मुसीबत के साथ शांति स्थापित करना
जब मैंने इस पर ध्यान दिया तो हम लगभग घर पहुँच चुके थे : हमारी कार के तापमान गेज की सुई तेजी से ऊपर की ओर भाग रही थी । जैसे ही हम अंदर आए, मैंने इंजन बंद करके कार से बाहर निकल गया । गाड़ी से धूएँ का गुब्बार निकल रहा था l इंजन एक तले हुए अंडे की तरह कड़कड़ाने लगा l मैंने कार को कुछ फीट पीछे किया और नीचे मुझे एक पोखर मिला : तेल । तुरंत, मुझे पता चल गया कि क्या हुआ था : अग्रभाग का गैसकेट(gasket) टूट गया था ।
मैं कराह उठा । हमनें हाल ही में दूसरे महँगे मरम्मतों में पैसे लगाए थे l चीजें काम क्यों नहीं करती? मैं ज़ोर से बड़बड़ाने लगा l चीजें टूटना बंद क्यों नहीं होती?
क्या आप सम्बद्ध(relate) कर सकते हैं? कभी-कभी हम एक संकट को टालते हैं, एक समस्या को हल करते हैं, एक बड़े बिल का भुगतान करते हैं, केवल दूसरे का सामना करने के लिए । कभी-कभी वे परेशानियाँ एक आत्म-विनाशकारी इंजन से बहुत बड़ी होती हैं : एक अप्रत्याशित निदान, एक असामयिक मृत्यु, एक भयानक नुकसान ।
उन क्षणों में, हम एक ऐसी दुनिया के लिए तरसते हैं जो कम टूटी, कम परेशानी से भरी है । यीशु ने जिस संसार का वादा किया था वह आनेवाला है । लेकिन अभी नहीं : "संसार में तुम्हें क्लेश होता है,” उसने यूहन्ना 16 में शिष्यों को याद दिलाया l “परन्तु ढाढ़स बाँधो, मैं ने संसार को जीत लिया है” (पद.33) । यीशु ने उस अध्याय में गंभीर मुसीबतों के बारे में बात की, जैसे कि आपके विश्वास के लिए सताव । लेकिन इस तरह की परेशानी, उन्होंने सिखाया, उनके लिए अंतिम शब्द कभी नहीं होगा जो उसमें आशा करते हैं ।
छोटी और बड़ी परेशानियाँ हमें दबा सकती हैं l लेकिन उसके साथ बेहतर कल का यीशु का वादा हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपनी परेशानियों को आज अपने जीवन को परिभाषित न करने दें l
आत्मिक ड्राइविंग(चालन)
जब हम अपने ड्राइविंग स्कूल के प्रशिक्षक से ड्राइव करना सीख रहे थे, तो प्रशिक्षक हमेशा कहा करते थे कि हम सड़क को बारीकी से देखें, खतरों की पहचान करें, यह अनुमान लगाने के लिए कि खतरे क्या हो सकते हैं, तय करें कि हम कैसे प्रतिक्रिया करेंगे, और फिर, यदि आवश्यक हो, तो उस योजना को निष्पादित करें l यह दुर्घटनाओं से बचने के लिए जानबूझकर की जाने वाली रणनीति थी l
मैं सोचता हूँ कि यह विचार हमारे आध्यात्मिक जीवन में कैसे स्थानांतरित हो सकता है l इफिसियों 5 में, पौलुस ने इफिसियों के विश्वासियों से कहा, ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो : निर्बुद्धियों के समान नहीं पर बुद्धिमान के समान चलो” (पद.15) l पौलुस जानता था कि कुछ ख़तरनाक बाधाएँ इफिसियों को पटरी से उतार दे सकते थे - यीशु में उनके नए जीवन के साथ जीवन के पुराने तरीकों का संघर्ष (पद.8, 10-11) l इसलिए उसने उन्नति कर रही कलीसिया को ध्यान देने का निर्देश दिया l
अनुवादित शब्द “ध्यान से देखो, कि कैसी चलते हो” का शाब्दिक अर्थ है “देखें कि आप कैसे चलते हैं l” दूसरे शब्दों में, चारों ओर देखो l खतरों पर ध्यान दें, और मतवालापन और निरंकुश जीवन (पद.18) जैसे व्यक्तिगत खतरों से बचें l इसके बजाय, प्रेरित ने कहा, हम अपने जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा को खोज सकते हैं (पद.17), जबकि, साथी विश्वासियों के साथ, हम गाते हैं और उसे(परमेश्वर को) धन्यवाद देते हैं पद.19-20) l
कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस खतरे का सामना करते हैं - और यहां तक कि जब हम ठोकर खाते हैं - हम मसीह में अपने नए जीवन का अनुभव कर सकते हैं जब हम उसकी असीम सामर्थ्य और अनुग्रह पर निर्भरता में उन्नति करते हैं l
एक फलता-फूलता वृक्ष
मेरे अन्दर हमेशा ही एक संग्राहक का हृदय रहा l बचपन में, मैं डाक टिकट, सिक्के, कॉमिक्स इकठ्ठा करता था l वर्तमान में, एक अभिभावक होने के कारण, मैं अपने बच्चों में वही असर देखता हूँ l कभी-कभी मैं विचार करता हूँ, क्या मुझे वास्तव में एक और टेडी बेयर की ज़रूरत है?
निःसंदेह, यह ज़रूरत के विषय नहीं है l यह किसी नई चीज़ की ओर आकर्षण के विषय है l या कभी-कभी कुछ पुरानी, कुछ दुर्लभ चीजों का तरसानेवाला खिंचाव l जो कुछ भी हमारी कल्पना को मंत्रमुग्ध करता है, हम यह विश्वास करने की ओर फुसलाए जाते हैं कि काश हमारे पास “फलां” वस्तु होती, तो हमारे जीवन बेहतर होते l हम खुश होते l संतुष्ट l
सिवाय वे चीजें जो कभी भी अपेक्षित परिणाम नहीं देते हैं l क्यों? इसलिए कि परमेश्वर ने हमें उसके द्वारा भरे जाने के लिए बनाया है, उन चीजों से नहीं जो हमारे चारों ओर का संसार अकसर जोर देता है कि ये वस्तुएं हमारे अभिलाषी हृदयों को संतुष्ट करेंगे l
तनाव शायद ही नई बात है l नीतिवचन जीवन के दो तरीकों की तुलना करता है : धन का पीछा करने में व्यतीत जीवन के विपरीत प्रेमी परमेश्वर और उदारता से दान देने में जड़वत जीवन l नीतिवचन 11:28 में ऐसा कहा गया है : “जो अपने धन पर भरोसा रखता है वह गिर जाता है, परन्तु धर्मी लोग नए पत्ते के समान लहलहाते हैं l”
कितनी खुबसूरत तस्वीर! दो तरीके का जीवन : एक फलता-फलता, दूसरा खोखला और फलहीन l संसार जोर देता है कि भौतिक अधिकता बराबर “अच्छा जीवन l” इसकी तुलना में, परमेश्वर हमें उसमें जड़वत होने, उसकी भलाई का अनुभव करने और उन्नति करते हुए फलवंत होने के लिए आमंत्रित करता है l और जब हम उसके साथ अपने सम्बन्ध के द्वारा गढ़े जाते है, परमेश्वर हमारे हृदयों और इच्छाओं को पुनः आकार देते हुए, हमें अन्दर से बाहर रूपांतरित करता है l
जीवन की तेज़ धाराओं को पार करना
“बायीं ओर के सभी लोग, मजबूती से तीन बार आगे की ओर पतवार चलाएँ!” हम लोगों का मांझी गाइड चिल्लाया l बायीं ओर वालों ने ताकत लगायी, और हमारे बेड़े को उस अशांत भँवर से खींच लिया l कई घंटों तक, हमने अपने गाइड के निर्देशों को सुनने का महत्व सीखा था l उसकी स्थिर आवाज़ ने बहुत कम नौका चलाने के अनुभव वाले छह लोगों को एक प्रचंड नदी में साथ मिलकर सबसे सुरक्षित जल मार्ग बनाने में कामयाबी दी l
जीवन का अपना मुसीबतों का भी हिस्सा है, क्या यह नहीं है? एक पल, यह सहज नौकायन है l फिर सहसा, हम अचानक खतरों से बचने के लिए पागल की तरह पैर मार रहे होते हैं l वह तनावपूर्ण क्षण हमें एक कुशल मार्गदर्शक के लिए हमारी ज़रूरत के बारे में जागरूक बनाते हैं, एक विश्वसनीय आवाज़ जो हमें अशांत समयों को पार करने मदद करती है l
भजन 32 में, परमेश्वर वह आवाज़ बनने की प्रतिज्ञा करता है : “मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूँगा” (पद.8) l इससे पहले, हम देखते हैं कि अपने पापों को मान लेना (पद.5) और प्रार्थनापूर्वक उसे ढूँढना (पद.6) उसकी सुनने की भी भूमिका निभाते हैं l फिर भी, मैं इस वास्तविकता में आराम पाता हूँ कि परमेश्वर प्रतिज्ञा करता है, “मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा और सम्मत्ति दिया करूँगा”(पद.8), एक ताकीद कि उसका मार्गदर्शन उस प्रेम के कारण है l इस अध्याय के अंत के निकट, भजनकार इस तरह समाप्त करता है, “जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा” (पद.10) l और जब हम उस पर भरोसा करते हैं, हम उसके इस प्रतिज्ञा में आराम पाते हैं कि वह जीवन के सबसे चट्टानी पथों में हमारा मार्गदर्शन करेगा l
निर्माणाधीन
उन्होंने अभी-अभी सड़क को फिर से बनाया है, मैंने मन में सोचा जब यातायात धीमी हो गयी अब वे उसे फिर से उखाड़ रहे हैं! तब मैंने सोचा, सड़क निर्माण कभी भी पूरा क्यों नहीं होता है? मेरा मतलब है, मैंने कभी भी ऐसा संकेत नहीं देखा, “सड़क निर्माण कंपनी ने काम पूरा कर दिया है l कृपया इस पूर्ण सड़क का आनंद लें ।”
लेकिन मेरे आध्यात्मिक जीवन में भी कुछ ऐसा ही है। मेरे आरंभिक विश्वास में, मैंने परिपक्वता के एक क्षण तक पहुँचने की कल्पना की जब मुझे यह सब पता चल जाता, कि कब मैं “आसानी से बन गया हूँ।” तीस साल बाद, मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं अभी भी “निर्माणाधीन हूँ।” हमेशा की तरह गड्ढों वाली सड़कों पर मैं ड्राइव करता हूँ, मुझे कभी भी “पूर्ण” महसूस नहीं करता हूँ। कभी-कभी यह समान रूप से निराशाजनक महसूस हो सकता है।
परन्तु इब्रानियों 10 में एक अद्भुत प्रतिज्ञा है। पद 14 कहता है, “क्योंकि उसने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्हें जो पवित्र किये जाते हैं, सर्वदा के लिए सिद्ध कर दिया है” (पद.14) l क्रूस पर यीशु का कार्य हमें पहले से ही बचा लिया है पूरी तरह सिद्धता से परमेश्वर की नज़रों में, हम पूर्ण और सम्पूर्ण हैं। परन्तु विरोधाभासी रूप से, वह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई हैल हम अभी भी उसकी समानता में आकार ले रहे हैं, अभी भी “पवित्र बनाए जा रहे हैं l”
एक दिन, हम उसे आमने-सामने देखेंगे, और उसके समान होंगे (1 यूहन्ना 3:2)। परन्तु तब तक, हम अभी भी “निर्माणाधीन” हैं, लोग जो उत्सुकता से उस महिमामय दिन का इंतज़ार करते हैं जब हम में वास्तव में काम पूरा होगा।
सबसे दुखित बत्तख
पार्किंग के स्थान पर फुटबॉल क्यों? मैं अचंभित हुआ l लेकिन जैसे-जैसे मैं करीब आता गया, मुझे अहसास हुआ कि राख के रंग का दिखाई देने वाला गोला फुटबॉल नहीं था : वह एक बत्तख था – सबसे दुखित बत्तख जो मैंने कभी देखा हो l
बतखें अक्सर ठन्डे महीनों में मेरे कार्यस्थल के निकट मैदान में एकत्र होते हैं l लेकिन आज केवल एक था, उसकी गर्दन पीछे की ओर मुड़ी हुयी और उसका सिर पंखों के अन्दर छिपा हुआ था lतुम्हारे मित्र कहाँ हैं? मैंने सोचा l बेचारा बिलकुल अकेला था l वह बहुत उदास दिखाई दे रहा था, मैं उसे गले लगाना चाहता था l
मैंने पंख वाले अपने अकेले मित्र की तरह शायद ही कभी बत्तख देखा हो lबतखों को विशेष रूप से एक साथ,V का आकार बनाते हुए हवा को चीरते हुए उड़ते देखा जाता है l उन्हें एक साथ रहने के लिए बनाया गया है l
मनुष्य होने के नाते, हमें भी समुदाय में रहने के लिए ही रचा गया है (देखें उत्पत्ति 2:18) l और सभोपदेशक 4:10 में, सुलैमान वर्णन करता है कि जब हम अकेले होते हैं तब कितना असुरक्षित होते हैं : “हाय उस पर जो अकेला होकर गिरे और उसका कोई उठानेवाला न हो l” वह आगे कहता है, संख्या में ताकत है, क्योंकि “यदि कोई अकेले पर प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका सामना कर सकेंगे l जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटेगी” (4:12) l
यह हमारे लिए आध्यात्मिक रूप से उतना ही सत्य है जितना कि शारीरिक रूप से l परमेश्वर हमें कभी भी अकेले “उड़ने” की इच्छा नहीं रखा, कमजोर रूप से अलग-थलग l हमें प्रोत्साहन, ताजगी और वृद्धि के लिए एक-दूसरे के साथ संबंधों की ज़रूरत है (देखें 1 कुरिन्थियों 12:21) l
एक साथ, हम दृढ़ खड़े रह सकते हैं जब तेज़ हवा का विपरीत झोंका हमारे सामने हो lएक साथ l
समस्त सुअवसर
आपने कभी शेर पकड़ा है? जब तक मेरे बेटे ने मुझे अपने फोन पर गेम डाउनलोड करने के लिए राज़ी नहीं किया, तब तक मैं नहीं पकड़ा था l वास्तविक संसार को दर्शाते हुए एक डिजिटल मानचित्र का बनाकर, खेल आपको आपके निकट रंगीन प्राणियों को पकड़ने की अनुमति देता है l
अधिकाँश मोबाइल गेमों के विपरीत, इसमें गति की ज़रूरत होती है l कहीं भी आप जाएँ खेल के मैदान का हिस्सा हैं l परिणाम? मैं बहुत अधिक चल रहा हूँ! कभी भी मेरा बेटे और मैं खेलते हैं, हम अपने आसपास रहनेवाले जानवरों को दबोचने के लिए हर अवसर को अधिकतम करने का प्रयास करते हैं l
इस पर ध्यान केन्द्रित करना आसान है, यहाँ तक कि उसमें ग्रस्त होना, एक गेम जो उपयोगकर्ताओं को लुभाने के लिए तैयार किया गया है l लेकिन जैसा जब मैंने खेल खेला था, मैं इस सवाल से दोषी महसूस किया : क्या मैं अपने आस-पास के आध्यात्मिक अवसरों को अधिकतम करने के बारे में स्वेच्छाचारी/जिद्दी हूँ?
पौलुस जानता था कि हमारे चारों ओर परमेश्वर के कार्य के प्रति सतर्क रहने की ज़रूरत है l कुलुस्सियों 4 में, उसने सुसमाचार को साझा करने के अवसर के लिए प्रार्थना के लिए कहा (पद.3) l फिर उसने चुनौती दी, “अवसर को बहुमूल्य समझकर बाहरवालों के साथ बुद्धिमानी से व्यवहार करो” (पद.5) l पौलुस नहीं चाहता था कि कुलुस्से के लोग मसीह की ओर दूसरों को प्रभावित करने का कोई मौका छोड़ें l लेकिन ऐसा करने के लिए वास्तव में उन्हें और उनकी ज़रूरतों को देखने की आवश्यकता होगी, फिर उन तरीकों में संलग्न होना होगा जो “अनुग्रह सहित” (पद.6) है l
हमारे संसार में, एक खेल के काल्पनिक शेरों की तुलना में कहीं अधिक चीजें हमारे समय और ध्यान को आकर्षित करती हैं l लेकिन परमेश्वर हमें हर दिन एक वास्तविक संसार में साहसिक कार्य के लिए आमंत्रित करता है, हर दिन उसकी ओर इंगित करने के अवसरों की खोज करना l
पूरा ध्यान
प्रोद्योगिकी आज हमारे निरंतर ध्यान देने की मांग करती है l इंटरनेट का आधुनिक “चमत्कार” हमें आने हाथ की हथेली में मानवता की सामूहिक शिक्षा तक पहुँचने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है l लेकिन कई लोगों के लिए, इस तरह की निरंतर पहुँच लागत पर आ सकती है l
हमेशा यह जानने की ज़रूरत कि “वहाँ क्या हो रहा है,” के आधुनिक प्रयोजन का वर्णन करने के लिए हाल ही में “निरंतर आंशिक ध्यान” वाक्याँश तैयार किया गया था जिससे यह निश्चित हो कि हमसे कुछ छूट तो नहीं रहा है l अगर ऐसा लगता है कि यह पुरानी चिंता पैदा कर सकता है, तो आप सही हैं!
यद्यपि प्रेरित पौलुस चिंता के विभिन्न कारणों से जूझ रह था, वह जानता था कि हमारी आत्माएं परमेश्वर में शांति पाने के लिए बाध्य है l यह कारण है कि, नए विश्वासियों को लिखे पत्र में जिन्होंने सताव सहा था (1 थिस्सलुनीकियों 2:14), पौलुस ने उनसे आग्रह करते हुए समाप्त किया कि “सदा आनंदित रहो l निरंतर प्रार्थना में लगे रहो l हर बात में धन्यवाद करो” (5:16-18) l
“निरंतर” प्रार्थना करना बहुत चुनौतीपूर्ण लग सकता है l लेकिन फिर, हम कितनी बार अपना फोन देखते हैं? कितना अच्छा होता अगर इसके बजाय यह प्रेरणा परमेश्वर से बात करने के लिए उकसाव हो?
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि काश हम परमेश्वर में निरंतर, प्रार्थनापूर्ण विश्राम के लिए हमेशा “जाननेवालों” में रहने की ज़रूरत का आदान-प्रदान करना सीख जाते? मसीह की आत्मा पर भरोसा करके, जब हम प्रतिदिन आगे बढ़ते हैं हम अपने स्वर्गिक पिता को अपना निरंतर पूर्ण ध्यान देना सीख सकते हैं l
झुकी हुआ मीनार
शायद आपने इटली में पीसा की झुकी मीनार के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपने सैन फ्रैंसिस्को की झुकी हुयी मीनार के विषय सुना है? इसे मिलेनियम टावर कहा जाता है l 2008 में निर्मित, यह अट्ठाईस मंजिला गगनचुम्बी इमारत गर्व से खड़ी है - लेकिन थोड़ी टेढ़ी-मेढ़ी - सैन फ्रैंसिस्को शहर के केंद्र में l
समस्या? इसके इंजिनियरों ने नींव को प्रयाप्त गहरी नहीं खोदी l इसलिए अब उसकी मरम्मत के साथ नींव को पुनः बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है जिसकी लागत पूरे टावर से अधिक हो सकती है जब इसे पहले बनाया गया था – मरम्मत जिसे कुछ लोग आवश्यक मानते हैं कि भूकंप के दौरान जो इसे गिरने से रोक सकता है l
यहाँ पर पीड़ादायक सबक? नींवें मायने रखती हैं l जब आपकी नींव ठोस नहीं होती है, तो तबाही मच सकती है l यीशु ने अपने पहाड़ी उपदेश के अंत में कुछ ऐसा ही सिखाया l मत्ती 7:24-27 में, उसने दो बिल्डरों की तुलना की, एक जिसने चट्टान पर बनाया, और दूसरा जिसने बालू पर l जब अपरिहार्य रूप से एक तूफ़ान आया, तो केवल एक ठोस नींव वाला घर ही खड़ा रह गया था l
हमारे लिए इसका क्या अर्थ है? यीशु स्पष्ट रूप से कहता है कि हमारा जीवन आज्ञाकारिता और उस पर विश्वास के द्वारा बनाया जाना चाहिए (पद.24) l जब हम उसमें विश्राम करते हैं, हमारा जीवन परमेश्वर की सामर्थ्य और अनंत अनुग्रह से ठोस आधार प्राप्त कर सकता है l
मसीह ने हमसे वादा नहीं किया है कि हम कभी भी तूफानों का सामना नहीं करेंगे l लेकिन वह अवश्य कहता है कि जब वह हमारी चट्टान है, तो तूफ़ान कभी भी हमारे विश्वास को बहा नहीं ले जा सकते हैं – उसमें मजबूत नींव l