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प्रेम या पैसे के लिए

आयरिश कवि ऑस्कर वाइल्ड ने कहा, “जब मैं जवान था मैं सोचता था कि पैसा जीवन में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु थी; अब जब कि मैं बूढ़ा हो गया हूँ मैं जानता हूँ कि वह है l” उसकी टिप्पणी मज़ाक बन गयी, वह छियालीस वर्ष की उम्र तक जीवित रहा, इसलिए वास्तव में वह “बूढ़ा” हुआ ही नहीं l वाइल्ड ने पूरी तरह समझ लिया कि जीवन पैसे के विषय नहीं है l

पैसा अस्थायी है; वह आता है और वह चला जाता है l इसलिए जीवन अवश्य ही पैसे से और जो पैसा खरीद सकता है से अधिक होगा l यीशु ने अपनी पीढ़ी के लोगों – धनी और निर्धन दोनों ही को –एक पुनः जांची हुए उपयोगिता पद्धति के प्रति चुनौती दी l लूका 12:15 में यीशु ने कहा, “चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो; क्योंकि किसी का जीवन उसकी संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता l” हमारी संस्कृति में, जहाँ और अधिक और नया और बेहतर की ओर स्थायी ध्यान है, संतोष के लिए और पैसा और सम्पति के विषय हमारा दृष्टिकोण क्या है, दोनों ही के लिए कुछ कहा जाना चाहिए l

यीशु से मुलाकात करके, एक जवान धनी व्यक्ति उदास होकर चला गया क्योंकि उसके पास बहुत अधिक सम्पति थी जिसे वह छोड़ना नहीं चाहता था (देखें लूका 18:18-25), परन्तु कर अधिकारी जक्कई अधिकाधिक सम्पति/पैसा त्याग दिया जिसे उसने इकठ्ठा करने में अपना जीवन लगाया था (लूका 19:8) l मसीह के हृदय को गले से लगाना ही अंतर है l उसके अनुग्रह में, हम अपने अधिकार में की वस्तुओं के प्रति एक स्वस्थ दृष्टिकोण रख सकते हैं – ताकि वे हम पर नियंत्रण करनेवाली वस्तुएँ न बन जाएँ l

कचरा से धन तक

बोगोटा के एक गरीब पड़ोस में एक ऊंची सड़क पर कबाड़ी का घर है l उसके विषय एक भी चीज़ विशेष नहीं है l फिर भी कोलोम्बिया की राजधानी में यह विनम्र मकान 25,000 पुस्तकों की एक मुफ्त पुस्तकालय है – अनावश्यक साहित्य जिसे जोस अल्बर्टो गुटीरेज़ ने अपने समुदाय के निर्धन बच्चों के साथ साझा करने के लिए इकठ्ठा किया है l

साप्ताहिक “पुस्तकालय समय” में स्थानीय बच्चे इस घर में इकठ्ठा होते हैं l हर एक कमरे में जाकर, जो पुस्तकों से भरे हुए हैं, बच्चे इस विनम्र घर को आदरणीय जोस के घर से अधिक मानते हैं – यह एक अमूल्य खज़ाना है l

मसीह के प्रत्येक विश्वासी के लिए भी यह सच है l हम सादी मिटटी से रचे गए हैं – जिसमें दोष/दरारें हैं और आसानी से टूट जाते हैं l परन्तु हम परमेश्वर के निवास हैं जिसमें समर्थ करनेवाला आत्मा रहता है, जो हमें दुखित, टूटे संसार में मसीह का सुसमाचार ले जाने के योग्य बनता है l यह साधारण, निर्बल लोगों के लिए बड़ा उत्तरदायित्व है l

“हमारे पास वह धन मिटटी के बरतनों में रखा है कि यह असीम सामर्थ्य हमारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर ही की ओर से ठहरे” (2 कुरिन्थियों 4:7), प्रेरित पौलुस ने प्राचीन शहर कुरिन्थुस में अपनी मंडली से कहा l वे लोग अलग-अलग समुदाय से और उस क्षेत्र के अलग-अलग हिस्से से थे, इसलिए पौलुस ने कहा, कि शायद उनमें से अनेक “अपने विषय . . . प्रचार करने” की परीक्षा में पड़े होंगे” (पद.5) l

इसके बदले, पौलुस ने कहा, उस अमूल्य व्यक्ति के विषय दूसरों को बताएं जो हमारे अन्दर रहता है l यह वही है और उसकी श्रेष्ठ सामर्थ्य है जो साधारण जीवनों को अमूल्य धन में परिवर्तित कर देता है l

बुलडॉग और फव्वारा

ज्यादातर गर्मियों की सुबह में, हमारे घर के पीछे पार्क में एक दिलचस्प नाटक दिखाई देता है l इसमें एक फव्वारा शामिल है l और एक बुलडॉग l लगभग 6.30 बजे, फव्वारे चालू हो जाते हैं l उसके थोड़े समय बाद, बुलडॉग फिफि(हमारे परिवार द्वारा दिया गया नाम) वहां आ जाती है l

फिफि का मालिक उसका पट्टा खोल देता है l बुलडॉग अपनी पूरी ताकत से निकटतम फव्वारे की ओर दौड़ती है, पानी के धार पर आक्रमण करती है जब वह उसके चेहरे को भिगोता है l यदि फिफि उस फव्वारे को खा पाती, मेरी समझ से वह उसे खा लेती l यह उल्लास का निरा चित्र है उस द्रव्य द्वारा पूरी तौर से भीगने की फिफि की कदाचित अनंत इच्छा जिसे वह इच्छा भर नहीं प्राप्त कर सकती है l

बाइबल में बुलडॉग, या फव्वारे नहीं हैं l फिर भी, एक तरीके से, इफिसियों 3 में पौलुस की प्रार्थना मुझे फिफि की याद दिलाती है l वहां पर, पौलुस प्रार्थना करता है कि इफिसुस के विश्वासी परमेश्वर के प्रेम से भर जाएं और “सब पवित्र लोगों के साथ भली-बहती समझने की शक्ति [पाएं] कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊँचाई, और गहराई कितनी हैं, और मसीह के उस प्रेम को जान [सकें] जो ज्ञान से परे है l” उसकी प्रार्थना थी कि हम “परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण [हो जाएं]” (पद.18-19) l

आज भी, हम एक ऐसे परमेश्वर को अनुभव करने के लिए आमंत्रित किये जाते हैं जिसका अनंत प्रेम हमारी सम्पूर्ण समझ से परे है, ताकि हम भी पूरी रीति से भीग जाएं, संतृप्त हो जाएं, और उसकी भलाई से बिलकुल संतुष्ट हो जाएं l हम बेफिक्री, उत्साह, और ख़ुशी से उसके साथ सम्बन्ध में गोता लगाने के लिए स्वतंत्र है केवल वही हमारे हृदयों और जीवनों को अपने प्रेम, अर्थ, और उद्देश्य से भर सकता है l

हम कौन हैं

मैं वह समय कभी नहीं भूल सकता जब मैं अपनी होनेवाली पत्नी को अपने परिवार से मिलाने ले गया l आँखों में चमक के साथ, मेरे दो बड़े भाई-बहनों में उससे पूछा, “आपने इस लड़के में क्या देखा?” उसने मुस्कराते हुए आश्वास्त किया कि परमेश्वर के अनुग्रह से मेरा पालन पोषण एक ऐसे पुरुष के रूप में हुआ है जिससे वह प्रेम करती थी l

मुझे वह अकलमंद उत्तर पसंद था क्योंकि वह यह भी प्रतिबिंबित करता है कि किस तरह,   मसीह में, प्रभु हमारे अतीत से अधिक देखता है l प्रेरितों 9 में, वह हनन्याह को शाऊल को चंगा करने भेजता है, जो कलीसिया को सतानेवाला एक जाना हुआ व्यक्ति था जिसे परमेश्वर ने दृष्टिहीन कर दिया था l हनन्याह इस सेवा को पाकर संदेह करके बोला कि शाऊल यीशु के विश्वासियों को सताने और यहाँ तक कि मारने के लिए भी घेर रहा था l परमेश्वर ने हनन्याह से इस बात पर ध्यान नहीं देने को कहा कि अतीत में शाऊल कौन था परन्तु इस पर कि वह क्या बन गया था : एक सुसमाचार प्रचारक जो उस समय के ज्ञात संसार को सुसमाचार सुननेवाला था, जिसमें गैरयहूदी (वे जो यहूदी नहीं थे) और राजा भी सम्मिलित थे (पद.15) l हनन्याह ने शाऊल को एक फरीसी और सनानेवाले के रूप में देखा, परन्तु परमेश्वर ने उसे प्रेरित पौलुस और सुसमाचार प्रचारक देखा l

हम कितनी बार खुद को केवल उस रूप में देखते हैं जैसे हम रहे हैं – अपने समस्त असफलताओं और कमियों के साथ l परन्तु परमेश्वर हमें नई सृष्टि के रूप में देखता है, हम कौन थे नहीं परन्तु हम यीशु में क्या हैं और पवित्र आत्मा की सामर्थ्य द्वारा हम क्या बन रहे हैं l हे परमेश्वर, हमें खुद को और दूसरों को इस प्रकार देखना सिखाएं!

नवीनीकरण के लिए तैयार

जर्मनी में सेना में रहते हुए, मैंने एक बिलकुल नयी 1969 मॉडल वोक्सवगेन बीटल(कार) खरीदी l कार सुन्दर थी! बाहरी गहरा हरा रंग आंतरिक भूरे रंग का पूरक था l परन्तु वर्षों के बीतने के साथ, परिवर्तन आरंभ हो गया, जिसमें एक दुर्घटना भी था जिसने पायदान और और एक दरवाजे को नष्ट कर दिया l और मैं अधिक कल्पना करके, सोच सकता था, “मेरी सबसे अच्छी कार नवीनीकरण की सही उम्मीदवार थी!” और अधिक पैसे के साथ, मैं उसे हटा भी सकता था l परन्तु ऐसा नहीं हो सका l

धन्यवाद हो कि सिद्ध परिकल्पना और असीमित श्रोतों का परमेश्वर इतनी आसानी से जीर्ण और टूटे लोगों के विषय हार नहीं मानता है l भजन 85 नवीनीकरण के लिए सही उम्मीदवारों का और योग्य परमेश्वर का वर्णन करता है जो नया कर सकता है l हालात संभवतः सत्तर वर्षों के निर्वासन(परमेश्वर के विरुद्ध बलवा करने पर उनको प्राप्त दंड) के बाद इस्राएलियों के लौट आने के बाद की है l पीछे मुड़कर, वे उसका अनुग्रह देख पा रहे थे – जिसमें उसकी क्षमा भी थी (पद.1-3) l वे परमेश्वर से उसकी सहायता मांगने के लिए प्रेरित थे (पद.4-7) और उनको उससे अच्छी वस्तुओं की अपेक्षा थी (पद.8-13) l

हममें से कौन कभी-कभी प्रताड़ित, घायल, और टूटा हुआ महसूस नहीं करता है? और कभी-कभी हमारे द्वारा खुद की हानि करने के कारण ऐसा होता है l परन्तु इसलिए कि प्रभु नवीनीकरण और क्षमा का परमेश्वर है, उसके निकट दीनता से आनेवाले कभी भी आशाहीन नहीं हैं l खुली बाहों के साथ वह उसकी ओर लौटने वालों का स्वागत करता है, और ऐसा करनेवाले, उसकी बाहों में सुरक्षा पाते हैं l