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Articles by डेविड रोपर

जहाँ आप हैं वहीं से आरम्भ करें

आज मैंने अपने खलिहान में एकलौता फूल देखा-एक छोटा बैगनी फूल “रेतीले स्थान में अपना मिठास बिखेरते हुए” कवि थॉमस ग्रे की खूबसूरत पंक्तियाँ हैं l निश्चित तौर पर इस ख़ास फूल को पहले किसी ने नहीं देखा था, और शायद आगे भी कभी नहीं देखेगा l यह ख़ूबसूरती ऐसी जगह क्यों? मैं विचारा l

प्रकृति बर्बाद नहीं होती l प्रतिदिन यह अपने सृष्टिकर्ता की सच्चाई, भलाई, और सुन्दरता दर्शाती है l प्रतिदिन प्रकृति परमेश्वर की महिमा को नए और निर्मल तरीके से प्रगट करती है l क्या मैं उसको उस खूबसूरती में देखता हूँ, अथवा उस पर सरसरी नज़र डालकर उसको नज़रन्दाज़ कर देता हूँ l

समस्त प्रकृति सृष्टिकर्ता की खूबसूरती फैलाती है l हमारा प्रतिउत्तर उपासना, प्रशंसा, और धन्यवाद हो सकता है-मक्के के फूल की चमक, सूर्योदय के प्रताप, और एक खास वृक्ष की बनावट के लिए l

सी.एस.ल्युईस गर्मी के एक दिन जंगल में टहलने का वर्णन करते हैं l उसने अभी-अभी अपने मित्र को परमेश्वर के प्रति धन्यवादी होना सिखाया था l उसके पैदल साथी ने निकट की एक छोटी नदी में जाकर झरने में अपना चेहरा और हाथ धोकर पुछा, “क्यों न इसी से आरंभ की जाए?” ल्युईस के अनुसार उसने उस क्षण एक महान सिद्धांत सिखा : “जहाँ आप हैं वहीं से आरम्भ करें l”

एक टपकती जलधारा, वृक्षों के मध्य बहती हवा, एक छोटी चिड़िया, एक छोटा फूल l  क्यों नहीं हम इनसे धन्यवाद आरंभ करें?

गर्जन और बिजली

कई वर्ष पूर्व मेरा मित्र और मैं ऊदबिलाव वाले तालाब में लगातार मछली पकड़ रहे थे जब बारिश शुरू हुई l हम निकट के सफ़ेद पीपल के पेड़ के जंगल में छिपने गए किन्तु बारिश होती रही l उन पेड़ों के हिलते पत्ते आवाज़ कर रहे थे l इसलिए हम उस स्थान को छोड़कर गुज़रते ट्रक को पुकारा l ट्रक का दरवाजा खोलते समय, आवाज़ के साथ बिजली उन पेड़ों पर गिरी जिससे उनके पत्ते और छाल निकल गए, और कुछेक डालियाँ सुलगती रहीं l और  तब शांति हो गई l

हम विचलित हुए और डर गए l

हमारे आइडहो घाटी में बिजली चमकती है और गर्जना होता है l बाल-बाल बचने पर भी- मुझे पसंद है l मुझे यह प्राकृतिक शक्ति पसंद है l वोल्टेज! टकराव! आश्चर्य और विस्मय! पृथ्वी और जो कुछ उसमें है थरथराती है और कांपती है l और फिर शांति l

मुझे बिजली और गर्जन पसंद है क्योंकि ये परमेश्वर की आवाज़ के संकेत हैं (अय्यूब 37:4), वचन द्वारा विस्मयकारक, प्रबल आवाज़ में बोलना l “यहोवा की वाणी आग की लपटों को चीरती है ... यहोवा अपने प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शांति की आशीष देगा” भजन 29:7,11) l वह हमें सहने की, धीरज धरने की, दयालुता की, शांत रहने की, उठकर जाने की, और कुछ हानि नहीं करने की शक्ति देगा l

शांति का परमेश्वर आपके साथ हो l

यों ही दयालुता के कार्य

कुछ लोगों के अनुसार अमरीकी लेखिका ऐन हर्बर्ट ने 1982 में एक रेस्टोरेंट में मेजपोश पर यों ही यह वाक्यांश लिख दी “यों ही भलाई और खूबसूरती के अर्थहीन काम करें l” उस समय से यह मनोभाव फिल्म और साहित्य द्वारा लोकप्रिय बनाया गया है और हमारे शब्दावली का हिस्सा बन गया है  l

प्रश्न उठता है “क्यों?” हम दया क्यों दिखाएं? यीशु के अनुयायियों के लिए, उत्तर स्पष्ट है : परमेश्वर की करुणा और दयालुता प्रकट करने हेतु l

यह सिद्धांत पुराने नियम की मोआब की एक प्रवासिन, रूत, की कहानी में है l वह विदेशी एक अपरिचित देश में रहती थी जिसकी भाषा और संस्कृति उस से परे थी l इसके अतिरिक्त, वह बहुत निर्धन थी, लोगों के दान पर निर्भर जो उसकी सुधि कम ही लेते थे l

हालाँकि, एक इस्राएली ने रूत पर अनुग्रह करके उसके हृदय को छुआ (रूत 2:13) l वह उसे अपने खेत में अनाज बीनने दिया, किन्तु सरल उपकार से बढ़कर, उसने अपनी सहानुभूति द्वारा परमेश्वर की कोमल करुणा प्रकट की, जिसकी छाया में वह आश्रय पा सकती थी l वह बोअज की दुल्हन बनी, परमेश्वर के परिवार का हिस्सा, और उस वंसज का एक भाग जिससे यीशु था, जो संसार के लिए उद्धार लेकर आया (देखें मत्ती 1:1-16) l

हमें नहीं मालुम कि यीशु के नाम में दया के एक कार्य का क्या परिणाम हो सकता है l

अल्प निद्रा

एक अन्य युग के स्कॉटलैंड के पास्टर, हेनरी दर्बनविले, स्कॉटलैंड के एक सुदूर इलाके में रहनेवाली अपनी ही कलीसिया की एक वृद्ध महिला के विषय बताते हैं l वह एडिनबर्ग शहर देखना चाहती थी, किन्तु उस लम्बे, अँधेरे  सुरंग से भय खाती थी जिसमें से होकर ट्रेन जाती थी l  

एक दिन, हालाँकि, अवस्था ने उसे एडिनबर्ग जाने को मजबूर किया, और ट्रेन तेज गति से शहर की ओर चली जिससे उसकी घबराहट बढ़ गई l किन्तु ट्रेन के सुरंग में पहुँचने से पूर्व उसकी आँख लग गई और वह गहरी नींद में सो गई l जागने पर उसने खुद को शहर में पाया!

यह संभव है कि हम सब मृत्यु का अनुभव नहीं करेंगे l यीशु के लौटने पर यदि हम जीवित रहेंगे, हम “हवा में प्रभु से [मिलेंगे]” (1 थिस्स. 4:13-18) l किन्तु हममें से अनेक मृत्यु द्वारा प्रभु से मिलेंगे और यह विचार बहुत घबराहट पैदा करती है l हमारी चिंता है कि मृत्यु की प्रक्रिया सहना बहुत कठिन है l

अपने उद्धारकर्ता यीशु के आश्वासन द्वारा हमें भरोसा है कि पृथ्वी पर अपनी आँखें बंद करके मृत्यु से गुजरने पर हम परमेश्वर की उपस्थिति में अपनी आँखें खोलेंगे l “हमारी अल्प निद्रा पश्चात हम अनंत में जागेंगे,” जॉन डॉन कहते हैं l

स्थायी दयालुता

मैं बचपन में एल. फ्रैंक बौम की लैंड ऑफ़ ओज़ पुस्तकों का उत्साही पाठक था l हाल ही में मुझे रिंकीटिंक इन ओज़  समस्त मूल कलाकृतियों के साथ मिली l मैं पुनः बौम के अदम्य, दयालु राजा रिंकीटिंक की व्यवहारिक भलाइयों पर हँसा l युवराज इंगा उत्तम वर्णन करता है : “उसका हृदय दयालु और कोमल है और यह बुद्धिमान होने से बेहतर है l”

किनता सरल और विवेकपूर्ण l फिर भी हमारे किसी प्रिय का हृदय किस ने कठोर शब्द से नहीं दुखाया है? ऐसा करके, हम उस समय की शांति और सुख में विघ्न डालकर   अपने प्रेमियों से की गई भलाइयों को बिगाड़ते हैं l  “एक छोटी सी दयाहीनता एक बड़ी गलती है,” 18 वीं शताब्दी के अंग्रेजी लेखक हैना ने कहा l

और यहाँ खुसखबरी है : कोई भी दयालु हो सकता है l शायद हम प्रेरणादायक उपदेश, कठिन प्रश्नों का हल न दे सकें, अथवा बहुतों को सुसमाचारित न कर सकें, किन्तु दयालु हो सकते हैं l

कैसे? प्रार्थना द्वारा l यही हमारे हृदयों को नम्र बना सकता है l “हे यहोवा, मेरे मुख पर पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार की रखवाली कर! मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दें” (भजन 141:3-4) l

संसार, जहाँ प्रेम ठंडा हो गया हैं, हमारे द्वारा दूसरों के समक्ष परमेश्वर के हृदय से निकलने वाली दयालुता सबसे अधिक सहायक और चंगा करने वाली होगी l

लाल शिखा/कलगी

अनेक वर्ष पूर्व, मैं ईसा पूर्व द्वितीय शताब्दी के एक यूनानी लेखक के मछली पकड़ने के ज्ञान सम्बन्धी एक लेख के कुछ अंश से चकित हुआ l “बोरोका और थिस्सलुनीके के बीच एस्त्राकस नदी है, जिसमें चितकबरी त्वचा वाली ट्राउट मछलियाँ हैं l” फिर वह “मछलियों के लिए फंदा, जिससे उनको अच्छी और अधिक मछलियाँ मिलती हैं, बताता है l वे दो पंखों के साथ सुर्ख लाल ऊन एक कांटे में लगाते हैं l फिर वे अपने फंदे को पानी में फेंकते हैं, और मछलियाँ रंग से आकर्षित होकर ऊपर आकर खाना चाहती हैं” (ऑन द नेचर ऑफ़ एनिमल्स) l

मछुआरे आज भी यह आकर्षण उपयोग करते हैं l इसे लाल शिखा/कलगी कहते हैं l 2,200 वर्ष पूर्व उपयोगी फंदा “अधिक ट्राउट मछलियाँ पकड़ने में” आज भी उपयोगी है l

उस प्राचीन लेख को पढ़कर मैंने सोचा : समस्त पुरानी बातें अप्रचलित नहीं हुई गईं हैं-विशेषकर लोग l यदि संतुष्ट और आनंदित वृद्धावस्था द्वारा हम परमेश्वर की परिपूर्णता और गहराई दर्शाते हैं, हम अपने जीवन के अंत तक उपयोगी रहेंगे l वृद्धावस्था गिरते स्वास्थ्य, पूर्व अवस्था पर केन्द्रित हों ज़रूरी नहीं है l यह परमेश्वर के साथ वृद्ध होनेवालों का फल अर्थात् शांतचित्तता और आनंद और साहस और दयालुता से भरपूर हो सकता है l

“वे यहोवा के भवन में रोपे जाकर, ... पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे” (भजन 92:13-14) l

एक कठिन पहाड़

हमारे घर आइडाहो के उत्तर में पर्वतों की जुगहैंडल चोटी की परत में ऊपर एक हिम झील है l इस झील तक का मार्ग शिलाखंडों और अलग-अलग पत्थरों के बीच खड़ी चढ़ाई, और खुला संकरा ऊंचा भाग है l यह प्रचंड चढ़ाई है l

हालाँकि, चढ़ाई के आरंभ में, एक छोटी नदी है-एक जल-श्रोत जो मुलायम, काईदार धरती से निकलकर हरे-भरे मैदान के बीच से बहती है l यह आगे की कठिन चढ़ाई के लिए संतुष्ट होने तक जल पीने का स्थान और तैयारी है l

मसीही जीवन पर जॉन बनयन की उत्कृष्ट कृति, द पिल्ग्रिम्स प्रोग्रेस, में मसीही पहाड़ कठिनाई नामक, एक खड़ी चढ़ाई के निकट पहुँचता है, “जिसके नीचे एक सोता था ... मसीही अब उस सोते तक गया और तरोताज़गी हेतु जल पीया, और तब पहाड़ पर चढ़ने लगा l”

शायद आपके लिए कठिन पहाड़ एक विद्रोही बच्चा या एक गंभीर चिकित्सीय रोग की पहचान हो सकती है l चुनौती आपके सहन से बाहर दिखती है l

अपने अगले मुख्य कार्य का सामना करने से पूर्व, तरोताज़गी के सोता परमेश्वर से मिलें l

अपने समस्त कमजोरी, थकान, बेकसी, भय और शंका के साथ उसके पास आएँ l तब उसकी

सामर्थ्य, ताकत, और बुद्धिमत्ता का पान करें l परमेश्वर आपकी समस्त परिस्थितियाँ जानता है और आत्मिक शक्ति और धैर्य का अत्यधिक सुख देगा l वह आगे बढ़ने हेतु आपके सिर को ऊँचा

करके सामर्थ्य देगा l

अवस्था दर अवस्था

बाइबिल में गिनती 33 ऐसा अध्याय है जिसपर हम चिंतन किये बगैर शायद आगे बढ़ जाना चाहेंगे l यह मिस्र में रामसेस से मोआब के मैदान तक इस्राएलियों के पहुँचने तक की यात्रा के दौरान स्थानों की एक लम्बी सूची है l यह विशेष है क्योंकि यह गिनती में एकमात्र स्थल है जिसके पहले ये शब्द लिखे हैं : “मूसा…

यह उपहार

कई वर्ष पूर्व मैंने अपनी छड़ी, लाठी, और वाकिंग स्टिक पर एक लेख लिखा था और विचार करता था कि एक दिन वॉकर से चलूँगा l तो, वह दिन आ गया है l पीठ की तकलीफ और सतही तंत्रिकाविकृति(peripheral neuropathy) ने मिलकर मुझे तिपहिया वॉकर में ला दिया है l मैं पैदल चल नहीं सकता; मछली नहीं पकड़ सकता; मैं…

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अदृश्यता की अंगूठी

यूनानी दार्शनिक प्लेटो (c. 427-c. 348 ई.पु.) मानव हृदय के अँधेरे भाग पर ज्योति चमकाने का काल्पनिक तरीका खोज लिया था l उसने एक चरवाहे की कहानी बतायी जिसे अचानक भूमि की गहराई में दबी एक सोने की अंगूठी मिली l एक दिन भूकंप से पहाड़ के निकट एक कब्र खुल गई और अंगूठी चरवाहे को दिखाई दी l संयोग से उसे यह भी ज्ञात हुआ कि उस जादुई अंगूठी को पहननेवाला इच्छा से अदृश्य हो सकता था l अदृश्यता पर विचार करते हुए, प्लेटो ने एक प्रश्न किया : यदि लोग को पकड़े जाने और दंड पाने का भय नहीं होता, क्या वे गलत करने से परहेज करते?

यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु इस विचार को एक भिन्न दिशा में ले जाता है l वहां पर, अच्छा चरवाहा, यीशु, ऐसे हृदयों की बात करता है जो अँधेरे की आड़ में अपने कार्यों को छिपाते हैं (यूहन्ना 3:19-20) l वह हमारे छिपाने की इच्छा पर हमारा ध्यान हमें दोषी ठहराने के लिए नहीं करता है, किन्तु उसके द्वारा उद्धार पाने के लिए (पद.17) l हृदयों का चरवाहा होकर, वह हमारे मानव स्वभाव के सबसे ख़राब हिस्से को भी प्रगट करके हमें बताता है कि परमेश्वर हमसे कितना अधिक प्रेम करता है (पद.16) l

परमेश्वर अपनी करुणा में हमें अंधकार से निकलकर ज्योति में उसका अनुसरण करने के लिए आमंत्रित करता है l

सम्पूर्ण पहुँच

कुछ वर्ष पूर्व, मेरा एक मित्र मुझे प्रथम गोल्फ प्रतियोगिता देखने के लिए आमंत्रित किया l पहली बार देखने के कारण, मेरी अपेक्षाएं शून्य थीं l वहाँ पहुँचकर, मैं उपहार, सूचना, और गोल्फ के मैदान का नक्शा पाकर चकित हुआ l लेकिन सबसे अच्छी बात यह थी कि हमें 18 वीं ग्रीन (गोल्फ खेल में एक विशेष बिंदु/स्थान) के पीछे विशिष्ट दीर्घा में पहुँच मिली, जहाँ मुफ्त भोजन और बैठने का स्थान था l यद्यपि मैं इस आतिथ्य दीर्घा में स्वयं नहीं पहुँच सकता था l मुख्य व्यक्ति मेरा मित्र था; केवल उसके द्वारा मुझे पूर्ण पहुँच मिली l

खुद पर भरोसे से हम, नाउम्मीदी में परमेश्वर से दूर रहते l किन्तु यीशु, हमारा दंड लेकर, अपना जीवन और परमेश्वर तक पहुँच देता है l प्रेरित पौलुस ने लिखा, “[परमेश्वर की इच्छा थी कि] अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्वर का विभिन्न प्रकार का ज्ञान ... प्रगट किया जाए” (इफि. 3:10) l इस ज्ञान ने यहूदी और गैरयहूदी का मसीह में मेल कराया, जिसने हमारे लिए परमेश्वर पिता तक पहुँच दी l “[यीशु पर] विश्वास करने से साहस और भरोसे के साथ परमेश्वर के निकट आने का अधिकार है” (पद.12) l

यीशु में भरोसा करने पर, हमें सबसे महान पहुँच मिलती है-परमेश्वर तक पहुँच जो हमसे प्रेम करता है और हमसे सम्बन्ध रखना चाहता है l

सम्पूर्ण मन से!

कालिब “सम्पूर्ण मन” का व्यक्ति था l वह और यहोशू मूसा और लोगों को प्रतिज्ञात देश की छानबीन रिपोर्ट देनेवाले बारह-व्यक्तियों की टोह लेनेवाली टीम का हिस्सा थे l कालिब ने कहा, “हम अभी ... उस देश को अपना कर लें; क्योंकि निःसंदेह हम में ऐसा करने की शक्ति है” (गिनती 13:30) l किन्तु टीम के बाकी दस लोगों ने परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के बाद भी, इसे असंभव कहकर केवल बाधाएं देखीं (पद. 31-33) l

दस लोगों द्वारा लोगों को हताश करके परमेश्वर के विरुद्ध बड़बड़ाने से उन्हें निर्जन-स्थान में चालीस वर्ष भटकना पड़ा l किन्तु कालिब डटा रहा l परमेश्वर ने कहा, “इस कारण कि ... कालिब के साथ और ही आत्मा है, और उसने ... मेरा अनुसरण किया है, मैं उसको उस देश में ... पहुँचाऊँगा, और उसका वंश उस देश का अधिकारी होगा” (गिनती 14:24) l पैंतालिस वर्ष बाद परमेश्वर ने 85 वर्षीय कालिब को, हेब्रोन नगर दिया “क्योंकि वह इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का पूरी रीति से अनुगामी था” (यहोशू 14:14) l

शताब्दियों बाद एक व्यवस्थापक ने यीशु से पूछा, “कौन सी आज्ञा बड़ी है?” यीशु ने उत्तर दिया, “ ‘तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन ... सारे प्राण, ... सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख l’ बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है” (मत्ती 22:35-38) l

आज, कालिब हमारे मन के सम्पूर्ण प्रेम, भरोसा, और समर्पण के योग्य परमेश्वर में अपने भरोसे से हमें प्रेरित कर रहा है l