
परदेशी से प्रेम
जब मैं एक नए देश में गया, तो मेरे पहले अनुभवों में से एक ने मुझे अवांछनीय महसूस कराया । उस दिन छोटे से चर्च में एक सीट मिलने के बाद, जहाँ मेरे पति प्रचार कर रहे थे, एक अशिष्ट वृद्ध सज्जन ने मुझे चौंका दिया, जब उन्होंने कहा, “और पीछे की ओर बढ़िए l” उनकी पत्नी ने माफी मांगी क्योंकि उन्होंने बताया कि मैं हमेशा उनके कब्जे वाले बेंच में बैठी थी l वर्षों बाद मुझे पता चला कि मण्डली ने बेंचों को किराए पर दिया करती थी, जिसने चर्च के लिए धन जुटाया जा सके और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी व्यक्ति दूसरे की सीट नहीं ले सकता । जाहिर है कि वह मानसिकता कुछ दशकों तक चलती रही l
बाद में, मैंने इस बात पर विचार किया कि कैसे परमेश्वर ने इस्राएलियों को परदेशियों का स्वागत करने का निर्देश दिया, सांस्कृतिक प्रथाओं के विपरीत जिसका सामना मैंने किया l उन व्यवस्थाओं को स्थापित करने में जो उनके लोगों को फलने-फूलने देंगे, उसने उन्हें परदेशियों का स्वागत करने के लिए याद दिलाया क्योंकि वे खुद एक समय परदेशी थे (लैव्यव्यवस्था 19:34) । केवल उन्हें परदेशियों के साथ दयालुता (पद.33) ही नहीं बरतनी थी, बल्कि उन्हें उनसे “अपने ही समान प्रेम रखना” था” (पद.34) । परमेश्वर ने उन्हें मिस्र में उत्पीड़न से बचाकर, उन्हें एक देश दिया था जिसमें “दूध और मधु” की धाराएँ बहती हैं (निर्गमन 3:17) । वह उम्मीद करता था कि उसके लोग दूसरों से प्यार करेंगे, जिन्होंने अपना घर वहां बनाया था l
जब आप अपने बीच में अजनबियों से सामना करते हैं, परमेश्वर से किसी भी सांस्कृतिक प्रथाओं को प्रकट करने के लिए कहें जो आपको उनके साथ अपने प्यार को साझा करने से रोक सकते हैं ।

खोयी हुई : बुद्धि
अमेरिका में एक दो साल का बच्चा लापता हो गया । फिर भी उसकी माँ के आपातकालीन कॉल के तीन मिनट के भीतर, एक वकील ने उसे मेले में घर से सिर्फ दो भवन समूह दूर पाया । उसकी माँ ने वादा किया था कि वह उस दिन बाद में अपने दादाजी के साथ जा सकता था l लेकिन उसने अपना खिलौना ट्रैक्टर वहाँ तक चलाया था, और उसे अपनी पसंदीदा झूले के निकट खड़ा कर दिया था । जब लड़का सुरक्षित घर आया, तो उसके पिता ने समझदारी से खिलौने की बैटरी निकाल दी ।
यह छोटा लड़का वास्तव में स्मार्ट था, जहां वह जाना चाहता था, लेकिन दो साल के बच्चे एक और महत्वपूर्ण गुण भूल रहे हैं : बुद्धि l और वयस्कों के रूप हमें भी कभी-कभी इसकी कमी होती है । सुलैमान, जिसे अपने पिता दाऊद द्वारा राजा नियुक्त किया गया था(1 राजा 2), ने स्वीकार किया कि वह एक बच्चे की तरह महसूस कर रहा था l परमेश्वर ने उसे एक सपने में दिखाई दिया और कहा, “जो कुछ तू चाहे कि मैं तुझे दूँ, वह मांग” (3:5) । उसने जवाब दिया, “मैं छोटा लड़का सा हूँ जो भीतर बाहर आना जाना नहीं जानता . . . तू अपने दास को अपनी प्रजा का न्याय करने के लिए समझने की ऐसी शक्ति दे, कि मैं भले बुरे को परख सकूँ : क्योंकि कौन ऐसा है कि तेरी इतनी बड़ी प्रजा का न्याय कर सके?” (पद.7–9) । परमेश्वर ने सुलैमान को “परमेश्वर ने सुलैमान को . . . समुद्र तट की बालू के किनकों के तुल्य अनगिनित हूँ दिए” (4:29) ।
हमें वह ज्ञान कहाँ से मील सकता है जिसकी हमें आवश्यकता है? सुलैमान ने कहा कि परमेश्वर का भय मानना “बुद्धि” का आरंभ हैं (नीतिवचन 9:10) l इसलिए हम उसे हमें सिखाने से आरम्भ कर सकते हैं कि हमें अपने विषय सिखाएँ और हमारी बुद्धि से परे हमें बुद्धि दें l

जीवन के ड्रैगन से युद्ध
क्या आपने कभी ड्रैगन से लड़ाई की है? यदि आपने उत्तर नहीं दिया है, तो लेखक यूजीन पीटरसन आपसे असहमत हैं । अपनी किताब लॉन्ग ओबेडियंस इन द सेम डायरेक्शन(Long Obedience in the Same Direction) में उन्होंने लिखा, “ड्रेगन हमारे डर के अनुमान हैं, सबसे अधिक भयानक सृजन जो हमें चोट पहुंचा सकते हैं . . . l जब एक किसान का सामना एक शानदार अजगर हुआ वह पूरी तरह निम्न/ओछा हो गया l” उसका मतलब? जीवन ड्रेगन से भरा हुआ है : खतरनाक स्वास्थ्य संकट, अचानक नौकरी की हानि, असफल विवाह, मनमुटाव उत्पन्न करनेवाला उड़ाऊ संतान l ये "ड्रेगन" जीवन के औसत से कहीं बड़े खतरे और भंगुरता हैं जिनसे हम अकेले लड़ने के लिए अपर्याप्त हैं ।
लेकिन उन लड़ाइयों में, हमारे पास एक चैंपियन है । एक परी कथा चैंपियन नहीं - परम चैंपियन जिसने हमारी ओर से लड़ाई लड़ी है और सभी ड्रेगन को जो हमें नष्ट करना चाहते हैं जीत लिया है । चाहे वे हमारी अपनी विफलताओं के ड्रेगन हों या आध्यात्मिक शत्रु जो हमारे विनाश की इच्छा रखता है, हमारा चैंपियन इन सबसे महान है, जो पौलुस को यीशु के बारे में लिखने की अनुमति देता है, “उसने प्रधानताओं और अधिकारों को ऊपर से उतारकर उनका खुल्लमखुल्ला तमाशा बनाया और क्रूस के द्वारा उन पर जयजयकार की ध्वनि सुनाई” (कुलुस्सियों 2:15) । इस टूटे हुए संसार की विनाशकारी ताकतों का उसके सामने कोई मुकाबला नहीं है!
जिस क्षण हम महसूस करते हैं कि जीवन के ड्रेगन हमारे लिए बहुत बड़े हैं, वह क्षण है जिसमें हम मसीह के बचाव में विश्राम करना शुरू कर सकते हैं । हम भरोसे के साथ कह सकते हैं, “परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवंत करता है” (1 कुरिन्थियों 15:57) ।

समीक्षात्मक प्रतिक्रिया
कठोर शब्दों से चोट लगी । इसलिए मेरे दोस्त - एक पुरस्कार विजेता लेखक - को इस बात से जूझना पड़ा कि उन्हें मिली आलोचना का कैसे जवाब दिया जाए । उनकी नई किताब ने पांच सितारा समीक्षाएँ और एक प्रमुख पुरस्कार अर्जित किया था । तब एक सम्मानित पत्रिका समीक्षक ने उनकी छद्दम प्रशंसा के साथ अपमानजनक टिपण्णी करते हुए, उनकी पुस्तक को अच्छी तरह से लिखी गई बताया और फिर भी उसकी कठोर आलोचना की l दोस्तों की ओर मुड़ते हुए उन्होंने पूछा, “मुझे कैसे जवाब देना चाहिए?”
एक दोस्त ने सलाह दी, “जाने दो ।“ मैंने पत्रिकाओं को लिखने से सलाह साझा की, जिसमें इस तरह की आलोचना को नजरअंदाज करना या काम करना और लिखना जारी रखते हुए भी इससे सीखना शामिल है ।
आख़िरकार, हालाँकि, मैंने पवित्रशास्त्र – जिसमें सभी के लिए अच्छी सलाह है – देखने का फैसला किया कि वह प्रबल आलोचना के प्रति किस तरह प्रतिक्रिया करने को कहती है l याकूब की पुस्तक सलाह देती है, “हर एक मनुष्य सुनने के लिए तत्पर और बोलने में धीर और क्रोध में धीमा हो” (1:19) । प्रेरित पौलुस हमें “आपस में एक सा मन [रखने] की सलाह” देता है (रोमियों 12:16) ।
नीतिवचन का एक पूरा अध्याय, हालांकि, विवादों पर प्रतिक्रिया देने के लिए विस्तारित ज्ञान प्रदान करता है । नीतिवचन 15:1 कहता है, “कोमल उत्तर सुनने से गुस्सा ठंडा हो जाता है l” “जो विलम्ब से क्रोध करनेवाला है, वह मुकद्दमों को दबा देता है” (पद.18) । इसके अलावा, “जो डांट को सुनता, वह बुद्धि प्राप्त करता है” (पद.32) । इस तरह की बुद्धिमत्ता को ध्यान में रखते हुए, परमेश्वर हमारी मदद कर सकता है कि हम अपनी जुबान पर लगाम दें, जैसा कि मेरे दोस्त ने किया । हालाँकि, सभी से अधिक, बुद्धि हमें “यहोवा का भय मानने” की शिक्षा देती है क्योंकि “महिमा से पहले नम्रता आती है” (पद.33) ।
