सुराख़ था l वे खिन्न होकर लौट आए l
गलती करना मानवता है – हम सभी कभी-कभी विफल होते हैं l पवित्रशास्त्र हमें बताता है कि युवा मरकुस एक मिशनरी यात्रा पर पौलुस और बरनबास से अलग चला गया “और काम पर उनके साथ न गया l” इस कारण, अगली यात्रा में “पौलुस . . . उसे साथ ले जाना अच्छा न समझा” (प्रेरितों 15:38), जिसका परिणाम बरनबास के साथ एक गहरा मतभेद था l लेकिन अपनी शुरूआती असफलताओं के बावजूद, वर्षों बाद मरकुस आश्चर्यजनक तरीके से दिखायी दिया l जब पौलुस अकेला था और अपने जीवन के अंत के समीप जेल में था, उसने मरकुस के विषय पुछा और उसे “सेवा के लिए . . . बहुत काम का है” कहा (2 तीमुथियुस4:11) l परमेश्वर ने मरकुस को सुसमाचार लिखने के लिए भी प्रेरित किया जो उसके नाम से है l
मरकुस का जीवन हमें दिखाता है कि परमेश्वर हमें हमारी गलतियों और विफलताओं का सामना करने के लिए अकेले नहीं छोड़ेगा l वह मदद और सामर्थ्य भी देगा जिनकी हमें ज़रूरत है l

प्रार्थना के अन्डे
मेरी रसोई की खिड़की के ठीक बाहर, एक कबूतर ने अपना घोंसला हमारी आँगन की छत के नीचे बनाया l उसका एक सुरक्षित स्थान पर घास रखना और उसके बाद अन्डे सेने मकसद से उन पर बैठना मुझे अच्छा लगा l प्रत्येक सुबह मैं उसकी प्रगति जांचती थी; लेकिन हर सुबह, वहां कुछ भी नहीं था l कबूतर के अन्डे से बच्चे निकलने में कुछ हफ्ते लगते हैं l
इस तरह की अधीरता मेरे लिए नई नहीं है l मैंने इंतज़ार करने के आगे हमेशा अथक प्रयास किया है, खासकर प्रार्थना में l मेरे पति और मैंने अपने पहले बच्चे को दत्तक लेने में पांच साल इंतज़ार किया l दशकों पहले, लेखिका कैथरीन मार्शल ने लिखा, “प्रार्थनाएं, अण्डों की तरह, रखते ही तुरंत नहीं फूटती हैं l”
नबी हबक्कूक ने प्रार्थना में प्रतीक्षा के साथ कुश्ती की l यहूदा के दक्षिणी राज्य के बाबुल के क्रूर दुर्व्यवहार के साथ परमेश्वर की चुप्पी से निराश, हबक्कूक “पहरे पर खड़ा [रहने], और गुम्मट पर चढ़कर [ठहरे रहने], और [ताकते रहने] कि मुझ से वह कहेगा” (हबक्कूक 2:1) के लिए समर्पित होता है l परमेश्वर उत्तर देता है कि हबक्कूक को “नियत समय” तक इंतज़ार करना है (पद.3) और हबक्कूक को “दर्शन की बातें लिख” देने के लिए निर्देश देता है ताकि ये बातें दिए जाने के तुरंत बाद ही फ़ैल जाए (पद.2) l
परमेश्वर जो बातें उल्लिखित नहीं करता है वह यह है कि “नियत समय” जब बाबुल पराजित होगा वह छह दशक दूर है, जिससे प्रतिज्ञा और उसके पूरा होने के बीच एक लम्बा अंतर उत्पन्न करता है l अण्डों की तरह, प्रार्थनाएं अक्सर तुरंत पूरी नहीं होती हैं, बल्कि परमेश्वर के अति महत्वपूर्ण उद्देश्यों में हमारे संसार और हमारे जीवनों के लिए पूरी होती हैं l