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बहत सुन्दर

मैं बहुत छोटा था जब मैं एक हॉस्पिटल की नर्सरी(छोटे बच्चों के लिए बनाया गया स्थान) की खिड़की से झांककर पहली बार एक नवजात शिशु को देखा l अपनी अज्ञानता में, मैं उस नन्हे, झुर्रीदार,बिना बाल के, शंख के आकार के सिर वाले उस छोटे बच्चे को देखकर निराश हो गया था l हालाँकि, हमारे पास खड़ी बच्चे की माँ, सभी से पूछना बंद न कर सकी, “वह कितना खुबसूरत है न?” मुझे वह पल याद आ गया जब मैंने एक युवा पिता को अपनी बच्ची के लिए “तुम बहुत सुन्दर हो(यू आर सो बीयूटिफ़ुल/ You Are So Beautiful)” गीत गाते हुए एक विडिओ देखा l अपने भावविभोर डैडी के लिए—वह नन्ही बच्ची अब तक की रची गई सबसे खुबसूरत चीज़ थी l 

क्या परमेश्वर भी हमें इसी तरह देखता है? इफिसियों 2:10 कहता है कि हम उसके “बनाए हुए हैं”—उसकी श्रेष्ठ रचना l अपनी असफलताओं से अवगत, हमारे लिए यह स्वीकार करना कठिन हो सकता है कि वह हमसे कितना प्रेम करता है या यह विश्वास करना कि हम भी कभी उसके लिए मूल्यवान हो सकते हैं l परन्तु परमेश्वर हमसे इसलिए प्रेम नहीं करता क्योंकि हम उसके प्रेम के योग्य हैं (पद.3-4); वह हम से इसलिए प्रेम करता है क्योंकि वह स्वयं प्रेम है (1 यूहन्ना 4:8) l उसका प्रेम अनुग्रह का कारण है, और उसने इसकी गहराई को तब दिखाया जब, यीशु के बलिदान के द्वारा, उसने हमें उसमें जीवित किया जब हम अपने पापों में मरे हुए थे (इफिसियों 2:5,8) l 

परमेश्वर का प्रेम अस्थिर नहीं है l यह निरंतर/स्थायी है l वह दोषियों को, टूटे हुओं को, जो निर्बल हैं और वह जो गड़बड़ी/भारी भूल कर देते हैं उनसे भी प्रेम करता है l जब हम गिरते हैं, वह हमें उठाने के लिए वहां उपस्थित है l हम उसकी निधि हैं, और हम उसके लिए अति सुन्दर हैं l 

आशीषमय पश्चाताप

“दिवालिया ”(BROKE) उस सड़क का नाम था” ग्रेडी ने उत्तर दिया था, और वे पांच अक्षर उसके लाइसेंस प्लेट पर गर्व से चमक रहे थे l हालाँकि आत्मिक भाव के इरादे से नहीं, यह मुँह बोला नाम अधेड़ उम्र के जुआरी, व्यभिचारी और धोखेबाज के लिए उपयुक्त है l वह टूट गया था, दिवालिया हो गया था, और परमेश्वर से दूर था l हालाँकि, एक शाम वह सब बदल गया जब उसे एक होटल के कमरे में परमेश्वर की आत्मा द्वारा दोषी ठहराया गया l उसने अपनी पत्नी से कहा, : “मुझे लगता है की मुझे उद्धार मिल रहा है!” उस शाम वह यीशु के पास क्षमा के लिए आया उसने अपने पापों को स्वीकार किया, जिसके विषय में उसने सोचा था कि वह उन्हें अपने साथ कब्र में ले जाएगाl अगले तीस वर्षों तक जिस व्यक्ति ने यह नहीं सोचा था कि वह स्वयं चालीस की उम्र देखने तक जीवित रहेगा उसने जीवित रहकर यीशु में परिवर्तित विश्वासी के रूप में परमेश्वर की सेवा की l उसकी लाइसेंस प्लेट अब—“दिवालिया”(BROKE) से “पश्चाताप” (REPENT)—में बदल गया थीl 

 REPENT(पश्चाताप) l यही तो ग्रेडी ने किया था और होशे 14:1-2 में परमेश्वर ने इस्राएल से यही करने को बुलाया था l “हे इस्राएल, अपने परमेश्वर यहोवा के पास लौट आ . . . बातें सीखकर और यहोवा की ओर लौटकर, उससे कह, ‘सब अधर्म दूर कर; अनुग्रह से हम को ग्रहण कर’ l” बड़े या छोटे, कम या अधिक, हमारे पाप हमें परमेश्वर से अलग कर देते हैं l लेकिन पाप से परमेश्वर की ओर मुड़ने और यीशु की मृत्यु के माध्यम से  अनुग्रहपूर्वक प्रदान की गयी क्षमा को प्राप्त करने से यह फासला खत्म किया जा सकता है l चाहे आप मसीह में एक संघर्षरत विश्वासी हों या फिर जिसका जीवन ग्रेडी की तरह दिखाई देता हो, आपकी क्षमा केवल एक प्रार्थना की दूरी पर है l 

स्थायी आशा

डॉक्टरों ने चार वर्षीय सोलोमन का ड्यूकेन मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (Duchenne Muscular Dystrophy) मांशपेशियों का कमज़ोर व पतली होने की बीमारी के साथ निदान किया l एक साल बाद, डॉक्टरों ने परिवार के साथ व्हीलचेयर के सम्बन्ध में चर्चा की l लेकिन सोलोमन ने विरोध किया कि उसे इसकी ज़रूरत नही पड़ेगी l परिवार और मित्रों ने उसके लिए प्रार्थना की और एक पेशवर प्रशिक्षित सेवा कुत्ते (प्रोफेशनलली ट्रेन्ड सर्विस डॉग/ professionally trained service dog) के लिए धन जुटाया ताकि यथासंभव लम्बे समय तक सोलोमन को व्हीलचेयर से बाहर रखने में सहायता मिल सके l टेल्स of लाइफ(Tails of Life) संगठन, जिसने मेरे कुत्ते कैली को प्रशिक्षित किया था वर्तमान में एक और कुत्ते को सोलोमन की सेवा करने के लिए तैयार कर रहा है l 

यद्यपि सोलोमन अपने इलाज को स्वीकार करता है, अक्सर परमेश्वर की प्रशंसा में एक गीत गाता है, कुछ दिन कठिन भी होते हैं l उन कठिन दिनों में से एक में, सोलोमन ने अपनी माँ को गले लगाकर बोला, “मुझे ख़ुशी है कि स्वर्ग में कोई ड्यूकेन बीमारी नहीं है l”

बीमारी के अपक्षयी प्रभाव अनंतकाल के इस पक्ष के सभी लोगों को प्रभावित करते हैं l लेकिन, सोलोमन की तरह, हमारे पास एक स्थायी आशा है जो उन अपरिहार्य कठिन दिनों में हमारे संकल्प को मजबूत कर सकती है l परमेश्वर हमें “नया आकाश और नयी पृथ्वी” की प्रतिज्ञा देता है (प्रकाशितवाक्य 21:1) l हमारा सृष्टिकर्ता हमारे साथ अपना घर बनाकर हमारे बीच में “निवास” करेगा (पद.3) l वह हमारी आँखों से “सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी” (पद.4) l जब प्रतीक्षा “बहुत कठिन” या “बहुत लम्बी” लगती हो हम शांति का अनुभव कर सकते हैं क्यंकि परमेश्वर की प्रतिज्ञा पूरी होगी l 

आशा और लालसा

जब मैं इंग्लैंड में रहने लगी, तो नवम्बर के महीने में थैंक्सगिविंग (Thanksgiving day/कृतज्ञता दिवस) का अमरीकी अवकाश सप्ताह का एक और गुरुवार के समान बन गया l बहरहाल,मैंने सप्ताह के अंत में एक दावत आयोजित की थी क्योंकि मैं उस दिन परिवार और दोस्तों के साथ रहना चाहती थी l हालांकि मैं समझ थी कि मेरी अभिलाषा अनोखी नहीं थी l हम सभी विशेष अवसरों और छुट्टियों पर अपने प्रिय लोगों के साथ रहना चाहते हैं l और जब हम जश्न मना रहे होते हैं, तब भी हम किसी ऐसे व्यक्ति को याद कर सकते हैं जो हमारे साथ नहीं है या हम प्रार्थना करते हैं कि हमारा खंडित परिवार शांति से रहे l 

ऐसे समय के दौरान, प्रार्थना करने और बाइबल की बुद्धि पर मनन करने से मुझे मदद मिली है, जिसमें राजा सुलेमान का एक नीतिवचन भी शामिल है : “जब आशा पूरी होने में विलम्ब होता है, तो मन शिथिल होता है, परन्तु जब लालसा पूरी होती है, तब जीवन का वृक्ष लगता है” (नीतिवचन 13:12) l इस नीतिवचन में, सुलेमान अपने ज्ञान को सपष्टता से साझा करते हुए टिप्पणी करता है कि “आशा टलने” से हो सकता है: किसी चीज़ में  बहुत अधिक विलम्ब होने के कारण अत्यधिक घबराहट और पीड़ा हो सकती है l लेकिन जब इच्छा पूरी हो जाती है, तो यह जीवन के वृक्ष की तरह होती है—कुछ ऐसा जो हमें तरोताज़ा और नए सिरे से महसूस करने की अनुमति देता है l 

हो सकता है कि हमारी कुछ आशाएं और इच्छाएँ तुरंत पूरी न हों, और कुछ हमारे मरने के बाद परमेश्वर द्वारा पूरी होंगी l हमारी जो भी अभिलाषा हो, हम परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं, यह जानते हुए कि वह हमसे असीम प्रेम करता है l और,एक दिन, जब हम अपने प्रियजनों के साथ फिर से मिल जाएंगे तब हम उसके साथ भोज करते हुए उसे धन्यवाद दे सकते हैI (देखें प्रकाशितवाक्य 19:6-9) 

परमेश्वर को अपना भविष्य सौंपना

2010 में, लाज़लो हान्याज़(Laszlo Hanyecz) ने बिटकॉइन के साथ पहली खरीददारी की (एक डिजिटल मुद्रा जो तब एक पैसे के एक अंश के बराबर मूल्य की थी), दो पिज़्ज़ा के लिए 10,000 बिटकॉइन का भुगतान किया ($25 – तब लगभग 1,125 रुपये थे) l 2021 में, वर्ष के दौरान अपने उच्चतम मूल्य पर, उन बिटकॉइन की कीमत (लगभग 3,900 करोड़ रुपये) से अधिक होती l मूल्य के आसमान छूने से पहले, वह सिक्कों के साथ पिज़्ज़ा के लिए भुगतान करता रहा, उसने कुल 100,000 बिटकॉइन खर्च कियेl यदि वह उन बिटकॉइन को रखा होता, तो उनका मूल्य उसे अड़सठ गुना से अधिक मिला होता जो उसे अरबपति बना देता और उसे फ़ोर्ब्स की “दुनिया के सबसे अमीर लोगों” की सूची में डाल देता l यदि केवल उसे पता होता कि भविष्य में क्या आ रहा है l 

बेशक, होन्याज़ संभवतः नहीं जान सकता था l हममें से कोई नहीं जान सकता था l भविष्य को समझने और नियंत्रित करने के हमारे प्रयासों के बावजूद, सभोपदेशक सच कहता है : “कोई मनुष्य नहीं जानता कि क्या होगा l (सभोपदेशक 10:14) l हममें से कुछ लोग खुद को यह सोचकर भ्रमित करते हैं कि हमें जितना जानना चाहिए हैं उससे अधिक जानते हैं, या इससे भी बदतर, कि हमारे पास किसी अन्य व्यक्ति के जीवन या भविष्य के बारे में कुछ विशेष अंतर्दृष्टि है l लेकिन जैसा सभोपदेशक स्पष्ट रूप से पूछता है : “कौन बता सकता है कि उसके बाद क्या होनेवाला है?” (पद.14) l कोई नहीं l 

बाइबल एक बुद्धिमान और मूर्ख व्यक्ति की तुलना करती है, और दोनों के बीच कई विशिष्टताओं में से एक भविष्य के बारे में दीनता है (नीतिवचन 27:1) l एक बुद्धिमान व्यक्ति यह पहचानता है कि केवल परमेश्वर ही वास्तव में जानता है कि क्षितिज के पार क्या है जब वे निर्णय लेते हैं l लेकिन मूर्ख लोग उस ज्ञान का अनुमान लगाते हैं जो उनका है ही नहीं l हमें बुद्धि होनी चाहिए, कि हम अपना भविष्य उसे सौंप दें जो वास्तव में इसे जानता है l