
कर्म द्वारा विश्वास प्रकट करना
2021 में जून की एक शाम को एक चक्रवात ने एक समुदाय में से होकर गुज़रते हुए, एक परिवार के खलिहान को नष्ट कर दिया l यह एक दुखद हानि थी क्योंकि 1800 के दशक के उत्तरार्ध से खलिहान पारिवारिक संपत्ति थी l जब जॉन और उसकी पत्नी गाड़ी से उसी रास्ते चर्च जा रहे थे, तो उन्होंने वहाँ हुए नुक्सान को देखा और सोचा कि वे कैसे सहायता कर सकते हैं l इसलिए वे ठहर गए और जब उन्हें पता चला कि परिवार को सफाई में मदद की जरुरत है l वे अपनी कार को तेजी से घुमाते हुए,कपड़े बदलने के लिए घर चले गए और लौट कर प्रचंड हवाओं द्वारा उत्पन्न गंदगी को साफ़ करने के लिए दिन भर रुके l उन्होंने उस परिवार की सेवा करते हुए अपने विश्वास को अमल में लाया l
याकूब ने कहा कि “विश्वास भी कर्म बिना मरा हुआ है” (याकूब 2:26) l वह अब्राहम का उदाहरण देता है, जिसने आज्ञाकारिता में परमेश्वर का अनुसरण किया जब वह नहीं जानता था कि वह कहाँ जा रहा है (पद..23; देखें उत्पत्ति 12:1-4; 15:6; इब्रानियों 11:8) l याकूब ने राहाब का भी उल्लेख किया, जिसने इस्राएल के परमेश्वर में अपना विश्वास दिखाया जब उसने उन भेदियों को छिपा दिया जो यरीहो शहर की पड़ताल करने आए थे (याकूब 2:25; यहोशु 2;6:17 देखें l
“यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो इससे क्या लाभ?” (याकूब 2:14) l मैथ्यू हेनरी टिप्पणी करता है, “विश्वास जड़ है, तो अच्छे काम फल हैं, और हमें यह देखना चाहिए कि हमारे पास दोनों हो l” परमेश्वर को हमारे अच्छे कर्मों की आवश्यकता नहीं है,लेकिन हमारा विश्वास हमारे कार्यों से सिद्ध होता है l

पीछे की ओर से पढ़ना
एक रहस्यमय उपन्यास के अंतिम अध्याय को पहले पढ़ना उन लोगों के लिए एक बुरे विचार की तरह लग सकता है जो एक अच्छी कहानी के रहस्य को पसंद करते हैं l लेकिन कुछ लोगों को पुस्तक पढ़ने में अधिक आनंद आता है अगर वे जानते हैं कि इसका अंत कैसे होता है l
रीडिंग बैकवर्ड्स(Reading Backwards) पुस्तक में, लेखक रिचर्ड हेज़ बताते हैं कि हमारी समझ के लिए यह अभ्यास कितना महत्वपूर्ण है l यह बताते हुए कि कैसे पवित्रशास्त्र के खुलनेवाले शब्द और घटनाएं बताती हैं, प्रतिध्वनित होती हैं, और एक दूसरे पर प्रकाश डालती हैं, प्रोफ़ेसर हेज़ हमें अपनी बाइबल को आगे और पीछे पढ़ने का कारण देते हैं l
हेज़ पाठकों को स्मरण कराते हैं कि यीशु के पुनरुत्थान के बाद ही उनके शिष्यों ने तीन दिनों में एक विध्वस्त मंदिर के पुनर्निर्माण के उसके दावे को समझा l प्रेरित यूहन्ना हमें बताता है, “मंदिर जिसकी चर्चा उसने की थी वह उसकी देह थी” (यूहन्ना 2:21) l केवल तभी वे अपने फसह के पर्व का अर्थ समझ सकते थे जिसे पहले कभी नहीं समझा गया था (देखें मत्ती:26:17-29) l केवल पुनरवलोकन में ही वे इस बात पर विचार कर सकते थे कि कैसे यीशु ने परमेश्वर के मंदिर के लिए एक प्राचीन राजा की गहरी भावनाओं को अर्थ की परिपूर्णता दी (भजन 69:9; यूहन्ना 2:16-17) l केवल परमेश्वर के सच्चे मंदिर (स्वयं यीशु) के प्रकाश में अपने धर्मग्रंथों को फिर से पढ़ने से ही शिष्य समझ सकते थे कि कैसे इस्राएल के धर्म की क्रियापद्धति और मसीह(Messiah एक दूसरे पर प्रकाश डालेंगे l
और अब, केवल उन्हीं शास्त्रों को पीछे और आगे पढ़कर, हम यीशु में वह सब कुछ देख सकते हैं जिसकी हममें से किसी को कभी आवश्यकता या लालसा थी l

सुकराती क्लब
1941 में, इंग्लैंड के ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में सुकराती क्लब की स्थापना हुयी l इसका गठन यीशु के विश्वासियों और नास्तिकों या अज्ञेयवादियों(agnostics) के बीच वाद-विवाद(debate) को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया था l
एक धर्मनिरपेक्ष विश्वविद्यालय में धार्मिक बहस असामान्य नहीं है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पन्द्रह वर्षों तक सुकराती क्लब की अध्यक्षता किसने की— वह थे महान मसीही विद्वान सी.एस.लियुईस l अपनी सोच की जाँच लेने के इच्छुक, लियुईस का मानना था कि मसीह में विश्वास बड़ी जाँच के लिए खड़ा हो सकता था l वह जानते थे कि यीशु में विश्वास करने के लिए विश्वसनीय, तर्कसंगत प्रमाण हैं l
एक मायने में, लियुईस पतरस की उस सलाह का अभ्यास कर रहे थे जो सताव से बिखरे हुए विश्वासियों के लिए थी, जब उसने उन्हें याद दिलाया, “मसीह को प्रभु जानकार अपने अपने मन में पवित्र समझो l जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, उसे उत्तर देने के लिए सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ” (1 पतरस 3:15) l पतरस दो मुख्य बिंदु पेश करते है : हमारे पास मसीह में हमारी आशा के लिए अच्छे कारण हैं और हमें अपने तर्क को “नम्रता और भय” के साथ प्रस्तुत करना है l
मसीह पर विश्वास करना धार्मिक पलायनवाद(escapism) या ख्याली पुलाव(wishful thinking) नहीं है l हमारा विश्वास इतिहास के तथ्यों पर आधारित है, जिसमें यीशु का पुनरुत्थान और सृष्टिकर्ता की साक्षी देने वाली सृष्टि के प्रमाण सम्मिलित हैं l जब हम परमेश्वर की बुद्धि और आत्मा की शक्ति में विश्राम करते हैं, तो हम उन कारणों को साझा करने के लिए तैयार हो सकते हैं जो हमारे पास हमारे महान परमेश्वर पर भरोसा करने के लिए हैं l

परमेश्वर आपको जानता है
ऐसा प्रतीत होता है कि मेरी माँ परेशानी को एक मील दूर से भाप लेती है l एक दिन स्कूल में एक कठिन दिन के बाद, मैं अपनी हताशा को छिपाने का प्रयास किया कि किसी का ध्यान मुझ पर नहीं जायेगा l “बात क्या है?” उन्होंने पूछा l फिर आगे बोली, “इससे पहले कि तुम मुझे यह बताओ कि कुछ नहीं है, याद रखो कि मैं तुम्हारी माँ हूँ l मैंने तुम्हें जन्म दिया है, और जितना तुम खुद को जानते हो उसकी तुलना में मैं तुम्हें तुमसे बेहतर जानती हूँl” मेरी माँ ने मुझे निरंतर स्मरण दिलाया है कि उनकी इस गहरी जागरूकता ने कि मैं कौन हूँ उनको उन क्षणों में जहाँ मुझे उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है उन्हें वहां रहने में मदद करता है l
यीशु में विश्वासी होने के कारण, हम एक ऐसे परमेश्वर द्वारा देखभाल किये जाते हैं जो बहुत निकटता से हमें जानता है l भजनकार दाऊद परमेश्वर की संतानों के जीवनों के प्रति उसकी परवाह के लिए उसकी प्रशंसा करता है, “हे यहोवा, तू ने मुझे जाँचकर जान लिया है l तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है” (भजन 139:1-2) l इसलिए कि परमेश्वर जानता है कि हम कौन हैं—हमारे हर एक विचार, इच्छा, और कार्य—ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ हम जा सकते हैं जहाँ हम उसके अत्यधिक प्रेम और देखभाल की सीमा से बाहर है (पद.7-12) l जैसे कि दाऊद लिखता है, “यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़कर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा” (पद.9-10) l हम यह जानने में आराम पाते हैं कि जीवन में हम कहीं भी रहें, जब हम प्रार्थना में परमेश्वर को पुकारते हैं, वह हमें प्रेम, बुद्धि, और मार्गदर्शन देता है जो हमारी ज़रूरत है l
