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कौन सा ज्ञान?

सन् 2018 के ईस्टर से ठीक पहले, एक आतंकवादी एक बाजार में घुस गया, और उसने दो लोगों को मार डाला और एक तीसरी स्त्री को बंधक बना लिया। जब उस स्त्री को स्वतंत्र करवाने के प्रयास विफल रहे, तो एक पुलिसकर्मी ने आतंकवादी को एक प्रस्ताव दिया कि वह उस स्त्री को छोड़ कर उसे पकड़ ले।

यह प्रस्ताव चौंकाने वाला इसलिए था क्योंकि यह लोकप्रिय ज्ञान के विरुद्ध था। आप हमेशा किसी संस्कृति के ज्ञान को उसके द्वारा मनाए जाने वाले कथनों से बता सकते हैं, जैसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने वाले सेलिब्रिटी उद्धरण। एक लोकप्रिय उद्धरण में लिखा है, "सबसे बड़ा साहसिक कार्य जो आप कर सकते हैं वह है अपने सपनों का जीवन जीना।" दूसरे का कहना है, ''पहले खुद से प्यार करें और बाकी सब चीजें आपके अनुरूप हो जाएंगी।'' तीसरा, ''तुम्हें अपने लिए जो करना है वही करो।'' यदि पुलिस अधिकारी ने ऐसी सलाह का पालन किया होता, तो वह स्वयं को पहले स्थान पर रखता और भाग जाता।

याकूब प्रेरित कहता है कि इस संसार में दो प्रकार की बुद्धि है: एक “सांसारिक” है, और दूसरी “स्वर्गीय” है। पहले वाली को स्वार्थी महत्वाकांक्षा और गड़बड़ी (विकार) द्वारा चिन्हित किया गया है (याकूब 3:14-16); तो दूसरी को नम्रता, अधीनता और मेल-मिलाप के द्वारा चिन्हित किया गया है (पद 13, 17-18)। सांसारिक ज्ञान स्वयं को सबसे पहले रखता है। स्वर्गीय ज्ञान दूसरों का पक्ष लेता है, जो विनम्र कर्मों के जीवन की ओर अगुवाई करता है (पद 13)।

उस आतंकवादी ने पुलिस अधिकारी के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, और उस बंधक को स्वतंत्र करके पुलिसकर्मी को गोली मार दी, और उस ईस्टर पर संसार ने एक निर्दोष व्यक्ति को किसी दूसरे के लिए मरते हुए देखा। स्वर्गीय ज्ञान विनम्र कार्यों की ओर अगुवाई इसलिए करता है क्योंकि यह परमेश्वर को स्वयं से ऊपर रखता है (नीतिवचन 9:10)। आज आप किस ज्ञान का अनुसरण कर रहे हैं?

प्रतिज्ञा पूरी हुई

जब मैं बच्चा था तो प्रत्येक गर्मियों में, मैं अपने दादा-दादी के साथ एक सप्ताह की छुट्टियाँ मनाने के लिए दो सौ मील की यात्रा किया करता था। मुझे बाद में जाकर यह पता चला कि मैंने उन दोनों से जिन्हें मैं प्रेम करता था कितना ज्ञान प्राप्त किया था। उनके जीवन के अनुभव और परमेश्वर के साथ उनके करीबी सम्बन्ध ने उन्हें ऐसे-ऐसे दृष्टिकोण प्रदान किए थे जिनकी अभी तक भी मेरा युवा मन कल्पना नहीं कर सकता था। परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के बारे में उनके साथ हुई बातचीत ने मुझे इस बात के लिए आश्वस्त किया कि परमेश्वर भरोसेमंद है और अपने द्वारा की गई हर प्रतिज्ञा को पूरा करता है।

जब एक स्वर्गदूत यीशु की माता, मरियम से मिलने आया तो उस समय पर वह एक किशोरी थी। जिब्राईल के द्वारा लाया गया वह अविश्वसनीय समाचार अभिभूत करने वाला रहा होगा, फिर भी उसने अनुग्रह के साथ उस कार्य को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया (लूका 1:38)। लेकिन शायद उनकी बुजुर्ग रिश्तेदार इलीशिबा से मुलाकात - जो एक चमत्कारी गर्भावस्था के बीच में थी (कुछ विद्वानों का मानना ​​है कि वह साठ साल की रही होगी) - उन्हें आराम मिला क्योंकि इलीशिबा ने जिब्राईल के शब्दों की उत्साहपूर्वक पुष्टि की कि वह प्रतिज्ञा किए गए बच्चे मसीहा की मां थीं। (पद 39-45)।

जैसे-जैसे हम मसीह में बढ़ते और परिपक्व होते जाते हैं, जैसे मेरे दादा-दादी करते थे, वैसे-वैसे हम सीखते जाते हैं कि वह अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करता है। उसने इलीशिबा और उसके पति जकर्याह के लिए एक संतान की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा किया (पद 57-58)। और वह पुत्र, अर्थात् यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, उस प्रतिज्ञा का अग्रदूत (संदेशवाहक) बना जो सैकड़ों वर्ष पहले की गई थी, अर्थात् वह प्रतिज्ञा जो मनुष्यजाति के भविष्य की दिशा को बदल देगी। प्रतिज्ञा किया हुआ मसीहा, अर्थात् संसार का उद्धारकर्ता, आ रहा है! (मत्ती 1:21–23)

निर्देश स्वीकारना

जब हम खलिहान में खड़े थे जहाँ मेरी मित्र मिशेल मेरी बेटी को घोड़े की सवारी करना सिखा रही थी, तो वहाँ हवा से चमड़े और घास की गंध आ रही थी। जब मिशेल ने यह दिखाया कि लगाम को घोड़े के दांतों के पीछे कैसे रखा जाता है तो उस समय पर मिशेल के सफेद टट्टू (छोटा घोड़ा) ने अपना मुँह खोल दिया। जैसे ही मेरी बेटी ने उसके कानों पर लगी लगाम खींची, तो मिशेल ने उसे समझाया कि लगाम इसलिए महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे सवार को घोड़े को धीमा करने और उसे बाईं या दाईं ओर चलाने का अधिकार मिलता है। 

घोड़े की लगाम, मनुष्य की जीभ की तरह ही, छोटी परन्तु महत्वपूर्ण होती है। दोनों ही का किसी बड़ी और शक्तिशाली वस्तु पर बहुत अधिक प्रभाव होता है— और लगाम के मामले में, यह घोड़ा होता है। जीभ के मामले में, यह हमारे शब्द होते हैं (याकूब 3:3, 5)। 

हमारे शब्द अलग-अलग दिशाओं में दौड़ सकते हैं। “इसी से हम प्रभु और पिता की स्तुति करते हैं, और इसी से मनुष्यों को...श्राप देते हैं” (पद 9)। दुर्भाग्य से, बाइबल इस बात की चेतावनी देती है कि हमारी बोली (बात-चीत) को नियंत्रित करना बहुत कठिन है क्योंकि शब्द हमारे हृदयों से निकलते हैं (लूका 6:45)। इस बात के लिए धन्यवाद हो कि प्रत्येक विश्वासी में वास करने वालापरमेश्वर का आत्मा, हमें धीरज, भलाई और संयम में उन्नति करने में सहायता करता है (गलातियों 5:22-23)। जब हम आत्मा के साथ सहयोग करते हैं, तो हमारे हृदय बदल जाते हैं और हमारे शब्द भी बदल जाते हैं। गाली-गलौज प्रशंसा करने में बदल जाता है। झूठ सच में बदल जाता है । आलोचना प्रोत्साहन में बदल जाती है। 

जीभ को वश में करने का अर्थ केवल स्वयं को सही बातें कहने के लिए प्रशिक्षित करना नहीं होता है। यह पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन को स्वीकार करना है ताकि हमारे शब्द उस करुणा और प्रोत्साहन को उत्पन्न करें जिसकी संसार को आवश्यकता है। 

आश्चर्यकर्म करने वाला परमेश्वर

वक्ता ने समर्पण की प्रार्थना में हमारी अगुवाई की, और हम हजारों विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपना सिर झुका लिया। जब उन्होंने उन लोगों को खड़े होने के लिए कहा जिन्होंने विदेशी मिशनों में सेवा करने की बुलाहट को महसूस किया था, तब मैंने महसूस किया कि मेरी मित्र लिनेट ने यह जानते हुए अपनी कुर्सी छोड़ दी कि वह फिलीपींस में रहकर सेवा करने की प्रतिज्ञा कर रही है। फिर भी मुझे खड़े होने की कोई इच्छा महसूस नहीं हुई। अपने देश की आवश्यकताओं को देखते हुए, मैं अपनी जन्मभूमि में ही रहकर परमेश्वर के प्रेम को बाँटना चाहता था। परन्तु एक दशक बाद, मैने दूसरे देश में परमेश्वर की सेवा करते हुए उन लोगों के बीच अपना घर बनाया जो उसने मेरे पड़ोसियों के रूप में मुझे दिए थे। मैं अपना जीवन कैसे व्यतीत करूँगा, इस बारे में मेरे विचार तब बदल गए जब मुझे इस बात का एहसास हुआ कि परमेश्वर ने मुझे उस अभियान से अलग कार्य के लिए आमंत्रित किया है जिसका मैंने अनुमान लगाया था।

जिन लोगों से यीशु मिलता था उनको अक्सर वह आश्चर्यचकित किया करता था, जिसमें वे मछुआरे भी शामिल थे जिन्हें उसने अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया था। जब मसीह ने उन्हें लोगों को पकड़ने का एक नया मिशन (विशेष कार्य) दिया, तो पतरस और अन्द्रियास “तुरंत” अपना जाल छोड़कर उसके पीछे हो लिए (मत्ती 4:20), और याकूब एवं योना ने भी “तुरंत” अपनी नाव छोड़ दी (पद 22)। वे उस पर भरोसा करते हुए यह न जानते हुए भी कि वे कहाँ जा रहे थे, यीशु के साथ इस नए अभियान पर निकल पड़े।

निःसंदेह, परमेश्वर बहुत से लोगों को अपनी सेवा वहीं पर करने के लिए बुलाता है जहाँ पर वे हैं! चाहे रुकना हो या जाना हो, हम सब उसकी ओर हमें अद्भुत अनुभवों और उसके लिए जीवन व्यतीत करने के अवसरों के साथ आश्चर्यचकित करने की आशा से देख सकते हैं, जिस तरह से हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा।

करुणामय कार्य

गर्भपात से पीड़ित होने के कुछ महीनों के बाद, वैलेरी ने गेराज सेल (विक्रेता के परिसर में आयोजित प्रयुक्त व्यक्तिगत या घरेलू वस्तुओं की बाहरी बिक्री) करने का निर्णय लिया । कुछ मील की दूरी पर रहने वाले उसके एक पड़ोसी शिल्पकार, जेरल्ड ने बड़ी उत्सुकता से उससे बच्चे का वह पालना खरीद लिया जिसे वह बेच रही थी। वहाँ पर बात करते हुए, उसकी पत्नी को वैलेरी के गर्भपात के बारे में मालूम हुआ। घर जाते हुए रास्ते में उसकी स्थिति के बारे में सुनने के बाद, जेरल्ड ने वैलेरी के उस पालने का उपयोग करके उसके लिए एक उपहार बनाने का निर्णय लिया। एक सप्ताह के बाद, उसने आँसुओं के साथ वैलेरी को एक सुंदर बेंच भेंट की। वैलेरी ने कहा कि “संसार में अच्छे लोग भी हैं, और उसका प्रमाण यहाँ पर है।” 

वैलेरी की तरह, रूत और नाओमी को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। नाओमी के पति और दो पुत्रों की मृत्यु हो गई थी। और अब उसके तथा उसकी दुखी बहू रूत के कोई वारिस न थे, और न ही कोई उनका भरण-पोषण करनेवाला था (रूत 1:1-5)। यहीं पर बोअज का आना हुआ। जब रूत बचे हुए अनाज को चुनने के लिए एक खेत में गई, तो खेत के मालिक बोअज ने उसके बारे में पूछा। जब उसे पता चला कि वह कौन है, तो वह उसके प्रति दयालु हुआ (2:5-9)। रूत ने चकित होकर पूछा, “क्या कारण है कि तूने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि करके मेरी सुधि ली है?” (पद 10 ) बोआज़ ने उत्तर दिया कि “जो कुछ तूने पति की मृत्यु के बाद अपनी सास से किया है...यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है।” (पद 11)

बाद में बोअज ने रूत से विवाह किया और नाओमी की देखभाल की (4 अध्याय)। उनके विवाह से, दाऊद और यीशु के एक पूर्वज का जन्म हुआ। जैसे दूसरे के दुःख को बदलने में सहायता करने के लिए परमेश्वर ने जेरल्ड और बोअज को उपयोग किया, वैसे ही वह पीड़ा में पड़े दूसरे लोगों के प्रति करुणा और सहानुभूति प्रकट करने के लिए हमारे माध्यम से भी काम कर सकता है।