एक घर की अभिलाषा
ऐनीऑफ़ ग्रीन गेबल्स कहानियों के मुख्य पात्र ऐनी को एक परिवार की इच्छा थी। वह अनाथ थीं और उसने कभी एक ऐसे जगह पाने की आशा खो दी थी जिसे वह घर कह सके। फिर उसने यह जाना कि मैथ्यू नामक एक बूढा आदमी और उसकी बहन मरिला उसे स्वीकार करने के लिए तैयार थे। एक छोटी गाड़ी में उनके घर जाते हुए ऐनी ने बार–बार बकबक करने के लिए माफ़ी मांगी, पर मैथ्यू, जो एक शांत स्वभाव का था ने कहा, “तुम जितना चाहो उतना बात कर सकती हो। मुझे कोई आपत्ति नहीं है।” यह ऐनी के कानों के लिए संगीत था। उसे लगता था कि कोई भी कभी उसे अपने आसपास नहीं चाहता, तो उसकी बकबक क्यों सुनना चाहेगा। पहुंचने के बाद, उसकी उम्मीदें धराशायी हो गई जब उसे पता चला कि भाई–बहनों ने सोचा था की उन्हें खेत में मदद करने के लिए एक लड़का मिल रहा है। वह लौटाए जाने से डरी, लेकिन ऐनी की एक प्यार भरे घर की लालसा तब पूरी हुई जब उन्होंने उसे अपने परिवार का एक हिस्सा बनाया।
हम सब ने ऐसे समय का सामना किया है जब जब हम अनचाहे और अकेला महसूस करते हैं। लेकिन जब हम यीशु में उद्धार के द्वारा परमेश्वर के परिवार का हिस्सा बनते हैं तो वह हमारे लिए एक सुरक्षित गढ़ बन जाता है। भजनसंहिता 62:2।वह हममें प्रसन्न होता है और हमे अपने साथ सब कुछ के बारे में बात करने के लिए आमंत्रित करता है — हमारी चिंता, परीक्षाएं, दुःख और आशा। भजनकार हमें कहता है “ परमेश्वर में आराम पाओ और अपने मन की बातें उससे खोल के कहो। (पद5,8)
संकोच न करें। जितना चाहे परमेश्वर से बात करें। वह बुरा नहीं मानेगा। वह आपके हृदयों से प्रसन्न है। उसमें आप एक घर पा सकते है।

झूठों का पिता
विक्टर धीरे–धीरे अश्लील वीडियो देखने का आदी हो गया। उसके बहुत सारे मित्र अश्लील वीडियो देखते थे और क्योंकि वह ऊबा हुआ था इसलिये वह भी इसका आदी हो गया था। पर अब उसे समझ आया कि यह कितना गलत था,उसने परमेश्वर के विरुद्ध पाप किया था,और उसकी पत्नी उसकी इस आदत से बिल्कुल टूट चुकी थी। उसने अपने जीवन को बचाने की कसम खाईए ताकि वह उसकी ओर दुबारा न देखे। वह अभी भी डरता है की बहुत देर हो चुकी है। क्या उसकी शादी बचाई जा सकती है? क्या वह कभी स्वतंत्र हो पायेगा और पूरी तरफ से माफ़ी प्राप्त कर पायेगा?
हमारा शत्रु शैतान परीक्षा को ऐसे प्रस्तुत करता है जैसे की यह कोई बड़ी बात नहीं। सब कोई तो कर रहे हैं। इसमें नुकसान क्या है? लेकिन जिस क्षण हम उसके योजना को पकड़ लेते है वह अपना रास्ता बदल देता है। आप सोचते हैं कि बहुत देर हो चुकी! आप ज्यादा दूर निकल चुके! अब कोई आशा नहीं है!
जब हम आत्मिक युद्ध में संग्लन होते हैं, शत्रु हमें हराने के लिए कुछ भी कह सकता है। यीशु ने कहा “वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्वभाव ही से बोलता हैय क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।” (यूहन्ना8:44)
यदि शैतान झूठा है तो हमें उसकी कभी नहीं सुनना चाहिए। जब वह कहता है कि हमारा पाप कोई बड़ी बात नहीं है, तब नहीं सुनना चाहिए और तब नहीं जब वह कहता है कि हम आशा हीन हैं। यीशु हमें शैतान के शब्दों को खारिज करने और उसके बजाय उनकी सुनने में मदद करें। हम उसके वायदों पर अपने दिल से निर्भर करते हैं। “यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे, और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।” (पद31.32)

उजियाला हो
मेरी बेटी के शुरुआती दिनों में, मैं अक्सर उसके सामने आने वाली चीज़ों का नाम लेती थी। मैं वस्तुओं को पहचानती या उसे कुछ अपरिचित चीज छूने देती और उसके नाम को बोलती थी ,और इस तरह जिस विशाल दुनिया की वह खोज कर रही थी उसके लिये समझ और एक शव्दावली उसे दे रही थी। भले ही मैं और मेरे पति ने स्वाभाविक रूप से अपेक्षा (आशा) की थी कि उसका पहला शब्द मम्मा या डैडी होगा, पर उसने पूरी रीति से एक फरक शब्द बोलकर हमें आश्चर्य में डाला, उसके छोट्टेमुंह ने एक दिन बुदबुदाया डाईट जो मैंने अभी–अभी उसके साथ बाँटा था लाईट उसका एक मीठा, गलत उच्चारण वाली गूंज ।
प्रकाश हमारे लिए बाइबल में दर्ज परमेश्वर द्वारा बोले गये पहले शब्दों में से एक है। जब परमेश्वर का आत्मा एक अंधेरी, निराकार और खाली पृथ्वी पर मँडरा रहा था, तो परमेश्वर ने अपनी सृष्टि में यह कहते हुए प्रकाश का परिचय दिया “उजियाला हो” (उत्पत्ति 1:3)। उसने कहा कि प्रकाश अच्छा था, जिसे शेष पवित्रशास्त्र ने दिखाया है, भजनकार समझाता है कि परमेश्वर के वचन हमारी समझ को प्रकाशित करते हैं (भजन संहिता 119:130), और यीशु स्वयं को संसार की ज्योति के रूप में संदर्भित करता है जो प्रकाश का दाता है। जीवन के प्रकाश का देने वाला (यूहन्ना 8:12)।
परमेश्वर ने अपने सृष्टि के निर्माण के काम में सबसे पहले जो बोला वह ज्योति देने के लिए था। यह इसलिए नहीं था की उसे अपने काम करने के लिए ज्योति चाहिए, नहीं, वह ज्योति हमारे लिए थी। ज्योति हमें उसे देखने और हमारे चारों तरफ उसकी सृष्टी में उसके उँगलियों के निशान पहचानने में, क्या अच्छा है और क्या नहीं पर भेद करने में, और इस विशाल संसार में यीशु का एक बार में एक कदम अनुसरण करने के लिये सक्षम बनाता है।

रात के सेवक
अभी गहन-चिकित्सा(intensive-care) हॉस्पिटल में सुबह का 3 बजा है। एक चिंतित मरीज एक घंटे में चौथी बार कॉल बटन दबाता है l रात की पाली की नर्स बिना किसी शिकायत के उत्तर देती है l शीघ्र ही एक और मरीज ध्यानाकर्षित करने के लिए चिल्ला रहा है l नर्स चकित नहीं है l उसने अपने हॉस्पिटल के दिन के हलचल से बचने के लिए पाँच वर्ष पूर्व रात की पाली का आग्रह किया था l फिर सच्चाई सामने आई l अक्सर रात के काम का अर्थ अतिरिक्त काम जैसे मरीज को खुद उठाना और घुमाना होता है l इसका अर्थ रोगी की स्थितियों की ध्यानपूर्वक देख-रेख करना होता है ताकि आपात स्थिति में डॉक्टरों को सूचित किया जा सके l
अपने रात के सहकर्मियों के साथ निकट मित्रता से हर्षित, यह नर्स अभी भी पर्याप्त नींद लेने के लिए संघर्ष करती है l अक्सर, वह अपने कार्य को प्रमुखता देते हुए, अपनी कलीसिया से प्रार्थना करने के लिए कहती है l “परमेश्वर की प्रशंसा हो, उनकी प्रार्थनाएं अंतर लाती है l”
रात के एक कार्यकर्ता के लिए उसकी प्रशंसा अच्छी और सही है─साथ ही साथ हम सब के लिए भी l भजनकार ने लिखा, “हे यहोवा के सब सेवकों, सुनो, तुम जो रात रात को यहोवा के भवन में खड़े रहते हो, यहोवा को धन्य करो! अपने हाथ पवित्रस्थान में उठाकर, यहोवा को धन्य कहो” (भजन संहिता 134:1-2)।
मंदिर में सेवक/प्रहरी का कार्य करने वाले, लेवियों के लिए लिखा गया यह भजन, उनके अत्यावश्यक कार्य को स्वीकार करता है─जो दिन और रात मंदिर की सुरक्षा करते थे l हमारे नॉनस्टॉप/निरंतर संसार में, रात में काम करनेवाले कार्यकर्ताओं के लिए इस भजन को साझा करना विशेष रूप से उचित है, फिर भी हममें से हर एक रात में परमेश्वर की स्तुति कर सकता है l जैसे कि भजनकार आगे कहता है, “यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, वह सिय्योन में से तुझे आशीष देवे (पद.3)।

आत्मिक पड़ताल
कीमोथेरेपी ने मेरे ससुर के अग्नाशय में ट्यूमर को छोटा कर दिया, जब तक कि ऐसा नहीं हुआ l जब वह ट्यूमर दोबारा बढ़ने लगा, उन्हें जीवन और मृत्यु के चुनाव के साथ छोड़ दिया गया l उन्होंने अपने डॉक्टर से पूछा, “क्या मुझे और कीमो लेना चाहिए या कुछ और, शायद एक दूसरी दवाई या फिर रेडिएशन?”
यहूदा के लोगों के पास भी इसी प्रकार का मृत्यू और जीवन का प्रश्न था l युद्ध और अकाल से थकित, परमेश्वर के लोगों ने सोचा कि क्या उनकी समस्या अत्यधिक मूर्तिपूजा थी या पर्याप्त नहीं थी l उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि उन्हें एक झूठे देवता को और अधिक बलिदान चढाने चाहिए और देखना चाहिए कि क्या वह उनकी रक्षा करेगी और उन्हें समृद्ध करेगी (यिर्मयाह 44 :17)।
यिर्मयाह कहता है कि उन्होंने अपनी परिस्थिति का बेतहाशा गलत पड़ताल किया है l उनकी समस्या मूर्तियों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी नहीं थी; उनकी समस्या यह थी कि उनके पास वे थीं l उन्होंने भविष्यवक्ता से कहा, “जो वचन तूने हम को यहोवा के नाम से सुनाया है, उसको हम नहीं सुनने की” (पद.16) l यिर्मयाह में उत्तर दिया “क्योंकि तुम धूप जलाकर यहोवा के विरुद्ध पाप करते और उसकी नहीं सुनते थे, और उसकी व्यवस्था और विधियों और चितौनियों के अनुसार नहीं चले, इस कारण यह विपत्ति तुम पर आ पड़ी है” (यिर्मयाह 44:23) l
यहूदा की तरह, हम उन पापपूर्ण विकल्पों को दुगना करने के लिए परीक्षा में पड़ सकते हैं जिन्होंने हमें संकट में डाल दिया है l संबंध की समस्याएं? हम और अलग हो सकते हैं। आर्थिक विषय? हम खुशी पाने के लिए अपनी मर्जी से खर्च करेंगे l दरकिनार किया गया? हम उनकी तरह ही निर्दई हो जाएंगे। परंतु मूर्तियां जिन्होंने हमारी समस्याओं को बढ़ाया है हमें बचा नहीं सकती हैं । केवल यीशु ही हमें हमारी समस्याओं से बाहर लेकर आ सकता है जब हम उसकी ओर मुड़ते हैं।