आपना नाम भरिये
परमेश्वर की ओर से लव लेटर्स (पुस्तक) में, ग्लेनिस नेललिस्ट बच्चों को प्रभु के साथ एक गहरे व्यक्तिगत तरीके से संवाद करने के लिए आमंत्रित करती है l बच्चों की इन पुस्तकों में परमेश्वर की ओर से एक पत्री सम्मिलित है जिसमें एक खाली स्थान है और जिसमें हर एक कहानी के बाद उस बच्चे का नाम भरा जाना है l वचन की सच्चाइयों को व्यक्तिगत बनाना उसके युवा पाठकों को समझने में सहायता करता है कि बाइबल केवल एक कहानी की पुस्तक नहीं है l उन्हें यह सिखया जा रहा है कि प्रभु उनके साथ एक सम्बन्ध चाहता है और कि वह अपने वचन के द्वारा अपने अति प्रिय बच्चों के साथ बातचीत करता है l
मैंने यह पुस्तक अपने भांजे के लिए खरीदी और परमेश्वर की ओर से हर एक पत्री के आरम्भ में सभी खाली स्थानों को भर दिया l अपने नाम को देखकर अत्यधिक ख़ुशी से, मेरे भांजे ने कहा, “परमेश्वर मुझे भी प्यार करता है!” अपने प्रेमी सृष्टिकर्ता के गहरे और सम्पूर्ण व्यक्तिगत प्रेम को जानना कितना तसल्ली देनेवाला है l
जब परमेश्वर ने इस्राएलियों से सीधे तौर पर नबी यशायाह के द्वारा बातें की, उसने उनके ध्यान को स्वर्ग की ओर की l प्रभु ने पुष्टि की कि वह “गणों” को नियंत्रित करता है (यशायाह 40:26), तारों के व्यक्तिगत महत्त्व को निर्धारित करता है, और प्रत्येक को प्रेम से मार्गदर्शित करता है l उसने अपने लोगों को आश्वस्त किया कि वह एक तारे को भी न भूलेगा या खोएगा . . . या एक प्रिय संतान जिसे उसने ख़ास उद्देश्य और अनंत प्रेम से रचा है l
जब हम वचन में अपने सर्वशक्तिमान प्रभु के अन्तरंग प्रतिज्ञाओं और प्रेम की घोषणाओं का उत्सव मानते हैं, हम अपने नाम भर सकते हैं l हम बच्चों का सा भरोसा और आनंद घोषित कर सकते हैं, “परमेश्वर मुझे भी प्यार करता है!”

मुख्य कर्ता
मैं एक विद्यार्थी के विषय सुना जो एक प्रसिद्ध सेमिनरी(बाइबल कॉलेज) में धर्मोपदेश की शिक्षा ले रहा था l वह युवा विद्यार्थी ने, जो अपने विषय अधिक अभिमानी था, अपने धर्मोपदेश को वाक्पटुता और प्रगट उत्साह के साथ प्रस्तुत किया l वह आत्म-संतुष्ट होकर बैठ गया, और प्रोफेसर उत्तर देने से पूर्व थोड़ा रुक गए l “वह तो एक प्रभावशाली धर्मोपदेश था,” उन्होंने कहा l “यह अच्छे से व्यवस्थित था और मर्मस्पर्शी भी l”
प्रोफेसर ने हम सब की एक समस्या स्पष्ट की जिससे हम कभी-कभी संघर्ष करते हैं l हम इस प्रकार बात कर सकते हैं जैसे कि हम मुख्य कर्ता हैं (उस पर बल देते हुए जो हम करते हैं, जो हम बोलते हैं) जबकि वास्तव में परमेश्वर जीवन में मुख्य कर्ता है l हम अक्सर दावे के साथ कहते हैं कि परमेश्वर किसी न किसी तरह सामान्य रूप से “प्रभारी है,” परन्तु हम इस प्रकार अभिनय करते हैं जैसे कि समस्त परिणाम हमारे ऊपर निर्भर होते हैं l
वचन दृढ़ता से कहता है कि परमेश्वर ही हमारे जीवन का वास्तविक विषय है, वास्तविक प्रभाव है l हमारे विश्वास के अनिवार्य कार्य भी – प्रभु की सामर्थ्य में (भजन 118:10-11) - “यहोवा के नाम से” संपन्न होते हैं l परमेश्वर हमारे उद्धार को सम्पादित करता है l परमेश्वर हमें बचाता है l परमेश्वर हमारी ज़रूरतों को पूरा करता है l “यह तो यहोवा की ओर से हुआ है” (पद. 23) l
इसलिए तनाव दूर हो चूका है l हमें क्षुब्ध होने, तुलना करने, बाध्यकारी ऊर्जा से कार्य करने की, या अपनी अनेक चिंताओं को पालने की ज़रूरत नहीं है l परमेश्वर नियंत्रण रखता है l हमें केवल भरोसा करने की ज़रूरत है और आज्ञाकारिता से उसकी अगुवाई का अनुसरण करना है l

मत भूलिएगा!
मेरी भांजी, उसकी चार साल की बेटी केलिन, और मैं ने शनिवार दोपहर का अद्भुत आनंद लिया l हमने बाहर बुलबुले बनाने, प्रिंसेस कलर बुक में रंग भरने, और पीनट मक्खन और जेली सैंडविच खाने का आनंद लिया l जब वे जाने के लिए कार में बैठ गए, कालीन ने खुली खिड़की से प्यार से बोली, “आंटी ऐन, मुझे मत भूलियेगा l” मैं जल्दी से कार की ओर बढ़कर धीरे से फुसफुसाई, “मैं तुम्हें कभी नहीं भूल सकती l मैं वादा करती हूँ कि मैं जल्द ही तुमसे मिलूंगी l”
प्रेरितों 1 में, शिष्य देख रहे थे जब यीशु “उनके देखते-देखते” आसमान में उठा लिया गया (पद.9) l मुझे आश्चर्य है कि उन्होंने सोचा होगा कि शायद उनका स्वामी उनको भूल जाएगा l परन्तु उसने अभी तुरंत प्रतिज्ञा की थी कि वह अपना पवित्र आत्मा भेजेगा जो उनके अन्दर निवास करेगा और आनेवाले सताव से पेश आने में उनको समर्थ बनाएगा (पद.8) l और उसने उनको समझाया था कि वह उनके लिए स्थान तैयार करने जा रहा है और वापस आकर उनको ले जाएगा कि वे उसके साथ रहें (यूहन्ना 14:3) l फिर भी वे सोचे होंगे कि उनको कितना समय इंतज़ार करना होगा l शायद वे कहना चाहते है, “यीशु, आप हमें भूलियेगा नहीं!”
हम जो यीशु में विश्वास किये हैं, वह पवित्र आत्मा के द्वारा हममें निवास करता है l इसके बाद भी हम सोचते हैं वह कब लौटेगा और हमें और अपनी सृष्टि को पूरी रीति से पुनः स्थापित करेगा l परन्तु यह अवश्य होगा – वह हमें भूलेगा नहीं l “इस कारण एक दूसरे को शांति दो और एक दूसरे की उन्नति का कारण बनो” ( 1 थिस्सलुनीकियों 5:10-11) l

निश्चिन्त रहें
हाल ही में मेरे ससुर अठत्तर वर्ष के हो गए, और उनको सम्मानित करने के लिए हमारे पारिवारिक सहभागिता में, किसी ने उनसे पुछा, “आपने अपने अब तक जीवन में कौन सी सबसे महत्वपूर्ण बात सीखी है?" उन्होंने उत्तर दिया, “निश्चिन्त रहें l”
निश्चिन्त रहें l उन शब्दों को एकपक्षीय कहकर अस्वीकार करना प्रलोभक हो सकता है l परन्तु मेरे ससुर अँधा आशावाद या सकरात्मक सोच को बढ़ावा नहीं दे रहे थे l वह अपने लगभग आठ दशकों में कठिन समयों को सहन किये थे l आगे बढ़ने का उनका दृढ़ निश्चय किसी धुंधली आशा में जड़वत नहीं था कि बातें बेहतर अच्छी हो सकती हैं, परन्तु उनके जीवन में मसीह के कार्य पर आधारित था l
“निश्चिन्त रहें” – बाइबल जिसे अटलता/दृढ़ता कहती है – केवल इच्छाशक्ति से संभव नहीं है l हम दृढ़ रहते हैं क्योंकि परमेश्वर ने बार-बार इसकी प्रतिज्ञा दी है, कि वह हमारे साथ है, कि वह हमें सामर्थ्य देगा, और कि वह हमारे जीवनों में अपने उद्देश्यों को पूरा करेगा l यही वह सन्देश था जो उसने यशायाह के द्वारा इस्राएलियों से दिया था : “मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूँ; मैं तुझे दृढ़ करूँगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे संभाले रहूँगा” (यशायाह 41:10) l
कैसे “निश्चिन्त रहें”? यशायाह के अनुसार, परमेश्वर का चरित्र आशा के लिए बुनियाद है l यह जानना कि परमेश्वर की भलाई भय पर हमारी पकड़ को हमें ढीला करने की अनुमति देता है, हम पिता और उसकी प्रतिज्ञा से लिपटे रह सकते हैं कि वह हमारे लिए दैनिक प्रबंध करेगा : सामर्थ्य, सहायता, और परमेश्वर की आराम देनेवाली, समर्थ करनेवाला, और थामनेवाली उपस्थिति l

तूफ़ान से आश्रय
जैसा कि कहानी में है, 1763 में, एक युवा सेवक, इंग्लैंड, सॉमरसेट में चट्टान के किनारे सड़क पर जाते समय, बिजली की कड़क, चमक और अत्यधिक बारिश से बचने के लिए एक गुफा में छिप गया l जब उसने उस शेडर घाटी के बाहर देखा, उसने परमेश्वर में आश्रय और शान्ति प्राप्त करने के उपहार पर विचार किया l वहां प्रतीक्षा करते हुए, उसने गीत लिखना शुरू किया, “अब्दी चट्टान मुझे(Rock of Ages),” जिसका आरंभिक स्मरणीय पंक्ति है : “अबदी चट्टान मुझे, उस दरार में छिपने दे l”
हम यह नहीं जानते हैं कि अगस्टस टॉपलेडी इस गीत को लिखते समय चट्टान की दरार में मूसा के अनुभव को प्राप्त किया या नहीं (निर्गमन 33:22), परन्तु शायद उसने किया l निर्गमन का वर्णन मूसा द्वारा परमेश्वर का आश्वासन खोजना और परमेश्वर का उत्तर बताता है l जब मूसा ने परमेश्वर से अपना प्रताप प्रगट करने को कहा, परमेश्वर ने यह जानते हुए दयालुता से उत्तर दिया, कि “मनुष्य मेरे मुख का दर्शन करके जीवित नहीं रह सकता” (पद.20) l उसने मूसा को चट्टान की दरार में छिपा दिया जब वह उसके सामने से निकला, और मूसा केवल उसकी पीठ देख सका l और मूसा जान गया कि परमेश्वर उसके साथ था l
हम भरोसा कर सकते हैं कि परमेश्वर ने मूसा से जो कहा था, “मैं आप तेरे साथ चलूँगा और तुझे विश्राम दूंगा” (पद.14), उसी प्रकार हम भी उसमें आश्रय पा सकते हैं l हम अपने जीवन में अनेक तूफानों का सामना करेंगे, जिस प्रकार मूसा और विलायती सेवक ने उस कहानी में किया, परन्तु जब हम उसे पुकारते हैं, वह हमें अपनी उपस्थिति की शांति देगा l