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Articles by बिल क्राऊडर

एक मजबूत हृदय

अपनी पुस्तक फिअरफुली एंड वंडरफुली मेड(Fearfully and Wonderfully Made) में सह-लेखक, फिलिप यैंसी के साथ, डॉ पॉल ब्रैंड कहते हैं, “एक गुंजन पक्षी(humming bird) के दिल का वजन एक औंस का एक अंश होता है और एक मिनट में आठ सौ बार धड़कता है; एक ब्लू व्हेल के हृदय का वजन आधा टन होता है, जो प्रति मिनट केवल दस बार धड़कता है, और दो मील दूर सुना जा सकता है l इन दोनों में से किसी भी एक के विपरीत, मानव हृदय कमज़ोर सुस्त कार्यात्मक लगता है, फिर भी यह अपना काम करता है, दिन में 100,000 बार धड़कता है [एक मिनट में 65-70 बार] जिसके पास आराम के लिए कोई समय नहीं, और सत्तर साल या उससे अधिक उम्र तक हमें ले जाता है l”
अद्भुत हृदय हमें जीवन में इतनी अच्छी तरह से उर्जा देता है कि यह हमारे समग्र आंतरिक स्वास्थ्य का रूपक बन गया है l फिर भी, हमारे दोनों शाब्दिक और लाक्षणिक(metaphorical) दिल विफलता के लिए प्रवृत्त हैं l हम क्या कर सकते है?
इस्राएल का आराधना अगुआ, भजनकार आसाप ने भजन 73 में स्वीकार किया कि सच्ची ताकत कहीं न कहीं से—किसी से—अन्यथा से आती है l उसने लिखा, “मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिए मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है” (पद.26) l आसाप सही था l जीवित परमेश्वर हमारी अंतिम और शाश्वत शक्ति है l स्वर्ग और पृथ्वी के निर्माता के रूप में, वह अपनी पूर्ण शक्ति के प्रति ऐसी कोई सीमा नहीं जानता है l
हमारी कठिनाई और चुनौती के समय में, हम यह जाने कि आसाफ ने अपने संघर्षों के द्वारा क्या सीखा : ईश्वर हमारे हृदयों की सच्ची ताकत है l हम हर दिन उस ताकत में विश्राम कर सकते हैं l

यीशु के समान

एक लड़के के रूप में, धर्मशास्त्री ब्रूस वेयर निराश थे कि 1 पतरस 2:21–23 हमें यीशु की तरह बनने के लिए कहता है l वेयर ने अपनी पुस्तक द मैन क्राइस्ट जीसस(The Man Christ Jesus) में अपनी युवावस्था के बारे में लिखा l "उचित नहीं, मैंने निर्धारित किया l खासतौर पर तब जब परिच्छेद ‘ऐसे व्यक्ति के क़दमों का अनुसरण करने के लिए कहता है ‘जिसने पाप नहीं किया l’ यह पूरी तरह से विचित्र था . . . मैं बिलकुल यह नहीं देख पा रहा था कि कैसे परमेश्वर वास्तव में चाहता है कि हम इसे गंभीरता से लें l”
मैं समझता हूँ कि वेयर को बाइबिल की चुनौती इतना हतोत्साहित करनेवाला क्यों महसूस हो सकता था! एक पुराना वृन्द्गीत/कोरस कहता है, “यीशु की तरह बनना, यीशु की तरह बनना l मेरी इच्छा, उसके जैसा बनना l” लेकिन जैसा कि वेयर ने ध्यान दिया कि हम ऐसा करने में असमर्थ हैं l अपने आप से, हम यीशु की तरह कभी नहीं बन सकते हैं l
हालाँकि, हम अकेले नहीं हैं l परमेश्वर की संतान को पवित्र आत्मा दिया गया है, कुछ हद तक ताकि हम में मसीह का रूप बन जाए (गलतियों 4:19) l इसलिए यह आश्चर्य की बात महसूस न हो कि पौलुस के पवित्र आत्मा सम्बंधित महान अध्याय में हम पढ़ते हैं, “जिन्हें उसने पहले से जान लिया है उन्हें पहले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों” (रोमियों 8:29) l परमेश्वर हममें अपने कार्य को पूरा करेगा l और वह इसे हममें यीशु की आत्मा के द्वारा करता है l
जब हम अपने जीवनों में आत्मा के कार्य के प्रति समर्पण करते हैं, हम वास्तव में और अधिक यीशु की तरह बन जाते हैं l यह जानना कितना सान्तवना देनेवाला है कि हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा कितनी बड़ी है!

सबसे गहरे स्थान

उन्नीसवीं सदी के फ्रांस के सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल के समय के कवि और उपन्यासकार विक्टर ह्यूगो (1802–1885),  शायद अपने उत्कृष्ट कृति(classic) लेस मिसरबल्स(Les Miserables) के लिए जाने जाते हैं  l एक सदी बाद,  उनके उपन्यास का एक संगीत रूपांतरण हमारी पीढ़ी की सबसे लोकप्रिय प्रस्तुतियों में से एक बन गया है l यह हमें आश्चर्यचकित न करने पाए l जैसा कि ह्यूगो ने एक बार कहा था, “संगीत वह व्यक्त करता है जो कहा नहीं जा सकता है और जिस पर चुप रहना असंभव है l”

भजन लिखने वाले मान जाते l उनके गीत और प्रार्थना हमें जीवन और उसके अपरिहार्य दर्द पर सच्चा प्रतिबिंब प्रदान करते हैं l वे हमें उन स्थानों पर स्पर्श करते हैं जहां हमें पहुंचना मुश्किल लगता है l उदाहरण के लिए,  भजन 6:6 में दाऊद रोता है, “मैं कराहते कराहते थक गया, मैं अपनी खाट आँसुओं से भिगोता हूँ; प्रति रात मेरा बिचौना भीगता है l”

यह तथ्य कि पवित्रशास्त्र के प्रेरित गीतों में ऐसी सच्ची ईमानदारी शामिल है, हमें बहुत प्रोत्साहन देता है l यह हमें अपने भय को ईश्वर तक लाने के लिए आमंत्रित करता है,  जो आराम और मदद देने के लिए अपनी उपस्थिति में हमारा स्वागत करता है l वह हमारे दिल को छू लेनेवाली इमानदारी में गले लगता है l

संगीत हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता दे सकता है जब शब्द मिलना कठिन होता है,  लेकिन चाहे वह अभिव्यक्ति गायी जाती है,  प्रार्थना की जाती है, या विलाप में व्यक्त  की जाती है,  हमारा परमेश्वर हमारे हृद्यों में सबसे गहरी जगहों पर पहुंचता है और हमें अपनी  शांति देता है l

क्रूस की भाषा

पास्टर टिम केलर ने कहा, “किसी के बताए जाने पर कि वह कौन है कोई भी कभी नहीं सीखता है । उन्हें दिखाया जाना चाहिए l ” एक अर्थ में,  यह कहावत का एक अनुप्रयोग है, "कार्य शब्दों से अधिक जोर से बोलते हैं ।" पति या पत्नी अपने जोड़े में से एक को दिखाते हैं कि जब वे उनकी सुनते हैं और उन्हें प्यार करते हैं तब उनकी सराहना होती है l माता-पिता अपने बच्चों की प्रेमी देखभाल करके दिखाते हैं कि वे मूल्यवान हैं l कोच एथलीटों के विकास में निवेश करके उन्हें दिखाते हैं कि उनके अन्दर संभावनाएं हैं l और इस तरह के अनेक उदाहरण हैं l इसी प्रतीक के द्वारा,  एक अलग तरह की कार्रवाई लोगों को दर्दनाक चीजें दिखा सकती है जो बहुत बुरे संदेश का संचार करती है ।

सृष्टि में सभी कार्य-आधारित संदेशों में से,  एक सबसे अधिक मायने रखता है । जब हम चाहते हैं कि हमें दिखया जाए कि हम परमेश्वर की नजर में कौन हैं,  तो हमें उसके क्रूस पर उसके कार्य से आगे नहीं देखना चाहिए । रोमियों 5:8 में, पौलुस ने लिखा, “परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिए मरा l” क्रूस हमें दिखाता है कि हम कौन हैं : जिन्हें परमेश्वर इतना प्यार करता था कि उसने हमारे लिए अपने एकलौता पुत्र दे दिया (यूहन्ना 3:16) ।

एक भंग संस्कृति में टूटे हुए लोगों के मिश्रित संदेशों और भ्रामक कार्यों के खिलाफ,  परमेश्वर के हृदय का संदेश स्पष्ट होता है । तुम कौन हो?  आप वह हैं जिसे परमेश्वर इतना प्यार करता है कि उसने आपको बचाने के लिए अपने पुत्र को दे दिया l उस कीमत पर विचार करें और उस अद्भुत वास्तविकता पर कि, आप उसके लिए, हमेशा महत्वपूर्ण थे l

शांति के साधन

1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध छिड़ा, तो ब्रिटिश राजनेता सर एडवर्ड ग्रे ने घोषणा की, “पूरे यूरोप में दीये बुझ रहे हैं; हम उन्हें अपने जीवनकाल में फिर से जलते हुए नहीं देखेंगे ।” ग्रे सही था । जब "सभी युद्धों को समाप्त करने वाला युद्ध" अंततः समाप्त हो गया, तो लगभग 20 मिलियन(2 करोड़) लोग मारे गए थे (उनमें से 10 मिलियन/1 करोड़ नागरिक) और अन्य 21 मिलियन/2.1 करोड़ घायल हुथे थे ।

जबकि उसी पैमाने या परिमाण पर नहीं, पर हमारे व्यक्तिगत जीवन में भी तबाही हो सकती है । हमारे घर, कार्यस्थल, चर्च, या पड़ोस को भी संघर्ष की अँधेरी छाया ढक सकती है l यह एक कारण है कि परमेश्वर हमें संसार में अंतर-निर्माता होने के लिए बुला रहा है l लेकिन ऐसा करने के लिए हमें उसकी बुद्धि पर भरोसा करना होगा l प्रेरित याकूब ने लिखा, “जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार कोमल और मृदु भाव और दया और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है l मिलाप कराने वाले धार्मिकता का फल मेल-मेलाप के साथ बोते हैं” (याकूब 3:17–18) ।

इसके परिणाम के कारण शांतिदूत की भूमिका महत्वपूर्ण है । शब्द धार्मिकता/righteousness का अर्थ है "ईमानदारी” या "सही संबंध ।" शांतिदूत रिश्तों को बहाल करने में मदद कर सकते हैं । कोई आश्चर्य नहीं कि यीशु ने कहा, "धन्य हैं वे, जो मेल करानेवाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएँगे” (मत्ती 5:9) l उनके बच्चे, उसकी बुद्धिमत्ता पर भरोसा करते हुए, उसकी शांति के साधन बन जाते हैं जहाँ इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है ।

शांति के साधन

1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध छिड़ा, तो ब्रिटिश राजनेता सर एडवर्ड ग्रे ने घोषणा की, “पूरे यूरोप में दीये बुझ रहे हैं; हम उन्हें अपने जीवनकाल में फिर से जलते हुए नहीं देखेंगे ।” ग्रे सही था । जब "सभी युद्धों को समाप्त करने वाला युद्ध" अंततः समाप्त हो गया, तो लगभग 20 मिलियन(2 करोड़) लोग मारे गए थे (उनमें से 10 मिलियन/1 करोड़ नागरिक) और अन्य 21 मिलियन/2.1 करोड़ घायल हुथे थे ।

जबकि उसी पैमाने या परिमाण पर नहीं, पर हमारे व्यक्तिगत जीवन में भी तबाही हो सकती है । हमारे घर, कार्यस्थल, चर्च, या पड़ोस को भी संघर्ष की अँधेरी छाया ढक सकती है l यह एक कारण है कि परमेश्वर हमें संसार में अंतर-निर्माता होने के लिए बुला रहा है l लेकिन ऐसा करने के लिए हमें उसकी बुद्धि पर भरोसा करना होगा l प्रेरित याकूब ने लिखा, “जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार कोमल और मृदु भाव और दया और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है l मिलाप कराने वाले धार्मिकता का फल मेल-मेलाप के साथ बोते हैं” (याकूब 3:17–18) ।

इसके परिणाम के कारण शांतिदूत की भूमिका महत्वपूर्ण है । शब्द धार्मिकता/righteousness का अर्थ है "ईमानदारी” या "सही संबंध ।" शांतिदूत रिश्तों को बहाल करने में मदद कर सकते हैं । कोई आश्चर्य नहीं कि यीशु ने कहा, "धन्य हैं वे, जो मेल करानेवाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएँगे” (मत्ती 5:9) l उनके बच्चे, उसकी बुद्धिमत्ता पर भरोसा करते हुए, उसकी शांति के साधन बन जाते हैं जहाँ इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है ।

जीवन के ड्रैगन से युद्ध

क्या आपने कभी ड्रैगन से लड़ाई की है? यदि आपने उत्तर नहीं दिया है, तो लेखक यूजीन पीटरसन आपसे असहमत हैं । अपनी किताब लॉन्ग ओबेडियंस इन द सेम डायरेक्शन(Long Obedience in the Same Direction) में उन्होंने लिखा, “ड्रेगन हमारे डर के अनुमान हैं, सबसे अधिक भयानक सृजन जो हमें चोट पहुंचा सकते हैं . . . l जब एक किसान का सामना एक शानदार अजगर हुआ वह पूरी तरह निम्न/ओछा हो गया l” उसका मतलब? जीवन ड्रेगन से भरा हुआ है : खतरनाक स्वास्थ्य संकट, अचानक नौकरी की हानि, असफल विवाह, मनमुटाव उत्पन्न करनेवाला उड़ाऊ संतान l ये "ड्रेगन" जीवन के औसत से कहीं बड़े खतरे और भंगुरता हैं  जिनसे हम अकेले लड़ने के लिए अपर्याप्त हैं ।

लेकिन उन लड़ाइयों में, हमारे पास एक चैंपियन है । एक परी कथा चैंपियन नहीं - परम चैंपियन जिसने हमारी ओर से लड़ाई लड़ी है और सभी ड्रेगन को जो हमें नष्ट करना चाहते हैं जीत लिया है । चाहे वे हमारी अपनी विफलताओं के ड्रेगन हों या आध्यात्मिक शत्रु जो हमारे विनाश की इच्छा रखता है, हमारा चैंपियन इन सबसे महान है, जो पौलुस को यीशु के बारे में लिखने की अनुमति देता है, “उसने प्रधानताओं और अधिकारों को ऊपर से उतारकर उनका खुल्लमखुल्ला तमाशा बनाया और क्रूस के द्वारा उन पर जयजयकार की ध्वनि सुनाई” (कुलुस्सियों 2:15) । इस टूटे हुए संसार की विनाशकारी ताकतों का उसके सामने कोई मुकाबला नहीं है!

जिस क्षण हम महसूस करते हैं कि जीवन के ड्रेगन हमारे लिए बहुत बड़े हैं, वह क्षण है जिसमें हम मसीह के बचाव में विश्राम करना शुरू कर सकते हैं । हम भरोसे के साथ कह सकते हैं, “परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवंत करता है” (1 कुरिन्थियों 15:57) ।

गुडबाई और हेलो

जब मेरे भाई की अचानक हृदयाघात से मृत्यु हो गयी, जीवन के प्रति मेरा परिपेक्ष नाटकीय रूप से बदल गया l डेव सात बच्चों में चौथा था, लेकिन हममें से सबसे पहले गुज़र गया – और उसके गुजरने का अनापेक्षित स्वभाव ने मुझे बहुत अधिक विचार करने को मजबूर किया l यह स्पष्ट हो गया कि जैसे जैसे हमलोगों की आयु बढ़ने लगी हमारे परिवार का भविष्य लाभ से अधिक हानि से चिन्हित होने जा रहा था l यह हेलो के बराबर गुडबाई से चरितार्थ होने जा रहा था l

इनमें से कोई भी बौद्धिक रूप से चकित करनेवाला नहीं था – जीवन ऐसे ही कार्य करता है l लेकिन यह एहसास मस्तिष्क पर एक भावनात्मक वज्रपात की तरह था l इसने हर पल को एक तरोताजा, नया महत्व दिया जो जीवन हमें देता है और हर एक अवसर जो समय अनुमति देता है l और इसने एक ऐसे भविष्य के पुनर्मिलन की वास्तविकता को एक बड़ा नया मूल्य दिया,  जहां कभी भी किसी गुडबाई की ज़रूरत नहीं होगी l

प्रकाशितवाक्य 21:3-4 में जो हमें मिलता है, उसके केंद्र में यह परम वास्तविकता है : “परमेश्वर आप उनके साथ रहेगा और उनका परमेश्वर होगा l वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं l”

हालाँकि आज हम खुद को लम्बे समय तक अलविदा कहने का अनुभव कर सकते हैं, लेकिन मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान में हमारा विश्वास अनंत काल तक हेलो का वादा करता है l

उसकी मृत्यु द्वारा जीवन

दक्षिण अमरीका में जोएना नाम की एक महिला मसीह के सुसमाचार द्वारा जेलों में कैदियों के लिए आशा लाने के लिए उत्सुक थी l जोएना प्रतिदिन कैदियों से मुलाकात करने लगी, और उनको क्षमा और मेल मिलाप का सरल सुसमाचार सुनाने लगी l उसने उनका विश्वास जीत लिया, और उन्हें अपने अपमानजनक बचपन के बारे में बात करने के लिए तैयार किया, और उन्हें संघर्षों को हल करने का एक बेहतर तरीका दिखाया l उसकी मुलाक़ात आरम्भ होने वाले वर्ष से पहले, जेल में बंदियों और सुरक्षाकर्मियों के विरुद्ध हिंसा की 279 घटनाएँ पंजीकृत की गई; जो अगले वर्ष केवल दो थीं l

प्रेरित पौलुस ने लिखा, “यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है : पुरानी बातें बीत गई है; देखो, सब बातें नई हो गई हैं” (2 कुरिन्थियों 5:17) l हालाँकि हम हमेशा उस नयेपन को  देख नहीं सकते हैं जिस तरह जोएना ने नाटकीय रूप से दर्शाया, पर रूपांतरित करने की सुसमाचार की सामर्थ्य सबसे बड़ी आशा है – विश्व में बल देनेवाली l नई सृष्टि l कितनी अद्भुत सोच है! यीशु की मृत्यु ने हमें उसके जैसा बनने के सफ़र पर उतारा है – एक ऐसा सफ़र, जिसका समापन तब होगा जब हम उसे आमने-सामना देखेंगे (देखें 1 युहन्ना 3:1-3) l

यीशु में विश्वासियों के रूप में हम अपने जीवन को नई  सृष्टि के रूप में मनाते हैं l फिर भी हमें कभी भी इस बात से ध्यान नहीं हटाना चाहिये कि मसीह की क़ीमत क्या है l उसकी मृत्यु से हमें जीवन मिलता है l “जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिए पाप ठहराया कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ” (2 कुरिन्थियों 5:21) l