
घुसपैठिये को निकालना
जब मेरे पति बिस्तर से उठकर रसोई में गए, तो बहुत सबेरा नहीं हुआ था l मैंने बत्ती को जलते और बुझते हुए देखा और उनकी हरकत पर आश्चर्य किया l तब मुझे याद आया कि पिछली सुबह मैं रसोई के काउंटर पर एक “घुसपैठिए” को देखकर चिल्लाई थी l अनुदित : छह पैरों वाला किस्म का अवांछनीय प्राणी l मेरे पति मेरे संदेह को जानते थे और उसे निकालने के लिए तुरंत पहुंच गए थे l आज सुबह वह यह सुनिश्चित करने के लिए जल्दी उठे कि हमारा रसोई कीड़ा रहित(bug-free) हो ताकि मैं बिना किसी चिंता के प्रवेश कर सकूँ l गजब के पति है!
मेरे पति मुझे अपने मन में रखते हुए जागे, खुद की ज़रूरत के ऊपर मेरी ज़रूरत को l मेरे लिए, उनकी क्रिया पौलुस द्वारा इफिसियों 5:25 में वर्णित प्रेम को दर्शाती है, “हे पतियो, अपनी अपनी पत्नी से प्रेम रखो जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिए दे दिया l” पौलुस आगे बढ़ता है, “पति अपनी अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे” (पद.28) l पौलुस द्वारा पति के प्रेम की तुलना यीशु मसीह के प्रेम से करना इस केंद्र बिंदु पर है कि कैसे यीशु ने अपनी ज़रूरतों के आगे हमारी ज़रूरतों को रखा l मेरे पति को पता है कि मैं कुछ घुसपैठियों से डरती हूँ, और इसलिए उन्होंने मेरी चिंता को अपनी प्राथमिकता बना दिया l
यह सिद्धांत केवल पतियों पर लागू नहीं होता है l यीशु के उदाहरण के बाद, हम में से प्रत्येक तनाव, भय, शर्म या चिंता के किसी घुसपैठिये को दूर करने में मदद करने के लिए प्यार से त्याग कर सकता है ताकि कोई व्यक्ति दुनिया में अधिक स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सके l

वह हमें नहीं छोड़ेगा
जूलियो अमेरिका में जॉर्ज वाशिंगटन ब्रिज के पार साइकिल से जा रहा था – एक व्यस्त सड़क, जो न्यूयॉर्क शहर और न्यू जर्सी को जोड़ती है – जब उसे जीवन –या – मौत की स्थिति का सामना करना पड़ा l एक आदमी पुल के किनारे पर खड़ा नदी में कूदने की तैयारी कर रहा था l यह जानते हुए कि पुलिस समय पर नहीं आएगी, जुलियों ने त्वरित कार्यवाई की l वह याद करता है कि वह अपनी साइकिल से उतरा और अपनी बाहों को फैलाते हुए बोला : “ऐसा मत करो l हम तुमसे प्यार करते हैं l” फिर, एक लाठी लिए हुए चरवाहे की तरह, उसने उस परेशान आदमी को पकड़ लिया, और दूसरे राहगीर की मदद से उसे सुरक्षित बचा लिया l ख़बरों के मुताबिक, जुलियो उस आदमी को छोड़ना नहीं चाहता था, भले ही वह सुरक्षित था l
दो सहस्त्राब्दी पहले, एक जीवन-या-मृत्यु की स्थिति में, अच्छा चरवाहा, यीशु, ने कहा कि वह अपना जीवन उनको बचाने के लिए त्यागेगा जो उस पर विश्वास करेंगे और वह उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा l उसने संक्षेप में बताया कि वह अपने भेड़ों को कैसे आशीष देगा : वे व्यक्तिगत रूप से उसे जानेंगे, अनंत जीवन का उपहार पाएंगे, नाश नहीं होंगे, और उसकी देखभाल में सुरक्षित रहेंगे l यह सुरक्षा कमजोर और निर्बल भेड़ की क्षमता पर निर्भर नहीं करती है, लेकिन चरवाहा की पर्याप्तता पर जिसके “हाथ से [कोई भी उन्हें छीन] नहीं” सकेगा (यूहन्ना 10:28-29) l
जब हम व्याकुल थे और आशाहीन महसूस कर रहे थे, तो यीशु ने हमें बचाया; अब हम उसके साथ अपने सम्बन्ध में महफूज़ और सुरक्षित महसूस कर सकते हैं l वह हमसे प्यार करता है, हमें खोजता है, हमें ढूंढ़ लेता है, हमें बचाता है, और हमें कभी नहीं छोड़ने का वादा करता है l

मसीह को प्रतिबिंबित कैसे करें
लिजीयू की थेरेस Thérèse of Lisieux (एक फ़्रांसिसी नन/मठवासिनी जो चर्च की एक प्रमुख सदस्य थी) एक खुशहाल और चिंतामुक्त लड़की थी- जब तक कि उसकी माँ की मृत्यु नहीं हुई जब वह सिर्फ चार साल की थी l वह संकोची हो गयी और आसानी से उत्तेजित हो जाती थी l लेकिन कई साल बाद क्रिसमस की पूर्व संध्या पर, वह सब कुछ बदल गया l अपने चर्च समुदाय के साथ यीशु के जन्म का जश्न मनाने के बाद, उसने परमेश्वर को उसके भय से मुक्त करने और उसे ख़ुशी देने का अनुभव किया l उसने परमेश्वर को जिसने स्वर्ग छोड़ा और एक मनुष्य, यीशु बना, और जिसने उसके अन्दर निवास किया, उसी की सामर्थ्य को कारण बताया l
मसीह का हमारे भीतर बसने का क्या मतलब है? यह एक रहस्य है, पौलुस ने कुलुस्से के चर्च से कहा l यह वह है जिसे परमेश्वर ने “समयों और पीढ़ियों से गुप्त” रखा” (कुलुस्सियों 1:26), लेकिन उसने परमेश्वर के लोगों पर प्रगट किया l परमेश्वर ने “उस भेद की महिमा का मूल्य . . . . . यह है कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में वास करता है” (पद.27) उन पर खुलासा किया l क्योंकि मसीह अब कुलुस्सियों में वास करता था, उन्होंने नए जीवन की ख़ुशी का अनुभव किया l अब वे पाप के पुराने व्यक्तित्व के दास नहीं थे l
यदि हमने यीशु को अपना उद्धारकर्ता माना है, तो हम भी उसके हमारे अन्दर निवास के इस रहस्य को जीते हैं l उसकी आत्मा के द्वारा, वह हमें भय से मुक्त कर सकता है, जैसा कि उसने थेरेस को किया था, और हमारे भीतर अपनी आत्मा का फल, जैसे आनंद, शांति और आत्म-नियंत्रण विकलित कर सकता है (गलातियों 5:22-23) l
आइये हम अपने भीतर मसीह के अद्भुत रहस्य के लिए धन्यवाद दें l

प्रेम में जड़वत
“इसमें बस इतना ही करना है!” मैगी ने कहा । उसने अपने फूल के पौधे से एक तने को काट लिया था, उसने कटे हुए सिरे को शहद में डुबो दिया, और उसे कम्पोस्ट खाद से भरे बर्तन में गाड़ दिया । मैगी मुझे सिखा रही थी कि कैसे इन फूलों को बढ़ाया जाए : कैसे एक स्वस्थ पौधा से कई पौधे बनाए जाएँ, ताकि मेरे पास दूसरों के साथ साझा करने के लिए फूल हों । शहद, उसने कहा, छोटे पौधे की जड़ें उगाने में मदद करता है ।
उसको काम करते हुए देखकर, मुझे आश्चर्य हुआ कि किस तरह की चीजें हमें आध्यात्मिक जड़ें जमाने में मदद करती हैं । विश्वास के मजबूत, फलने-फूलने में परिपक्व लोग होने में हमें क्या मदद करती है? क्या हमें मुरझाने नहीं देती या विकास करने में मदद करता है? पौलुस, इफिसियों को लिखते हुए कहता है कि हम “प्रेम में जड़ पकड़कर और नेव डालकर” जड़वत हैं (इफिसियों 3:17) । यह प्रेम परमेश्वर से आता है, जो हमें पवित्र आत्मा देकर हमें मजबूत बनाता है । मसीह हमारे दिलों में निवास करता है l और जब हम “समझने की शक्ति [पाते हैं] कि उसकी(मसीह का प्रेम) चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊँचाई, और गहराई कितनी है” (पद.18), तो हम परमेश्वर की उपस्थिति का एक समृद्ध अनुभव प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि हम “परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण” हैं (पद.19 AMP) ।
आध्यात्मिक रूप से बढ़ने में परमेश्वर के प्रेम में जड़वत होना जरूरी है - इस सत्य का ध्यान करते हुए कि हम परमेश्वर के प्रिय हैं जो “हमारी विनती और समझ से कही अधिक काम कर सकता है” (पद.20) । हमारे विश्वास का कितना अविश्वसनीय आधार!
