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मिलकर काम करना

जो(Joe) ने दिन में बारह घंटे से ज्यादा काम किया, अक्सर बिना अवकाश के l एक धर्मार्थ व्यवसाय के आरम्भ ने इतने समय और ऊर्जा की मांग की कि जब वह घर पहुँचा तो उसके पास उसकी पत्नी और बच्चों के लिए बहुत कम समय बचा था l जीर्ण तनाव की सजा ने जब जो को अस्पताल में पहुंचाया, तो एक दोस्त ने उसकी मदद करने के लिए एक टीम का आयोजन करने की पेशकश की l हालांकि वह नियंत्रण छोड़ने में डर रहा था, जो जानता था कि वह अपनी वर्तमान गति को बनाए नहीं रख सकता l वह अपने दोस्त पर─और ईश्वर पर─भरोसा करने के लिए तैयार हो गया, जब उसने उन लोगों के समूह को जिम्मेदारियाँ सौंपीं जिन्हें उन्होंने एक साथ मिलकर चुना था l एक साल बाद, जो ने स्वीकार किया कि दान और उसका परिवार कभी समृद्ध नहीं हो सकता है यदि उसने उस मदद को अस्वीकार किया होता जिसे परमेश्वर ने उसको भेजा था l

परमेश्वर ने एक प्यार करने वाले समुदाय के समर्थन के बिना लोगों को अभिकल्पित नहीं किया l निर्गमन 18 में, मूसा ने जंगल के रास्ते से इस्राएलियों का नेतृत्व किया l उसने अपने बल पर एक शिक्षक, एक परामर्शदाता, और एक न्यायी के रूप में परमेश्वर के लोगों की सेवा करने की कोशिश की l जब उसके ससुर ने उससे मुलाकात की, तो उन्होंने मूसा को सलाह दी : “इससे तू क्या, वरन् ये लोग भी जो तेरे संग हैं निश्चय थक जाएँगे, क्योंकि यह काम तेरे लिए बहुत भारी है,” यित्रो ने कहा (निर्गमन 18:18) l उसने मूसा को वफादार लोगों के साथ काम का बोझ साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया l मूसा ने मदद स्वीकार की और पूरे समुदाय को फायदा हुआ l

जब हम भरोसा करते हैं कि परमेश्वर अपने सभी लोगों के साथ और उनके द्वारा काम करता है, जब हम एक साथ काम करते हैं, तो हम वास्तविक आराम पा सकते हैं l

लिपट जाना

“डैडी, क्या आप मेरे लिए पढेंगे?” मेरी बेटी ने पूछा l किसी बच्चे के लिए माता-पिता से इस प्रकार का प्रश्न करना असामान्य नहीं है l लेकिन मेरी बेटी अब ग्यारह वर्ष की है l इन दिनों, इस तरह के अनुरोध उस समय से कम होते हैं जब वह छोटी थी l “हाँ,” मैंने खुशी से कहा, और वह सोफे पर मेरे बगल में सिमट कर बैठ गयी l

जब मैं उसके लिए पढ़ रहा था, वह मानो मुझ से लिपट गयी l माता-पिता के रूप में वह उन शानदार क्षणों में से एक था, जब हम शायद हमारे लिए हमारे पिता के सिद्ध प्यार को महसूस करते है और हमारे लिए उसकी गहरी इच्छा कि हम उसकी उपस्थिति और हमारे लिए उसके प्रेम में “समा जाएँ l”

मुझे उस पल एहसास हुआ कि मैं बहुत हद तक अपने ग्यारह साल के बच्चे की तरह हूँ l अधिकांश समय, मैं स्वतंत्र होने पर ध्यान केंद्रित करता हूँ l हमारे लिए परमेश्वर के प्रेम के स्पर्श से दूर होना कितना सरल है, एक कोमल और सुरक्षात्मक प्रेम जिसका वर्णन भजन 116 “अनुग्रहकारी और धर्मी . . . दया करनेवाला” के रूप में करता है (पद.5) l यह एक प्यार है जहां, मेरी बेटी की तरह, मैं परमेश्वर की गोद में सिमट सकता हूँ, घर पर मेरे लिए उसकी खुशी में l

भजन 116:7 बताता है कि हमें नियमित रूप से अपने आप को परमेश्वर के अच्छे प्रेम की याद दिलाना पड़ सकता है, और फिर प्रतीक्षा कर रही उसकी बाहों में सिमट जाना : “हे मेरे प्राण, तू अपने विश्रामस्थान में लौट आ; क्योंकि यहोवा ने तेरा उपकार किया है l” और वास्तव  में, उसने किया है l

मुर्खता से सीखना

एक व्यक्ति किराने की दुकान में  गया, उसने काउंटर पर 500 रुपये रखे और रेजगारी देने को कहा l  जब दुकानदार ने नकद दराज खोली, तो आदमी ने एक बंदूक खींची और रजिस्टर में दर्ज पूरी नकदी मांगी, जो दुकानदार ने तुरंत दे दी l व्यक्ति ने क्लर्क से कैश लिया और काउंटर पर रखे पांच सौ रुपये के नोट को छोड़कर फरार हो गया  l दराज से उसे कुल कितनी नकदी मिली? तीन सौ रुपये  l

हम सभी मूर्खतापूर्ण कार्य करते हैं─भले ही, इस चोर के विपरीत, हम सही काम करने की कोशिश करते हैं l कुंजी यह है कि हम अपने मूर्ख व्यवहार से कैसे सीखते हैं  l सुधार के बिना, हमारे खराब चुनाव आदत बन सकते हैं, जो हमारे चरित्र को नकारात्मक रूप से आकार देंगे  l हम “मूर्ख [बन जाएंगे . . . जिसकी] समझ काम नहीं देती” (सभोपदेशक 10:3) l

कभी-कभी अपनी मूर्खता को स्वीकार करना कठिन होता है क्योंकि इसके लिए अतिरिक्त काम की आवश्यकता होती है  l शायद हमें एक विशेष चरित्र दोष पर विचार करना हो और यह पीड़ादायक है l   या शायद हमें यह स्वीकार करना हो कि एक निर्णय जल्दबाजी में किया गया था और अगली बार हमें अधिक ध्यान रखना चाहिए  l कारण जो भी हो,  अपने मूर्खतापूर्ण तरीकों को अनदेखा करने की कीमत बड़ी होती है l

शुक्र है, परमेश्वर हमारी मूर्खता का उपयोग अनुशासन और हमें आकार देने के लिए कर सकता है l  अनुशासन “आनंद [का] नहीं,” लेकिन इसके अभ्यास से लंबे समय में अच्छे फल मिलते हैं (इब्रानियों 12:11)  l आइए अपने मूर्खतापूर्ण व्यवहार के लिए हमारे पिता के अनुशासन को  स्वीकार करें और उससे हमें और अधिक वैसे पुत्र और पुत्रियाँ बनाने के लिए कहें जैसा वह चाहता है कि हम बनें l

हमारे सर्वाधिक बदतर अवस्था में

“वह सहनीय है, लेकिन मुझे आकर्षित करने के लिए पर्याप्त सुंदर नहीं है l” जेन ऑस्टेन के प्राइड एंड प्रेजुडिस (Pride and Prejudice) में मिस्टर डार्सी द्वारा सुनाया गया यह वाक्य, वह कारण है कि मैं उस उपन्यास और मुझ पर इसके प्रभाव को कभी नहीं भूल पाऊँगी l क्योंकि उस एक वाक्य को पढ़ने के बाद,  मैंने दृढ़ता से निर्णय लिया कि मैं मिस्टर डार्सी को कभी पसंद नहीं करूंगी  l

पर मैं गलत थी  l ऑस्टिन के चरित्र एलिजाबेथ बेनेट की तरह, मुझे धीरे-धीरे─और काफी अनिच्छा से─अपने दिमाग को बदलने का नम्र अनुभव हुआ था l उसकी तरह, मैं डार्सी के चरित्र को पूरी तरह से जानने के लिए तैयार नहीं थी; मैंने उनकी सबसे खराब क्षणों में से एक पर अपनी प्रतिक्रिया को दृढ़ता से थामे रही  l उपन्यास खत्म करने के बाद, मैं सोचने लगी  कि मैंने वास्तविक दुनिया में किसके साथ वही गलती की थी l  मैं एक आकस्मिक निर्णय छोड़ना नहीं चाहती  थी  इसलिए मैं कौन सी मित्रता में विफल रही थी?

यीशु में विश्वास के केंद्र में हमारे उद्धारकर्ता द्वारा देखे जाने, प्यार करने और गले लगाने का अनुभव है─हमारे सर्वाधिक बदतर अवस्था में (रोमियों 5:8; 1 यूहन्ना 4:19)  l यह महसूस करने का आश्चर्य है कि हम मसीह में वास्तव में क्या हैं, के लिए अपने पुराने, झूठे निजी व्यक्तित्व को समर्पित कर सकते हैं (इफिसियों 4:23-24) l  और यह समझने की खुशी है कि हम अब अकेले नहीं हैं  बल्कि एक परिवार का हिस्सा हैं,  “प्रेम में [चलना]”─वास्तविक, शर्तहीन प्रेम (5:2)─सीखनेवालों का एक “झुण्ड” हैं l

जब हम याद करते हैं कि मसीह ने हमारे लिए क्या किया है (पद.2), तो जैसे वह हमें देखता है हम दूसरों को उस तरह देखने के लिए कैसे नहीं तरसेंगे?

चंगाई के लिए एक वृक्ष

लगभग 2.19 करोड़ रुपये में, आप एक नई मैकलेरन लक्जरी स्पोर्ट्स कार खरीद सकते हैं l वाहन V8 इंजन के साथ आता है जिसमें 710 हॉर्सपावर की क्षमता होती है─जो आपके सुबह के जाने और आने के लिए आपकी आवश्यकता से कहीं अधिक है l

बेशक, आप उस सारी शक्ति का उपयोग करने के लिए ललचा सकते हैं l एक ड्राइवर ने जाना  कि उसकी कार इतनी “तेज” थी कि वह अत्यधिक महँगी कार वाले शोरूम से रद्दी माल के ढेर में सिर्फ चौबीस घंटे में जा सकती थी! कार खरीदने के एक दिन बाद, उसने उसे एक पेड़ से टकरा दिया l (शुक्र है, वह बच गया l)

बाइबल की कहानी के सिर्फ तीन अध्यायों में, हम सीखते हैं कि कैसे एक अलग बुरे चुनाव और एक पेड़ ने परमेश्वर की अच्छी रचना को बिगाड़ दिया l आदम और हव्वा ने उस एक पेड़ से खाया जिसे उन्हें अकेले छोड़ देना चाहिए था (उत्पत्ति 3:11) l कहानी मुश्किल से शुरू हुई थी, और अदन वाटिका शापित हो गया (पद.14-19) l

एक और पेड़ इस अभिशाप को ख़त्म करने में भूमिका निभानेवाला था─क्रूस जिसे यीशु ने हमारे लिए उठाया l उसकी मृत्यु ने हमारा भविष्य उसके साथ निश्चित कर दिया (व्यवस्थाविवरण 21:23; गलातियों 3:13) l

कहानी बाइबल के आखिरी अध्याय में पूरी हो जाती है l वहाँ हम “जीवन के जल की नदी” के बगल में “जीवन [के] वृक्ष” के विषय पढ़ते हैं (प्रकाशितवाक्य 22:1-2) l जैसा कि यूहन्ना ने वर्णन किया है,  इस “वृक्ष . . . से जाति-जाति के लोग चंगे” होंगे (पद.2) l और वह हमें आश्वासन देता है, “फिर श्राप न होगा” (पद.3) l परमेश्वर की कहानी हमारी चाहत के अनुकूल ख़त्म होती है कि सब कुछ सम्पूर्ण और अच्छा होगा l