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सुबह की धुंध

एक सुबह मैं अपने घर के पास एक तालाब पर गयी l मैं एक पलटी हुई नाव पर बैठ गयी, सोचती हुई और एक कोमल पश्चिम हवा को पानी की सतह पर धुंध की एक परत का पीछा करते हुए देख रही थी । कोहरे की लड़ी चक्कर मार रहे थे और भँवर में घूम रहे थे l छोटे-छोटे "बवंडर" उठे और फिर खुद ही शांत हो गए l जल्द ही,  बादलों के बीच से सूरज की रोशनी दिखाई दी और धुंध गायब हो गई ।

इस दृश्य ने मुझे सुकून दिया क्योंकि मैंने इसे एक पद के साथ जोड़ा जिसे मैंने अभी पढ़ा था : "मैंने तेरे अपराधों को काली घटा के समान और तेरे पापों को बादल के समान मिटा दिया है” (यशायाह 44:22) । मैं उन पापपूर्ण विचारों की एक श्रृंखला से खुद का ध्यान हटाने के लिए जिसमें मैं कई दिनों से फंसी हुई थी, उस स्थान पर गयी थी l हालाँकि मैं उन्हें कबूल कर रही थी,  लेकिन मुझे आश्चर्य होने लगा कि क्या परमेश्वर मुझे माफ कर देगा जब मैंने उसी पाप को दोहराउंगी l  

उस सुबह,  मुझे पता था कि जवाब हां था । अपने भविष्यवक्ता यशायाह के माध्यम से, परमेश्वर ने इस्राएलियों पर अनुग्रह दिखाया जब वे मूर्ति पूजा की अविरत समस्या से जूझ रहे थे । यद्यपि उसने झूठे देवताओं का पीछा करना बंद करने के लिए कहा था,  परमेश्वर ने खुद ही उन्हें वापस भी आमंत्रित किया, और कहा, “तू मेरा दास है, मैं ने तुझे रचा है . . . मैं तुझ को न भूलूंगा” (पद.21) l

मैं इस तरह क्षमा को पूरी तरह समझ नहीं सकती, लेकिन मैं समझती हूँ कि परमेश्वर का अनुग्रह ही एकमात्र ऐसी चीज है जो हमारे पाप को पूरी तरह से ख़त्म कर सकता है हमें उससे चंगा कर सकता है l मैं आभारी हूं कि उसका अनुग्रह उसी के समान अनंत और दिव्य है, जब भी हमें इसकी आवश्यकता होती है वह उपलब्ध है ।

एक ही दल में

गंभीर चोट से ठीक होने के बाद वापस फुटबॉल के मैदान में लौटते समय,  टीम का एक साथी जो कि उसी स्थिति/position को खेलता है, धैर्यपूर्वक बेंच पर लौट गया l हालाँकि यह फुटबॉल खिलाड़ी भी उसी स्थिति/position के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा था,  लेकिन दोनों ने एक-दूसरे का समर्थन करने का फैसला किया और अपनी भूमिकाओं में आश्वस्त रहे । एक रिपोर्टर ने देखा कि दोनों एथलीटों का "मसीह में अपने विश्वास में अनोखा रिश्ता" है जो एक-दूसरे के लिए चल रही प्रार्थनाओं के द्वारा दिखाया गया । जब अन्य लोग देख रहे थे,  वे यह याद करके कि वे एक ही टीम में थे -  केवल खिलाड़ी के रूप में नहीं,  बल्कि यीशु में विश्वासियों के रूप में उसका प्रतिनिधि होकर - उन्होंने परमेश्वर को आदर दिया l

प्रेरित पौलुस विश्वासियों को "ज्योति की संतान” के रूप में जीने की याद दिलाता है जो यीशु की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं (1 थिस्सलुनीकियों 5:5–6) । मसीह द्वारा दिए गए उद्धार में हमारी सुरक्षित आशा के साथ,  हम ईर्ष्या,  असुरक्षा,  भय,  या डाह से बाहर निकलने के लिए किसी भी प्रलोभन से बच सकते हैं । इसके बजाय, हम "एक दूसरे को शांति [दे सकते हैं] और एक दूसरे की उन्नति का कारण [बन सकते हैं]” (पद.11) l हम आध्यात्मिक अगुओं का सम्मान कर सकते हैं जो परमेश्वर का आदर करते हैं और "मेलमिलाप से [रह सकते हैं]” जब हम अपने साझा लक्ष्य को पूरा करने के लिए सेवा करते हैं - लोगों को सुसमाचार के बारे में बताते हुए और दूसरों को यीशु के लिए जीने के लिए प्रोत्साहित करते हुए (पद.12–15) ।

जब हम एक ही टीम में सेवा करते हैं,  तो हम पौलुस की आज्ञा को ध्यान में रख सकते हैं : “सदा आनंदित रहो l निरंतर प्रार्थना में लगे रहो l हर बात में धन्यवाद करो; क्योंकि तुम्हारे लिए मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है” (पद.16-18) l

टूटे हृदय की प्रार्थना

“प्रिय स्वर्गिक पिता, मैं प्रार्थना करने वाला आदमी नहीं हूँ, लेकिन अगर आप ऊपर वहाँ हैं, और आप मुझे सुन सकते हैं, तो मुझे रास्ता दिखाएँ l मैं अपनी समस्या का हल ढूँढ़ने में असमर्थ हूँ l" यह प्रार्थना हिम्मत हार चुके जॉर्ज बेली द्वारा फुसफुसायी गयी, जो प्रसिद्ध अंग्रेजी फिल्म इट्स ए वंडरफुल लाइफ(It’s a Wonderful Life) का एक चरित्र है । अब उस प्रतिष्ठित दृश्य में उसकी आँखें में आंसू भर आते हैं । वे कथानक/script का हिस्सा नहीं थे, लेकिन उस भूमिका को निभाने वाले चरित्र ने जब वह प्रार्थना की उसने कहा कि उसने “अकेलापन महसूस किया,  लोगों की वह आशाहीनता जिनके पास मुड़ने की कोई दिशा नहीं थी l” उससे वह टूट गया l  

इस प्रार्थना का बुनियादी अर्थ है, बस "मेरी मदद कीजिए ।" और यह वही है जो भजन 109 में सुनाई देता है । दाऊद को अपनी समस्या का हल नहीं मिल रहा था : “दीन और दरिद्र,” उसका हृदय घायल” था (पद.22), और उसका शरीर “चर्बी न रहने से . . . सुख गया [था]” (पद.24) l वह "ढलती हुई छाया के समान जाता रहा [था]” (पद.23), और “लोगों में [उसकी] नामधराई” हो रही थी और लोग देखकर “सर हिलाते [थे]” (पद.25) l अपने चरम टूटेपन में, वह कहीं और नहीं मुड़ सकता था l उसने परम प्रभु यहोवा से उसे राह दिखाने के लिए अनुनय किया : “हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरी सहायता कर” (पद.26) l

हमारे जीवन में ऐसे काल आते हैं जब "टूटापन” सब कह देता है l ऐसे समय में यह जानना कठिन हो सकता है कि प्रार्थना क्या करें । हमारा प्रेमी परमेश्वर मदद के लिए हमारी सरल प्रार्थना का जवाब देगा ।

बेट्टी आंटी का तरीका

जब मैं छोटा था, तो जब भी मेरी अत्यधिक स्नेह करनेवाली बेट्टी आंटी आती थी, मुझे क्रिसमस जैसा लगता था । वह खिलौने लाती थी और दरवाजे से बाहर जाते समय पैसे भी दे जाती थी l जब भी मैं उनके साथ रहा, उन्होंने फ्रीज़र को आइसक्रीम से भर दिया और सब्जियां कभी नहीं पकायी l उनके कुछ नियम थे और मुझे देर रात तक जगा कर रखती थीं l परमेश्वर की उदारता को दर्शानेवाली मेरी आंटी अद्भुत थी । हालाँकि, स्वस्थ रूप से उन्नति करने के लिए, मुझे केवल आंटी बेट्टी के तरीके से अधिक की आवश्यकता थी । मैं चाहता था कि मेरे माता-पिता मुझसे और मेरे आचरण से अपेक्षा करें, और मेरी माने l    

परमेश्वर बेट्टी आंटी से अधिक मेरे विषय मुझसे पूछता है l जबकि वह हमें अथक प्रेम से भर देता है, एक ऐसा प्यार जो उस समय भी कभी डगमगाता नहीं जब हम विरोध करते हैं या भाग जाते हैं, वह हमसे कुछ अपेक्षा ज़रूर करता है l जब परमेश्वर इस्राएल को कैसे जीना है का निर्देश दिया, उसने दस आज्ञाएँ दीं, दस सुझाव नहीं (निर्गमन 20:1-17) । हमारे आत्म-धोखे के बारे में अभिज्ञ, परमेश्वर स्पष्ट अपेक्षाएँ प्रदान करता है : “हम परमेश्वर से प्रेम [करें] और उसकी आज्ञाओं को [मानें]” (1 यूहन्ना 5:2) l

शुक्र है, “[परमेश्वर की] आज्ञाएँ कठिन नहीं [हैं] (पद.3) । पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा, हम उनको व्यवहारिक रूप से जी सकते हैं जब हम परमेश्वर के प्रेम और आनंद का अनुभव करते हैं । हमारे लिए उसका प्रेम अनवरत है l लेकिन पवित्रशास्त्र हमें यह जानने में मदद करने के लिए एक प्रश्न प्रस्तुत करता है कि क्या हम बदले में परमेश्वर से प्रेम करते हैं : क्या हम उसकी आज्ञाओं का पालन कर रहे हैं जब पवित्र आत्मा हमारा मार्गदर्शन करता है?

हम कह सकते हैं कि हम परमेश्वर से प्यार करते हैं, लेकिन हम उसकी ताकत में क्या करते हैं वास्तविक कहानी बताती है ।