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बस एक साँस

बॉबी की अचानक मृत्यु ने मुझे मृत्यु की कठोर सच्चाई और जीवन की अल्पता याद दिलायी l मेरे बचपन की सहेली केवल चौबीस वर्ष की थी जब बर्फीले सड़क पर एक दुखद दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गयी l एक बिगड़े परिवार में उसका पालन-पोषण हुआ, अभी हाल ही में वह उन्नति करती हुयी दिखाई दे रही थी l यीशु में एक नयी विश्वासिनी, उसका जीवन इतना जल्दी कैसे समाप्त हो सकता था?

कभी-कभी जीवन बहुत ही छोटा और दुःख भरा दिखाई देता है l भजन 39 में भजनकार दाऊद अपने दुःख पर विलाप करते हुए पुकारता है : “हे यहोवा, ऐसा कर कि मेरा अंत मुझे मालूम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिससे मैं जान लूँ कि मैं कैसा अनित्य हूँ! देख, तू ने मेरी आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं l सचमुच सब मनुष्य कैसे भी स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं” (पद.4-5) l जीवन छोटा है l यदि हम एक सौ वर्ष भी जीवित रहें, हमारा पृथ्वी पर का जीवन समस्त समय में मात्र एक बूंद है l

और फिर भी, दाऊद के साथ, हम कह सकते हैं, “मेरी आशा तो [प्रभु की] ओर लगी है” (पद. 7) l हम भरोसा कर सकते हैं कि हमारे जीवनों में सार्थकता है l यद्यपि हमारा शरीर क्षीण होता जाता है, विश्वासी होने के कारण हमें भरोसा है कि हमारा “भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है” – और एक दिन हम उसके साथ अनंत जीवन का आनंद उठाएंगे (2 कुरिन्थियों 4:16-5:1) l हमें यह ज्ञात है क्योंकि परमेश्वर ने “हमें बयाने में आत्मा . . . दिया है”! (5:5) l

शेखी मारना

वास्तविक होने का अर्थ क्या होता है? छोटे बच्चों की पुस्तक द वेलवेटीन रैबिट(The Velveteen Rabbit) में इस बड़े प्रश्न का उत्तर दिया गया है l यह नर्सरी(शिशु सदन) में खिलौनों और वेलवेटीन खरगोश की कहानी है जिसमें वह वास्तविक बनने के लिए एक बच्चे को उसे प्यार करने की अनुमति देता है l एक और खिलौना वृद्ध और बुद्धिमान स्किन घोड़ा था l उसने “मशीनी खिलौने को शेखी मारते और इठलाते देखा था, और धीरे-धीरे टूटकर . . . और समाप्त होते देखा था l” वे प्रभावशाली और अच्छे दिखाई देते थे, किन्तु जब प्रेम करने की बात आयी उस समय उनका शेखी बघारना आख़िरकार व्यर्थ निकला l

शेखी मारना प्रबलता से आरम्भ होता है, परन्तु आखिर में यह धूमिल हो जाता है l यिर्मयाह तीन ऐसे क्षेत्र बताता है जहां यह प्रगट है : “बुद्धिमत्ता . . . ताकत . . . धन” (यिर्मयाह 9:23) l बुद्धिमान वृद्ध नबी अपने लम्बे अनुभव से एक या दो बातें जानता था, और उसने प्रभु की सच्चाई द्वारा ऐसे घमण्ड का सामना किया : “परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूँ l (पद.24) l

आइए हम, बच्चे, अपने परमेश्वर, हमारे अच्छे पिता के विषय घमण्ड करें l उसके महान प्रेम की कहानी में, आप और हम एक अद्भुत तरीके से बढ़ते हैं और अधिकाधिक वास्तविक बनते जाते हैं l

सर के पीछे आँखें

मैं बचपन में अन्य बच्चों की तरह ही शरारती थी और परेशानी से बचने के लिए अपनी बुरी आदतें छिपाने की कोशिश करती थी l इसके बावजूद अक्सर मेरी माँ मेरी गलतियाँ पकड़ लेती थी l मैं याद करके चकित होती हूँ कैसे तुरंत और सही तौर से वह मेरी शरारत के विषय जान लेती थी l जब मैं अचंभित होकर उनसे पूछती थी, वो हमेशा कहती थी, “मेरे सिर के पीछे भी आँखें हैं l” यह, अवश्य ही, मुझे पता लगाने को विवश किया कि क्या वास्तव में उनके सर के पीछे आँखें थीं – क्या अदृश्य आँखें या ऑंखें जो उनके लाल बालों में छिपी हुयी थीं? बड़ी होने पर मैं उनकी सर के पीछे आँखें खोजना बंद कर दी और मैंने जाना कि अब मैं उतनी शरारती नहीं थी l उनकी सतर्क आँखें उनके बच्चों के लिए प्रेमी चिंता का प्रमाण था l

मैं बहुत अधिक अपनी माँ के सतर्क देखभाल के लिए कृतज्ञ हूँ (बावजूद इसके कि कभी-कभी निराश होती थी कि मैं पकड़ी जाती थी), मैं उससे भी अधिक धन्यवादित हूँ कि परमेश्वर स्वर्ग से दृष्टि करके “सब मनुष्यों को निहारता है” (भजन 33:13) l हम जितना करते हैं उससे कहीं अधिक वह देखता है; वह हमारे दुःख, हमारे आनंद, और एक दूसरे के लिए हमारे प्रेम को देखता है l

परमेश्वर हमारा वास्तविक चरित्र देखता है और हमेशा जानता है हमें किसकी ज़रूरत है l सिद्ध दृष्टि से, जो हमारे हृदयों के भीतर भी देखता है, वह उससे प्रेम करनेवालों और उसमें आशा रखनेवालों की हिफाजत करता है (पद.18) l वह हमारा ध्यान देनेवाला और प्रेमी पिता है l

कैद में विश्वासयोग्य

1948 में एक दिन बहुत सुबह के समय जब दरवाजे की घंटी बजी हारालेन पोपोव (एक प्रोटेस्टेंट पादरी) को यह पता नहीं था कि उसका जीवन कौन सा मोड़ लेने वाला था l बगैर किसी चेतावनी के, बल्गेरियाई पुलिस ने हारालेन को उसके विश्वास के कारण जेल में डाल दिया l वह अगले तेरह वर्षों तक जेल में रहा, और सामर्थ्य और साहस के लिए प्रार्थना करता रहा l भयंकर बर्ताव के बाद भी, उसे मालूम था कि परमेश्वर उसके साथ है, और उसने अपने सह कैदियों के साथ यीशु का सुसमाचार बांटा – और बहुतों ने विश्वास किया l

उत्पत्ति 27 से इस वर्णन में, यूसुफ को पता नहीं था कि उसके साथ क्या होने वाला था जब उसके क्रोधित भाइयों ने बेरहमी से उसे व्यपारियों के हाथ बेच दिया जिन्होनें उसे मिस्र ले जाकर एक मिस्री अधिकारी, पोतीपर के हाथ बेच दिया l उसने खुद को एक ऐसी संस्कृति में पाया जहाँ लोग हजारों देवताओं में विश्वास करते थे l स्थिति को और बदतर बनाने के लिए, पोतीपर की पत्नी ने यूसुफ को पथभ्रष्ट करना चाहा l यूसुफ के बार-बार इनकार करने पर, उसने उसपर झूठे दोष लगाकर, उसे कैदखाने में भेजवा दिया (39:16-20) l फिर भी परमेश्वर ने उसको नहीं त्यागा l वह केवल उसके साथ ही नहीं रहा, परन्तु “जो काम वह करता [था] उसको यहोवा उसके हाथ से सफल कर देता [था]” और “उस पर करुणा की” और “बंदीगृह के दारोगा के अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई” (39:3,21) l

उस डर की कल्पना करें जो यूसुफ ने अनुभव किया l परन्तु वह विश्वासयोग्य रहा और अपनी ईमानदारी बरकरार रखी l परमेश्वर यूसुफ की कठिन यात्रा में उसके साथ था और उसके लिए एक मास्टर प्लान(मुख्य योजना) रखा था l उसके मन में आपके लिए भी एक योजना है l हिम्मत बांधें और विश्वास में चलें, यह भरोसा करते हुए कि वह देखता है और वह जानता है l

कभी भी अति विलंबित नहीं

मेरे सास के हृदयाघात के बाद के चिंताजनक क्षणों में, वह त्वरित चिकित्सीय देखभाल प्राप्त करने में भाग्यशाली थी l बाद में, उनके डॉक्टर ने मुझे से कहा कि गंभीर हृदयाघात रोगियों का इलाज पंद्रह मिनट के भीतर होने पर 33 फीसदी लोग बच जाते हैं l परन्तु इस समय सीमा के बाहर इलाज पानेवाले केवल 5 फीसदी ही बच पाते हैं l

याईर की गंभीर रूप से बीमार बेटी (जिसे त्वरित चिकित्सीय देखभाल की ज़रूरत थी) को चंगाई देने जा रहे यीशु ने अकल्पनीय कार्य किया : वह ठहर गया (मरकुस 5:30) l उसने रुककर जानना चाहा किसने उसे छुआ था, और तब उस स्त्री से कोमलता से बात की l आप कल्पना कर सकते हैं कि याईर क्या सोच रहा था : इस के लिए समय नहीं है, मेरी बेटी मरनेवाली है! और तब, उसका सबसे बड़ा डर सच साबित हुआ – यीशु ने बहुत देर कर दिया था और उसकी बेटी की मृत्यु हो गयी (पद.35) l

परन्तु यीशु याईर की ओर मुड़कर उससे उत्साह के शब्द कहे : “मत डर; किवल विश्वास रख” (पद. 36) l तब, तमाशबीनों के उपहास को शांति से अनदेखा करके, मसीह ने याईर की बेटी से बोला और वह जीवित हो गयी! उसने प्रगट किया कि वह कभी भी अति विलंबित नहीं हो सकता है l जो वह कर सकता है और जब वह करता है समय उसको सीमित नहीं कर सकता है l

कितनी बार हम भी याईर की तरह अनुभव करते हैं, जो हम करने की आशा रखते थे उसमें परमेश्वर ने यूँ ही विलम्ब कर दिया l किन्तु परमेश्वर के साथ, ऐसी कोई बात नहीं है l वह हमारे जीवनों में अपना अच्छा और करुणामय कार्य पूरी करने में कभी देर नहीं करता है l