
यीशु के समान
एक लड़के के रूप में, धर्मशास्त्री ब्रूस वेयर निराश थे कि 1 पतरस 2:21–23 हमें यीशु की तरह बनने के लिए कहता है l वेयर ने अपनी पुस्तक द मैन क्राइस्ट जीसस(The Man Christ Jesus) में अपनी युवावस्था के बारे में लिखा l "उचित नहीं, मैंने निर्धारित किया l खासतौर पर तब जब परिच्छेद ‘ऐसे व्यक्ति के क़दमों का अनुसरण करने के लिए कहता है ‘जिसने पाप नहीं किया l’ यह पूरी तरह से विचित्र था . . . मैं बिलकुल यह नहीं देख पा रहा था कि कैसे परमेश्वर वास्तव में चाहता है कि हम इसे गंभीरता से लें l”
मैं समझता हूँ कि वेयर को बाइबिल की चुनौती इतना हतोत्साहित करनेवाला क्यों महसूस हो सकता था! एक पुराना वृन्द्गीत/कोरस कहता है, “यीशु की तरह बनना, यीशु की तरह बनना l मेरी इच्छा, उसके जैसा बनना l” लेकिन जैसा कि वेयर ने ध्यान दिया कि हम ऐसा करने में असमर्थ हैं l अपने आप से, हम यीशु की तरह कभी नहीं बन सकते हैं l
हालाँकि, हम अकेले नहीं हैं l परमेश्वर की संतान को पवित्र आत्मा दिया गया है, कुछ हद तक ताकि हम में मसीह का रूप बन जाए (गलतियों 4:19) l इसलिए यह आश्चर्य की बात महसूस न हो कि पौलुस के पवित्र आत्मा सम्बंधित महान अध्याय में हम पढ़ते हैं, “जिन्हें उसने पहले से जान लिया है उन्हें पहले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों” (रोमियों 8:29) l परमेश्वर हममें अपने कार्य को पूरा करेगा l और वह इसे हममें यीशु की आत्मा के द्वारा करता है l
जब हम अपने जीवनों में आत्मा के कार्य के प्रति समर्पण करते हैं, हम वास्तव में और अधिक यीशु की तरह बन जाते हैं l यह जानना कितना सान्तवना देनेवाला है कि हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा कितनी बड़ी है!

अकल्पनीय वादे
हमारी सबसे बड़ी असफलता के क्षणों में, यह विश्वास करना आसान हो सकता है कि हमारे लिए बहुत देर हो चुकी है, कि हमने उद्देश्य और मूल्य के जीवन में अपना मौका खो दिया है l इसी तरह अधिकतम-सुरक्षा जेल में एक पूर्व कैदी एलियास ने कैदी के रूप में अपनी भावनाओं का वर्णन किया l “मेरे पास टूटे वादे थे, मेरे अपने भविष्य के वादे, मैं क्या हो सकता था का वादा l”
यह एक कॉलेज का “जेल में प्रचार करने की पहल(Prison Initiative” कॉलेज की डिग्री प्रोग्राम था जिसने एलियास के जीवन को बदलना शुरू किया l कार्यक्रम में रहते हुए, उसने एक वाद-विवाद टीम में भाग लिया, जिसने 2015 में हार्वर्ड की एक टीम से वाद-विवाद किया और जीत हासिल की l एलायस के लिए, “"टीम का हिस्सा होना . . . [यह साबित करने का एक तरीका था कि ये वादे पूरी तरह से खो नहीं गए हैं l”
इसी तरह का परिवर्तन हमारे हृद्यों में तब होता है जब हम यह समझने लगते हैं कि यीशु में परमेश्वर के प्रेम की खुशखबरी हमारे लिए भी अच्छी खबर है l हम आश्चर्य के साथ महसूस करना शुरू करते हैं, बहुत देर नहीं हुई है । परमेश्वर अभी भी मेरे लिए एक भविष्य रखा है l
और यह एक ऐसा भविष्य है जिसे न तो कमाया जा सकता है और न ही यह खो सकता है, केवल परमेश्वर के असाधारण अनुग्रह और सामर्थ्य पर अवलंबित है (2 पतरस: 1:2-3) l एक ऐसा भविष्य जहां हम संसार में निराशा से मुक्त हो गए हैं और हमारे हृद्यों में जो उसकी “महिमा और सद्गुण” से भरे हुए हैं (पद.3) l मसीह के अकल्पनीय वादों में सुरक्षित भविष्य (पद.4); और एक भविष्य जो “परमेश्वर की संतानों की महिमा” में बदल गया है (रोमियों 8:21) l

अनुग्रह द्वारा सामर्थी
अमेरिकी गृह युद्ध के दौरान, कर्तव्य छोड़कर भागने का दण्ड फांसी थी l लेकिन संघ की सेनाओं ने शायद ही कभी भागनेवालों को मृत्युदंड दिया, क्योंकि उनके कमांडर-इन-चीफ अब्राहम लिंकन ने उन सभी को माफ कर दिया था l इसने युद्ध के सचिव, एडविन स्टेनटन को व्यथित किया, जिनका यह मानना था कि लिंकन की उदारता भावी भागनेवालों को केवल प्रलोभित किया l लेकिन लिंकन ने उन सैनिकों के साथ सहानुभूति व्यक्त की, जिन्होंने अपनी साहस खो दी थी और जिन्होंने लड़ाई की ताप में अपने डर से हार मान लिया था l और उसकी सहानुभूति ने उसे उसके सैनिकों के लिए प्रिय बनाया l वे अपने “फादर अब्राहम” से प्यार करते थे, और उनके स्नेह ने सैनिकों को लिंकन की और अधिक सेवा करने की इच्छा दी l
जब पौलुस तीमुथियुस को “मसीह यीशु के एक अच्छे योद्धा के समान” उसके साथ “दुःख” उठाने के लिए बुलाता है (2 तीमुथियुस 2:3), तो वह उसे कठिन काम विवरण(job description) के लिए बुलाता है l एक सैनिक को पूरी तरह से समर्पित, कड़ी मेहनत करने वाला और निस्वार्थ होना चाहिए l उसे अपने कमान ऑफिसर, यीशु की सेवा पूरे हृदय से करना है l लेकिन वास्तव में, हम कभी-कभी उसके अच्छे सैनिक बनने में असफल होते हैं l हम हमेशा उसकी सेवा ईमानदारी से नहीं करते हैं l और इसलिए पौलुस का आरंभिक वाक्यांश महत्वपूर्ण है : “उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है बलवंत हो जा” (पद.1) l हमारा उद्धारकर्ता अनुग्रह से भरा हुआ है l वह हमारी कमजोरियों में सहानुभूति रखता है और हमारी असफलताओं को क्षमा करता है (इब्रानियों 4:15) l और जिस तरह लिंकन की करुणा ने संघ के सैनिकों को प्रोत्साहित किया, उसी तरह यीशु के अनुग्रह से विश्वासियों को बल मिलता है l हम उसकी और अधिक सेवा करना चाहते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि वह हमसे प्यार करता है l

हम ईश्वर नहीं हैं
पुस्तक मियर क्रिचियानिटी(Mere Christianity) में, सी.एस. लियुईस ने खुद से यह जानने के लिए कि क्या हम अहंकार महसूस करते हैं कुछ प्रश्न पूछने की सिफारिश की : “जब अन्य लोग मुझे कोई महत्त्व नहीं देते हैं, या मेरी अनदेखी करते हैं, . . . या सहायता करते हैं, इतराते हैं तो मैं इसको कितना नापसंद करता हूँ?” लियुईस ने अहंकार को “परम दुष्टता” के प्रतिनिधिरूप और घरों और राष्ट्रों में दुख के प्रमुख कारण के रूप में देखा l उन्होंने इसे “आत्मिक कैंसर” कहा जो प्रेम, संतोष और सामान्य ज्ञान की मूल संभावना को खा जाता है l
अहंकार युगों से एक समस्या रही है l परमेश्वर ने, नबी यहेजकेल के द्वारा, शक्तिशाली तटीय नगर सोर(Tyre) के अगुआ के अहंकार के विरुद्ध चेतावनी दी l उसने कहा कि राजा का अहंकार उसके पतन में बदल जाएगा : “तू जो अपना मन परमेश्वर-सा दिखाता है . . . मैं तुझ पर . . . परदेशियों से चढ़ाई कराऊँगा” (यहेजकेल 28:6-7) l तब वह जान जाएगा कि वह ईश्वर नहीं था, लेकिन नश्वर था (पद.9) l
अहंकार के विपरीत नम्रता है, जिसे लियुईस ने एक गुण के रूप में नामित किया है जिसे हम ईश्वर को जानने से प्राप्त करते हैं l लियुईस ने कहा कि जैसे-जैसे हम उसके संपर्क में आते हैं, हम “"ख़ुशी से विनम्र” बनते हैं, अपनी खुद की गरिमा के बारे में मूर्खतापूर्ण बकवास से छुटकारा पाने के लिए राहत महसूस करते हैं जो पहले हमें बेचैन और दुखी करता था l
जितना अधिक हम परमेश्वर की उपासना करते हैं, उतना ही अधिक हम उन्हें जानेंगे और अधिकाधिक अपने को नम्र कर सकते हैं l हम आनंद, नम्रता से प्रेम और सेवा करने वाले बन जाएँ l
