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देखने के लिए आँखें

मुझे हाल ही में एनामॉर्फिक/anamorphic(पारस्परिक रूप से लंबवत त्रिज्या के साथ विभिन्न ऑप्टिकल इमेजिंग प्रभाव का उत्पादन) कला के आश्चर्य का पता चला । यादृच्छिक/क्रम रहित भागों के वर्गीकरण के रूप में पहली बार दिखाई देने पर, एक एनामॉर्फिक मूर्तिकला केवल सही कोण से देखे जाने पर समझ में आता है । एक टुकड़े में, लम्बवत स्तंभों की एक श्रृंखला एक प्रसिद्ध नेता के चेहरे को प्रकट करने के लिए संरेखित हैं । दूसरे में, केबल(cable) का एक ढेर एक हाथी की रूपरेखा बन जाता है । तार द्वारा निलंबित सैकड़ों काले बिन्दुओं से बनी एक और कलाकृति, सही ढंग से देखने पर एक महिला की आंख बन जाती है । एनामॉर्फिक कला की कुंजी इसे विभिन्न कोणों से देखने की है जब तक कि इसका अर्थ सामने नहीं आता ।

इतिहास, कविता और ज्यादा के हजारों छंदों के साथ, बाइबल कभी-कभी समझने में कठिन हो सकती है । लेकिन पवित्रशास्त्र स्वयं हमें बताता है कि इसका अर्थ कैसे अनलॉक किया जाए। इसके साथ एक एनामॉर्फिक मूर्तिकला की तरह व्यवहार करें : इसे विभिन्न कोणों से देखें और इस पर गहराई से ध्यान दें ।

मसीह के दृष्टान्त इस तरह काम करते हैं । जो लोग उन पर ध्यान देते हैं उन्हें उनका अर्थ देखने के लिए “आँखें” मिलेंगी (मत्ती 13:10-16) l पौलुस ने तीमुथियुस को उसके शब्दों पर “ध्यान” देने के लिए कहा ताकि परमेश्वर उसे अंतर्दृष्टि दे (2 तीमुथियुस 2:7) । और भजन 119 में बार-बार आने वाले शब्द पवित्रशास्त्र पर ध्यान देने का वह तरीका है जिससे बुद्धिमत्ता और अंतर्दृष्टि आती है जिससे उसके अर्थ समझने के लिए हमारी आँखें खुलती हैं (119:18, 97–99) ।

एक सप्ताह तक एक दृष्टान्त पर विचार करना या एक बैठक में एक सुसमाचार पढ़ना कैसा रहेगा? सभी कोणों से एक पद पर विचार करने में कुछ समय बिताएं । गहराई में जाएँ । बाइबल की अंतर्दृष्टि, पवित्रशास्त्र पर ध्यान देने से आती है, न कि इसे केवल पढ़ने से l

हे परमेश्वर, हमें देखने के लिए आंखें दीजिये l

कभी पर्याप्त नहीं

फ्रैंक बोरमन ने चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले पहले अंतरिक्ष मिशन की कमान संभाली । वह प्रभावित नहीं हुआ l दोनों तरफ से यात्रा में दो दिनों का समय लगा l फ्रैंक को गति-मिचली/रुग्णता(motion sickness) हो गई और उसको उलटी आ गयी l उन्होंने कहा कि तीस सेकंड के लिए वजन रहित होना अच्छा था । फिर उसे इसकी आदत हो गई । पास में उसने चंद्रमा को धूसर और गड्ढेदार पाया l उनके कर्मी दल ने धूसर बंजर भूमि की तस्वीरें लीं, फिर ऊब गए ।

फ्रैंक वहाँ गया जहाँ पहले कोई नहीं गया था । यह पर्याप्त नहीं था l यदि वह इस संसार के  बाहर के एक अनुभव से जल्दी थक गया, तो शायद हमें इस बात की अपेक्षा कम करनी चाहिए कि इसमें क्या निहित है । सभोपदेशक के शिक्षक ने देखा कि कोई भी सांसारिक अनुभव परम आनन्द प्रदान नहीं करता है । “न तो आँखें देखने से तृप्त होती हैं, और न कान सुनने से भरते हैं” (1: 8) । हम परम आनंद के क्षणों को महसूस कर सकते हैं, लेकिन हमारा उत्साह जल्द ही मिट जाता है और हम अगले रोमांच की तलाश करते हैं ।

फ्रैंक के पास एक जीवनदायक क्षण था, जब उसने पृथ्वी को चंद्रमा के पीछे अंधेरे से उठते देखा । नीले और सफ़ेद घूमते हुए संगमरमर की तरह, हमारा संसार सूरज की रोशनी में चमकने लगा l इसी तरह, हमारी सच्ची खुशी पुत्र(Son) से आती है जो हम पर चमकता है l यीशु हमारा जीवन, अर्थ, प्रेम और सौंदर्य का एकमात्र अंतिम स्रोत है । हमारी गहरी संतुष्टि इस दुनिया से आती है । हमारी समस्या? हम चंद्रमा तक जा सकते हैं, फिर भी बहुत दूर नहीं जाते हैं l

भटक जाना

मवेशियों के खेतों के पास रहते हुए, माइकल नामक एक हँसानेवाला(Comedian) देखा करता था कि किस तरह चरते-चरते गायों के भटक जाने की सम्भावना रहती थी l एक गाय अच्छे "हरे चरागाहों" की तलाश में आगे बढ़ती है l खेत के किनारे पर, गाय को एक छायादार पेड़ के नीचे कुछ अच्छी ताजा घास मिल जाती है l बाड़े के एक टूटे हिस्से के ठीक उस पार खाने लायक स्वादिष्ट वनस्पति है । फिर गाय बाड़ से परे सड़क तक चली जाती है । वह धीरे-धीरे “चरते हुए” खो जाती है l

घूमने की समस्या में गाय अकेले नहीं होती हैं । भेड़ें भी भटकती हैं, और इस बात की संभावना है कि लोगों में भटकने की सबसे बड़ी प्रवृत्ति है ।

शायद यही एक कारण है कि परमेश्वर बाइबल में हमारी तुलना भेड़ों से करता है । लापरवाह समझौता और मूर्खतापूर्ण निर्णयों के द्वारा दिशाहीन होकर “मार्ग भटक जाना” सरल हो सकता है, और ध्यान नहीं देना कि हम सच्चाई से कितनी दूर भटक गए हैं l 

यीशु ने फरीसियों को एक खोई हुई भेड़ की कहानी सुनाई । भेड़ चरवाहे के लिए इतनी कीमती थी कि उसने अपनी दूसरी भेड़ों को पीछे छोड़ दिया जबकि उसने भटकी भेड़ को खोजा l और जब उसने भटकी हुई को खोज लिया, उसने जश्न मनाया! (लूका 15:1-7) ।

परमेश्वर की ऐसी प्रसन्नता उन लोगों पर है जो उनकी ओर फिरते हैं । यीशु ने कहा, “मेरे साथ आनंद करो, क्योंकि मेरी खोयी हुई भेड़ मिल गयी है”(पद.6) । परमेश्वर ने हमें बचाने और हमें घर लाने के लिए एक उद्धारकर्ता भेजा है ।

वादा निभाने वाला

लीना से किए गए वादों की गंभीरता से घबराया हुआ, जॉन ने अपनी शादी की कसमों को दोहराते हुए खुद को लड़खड़ाते हुए पाया । उसने सोचा, विश्वास किये बिना कि वादों को पूरा करना संभव है मैं ये वादे कैसे कर सकता हूं? उसने विवाह समारोह को पूरा किया, लेकिन उसकी प्रतिबद्धताओं का वजन बना रहा । स्वागत समारोह(reception) के बाद, जॉन अपनी पत्नी को चैपल/चर्च में ले गया, जहाँ उसने प्रार्थना की - दो घंटे से अधिक समय तक - कि परमेश्वर उसे लीना को प्यार करने और उसकी देखभाल करने के उसके वादे को निभाने में मदद करेगा ।

जॉन की शादी के दिन का खौफ उसके मानवीय भंगुरता की मान्यता पर आधारित थी । लेकिन परमेश्वर, की ऐसी कोई सीमा नहीं है जिसने अब्राहम की संतानों (गलतियों 3:16) के माध्यम से राष्ट्रों को आशीष देने का वादा किया था l

अपने यहूदी मसीही पाठकों को दृढ़ता और धैर्य से यीशु में अपने विश्वास में बने रहने के लिए चुनौती देने के लिए, इब्रानियों के लेखक ने अब्राहम को दी गयी परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ याद दिलायी, कुलपिता की धीरज से प्रतीक्षा और उन वादों की पूर्णता जो की गयी थी (इब्रानियों 6:13-15) l अब्राहम और सारा की वरिष्ठ नागरिकों के रूप में स्थिति, अब्राहम को "कई संतान" (पद.14) देने के परमेश्वर के वादे को पूरा करने में कोई बाधा नहीं थी ।

क्या कमजोर, निर्बल और मानवीय होने के बावजूद आप परमेश्वर पर भरोसा करने की चुनौती महसूस करते हैं? क्या आप अपनी वचनबद्धताओं, अपने संकल्पों और वादों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं? 2 कुरिन्थियों 12: 9 में, परमेश्‍वर हमारी मदद करने का वादा करता है : “मेरा अनुग्रह तेरे लिए बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है l” छत्तीस से अधिक वर्षों तक परमेश्वर ने जॉन और लीना को अपने वादों के प्रति समर्पित रहने में मदद की है । उसकी मदद प्राप्त करने के लिए उस पर भरोसा क्यों नहीं?

प्रेम के ताले

मैं कई हजार तालों को देखकर हैरान हुई, जिनमें से कईयों पर प्रेमियों के नाम के प्रथमाक्षर खुदे हुए थे, जो पेरिस के पोंट देस आर्ट्स(Pont des Arts) पुल के हर एक कल्पनीय भाग से जुड़े हुए थे l सीन नदी पर यह पैदल पुल प्यार के इन प्रतीकों के पटा पड़ा था, जो प्रेमियों के “हमेशा” की प्रतिबद्धता की घोषणा थी l 2014 में, प्यार के तालों का अनुमान पचास टन लगाया गया था जो कि बहुत अधिक था और इसने पुल के एक हिस्से को ध्वस्त भी कर दिया था, जिससे तालों को हटाने की ज़रूरत पड़ी l

इतने सारे प्रेम के तालों की मौजूदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि इंसान होने के कारण  हम आश्वासन चाहते हैं कि प्यार सुरक्षित है l पुराना नियम की एक किताब, श्रेष्ठगीत में, दो प्रेमियों के बीच एक संवाद को दर्शाया गया है, स्त्री अपने प्रिय से उसे "नगीने के समान अपने हृदय पर लगा [ने], और ताबीज के समान अपनी बाँह पर [बाँधने] (गीत 8: 6) की इच्छा व्यक्त कर सुरक्षित प्यार की अभिलाषा करती है । उसकी लालसा उसके प्रेम में महफूज़ और सुरक्षित होना था जैसे एक मुहर हृदय पर लगी हो या उसकी ऊँगली में एक अंगूठी l 

रोमांटिक/अद्भुत प्रेम की लालसा जो श्रेष्ठगीत में व्यक्त किया गया है इफिसियों में नए नियम के सत्य की ओर इशारा करती है कि हम परमेश्वर की आत्मा की "मुहर" (1:13) से चिह्नित किये गए हैं। जबकि मानव प्रेम चंचल हो सकता है, और एक पुल से ताले को हटाया जा सकता है, मसीह की आत्मा का हममें निवास परमेश्वर के कभी न खत्म होने वाले, अपने प्रत्येक बच्चे के लिए प्रतिबद्ध प्रेम का प्रदर्शन करने वाली एक स्थायी मुहर है ।