Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by माइक विटमर

दुश्मनों पर अंगारों का ढेर लगाना

डैन को उसी जेल प्रहरी से रोजाना मार–पीट सहन करनी पड़ती थी। उसने महसूस किया कि यीशु ने उसे इस आदमी से प्यार करने के लिए बाध्य किया है, इसलिए एक सुबह, पिटाई शुरू होने से पहले, डैन ने कहा, “महोदय, अगर मैं जीवन भर आपको हर दिन देखने जा रहा हूं, तो आइये हम दोस्त बन जायें।” गार्ड ने कहा, “नहीं,  हम कभी दोस्त नहीं हो सकते।” पर  डैन ने अपनी बात पर जोर दिया और अपना हाथ बढ़ाया।

पहरेदार कुछ भी नहीं बोल सका और शान्त खड़ा रहा। वह कांपने लगा, फिर उसने डैन का हाथ पकड़ लिया और छोड़ा नहीं। उसकी आंखों  से आँसू बहने लगे। उसने कहा, “डैन, मेरा नाम रोसोक है। मैं आपका दोस्त बनना पसंद करूँगा।” उस दिन या फिर कभी बाद में भी गार्ड ने डैन को नहीं पीटा।

पवित्रशास्त्र हमें बताता है “यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे भोजन खिलाना, यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिला। ऐसा करने से तू उसके सिर पर अंगारे डालेगा, और यहोवा तुझे इसका फल देगा”नीतिवचन 25:21—.22। कोयले की कल्पना मिस्र के एक अनुष्ठान (रिवाज़)को दशौती है जिसमें एक दोषी व्यक्ति  अपने सिर पर गर्म अंगारों का कटोरा लेकर अपना पश्चाताप दिखाता है। इसी तरह, हमारी दयालुता हमारे शत्रुओं के चेहरे को शर्मिंदगी से लाल कर सकती है, जो उन्हें पश्चाताप की ओर ले जा सकती है।

आपका दुश्मन कौन है ?आप किसे नापसंद करते हैं? डैन ने पाया कि मसीह की दया इतनी प्रबल थी कि वह किसी भी हृदय को बदल सकती थी — उसके शत्रु का और उसके स्वयं का। हम भी ऐसा कर सकते हैं।

यह अभी खाली है

मेरे भाइयों और हमारे परिवारों ने हमारे माता–पिता के सामान को हमारे बचपन के घर से हटाने में सारा दिन बिताया। दोपहर में देर से, हम आखिरी बार सामान उठाने के लिए वापस गए और यह जानते हुए कि हम अपने  पारिवारिक घर में आखिरी बार हैं हमने  पीछे के बरामदे में एक तस्वीर खिंचवाने का फेसला किया। मैं आँसुओं को छिपाने की कोशिश कर रहा था कि मेरी माँ ने मेरी ओर मुड़कर कहा, “अब यह सब खाली है।” इसने मुझे पूरी तरह से भावनातमक तरह से हिला दिया । चौवन साल की यादें समेटे वह घर अब सूना है। मैं इसके बारे में न सोचने की कोशिश करता हूं।

मेरे दिल का दुख यिर्मयाह के विलापगीत  के पहले शब्दों के साथ गूँजता है— “जो नगरी लोगों से भरपूर थी वह अब कैसी अकेली है” (1:1); एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि यरूशलेम नगरी अपने बहुत से अपराधों के कारण सूनी थी (पद 5)। परमेश्वर ने अपने लोगों को बाबुल में बंधुआई में भेजा क्योंकि उन्होंने उसके विरुद्ध विद्रोह किया और पश्चाताप करने से इनकार कर दिया (पद 18)। मेरे माता–पिता पाप के कारण आगे नहीं बढ़ रहे थे, कम से कम खुले दिल से तो नहीं । परन्तु अदन की वाटिका में आदम के पाप के बाद से, प्रत्येक व्यक्ति के जीवनकाल में उनके स्वास्थ्य में  गिरावट आई है। जैसे–जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे लिए यह असामान्य नहीं है कि हम छोटे घरों में रहें जिनका रख–रखाव आसान हो।

मैं उन यादों के लिए शुक्रगुजार हूं जिन्होंने हमारे साधारण घर को खास बनाया। दुख दर्द प्यार की कीमत है। मुझे पता है कि अगली अलविदा मेरे माता–पिता के घर के लिये नहीं, बल्कि मेरे माता–पिता के लिए होगी। और मैं रोता हूं, मैं यीशु को आने के लिए पुकारता हूं, कि वह आये और इस अलविदा को समाप्त  करे, और सभी चीजों को बहाल करे । मेरी आशा उस पर है।

यीशु उत्तर है

यह कहानी बताई जाती है कि अल्बर्ट आइंस्टीन के व्याख्यान दौरे पर एक और पड़ाव के बाद, उनके ड्राईवर ने उल्लेख किया कि उन्होंने उनके भाषण के बारे में पर्याप्त सुना है जो वह दे सकते थे। आइंस्टीन ने सुझाव दिया कि वे अगले कॉलेज में जगह बदल लें, क्योंकि वहां किसी ने उनकी तस्वीर नहीं देखी थी। ड्राईवर सहमत हो गया और एक अच्छा व्याख्यान दिया। फिर आया सवाल-जवाब का दौर। एक आक्रामक जिज्ञासु के लिए, ड्राइवर ने उत्तर दिया, "मैं देख सकता हूं कि आप एक शानदार प्रोफेसर हैं, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि आप एक इतना सरल प्रश्न पूछेंगे कि मेरा ड्राइवर भी इसका उत्तर दे सकता है।" तब उनके "ड्राइवर" - अल्बर्ट आइंस्टीन ने स्वयं इसका उत्तर दिया! इस प्रकार मजेदार लेकिन काल्पनिक कहानी समाप्त होती है।

दानियेल के तीन दोस्त सही मायने में खतरे में थे। राजा नबूकदनेस्सर ने धमकी दी कि यदि वे उसकी मूर्ति की पूजा नहीं करेंगे तो वे उन्हें धधकते भट्ठी में फेंक देंगे। उसने पूछा, “कौन सा देवता तुझे मेरे हाथ से छुड़ा सकेगा?” (दानिय्येल 3:15)। मित्रों ने फिर भी झुकने से इनकार कर दिया, इसलिए राजा ने भट्ठी को सात गुना अधिक गर्म किया और उन्हें उसमें झोंक दिया।

वे अकेले नहीं गए। एक "स्वर्गदूत" (पद. 28), शायद स्वयं यीशु, उनके साथ आग में शामिल हो गया, उन्हें नुकसान से बचाते हुए और राजा के प्रश्न का निर्विवाद उत्तर प्रदान करते हुए (पद. 24-25)। नबूकदनेस्सर ने "शद्रक, मेशक और अबेदनगो के परमेश्वर" की प्रशंसा की और स्वीकार किया कि "कोई अन्य देवता इस प्रकार नहीं बचा सकता" (पद. 28-29).

कई बार, हम अपने सिर के ऊपर परेशानी महसूस कर सकते हैं। लेकिन यीशु उनके साथ खड़ा है जो उसकी सेवा करते हैं। वह हमें ले जाएगा।

जाने देना

ऑगस्टाइन की आत्मकथात्मक स्वीकारोक्ति यीशु के लिए उनकी लंबी और घुमावदार यात्रा का वर्णन करती है। एक अवसर पर, वह सम्राट के लिए चापलूसी भरा भाषण देने के लिए महल में जा रहे थे। वह अपनी भ्रामक तालियों की पंक्तियों पर चिंतन ही कर रहे थे जब उनका ध्यान एक नशे में धुत भिखारी पर गया जो "मजाक कर रहा था और हंस रहा था"। उन्होंने महसूस किया कि नशे में उस व्यक्ति के पास पहले से ही वह क्षणभंगुर खुशी थी जो की उसका कुटिल जीवन देने पाता है, और वो भी कुछ ज्यादा प्रयास किए बिना । इसलिए ऑगस्टाइन ने सांसारिक सफलता के लिए प्रयास करना बंद कर दिया।

लेकिन वह अभी भी वासना के गुलाम थे। वह जानते  थे  कि वह पाप से मुड़े बिना यीशु की ओर नहीं मुड़ सकते, और वह अभी भी यौन अनैतिकता से जूझ रहे थे। इसलिए उसने प्रार्थना की, “मुझे पवित्रता प्रदान करो। . . लेकिन अब तक नहीं।"

ऑगस्टाइन ठोकर खाते चले, उद्धार और पाप के बीच जूझते रहे, जब तक अंतः उनके लिए यह बहुत हुआ। दूसरों से प्रेरित होकर जो यीशु की ओर फिरे थे, उन्होंने बाइबिल में रोमियों 13:13-14 पढ़ा। “आइए शालीनता से व्यवहार करें . . . न रंगरेलियों और मतवालेपन में, न व्यभिचार में। . . . बल्कि प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और यह न सोचो कि शरीर की लालसाओं को कैसे तृप्त किया जाए।”

उनके लिए यह काम कर गया। परमेश्वर ने ऑगस्टाइन की वासना की जंजीरों को तोड़ने के लिए उन प्रेरित शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें ले आए “पुत्र के राज्य में . . . जिसमें हमें छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा मिली है" (कुलुस्सियों 1:13-14)। ऑगस्टाइन एक बिशप बन गए  जो प्रसिद्धिता और वासना की परीक्षा में बने रहे, लेकिन अब वह जानते थे  कि जब उसने पाप किया तो उसे किसकी ओर देखना है। वह यीशु की ओर मुड़े। क्या आप मुड़े है ?

पापियों के लिए एक अस्पताल

काठमांडू में एक मित्र के चर्च की यात्रा के दौरान, मैंने एक चिन्ह देखा जो उसने द्वार पर लगाया था। यह कहा, “चर्च पापियों के लिए एक अस्पताल है न कि संतों के लिए एक संग्रहालय”। हालांकि मैं संग्रहालय शब्द के बारे में निश्चित नहीं हूं, लेकिन मुझे अस्पताल की उपमा पसंद है। मेरे विचार से यह एकदम सही है।

डॉक्टर, नर्स, प्रशासनिक कर्मचारी, मरीज और कई अन्य लोग अस्पताल बनाते हैं। अस्पताल में हम लगभग सभी ज्ञात भावनाएँ पा सकता है। हम, यहां तक कि डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ को भी अस्पताल में मरीज बनने की प्रवृत्ति होती है और उनमें से कई लोग होते भी हैं।

सी. एस. लुईस ने कहा था, “मुझे उसी अस्पताल में साथी मरीज समझो। लेकिन कुछ समय पहले भर्ती हुआ इसलिये कुछ सलाह दे सकता था।” किसी प्रकार की पूर्णता से नहीं, बल्कि एक साथी रोगी के रूप में, फरीसियों के विपरीत, जो स्वयं धर्मी अहंकार के ऊंचे आसन से बोलते हैं जो कहते हैं, “मैं न कभी बीमार हुआ हूं और न कभी होऊंगा”

यीशु ‘यद्यपि उन्होंने पाप नहीं किया’ जो ‘पाप बन गया’ के रूप में बोला और ऐसा ही ‘कर लेने वालों और पापियों’ का मित्र था। प्रश्न यह है कि क्या हम उन पापियों के मित्र हैं जिन्हें उनके अनुग्रह और दया की आवश्यकता है?

नरक से आशा

1979 में, पुरातत्वविद्(archeologist/आर्केओलोजिस्ट) गेब्रियल बार्के ने चाँदी के दो छोटे घूँघर/खर्रा(scroll/स्क्रोलl) खुदाई से निकाले l धातु के स्क्रोल को नाजुक ढंग से खोलने में वर्षों लग गए, और प्रत्येक में गिनती 6:24-26 से आशीष इब्री में उकेरी हुयी देखी गयी, “यहोवा तुझे आशीष दे और तेरी रक्षा करे; यहोवा तुझ पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए, और तुझ पर अनुग्रह करे; यहोवा अपना मुख तेरी ओर करे; और तुझे शांति दे l” विद्वानों ने स्क्रोल को सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व का बताया है l वे संसार में बाइबल के सबसे पुराने ज्ञात अंश हैं l 

जिस स्थान पर वे पाए गए वह उतना ही दिलचस्प है l बार्के हिन्नोम की घाटी में एक गुफा की खुदाई कर रहे थे, वही स्थान जहाँ नबी यिर्मयाह ने यहूदा के लोगों से कहा था कि परमेश्वर उनको अपने बच्चों को बलि चढ़ाने के कारण मार डालेगा (यिर्मयाह 19:4-6) l यह घाटी ऐसी दुष्टता की जगह थी कि यीशु ने नरक के चित्र के रूप में “गेहन्ना/Gehenna” (“हिन्नोम की घाटी” के लिए इब्री नाम का एक यूनानी रूप) शब्द का प्रयोग किया था (मत्ती 23:33) l 

इस जगह, लगभग उस समय यिर्मयाह अपने राष्ट्र पर परमेश्वर का न्याय घोषित कर रहा था, कोई और अपनी भावी आशीष को चाँदी के स्क्रोल पर उकेर रहा था l यह उनके जीवनकाल में घटित नहीं होने वाला था, लेकिन एक दिन—बेबीलोन के आक्रमण के दूसरी ओर—परमेश्वर अपना मुख अपने लोगों की ओर करनेवाला था और उन्हें आशीष देनेवाला था l 

हमारे लिए सबक स्पष्ट है l बावजूद इसके कि हम जिसके लायक हैं वह होनेवाला/घटनेवाला है, हम परमेश्वर की आशीष को थामें रह सकते हैं l उसका हृदय हमेशा उसके लोगों के लिए लालायित रहता है l

जब कमजोरी ताकत होती है

ड्रू को दो साल के लिए कैद में डाला गया क्योंकि वह यीशु की सेवकाई कर रहा था । वह उन मिशनरियों की कहानियाँ पढ़ता था जो अपने कारावास के दौरान निरंतर आनंद महसूस करते थे, लेकिन उसने स्वीकार किया कि यह उसका अनुभव नहीं था। उसने अपनी पत्नी से कहा कि परमेश्वर ने गलत आदमी को उसके लिए दुःख उठाने के लिए चुना है। उसकी पत्नी ने जवाब दिया, "नहीं। मुझे लगता है कि शायद उसने सही आदमी को चुना है। यह कोई संयोग की बात नहीं है।"

ड्रू संभवतः भविष्यवक्ता यिर्मयाह से अपने आप को जोड़ सकता है, जिसने यहूदा को चेतावनी देकर कि परमेश्वर उनके पापों के लिए उन्हें दंड देगा, ईमानदारी से परमेश्वर की सेवा की थी। परन्तु परमेश्वर का न्याय अभी तक नहीं आया था, और यहूदा के अगुवों ने यिर्मयाह को पीटा और उसे काठ में डाल दिया। यिर्मयाह ने परमेश्वर को दोष दिया: "हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया" (पद 7)। भविष्यवक्ता का मानना ​​था कि परमेश्वर उसे छुड़ाने में विफल रहे हैं। उसके वचन केवल "दिन भर [उसके लिये] निंदा और ठट्ठा" (पद 8)। "स्रापित हो वह दिन जिसमें मैं उत्पन्न हुआ!" यिर्मयाह ने कहा। " मैं क्यों उत्पात और शोक भोगने के लिए जन्मा और की अपने जीवन में परिश्रम और दुःख देखूँ, और अपने दिन नामधराई में व्यतीत करूं?" (पद 14,18)।

अंततः ड्रू को रिहा कर दिया गया, लेकिन अपनी परीक्षा के माध्यम से वह समझने लगा कि शायद परमेश्वर ने उसे चुना है - ठीक उसी तरह जैसे उसने यिर्मयाह को चुना था - क्योंकि वह कमजोर था। यदि वह और यिर्मयाह स्वाभाविक रूप से मजबूत होते, तो शायद उन्हें अपनी सफलता के लिए कुछ प्रशंसा मिली होती। परन्तु यदि वे स्वाभाविक रूप से निर्बल होते, तो उनके धीरज की सारी महिमा परमेश्वर के पास जाती (1 कुरिन्थियों 1:26-31)। उसकी कमज़ोरी ने उसे यीशु के इस्तेमाल के लिए एकदम सही इंसान बना दिया।

टर्की(पक्षी) से भागना

कंट्री लेन में आगे दो जंगली टर्की खड़े थे। मैं कितना करीब जा सकता हूँ? मैं यह सोचने लगा। मैं भागने की जगह अब चलने लगा, फिर रुक गया। इसने  काम किया। टर्की मेरी ओर चल पड़े। . . और आते रहे। सेकंडों में ही, उनके सिर मेरी कमर पर, फिर मेरे पीछे घूम रहे थे। वे चोंच कितनी तेज थीं? मैं भाग गया। पीछा छोड़ने से पहले वे मेरे पीछे अपनी डगमगाती हुई चाल से पीछे पड़े।

कितनी जल्दी पाँसा पलट गया था! जब टर्की ने पहल को ज़ब्त किया तो शिकार शिकारी बन गया था। मूर्खता से, मैंने सोचा था कि वह डराने के लिए बहुत भोले-भाले हैं। मैं एक पक्षी द्वारा लापरवाही से घायल होने वाला नहीं था, इसलिए मैं भाग गया। टर्की से।

दाऊद खतरनाक नहीं लग रहा था, इसलिए गोलियत ने उसे पास आने के ललकारा। उसने कहा, " ‘मेरे पास आ, मैं तेरा मांस आकाश के पक्षियों और जंगली जानवरों को दूंगा!'" (1 शमूएल 17:44)। दाऊद ने परिस्थिति को पलट दिया जब उसने पहल को जब्त किया। वह गोलियत की ओर भागा, इसलिए नहीं कि वह मूर्ख था, बल्कि इसलिए कि उसे परमेश्वर पर भरोसा था। वह चिल्लाया, “आज के दिन ...समस्त पृथ्वी के लेगा जान लेंगे कि इस्राएल में एक परमेश्वर है" (पद 46)। गोलियत इस आक्रामक लड़के से हैरान था। यह क्या हो रहा है? उसने सोचा होगा। तभी उसे मारा गया। आँखों के ठीक बीच।

बड़े जानवरों से बचने के लिए छोटे जानवरों का लोगों और चरवाहों से दूर भागना स्वाभाविक है। हमारे लिए अपनी समस्याओं से छिपना स्वाभाविक है। पर स्वाभाविकता के साथ समझौता क्यों? क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर है? तो फिर, उसकी शक्ति में, लड़ाई की ओर दौड़ें।

परमेश्वर के वचन की सामर्थ

स्टीफन एक उभरते हुए हास्य अभिनेता और एक खर्चीले व्यक्ति थे। एक मसीही परिवार में पले-बढ़े, अपने पिता और दो भाइयों की विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद वह संदेह से जूझ रहे थे। अपने शुरुआती बीस वर्ष तक, उन्होंने अपना विश्वास खो दिया था। लेकिन एक रात शिकागो की ठंडी सड़कों पर  उसने उसे पाया। एक अजनबी ने उसे एक छोटा नया नियम दिया, और स्टीफन ने पन्ने खोले। एक सूचकांक में लिखा था कि चिंता से जूझ रहे लोगों को मत्ती 6:27-34 पढ़ना चाहिए,  जो यीशु का पहाड़ी उपदेश है।

स्टीफन ने वह पढ़ा, और शब्दों ने उनके हृदय में आग जला दी। वह याद करते हैं, "मैं बिल्कुल, तुरंत हल्का हो गया था। मैंने ठंड में सड़क के किनारे खड़े होकर वचन को पढ़ा, और मेरा जीवन पहले जैसा फिर न रहा।"

पवित्रशास्त्र की सामर्थ ऐसी है। बाइबल किसी भी अन्य पुस्तक से भिन्न है, क्योंकि यह जीवित है। हम सिर्फ बाइबल को नहीं पढ़ते हैं। बाइबल हमें पढ़ती है। " हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है; और प्राण और आत्मा को, ...आर-पार छेदता है...; मन की भावनाओं और विचारों को जाँचता है।" (इब्रानियों 4:12)।

पवित्रशास्त्र ग्रह पर सबसे शक्तिशाली शक्ति को प्रस्तुत करता है, एक ऐसी शक्ति जो हमें आत्मिक परिपक्वता की ओर ले जाती है। इसे खोलें और इसे ज़ोर से पढ़ें, परमेश्वर से हमारे हृदयों को प्रज्वलित करने के लिए कहें। वह वादा करता है कि उसके द्वारा बोले गए शब्द "व्यर्थ ठहरकर मेरे पास खाली न लौटेगा, परन्तु जो [वह चाहता है] उसे पूरा करेगा और जिस काम के लिए [उसने] उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा" (यशायाह 55:11)। हमारा जीवन पहले के समान फिर न रहेगा।