यात्रा में परमेश्वर का साथ
भारत भर में सड़क यात्रा आपको कुछ खतरनाक सड़कों पर ले जाएगी। सबसे पहले– किलर किश्तवाड़ रोड, जम्मू और कश्मीर। उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ते हुए गुजरात के डुमास समुद्र तट के पास आप एक भयानक अहसास का अनुभव करते हैं। मध्य भारत की ओर आगे बढ़ते हुए, आप बस्तर, छत्तीसगढ़ में, जो एक खतरनाक जगह है, आराम करने का साहस नहीं करते। जैसे ही आप दक्षिण की ओर बढ़ते हैं, आप पहुंचेंगे–डरावनी कोल्ली हिल रोड, तमिलनाडु। ये भारत के परिदृश्य में कुछ वास्तविक स्थान हैं, जहां आप कभी भी यात्रा करना नहीं चाहेंगें।
कभी–कभी जिंदगी का सफर भी कुछ ऐसा ही लगता है। हम जंगल में इस्राएलियों के कठिन जीवन को आसानी से पहचान लेते हैं (व्यवस्थाविवरण 2:7)— जीवन कठिन हो सकता है। लेकिन क्या हम अन्य समानताएं देखते हैं? हम परमेश्वर के मार्ग से मुड़कर अपना स्वयं का यात्रा कार्यक्रम बनाते हैं (1:42–43)। इस्राएलियों की तरह हम अक्सर अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कुड़कुड़ाते हैं (गिनती 14:2)। हमारे दैनिक झल्लाहट में हम वैसे ही परमेश्वर के उद्देश्यों पर संदेह करते हैं (पद 11)। इस्राएलियों की कहानी हमारी अपनी कहानी में बार–बार दोहराई जाती है।
परमेश्वर हमें विश्वास दिलाता है कि यदि हम उसके मार्ग का अनुसरण करते हैं, तो वह हमें उस स्थान से कहीं बेहतर स्थान पर पहुँचाएगा जहाँ खतरनाक सड़कें हमें ले जाती हैं। वह प्रदान करेगा और हमारे पास ऐसी किसी भी वस्तु की घटी नहीं होगी जिसकी हमें वास्तव में आवश्यकता है (व्यवस्थाविवरण 2:7: फिलिप्पियों 4:19)। फिर भी जितना हम पहले से ही जानते हैं, हम अक्सर इसे करने में असफल हो जाते हैं। हमें परमेश्वर के रोडमैप का अनुसरण करने की आवश्यकता है।
यह एक ड्राइव से थोड़ा अधिक है, लेकिन कार द्वारा कुछ और घंटों का सफर आपको डरावनी कोल्ली हिल से “परमेश्वर के अपने देश” केरल में हरे–भरे और शांत वायनाड तक ले जाएगी। यदि हम परमेश्वर को हमारे पथों को निर्देशित करने देते हैं (भजन संहिता 119:35) तो हम उसकी स्टेयरिंग व्हील पर मौजूदगी के साथ आनंद में यात्रा करेंगे — वास्तव में एक आशीषित आश्वासन!

प्यार के बिना निरर्थक (बेकार)
बॉक्स से अपनी खास आर्डर की गई मेज़ के टुकड़े निकालने और उन्हें अपने सामने रखने के बाद में मैंने देखा कि कुछ तो सही नहीं था। मेज के सुन्दर टाप और अन्य भाग तो थे, लेकिन उसमें से एक पैर गायब था। सभी पैरों के बिना मैं मेज़ को जोड़ नहीं सकता था, जिससे यह बेकार हो गई।
यह केवल मेजें ही नहीं है जो एक महत्वपूर्ण टुकड़ा खोने पर बेकार हैं। 1 कुरिन्थियों की पुस्तक में, पौलुस ने अपने पाठकों को याद दिलाया कि वे एक आवश्यक घटक को खो रहे थे। विश्वासियों के पास बहुत से आध्यात्मिक वरदान थे, लेकिन उनमें प्रेम की कमी थी।
अपनी बात पर जोर देने के लिए बढ़ा चढ़ा कर बोलते हुये पौलुस ने लिखा है कि भले ही उसके पाठकों के पास सभी ज्ञान हों, अगर वे अपनी हर एक चीज को दे दें, और यहां तक कि अगर वे स्वेच्छा से कठिनाई का सामना करें, पर प्रेम की आवश्यक नींव के बिना, उनके कार्यों का अर्थ कुछ भी नहीं होगा (1कुरिन्थियों 13:1–3)। पौलुस ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे हमेशा अपने कार्यों को प्रेम से तर करें; प्रेम की सुंदरता का वर्णन करते हुए वह कहता है— प्रेम हमेशा रक्षा करता है, भरोसा करता है, आशा करता है, और दृढ़ रहता है (पद 4–7)।
जब हम अपने आध्यात्मिक वरदानों का उपयोग करते हैं, शायद हमारे विश्वास समुदायों में सिखाने, प्रोत्साहित करने या सेवा करने के लिए तो याद रखें कि परमेश्वर की योजना हमेशा प्यार की मांग करती है। अन्यथा, यह एक मेज़ की तरह है जिसका एक पैर गायब है। यह उस वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकता जिसके लिए इसे बनाया गया था।

पूरा घर
अपने धारीदार जंपसूट पहने, जेम्स पोर्टेबल पूल में चढ़ गया जहां उसे जेल के पादरी ने बपतिस्मा दिया था। हालाँकि जेम्स की खुशी कई गुना बढ़ गई, जब उसने सुना कि उसकी बेटी ब्रिटनी ने —एक कैदी भी— उसी दिन बपतिस्मा लिया था— उसी पानी में! जब उन्हें एहसास हुआ कि क्या हुआ है, तो कर्मचारी भी भावुक हो गए। “एक आंख भी सूखी नहीं थी,” पादरी ने कहा। वर्षों तक जेल में कई बार रहने से ब्रिटनी और उसके पिता दोनों ही परमेश्वर से क्षमा चाहते थे। परमेश्वर ने एक साथ उन्हें नया जीवन दिया।
पवित्रशास्त्र एक और जेल मुठभेड़ का वर्णन करता है–इस बार एक जेलर के साथ–जहाँ यीशु के प्रेम ने एक पूरे परिवार को बदल दिया। एक भयंकर भूकंप के जेल को हिलाने के बाद, और जेल के दरवाजे खुलने के बाद पौलुस और सीलास भागे नहीं बल्कि अपनी कोठरी में रहे (प्रेरितों के काम16:26–28) । उनके न भागने से कृतज्ञता से भरा जेलर उन्हें अपने घर ले गए और अंततः जीवन बदलने वाला प्रश्न पूछा, “उद्धार पाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? (पद 30) ।
“प्रभु यीशु पर विश्वास करो” उन्होंने उत्तर दिया, “तू और तेरा घराना” (पद 31)। यह उत्तर न केवल व्यक्तियों पर बल्कि पूरे परिवारों पर दया करने की ईश्वर की इच्छा को प्रकट करता है। परमेश्वर के प्रेम का सामना करते हुए, वे सभी, जेलर और उसके पूरा घराना, परमेश्वर पर विश्वास करने लगे (पद 34)। यद्यपि हम अक्सर उन लोगों के उद्धार के लिए उत्सुक होते हैं जिनसे हम प्रेम करते हैं, हम भरोसा कर सकते हैं कि परमेश्वर हमसे अधिक उनसे प्रेम करता है। वह हम सभी को, हमारे पूरे घर को, नया बनाना चाहता है।

विश्वास की मांसपेशियों को फैलाना
चिड़ियाघर की यात्रा के दौरान, मैं स्लॉथ (Sloth) (दक्षिण व मध्य अमेरिका में पाया जाने वाला एक आलसी जानवर जो पेड़ों में रहता है), के पास आराम करने के लिए रुक गया। वह जीव उल्टा लटका हुआ था । ऐसा लग रहा था कि वह संन्तुष्ट है क्योंकि वह पूरी तरह से (शांत) स्थिर था । मैंने आह भरी। अपने स्वास्थ्य के मुद्दों के कारण, मैं स्थिरता से संघर्ष कर रहा था और कुछ भी करने के लिए मैं निराशा से भर कर आगे बढ़ना चाहता था। अपनी बाधाओं पर कुढ़ते हुये, मैं इतना कमजोर महसूस करना बंद करना चाहता था। लेकिन स्लॉथ को मैंने देखा कि कैसे उसने अपना एक हाथ बढ़ाया, पास की एक शाखा को पकड़ लिया, और फिर रुक गया। स्थिर होने में भी शक्ति की आवश्यकता है। अगर मैं धीमी गति से चलने या स्लॉथ की तरह स्थिर रहना चाहता था, तो मुझे अविश्वसनीय मांसपेशियों की शक्ति से अधिक की आवश्यकता थी। अपने जीवन के हर खींचे जाने वाले क्षण में ईश्वर पर भरोसा करने के लिए मुझे अलौकिक शक्ति की आवश्यकता थी।
भजन संहिता 46 में, लेखक घोषणा करता है कि परमेश्वर हमें केवल शक्ति ही नहीं देता, वह हमारी शक्ति है (पद 1)। हमारे आसपास कुछ भी हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि, सर्वशक्तिमान प्रभु हमारे साथ है (पद 7)। भजनकार इस सत्य को विश्वास के साथ दोहराता है (पद 11)।
स्लॉथ की तरह हमारे दिन–प्रतिदिन के कामों के लिए अक्सर धीमे कदमों और असंभव प्रतीत होने वाली स्थिरता की लंबी अवधि की आवश्यकता होती है। जब हम परमेश्वर के अपरिवर्तनीय चरित्र पर भरोसा करते हैं, तो हम उसकी शक्ति पर निर्भर हो सकते हैं, चाहे वह हमारे लिए कोई भी योजना और गति निर्धारित करे जो सही हो।
यद्यपि हम कष्टों से लड़ना जारी रख सकते हैं या प्रतीक्षा के साथ संघर्ष कर सकते हैं, परमेश्वर विश्वासपूर्वक उपस्थित रहता है। यहां तक कि जब हम बलशाली महसूस नहीं करते हैं, तब भी वह हमारे विश्वास की मांसपेशियों को फैलाने में हमारी मदद करेगा।

यीशु कौन है ?
लोग यीशु को क्या मानते हैं? कुछ लोग कहते हैं कि वह एक अच्छे शिक्षक थे, लेकिन वह सिर्फ एक मनुष्य थे। लेखक सी एस लुईस ने लिखा, या तो यह आदमी परमेश्वर का पुत्र था, और है, या फिर एक पागल, या कुछ इससे भी और बुरा। आप उसे एक मूर्ख बोल कर चुप करा सकते हैं, आप उस पर थूक सकते हैं और उसे एक दुष्ट आत्मा के रूप में मार सकते हैं, या आप उसके चरणों में गिर सकते हैं और उसे परमेश्वर और प्रभु कह सकते हैं, लेकिन हमें उसके महान मानव शिक्षक होने के बारे में कोई भी बेकार का समर्थन नहीं करना चाहिए।” मियर क्रिस्चीऐनिटी के ये अब प्रसिद्ध शब्द बताते हैं कि यदि यीशु ने ईश्वर होने का झूठा दावा किया होता तो वह एक महान भविष्यवक्ता नहीं होता। यह परम विधर्म होगा।
गाँवों के बीच चलते समय अपने शिष्यों से बात करते हुए, यीशु ने उनसे पूछा, “लोग क्या कहते हैं कि मैं कौन हूँ? मरकुस (8:27)। उनके उत्तरों में— यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, एलिय्याह और भविष्यद्वक्ताओं में से एक शामिल थे (पद 28) । लेकिन यीशु जानना चाहते थे कि वे क्या मानते हैं? “तुम क्या कहते हो कि मैं कौन हूं?” पतरस ने इसे सही बताया, “तू मसीह है”, उद्धारकर्ता (पद 29) ।
लेकिन हम क्या कहते हैं कि यीशु कौन है? यीशु एक अच्छा शिक्षक या भविष्यद्वक्ता नहीं हो सकता था यदि उसने अपने बारे में जो उसने कहा था— कि वह और पिता परमेश्वर “एक हैं” (यूहन्ना 10:30)— सच नहीं था। उसके अनुयायियों और यहाँ तक कि दुष्टात्माओं ने भी उसकी ईश्वरत्व (दिव्यता) को परमेश्वर के पुत्र के रूप में घोषित किया (मत्ती 8:29;16:16. 1यूहन्ना 5:20)। आज, हम इस बात का प्रचार करें कि मसीह कौन है क्योंकि वह हमें वह प्रदान करता है जिसकी हमें आवश्यकता है।