परमेश्वर को पुकारना
डॉ. रसेल मूर ने अपनी पुस्तक एडॉप्टेड फॉर लाइफ में एक बच्चे को गोद लेने के लिए अपने परिवार की अनाथालय यात्रा का वर्णन किया है। जैसे ही वे नर्सरी में दाखिल हुए, सन्नाटा चौंका देने वाला था। पालने में रहने वाले बच्चे कभी नहीं रोते थे, और ऐसा इसलिए नहीं था क्योंकि उन्हें कभी किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं होती थी, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्होंने सीख लिया था कि कोई भी इतनी परवाह नहीं करता कि उनके रोने का जवाब दे।
उन शब्दों को पढ़कर मेरा दिल दुख गया। मुझे अनगिनत रातें याद हैं जब हमारे बच्चे छोटे थे। मैं और मेरी पत्नी गहरी नींद में सोये होते थे तभी उनके रोने की आवाज से हमारी नींद खुल जाती : "डैडी, मैं बीमार हूँ!" या "माँ, मुझे डर लग रहा है!" हममें से कोई तुरंत उठता और उन्हें आराम देने और उनकी देखभाल करने की पूरी कोशिश करने के लिए उनके सोने के कमरे में जाता था। अपने बच्चों के प्रति हमारे प्यार ने उन्हें हमारी मदद के लिए पुकारने का कारण दिया।
भजन संहिताों की एक बड़ी संख्या परमेश्वर के लिए पुकार या विलाप है। इस्राएल उसके साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर अपना विलाप उनके पास लाये । ये वे लोग थे जिन्हें परमेश्वर ने अपना "पहिलौठा" कहा था (निर्गमन 4:22) और वे अपने पिता से परिस्थिति के अनुसार कार्य करने के लिए कह रहे थे। भजन संहिता संहिता 25 में ऐसा ईमानदार विश्वास देखा जाता है : "हे यहोवा मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर; क्योंकि मैं अकेला और दीन हूं" (पद.16-17)। जो बच्चे देखभाल करने वाले के प्यार के प्रति आश्वस्त होते हैं वे रोते हैं। यीशु में विश्वासियों के रूप में—परमेश्वर की संतान होने के नाते—उसने हमें उसे पुकारने का कारण दिया है। वह अपने महान प्रेम के कारण सुनता है और परवाह करता है । जॉन ब्लेज़
परमेश्वर का सुरक्षात्मक प्रेम
एक गर्मी की रात, हमारे घर के पास पक्षी अचानक गड़बड़ी और शोर वाली आवाजें करने लगे। उनकी चीख.पुकार तेज हो गई जब गानेवाले पक्षियों ने पेड़ों से भेदने वाली आवाजें करीं । आख़िरकार हमें एहसास हुआ कि ऐसा क्यों हो रहा है। जैसे ही सूरज डूबा, एक बड़े बाज़ ने पेड़ की चोटी से झपट्टा मारा, जिससे पक्षी चीखते हुए तितर-बितर हो गए, और उड़ते हुए उन्होंने खतरे की चेतावनी भी दी।
हमारे जीवनों में, आत्मिक चेतावनियाँ पूरी बाइबल में सुनी जा सकती हैं—उदाहरण के लिए, झूठी शिक्षाओं के प्रति चेतावनियाँ। हमें संदेह हो सकता है कि हम यही सुन रहे हैं। हालाँकि, हमारे प्रति उसके प्रेम के कारण, हमारे स्वर्गीय पिता हमें ऐसे आत्मिक खतरों को स्पष्ट करने के लिए बाइबल की स्पष्टता प्रदान करते हैं।
यीशु ने सिखाया, "झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर में वे फाड़नेवाले भेड़िए हैं" (मत्ती7:15)। उसने आगे कहा, "उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे . . . हर अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है, और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।" फिर उसने हमें चेतावनी दी, "उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे" (पद.16-17; 20)।
नीतिवचन 22:3 हमें याद दिलाता है, "चतुर मनुष्य विपत्ति को आते देखकर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़कर दण्ड भोगते हैं।" ऐसी चेतावनियों में परमेश्वर का सुरक्षात्मक प्रेम निहित है, जो हमारे लिए उसके शब्दों में प्रकट होता है।
जैसे पक्षियों ने एक-दूसरे को शारीरिक खतरे के बारे में चेतावनी दी, क्या हम आत्मिक खतरे से बचने और परमेश्वर की शरण में जाने के लिए बाइबल की चेतावनियों पर ध्यान दे सकते हैं। पैट्रिशिया रेबॉन
पैरों का धोना . . . और बर्तन
चार्ली और जेन की शादी की पचासवीं सालगिरह पर, उन्होंने अपने बेटे जोन के साथ एक कैफे में नाश्ता किया। उस दिन, रेस्तरां में बहुत कम कर्मचारी थे, केवल एक प्रबंधक, रसोइया और एक किशोर लड़की थी जो परिचारिका, महिला वेटर और वेटर के सहायक के रूप में काम कर रही थी। जैसे ही उन्होंने अपना नाश्ता ख़त्म किया, चार्ली ने अपनी पत्नी और बेटे से कहा, "क्या अगले कुछ घंटों में आपके लिए कोई महत्वपूर्ण काम है?" उनके पास कुछ भी नहीं था l
इसलिए, मैनेजर की अनुमति से, चार्ली और जेन ने रेस्तरां के पीछे बर्तन धोना शुरू कर दिया, जबकि जोन ने अव्यवस्थित टेबलों को साफ करना शुरू कर दिया। जोन के अनुसार, उस दिन जो हुआ वह वास्तव में उतना असामान्य नहीं था। उनके माता-पिता ने हमेशा यीशु का उदाहरण पेश किया था जो "सेवा कराने नहीं, बल्कि सेवा करने आए था" (मरकुस 10:45)।
यूहन्ना 13 में, हम मसीह द्वारा अपने शिष्यों के साथ साझा किये गये अंतिम भोजन के बारे में पढ़ते हैं। उस रात, गुरु ने उनके गंदे पैर धोकर उन्हें विनम्र सेवा का सिद्धांत सिखाया (पद.14-15)। यदि वह एक दर्जन पुरुषों के पैर धोने का नीचा काम करने को तैयार था, तो उन्हें भी खुशी-खुशी दूसरों की सेवा करनी चाहिए।
हमारे सामने आने वाली सेवा का प्रत्येक मार्ग अलग-अलग दिख सकता है, लेकिन एक बात समान है : सेवा करने में बहुत आनंद है। सेवा के कार्यों के पीछे का उद्देश्य उनको करनेवालों की प्रशंसा करना नहीं है, बल्कि सारी स्तुति हमारे विनम्र, आत्म-त्यागी परमेश्वर की ओर निर्देशित करते हुए प्रेमपूर्वक दूसरों की सेवा करना है । सिंडी हेस कैस्पर
परमेश्वर के पीछे चलने का चुनाव
एक ब्रिटिश अखबार का दावा है, "औसत व्यक्ति अपने जीवनकाल में 7,73,618 निर्णय लेगा," आगे उनका दृढ़ता से कहना है कि हमें "उनमें से 1,43,262 पर पछतावा होगा।" मुझे नहीं पता कि अख़बार इन संख्याओं तक कैसे पहुंचा, लेकिन यह स्पष्ट है कि हम अपने पूरे जीवनकाल में अनगिनत निर्णयों का सामना करते हैं। उनकी वास्तविक मात्रा हमें पंगु बना सकती है, खासकर जब हम मानते हैं कि हमारे सभी विकल्पों के परिणाम होते हैं, कुछ दूसरों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
चालीस वर्षों तक जंगल में भटकने के बाद, इस्राएल के लोग अपनी नई मातृभूमि की दहलीज(threshold) पर खड़े थे। बाद में, देश में प्रवेश करने के बाद, उनके अगुवे यहोशू ने उन्हें एक चुनौतीपूर्ण विकल्प दिया : "यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा . . . करते थे, उन्हें दूर करके यहोवा की सेवा करो" (यहोशू 24:14)। यहोशू ने उनसे कहा, "यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे . . . परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा" (पद.15) ।
जैसे-जैसे हम प्रत्येक नए दिन की शुरुआत करते हैं, संभावनाएं हमारे सामने बढ़ती हैं, जिससे अनेक निर्णय लेने पड़ते हैं, जो अनेक निर्णयों की ओर अग्रसर होते हैं ।परमेश्वर से हमारा मार्गदर्शन करने के लिए समय निकालने से हमारे द्वारा चुने गए विकल्पों पर प्रभाव पड़ेगा। आत्मा की शक्ति से, हम हर दिन उसका अनुसरण करना चुन सकते हैं। बिल क्राउडर
गुरुत्वाकर्षण पहाड़ी
रहस्यों को समझना एक ऐसी चीज़ है जो कई लोगों को आकर्षित करती है, जिनमें मैं भी शामिल हूँ। ऐसा ही एक रहस्य है लेह, लद्दाख के पास एक पहाड़ी जिस पर वाहन नीचे की ओर जाने के बजाय अपने आप ऊपर की ओर लुढ़कते हैं। लोकप्रिय रूप से “ग्रेविटी हिल” के नाम से प्रसिद्ध, लोगों का मानना है कि यह एक दृष्टिभ्रम हो सकता है, या पहाड़ी में एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र हो सकता है या यह कि परिदृश्य एक मानसिक धोखा है। कारण जो भी हो, एक बात तो तय है, यह घटना गुरुत्वाकर्षण के नियमों के विरुद्ध प्रतीत होती है——यह एक रहस्य है।
प्रेरित पौलुस, जो अपने समय का एक प्रसिद्ध विद्वान था, के पास अपने श्रेष्ठ ज्ञान, बुद्धि और शैक्षणिक प्रतिष्ठा पर घमंड करने का हर कारण था (पद.1-2)। फिर भी वह डरते और कांपते हुए कुरिन्थियों के पास गया क्योंकि वह जिस “रहस्य” का साक्षी था वह उसकी बौद्धिक क्षमता से कहीं अधिक था। यह “रहस्य” मानवजाति को पाप से छुड़ाने के लिए परमेश्वर की अपरिमेय योजना है, और यह उसके पुत्र, यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा प्रकट हुयी। इसका प्रबंध करने में परमेश्वर की बुद्धि एक रहस्य है जिसे केवल पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से ही समझा जा सकता है (पद.5-10)।
जब हम मसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करते हैं, तो हम इस महान “रहस्य” का हिस्सा बन जाते हैं, जिसे परमेश्वर ने हमारे अंदर स्थापित किया है। परमेश्वर की बुद्धि किसी भी सांसारिक बुद्धि से महान है, और पवित्र आत्मा के द्वारा यह हमारे लिए उपलब्ध है। जीवन के चौराहे पर, जब हम परिवार, मित्रों या साथियों की बुद्धि पर निर्भर होने के लिए लुभाए जाते हैं, तो हमें सभी बुद्धि के अंतिम स्रोत——पवित्र आत्मा (कुलुस्सियों 1:9) का उपयोग करना ही चाहिए l क्योंकि जब मनुष्य की बुद्धि अच्छी है, तो परमेश्वर की बुद्धि उससे भी बेहतर है, और उसकी उपस्थिति हमेशा हमारे साथ रहती है।
रेबेका विजयन
अत्यधिक अतिप्रवाह
स्कूल में, हमारे तमिल शिक्षकों ने हमारे लिए पोंगल नामक एक तमिल त्यौहार के सांस्कृतिक उत्सव का अनुभव करने का आयोजन किया, जिसे अन्य स्थानों पर लोहरी और मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने एक पारंपरिक चूल्हा स्थापित किया, छोटी लकड़ियाँ जलाईं और उस पर चावल, चीनी और दूध से भरा एक मिट्टी का बर्तन रखा। हम चकित होकर देखते रहे और बर्तन की सामग्री के उबलने पर चिल्लाते रहे। हममें से प्रत्येक ने थोड़ा पोंगल खाने के बाद, हम कक्षा में वापस चले गए। तमिल संस्कृति में, 'पोंगल'जिसका अर्थ है 'अतिप्रवाह' फसल की प्रचुरता का प्रतीक है।
यूहन्ना 7 एक यहूदी त्यौहार के बारे में बात करता है जिसे झोपड़ियों का पर्व कहा जाता है। इस पर्व के अंतिम दिन, यीशु खड़े होकर ऊंची आवाज़ में बोला, "यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आए और पीए" (पद.37)। उसने प्रतिज्ञा की कि जो कोई भी उस पर विश्वास करेगा, उसके "हृदय में से" "जीवन के जल की नदियाँ" बह निकलेंगी (पद.38)। लेखक यूहन्ना कहता है कि यीशु जिस अतिप्रवाह का उल्लेख कर रहा था, वह प्रतिज्ञा किया गया पवित्र आत्मा है जिसे बाद में सभी पर उंडेला जाएगा (पद.39)। यीशु के मरने, पुनरुत्थित होने और स्वर्गारोहण के बाद, उसने एक अन्य त्योहार, पिन्तेकुस्त के दिन, के दौरान इस वादे को पूरा किया (प्रेरितों के काम 2:1)। आत्मा से भरपूर होकर, उसके शिष्यों ने विभिन्न भाषाओं में सुसमाचार का प्रचार किया, अपने संसाधनों को स्वेच्छा से साझा किया और एक देखभाल करने वाला समुदाय बन गए (प्रेरितों के काम 2:3,52)।
यीशु ने हमें अपनी आत्मा दी है ताकि हम अपने भीतर की अपनी आध्यात्मिक प्यास बुझा सकें (यूहन्ना 7:38-39)। आत्मा हमें उत्साहित करता है, हमें शांति और आनंद देता है, और हमें भरपूर मात्रा में भर देता है (पद.38)। और जैसे-जैसे हम भरते हैं, हम दूसरों को भी भरने के लिए भरपूर मात्रा में अतिप्रवाहित होते हैं। ऍन हरिकीर्तन
परमेश्वर पर केन्द्रित दृष्
उन्नीसवीं सदी के स्कॉटिश पास्टर थॉमस चामर् ने एक बार पहाड़ी क्षेत्र में घोड़ा गाड़ी में सवारी करने की कहानी सुनाई थी, जो एक डरावनी खड़ी चट्टान के साथ एक संकीर्ण पहाड़ी के कगार से जुड़ी हुई थी। दोनों घोड़ों में से एक घोड़ा चौंक गया था, गाड़ी हांकने वाले को यह डर था कि कहीं वे (घोड़े) घबरा कर गिरकर मर न जाएँ, वह बार-बार अपना चाबुक चलाता रहा। ख़तरे को पार कर लेने के बाद चामर् ने गाड़ी हांकने वाले से पूछा कि उसने इतने ज़ोर से चाबुक का इस्तेमाल क्यों किया। उसने कहा, "मुझे घोड़ों को सोचने के लिए कुछ और देने की ज़रूरत थी।" "मुझे उनका ध्यान अपनी ओर खींचने की ज़रूरत थी।"
हमारे चारों ओर आशंकाओं और खतरों से भरी दुनिया में, हम सभी को अपना ध्यान केन्द्रित करने के लिए किसी और चीज़ की आवश्यकता है। हालाँकि, हमें केवल मानसिक विकर्षण से कहीं अधिक की आवश्यकता है -- एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक तरकीब। हमें जिस चीज़ की सबसे अधिक आवश्यकता है, वह यह है कि अपने दिमाग को अपने सभी प्रकार के भय से अधिक शक्तिशाली वास्तविकता पर केंद्रित करना। जैसा कि यशायाह ने यहूदिया में परमेश्वर के लोगों से कहा, हमें वास्तव में अपने मन को परमेश्वर पर केंद्रित करने की आवश्यकता है। यशायाह वादा करता है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है (यशायाह 26:3)। और हम प्रभु पर सदैव भरोसा रख सकते हैं, क्योंकि "प्रभु परमेश्वर सनातन चट्टान है" (पद-4)।
शांति—यह उन सभी के लिए उपहार है जो अपनी दृष्टी परमेश्वर पर केंद्रित करते हैं। और उनकी शांति हमारे बुरे विचारों को दूर रखने की एक तकनीक से कहीं अधिक प्रदान करती है। जो लोग अपने भविष्य, अपनी आशाओं और अपनी चिंताओं को त्याग देंगे, उनके लिए पवित्र आत्मा जीवन जीने का एक बिल्कुल नया तरीका संभव बनाता है। विन्न कोलियर
यीशु में दृढ़ रहना
जब मैं वर्षों पहले सेमिनरी में पढ़ रहा था, तो हमारे यहां साप्ताहिक चैपल आराधना सभा होती थी। एक सभा में, जब हम छात्र " कितना महान, कितना महान" गा रहे थे, तो मैंने अपने तीन प्रिय प्रोफेसरों को उत्साह के साथ गाते हुए देखा। उनके चेहरों पर खुशी झलक रही थी, जो परमेश्वर में उनके विश्वास से ही संभव हुआ। वर्षों बाद, जब हर एक जानलेवा बीमारी से गुज़रा, यह विश्वास ही था जिसने उन्हें सहन करने और दूसरों को प्रोत्साहित करने में सक्षम बनाया।
आज, मेरे शिक्षकों के गायन की याद मुझे मेरी आजमाइशों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती है। मेरे लिए, वे उन लोगों की कई प्रेरक कहानियों में से कुछ हैं जो विश्वास के आधार पर जीते थे। वे इस बात की याद दिलाते हैं कि हम इब्रानियों 12:2-3 में लेखक के आह्वान का पालन कैसे कर सकते हैं ताकि हम अपनी आँखें यीशु पर केंद्रित कर सकें जो "जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था . . . क्रूस का दुख सहा"(पद.2)।
जब आजमाइशें—अत्याचार या जीवन की चुनौतियों से—चलते रहना कठिन हो जाता है, तो हमारे पास उन लोगों का उदाहरण है जिन्होंने परमेश्वर के वचनों पर और उसके वादों पर विश्वास किया । हम "वह दौड़ जिसमें हमें दौड़ना है धीरज से [दौड़ सकते हैं]" (पद.1), यह याद करते हुए कि यीशु—और जो हमसे पहले चले गए हैं—सहन करने में सक्षम थे। लेखक हमसे "उस पर ध्यान करने" का आग्रह करता है . . . ताकि [हम]निराश होकर हियाव न छोड़ दें"(पद.3)।
मेरे शिक्षक, जो अब स्वर्ग में खुश हैं, संभवतः कहेंगे : "विश्वास का जीवन इसके लायक है। चलते रहिये।" करेन ह्वांग
परमेश्वर का कार्यकर्ता
मध्य पूर्व के एक शरणार्थी शिविर में, जब रेज़ा को बाइबल मिली, तो उसे यीशु के बारे में पता चला और वह उस पर विश्वास करने लगा। मसीह के नाम में उसकी पहली प्रार्थना थी, "मुझे अपने कार्यकर्ता के रूप में उपयोग करें।" बाद में, शिविर छोड़ने के पश्चात्, परमेश्वर ने उस प्रार्थना का जवाब दिया जब उसे अचानक से एक राहत एजेंसी में नौकरी मिल गई, और वह उन लोगों की सेवा करने के लिए शिविर में लौट आया जिन्हें वह जानता था और प्यार करता था। उसने खेल-कूद क्लब, भाषा कक्षाएं और कानूनी परामर्श की स्थापना की—"कुछ भी जो लोगों को आशा दे सकता है।" वह इन कार्यक्रमों को दूसरों की सेवा करने और परमेश्वर के ज्ञान और प्रेम को साझा करने के एक तरीके के रूप में देखता है।
अपनी बाइबल पढ़ते समय, रेज़ा को उत्पत्ति से यूसुफ की कहानी के साथ तत्काल संबंध महसूस हुआ। उसने देखा कि जब वह जेल में था तब परमेश्वर ने अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए यूसुफ का उपयोग कैसे किया। चूँकि परमेश्वर यूसुफ के साथ था, उसने उस पर दया की और उस पर अनुग्रह किया। जेल प्रबंधक ने यूसुफ को प्रभारी बना दिया और उसे वहां के मामलों पर ध्यान नहीं देना पड़ा क्योंकि परमेश्वर ने यूसुफ को "जो कुछ वह करता था . . . उस में सफलता देता था।" (उत्पत्ति 39:23)।
परमेश्वर भी हमारे साथ रहने का वादा करता है l चाहे हम कारावास का सामना कर रहे हों— शाब्दिक या आलंकारिक—कठिनाई, विस्थापन, मनोव्यथा, या दुःख, हम भरोसा कर सकते हैं कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा। जिस तरह उसने रेज़ा को शिविर में लोगों की सेवा करने और यूसुफ को जेल में उत्तरदायित्व निभाने में सक्षम बनाया l वह हमेशा हमारे पास रहेगा। एमी बूशर पाई