परमेश्वर आपको जानता है
ऐसा प्रतीत होता है कि मेरी माँ परेशानी को एक मील दूर से भाप लेती है l एक दिन स्कूल में एक कठिन दिन के बाद, मैं अपनी हताशा को छिपाने का प्रयास किया कि किसी का ध्यान मुझ पर नहीं जायेगा l “बात क्या है?” उन्होंने पूछा l फिर आगे बोली, “इससे पहले कि तुम मुझे यह बताओ कि कुछ नहीं है, याद रखो कि मैं तुम्हारी माँ हूँ l मैंने तुम्हें जन्म दिया है, और जितना तुम खुद को जानते हो उसकी तुलना में मैं तुम्हें तुमसे बेहतर जानती हूँl” मेरी माँ ने मुझे निरंतर स्मरण दिलाया है कि उनकी इस गहरी जागरूकता ने कि मैं कौन हूँ उनको उन क्षणों में जहाँ मुझे उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है उन्हें वहां रहने में मदद करता है l
यीशु में विश्वासी होने के कारण, हम एक ऐसे परमेश्वर द्वारा देखभाल किये जाते हैं जो बहुत निकटता से हमें जानता है l भजनकार दाऊद परमेश्वर की संतानों के जीवनों के प्रति उसकी परवाह के लिए उसकी प्रशंसा करता है, “हे यहोवा, तू ने मुझे जाँचकर जान लिया है l तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है” (भजन 139:1-2) l इसलिए कि परमेश्वर जानता है कि हम कौन हैं—हमारे हर एक विचार, इच्छा, और कार्य—ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ हम जा सकते हैं जहाँ हम उसके अत्यधिक प्रेम और देखभाल की सीमा से बाहर है (पद.7-12) l जैसे कि दाऊद लिखता है, “यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़कर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा” (पद.9-10) l हम यह जानने में आराम पाते हैं कि जीवन में हम कहीं भी रहें, जब हम प्रार्थना में परमेश्वर को पुकारते हैं, वह हमें प्रेम, बुद्धि, और मार्गदर्शन देता है जो हमारी ज़रूरत है l

विचार और प्रार्थनाएँ
“आप मेरे विचारों और प्रार्थनाओं में रहेंगे l” यदि आप इन शब्दों को सुनते हैं, आप जानने के लिए उत्सुक होंगे कि क्या वास्तव में वह व्यक्ति ऐसा मानता है l लेकिन आपको कभी भी संदेह नहीं होता जब यह बात एड्ना डेविस ने कही होती l हर एक व्यक्ति उस छोटे, एक यातायात बत्ती(one stoplight) शहर में “मिस. एड्ना”’ के येलो लीगल पैड (yellow legal pad) पर —पृष्ठ दर पृष्ठ, नामों की एक लम्बी पंक्तिबद्ध सूची के विषय में जानता था l हर सुबह उस वृद्ध स्त्री ने ऊंची आवाज़ में परमेश्वर से प्रार्थना की l उसकी सूची में सभी को उनकी प्रार्थना का उत्तर नहीं मिला जो वे चाहते थे, लेकिन लोगों ने उनके अंतिम संस्कार में यह साक्षी दी कि उनके जीवन में कुछ अलौकिक घटा थाI, और उन्होंने इसका श्रेय मिस.एड्ना की पूरी लगन से की गयी प्रार्थनाओं को दिया l
परमेश्वर ने प्रार्थना की सामर्थ्य को पतरस के बंदीगृह के अनुभव में दर्शाया l हेरोदेस के आदमियों द्वारा प्रेरित को पकड़ लिए जाने, बंदीगृह में डाल दिए जाने और उसके बाद “चार-चार सिपाहियों के चार पहरों में” रखने के बाद (प्रेरितों 12:4), उसकी आशा निराशाजनक दिखाई दी l लेकिन “कलीसिया उसके लिए लौ लगाकर परमेश्वर से प्रार्थना कर रही थी” (पद.5) l उनके विचार और प्रार्थना में पतरस था l परमेश्वर ने जो किया वह आश्चर्यजनक था! बंदीगृह में पतरस के सामने एक स्वर्गदूत आया, उसे जंजीरों से स्वतंत्र किया, और उसे सुरक्षित रूप से बंदीगृह के फाटक से बाहर निकला (पद.7-10) l
यह संभव है कि कुछ लोग “विचार और प्रार्थनाओं” का वास्तव में अर्थ के बिना उपयोग कर सकते हैं l लेकिन हमारा पिता हमारे विचारों को जानता है, हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है, और अपने सिद्ध इच्छा के अनुसार हमारे पक्ष में कार्य करता है l आपके लिए प्रार्थना की जाए और आपका दूसरों के लिए प्रार्थना करें, कोई छोटी बात नहीं है जब हम महान और शक्तिशाली परमेश्वर की सेवा करते हैं l
बढ़ते हुए! अडिग
“रेस्ट/विश्राम(Rest)” नामक कविता में, कवि धीरे-धीरे “फुरसत” के समय को “काम” से अलग करने की हमारी प्रवृत्ति को चुनौति देता हुआ पूछता है, “क्या सच्ची फुरसत / सच्चा परिश्रम एक नहीं है?” यदि आप जीवन के कर्तव्यों से दूर रहकर उसके स्थान पर सच्ची फुरसत का अनुभव करना चाहते हैं, तो लेखक आग्रह करता है, “फिर भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें; उसका उपयोग करें, उसे व्यर्थ न गवाएँ ——/ अन्यथा वह आराम नहीं है l /क्या सुन्दरता निहारना चाहेंगे/ अपने निकट? चारों-ओर? / केवल कर्तव्य है / ऐसी ही स्थिति है l”
कवि इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सच्चा विश्राम और आनंद दोनों ही प्रेम और सेवा से मिलते हैं—एक विचार जो थिस्सलुनीकियों के लिए पौलुस का प्रोत्साहन याद दिलाता है l अपनी बुलाहट के वर्णन के द्वारा विश्वासियों को प्रोत्साहित करते हुए कि “उनका चाल-चलन परमेश्वर के योग्य हो” (1 थिस्सलुनीकियों 2:12) प्रेरित और अधिक निश्चित विवरण देता है l
और ऐसे जीवन का चित्र जो वह बनाता है वह शांत सत्यनिष्ठा, प्रेम और सेवा का है l पौलुस प्रार्थना करता है कि परमेश्वर “ऐसा करें कि . . . आपका प्रेम एक दूसरे के प्रति और सब के प्रति बढ़ता और उमड़ता रहे’” (3:12) और वह यीशु में विश्वासियों से आग्रह करता है कि “चुपचाप रहने और अपना-अपना काम काज करने और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न [करें]” (4:11) l यह उस तरह का जीवन है, जिस तरह से परमेश्वर ने हमें सक्षम बनाया है, चुपचाप प्रेम और सेवा करना, जो दूसरों के समक्ष विश्वास के जीवन की सुन्दरता को प्रकट करता हैI (पद.12)
अथवा, जैसे वह लेखक लिखता है, सच्चा आनंद “प्रेम करने और सेवा करने/ सबसे ऊंचा और सर्वोत्तम;/ आगे बढ़ने वाला! अडिग—/और यही सच्चा विश्राम है l”


अपनी चौकसी करो
एक व्यक्ति और अनेक मित्र स्की रिसोर्ट गेट से अन्दर गए जिस पर हिमस्खलन (Avalanche) के चेतावनी संकेत होने के बावजूद स्नोबोर्डिंग(बर्फ पर फिसलना) करने लगे l दूसरी बार नीचे आते समय, कोई चिल्लाया, “हिमस्खलन!” लेकिन वह व्यक्ति बच न सका और गिरती हुए बर्फ में दब कर मर गया l कुछ ने उसे नौसिखिया बताते हुए उसकी आलोचना की l लेकिन वह नौसिखिया नहीं था; वह एक “हिमस्खलन-प्रमाणित गाइड(Avalanche-certified guide)” था l एक शोधकर्ता ने कहा कि अक्सर सबसे अधिक हिमस्खलन प्रशिक्षण वाले स्कीयर(skiers) और स्नोबोर्डर्स (snowboarders) में ही दोषपूर्ण तर्क देने की सम्भावना देखने को मिलती है l “स्नोबोर्डर(snowboarder) की मृत्यु इसलिए हुयी क्योंकि उसने अपनी सतर्कता को हलके में लिया l
जैसे ही इस्राएल प्रतिज्ञात देश में जाने की तैयारी करने लगा, परमेश्वर चाहता था कि उसके लोग अपनी चौकसी करें—सावधान और सचेत रहें l इसलिए उसने उन्हें उसके सभी “विधि और नियम” मानने की आज्ञा दी (व्यवस्थाविवरण 4:1-2) और अतीत में अनाज्ञाकारियों पर उसके दंड को स्मरण रखें (पद.3-4) l उन्हें स्वयं की जाँच करने और अपने आंतरिक जीवन पर नज़र रखने के लिए “चौकसी” करनी थी (पद.9) l इससे उन्हें बाहर से आध्यात्मिक खतरों और भीतर से आध्यात्मिक उदासीनता से बचने में मदद मिलती l
हमारे लिए अपनी चौकसी छोड़ना और उदासीनता और आत्म-धोखे में पड़ना आसान है l लेकिन परमेश्वर हमें जीवन में गिरने से बचने की शक्ति दे सकता है और जब हम गिरते हैं तो उसके अनुग्रह से क्षमा मिलती हैं l उसका अनुसरण करके और उसकी बुद्धि और प्रावधान में आराम करके, हम अपने बचाव को बनाए रख सकते हैं और अच्छे निर्णय ले सकते हैं !

अपनी वाणी का उपयोग
आठ साल की उम्र से, लीसा हकलाहट के साथ संघर्ष करती थी और सामाजिक स्थितियों से डरने लगी जहाँ उसे लोगों से बात करने की ज़रूरत होती थी l लेकिन आगे जीवन में, वाक्-चिकित्सा(स्पीच थेरेपी/speech therapy) की सहायता से अपनी चुनौती पर विजय पाने के बाद लीसा ने अपनी आवाज़ को दूसरों की मदद करने में उपयोग करने का निर्णय लिया l वह एक भावनात्मक संकट टेलेफोन हॉटलाइन(इमोशनल डिस्ट्रेस टेलीफोन हॉट लाइन/emotional distress telephone hotline) के लिए परामर्शदाता के रूप में कार्य करने लगी l
इस्राएलियों को दासत्व से बाहर निकालने में सहायता करने के लिए बोलने के विषय में मूसा को अपनी चिंताओं का सामना करना पड़ा l परमेश्वर ने उसे फिरौन के साथ संवाद करने के लिए कहा, परन्तु मूसा ने विरोध किया क्योंकि वह अपनी बोलने की क्षमता में आत्मविश्वास महसूस नहीं करता था (निर्गमन 4:10) l परमेश्वर ने उसे चुनौती दी, “मनुष्य का मुँह किसने बनाया है? तब उसने मूसा को यह कहते हुए आश्वास्त किया, “मैं तेरे मुख के संग होकर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखलाता जाऊँगा” (पद.11-12) l
परमेश्वर का प्रतिउत्तर हमें याद दिलाता है कि वह हमारी सीमाओं में भी हमारे द्वारा शक्तिशाली रूप से कार्य कर सकता है l लेकिन इसे अपने हृदय में जानते हुए भी, इसे जीना कठिन हो सकता है l मूसा संघर्ष करता रहा और किसी और को भेजने के लिए परमेश्वर से विनती की (पद.13) l इसलिए परमेश्वर ने मूसा के भाई हारून को उसके साथ जाने दिया (पद.14) l
हममें से हर एक के पास आवाज़ है जो दूसरों की सहायता कर सकता है l हम भयभीत हो सकते हैं l हम अक्षम महसूस कर सकते हैं l हमें लग सकता है कि हमारे पास सही शब्द नहीं हैं l
परमेश्वर जानता है हम कैसा महसूस करते हैं l वह दूसरों की सेवा करने के लिए शब्द और हमारी सारी आवश्यकता पूरी कर सकता है और अपने काम को पूरा कर सकता है l