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परमेश्वर हमारा बचानेवाला

खुले समुद्र में, एक बचानेवाले ने आतंकित तैराकों को ट्रायथलॉन(लम्बी दूरी की तैराकी प्रतियोगिता) में प्रतिस्पर्धा करने में मदद करने के लिए अपनी नाव तैनात की l “नाव के बीच के हिस्से को न पकड़ें!” उसने तैराकों को ध्यान दिलाया, यह समझाते हुए कि इस प्रकार का प्रयास उसके नाव को डूबा देगी l इसके बजाय, उसने थके हुए तैराकों को नाव के अगले भाग की ओर निर्देशित किया l वहां वे एक लूप/फंदे को पकड़ सकते थे, जिससे सुरक्षाकर्मी व्यक्ति को बचाने में मदद कर सके l

जब भी जीवन या लोग हमें नीचे खींचने की धमकी देते हैं, यीशु में विश्वासियों के रूप में,  हम जानते हैं कि हमारे पास एक बचाने वाला है l “क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है : देखो, मैं आप ही अपनी भेड़-बकरियों की सुधि लूँगा, और उन्हें ढूँढूँगा . . . मैं उन्हें उन सब स्थानों से निकाल ले आऊँगा, जहां जहां वे . . . तितर-बितर हो गईं [हैं]” (यहेजकेल 34:11-12) l

जब परमेश्वर के लोग निर्वासन में थे तब नबी यहेजकेल का यह आश्वासन था l उनके अगुवे  उनकी उपेक्षा किये थे और उनका शोषण किया था,  उनके जीवन को लूटा था और [परमेश्वर के रेवड़] का नहीं, अपना ही पेट भरा” (पद.8) l परिणामस्वरूप, लोग “सारी पृथ्वी के ऊपर तितर-बितर [हुए]; और न तो कोई उनकी सुधि लेता था, न कोई उनको ढूंढता था” (पद.6) l 

लेकिन परमेश्वर यहोवा यों कहता है, “मैं [अपने झुण्ड को] छुड़ाऊँगा” (पद.10), और उसकी प्रतिज्ञा अभी भी स्थिर है l 

हमें क्या करना है?  परमेश्‍वर और उसके वचनों को मजबूती से थामे रहें l वह कहता है, “मैं आप ही अपनी भेड़-बकरियों की सुधि लूँगा, और उन्हें ढूँढूँगा” (पद.11) l कसकर पकड़े रहने के लिए यह एक छुटकारे की प्रतिज्ञा है l

निर्बलों को बचाओ

आप क्या चुनेंगे - स्विट्जरलैंड में छुट्टी या प्राग में बच्चों को खतरे से बचाना? निकोलस विंटन, जो एक साधारण आदमी था, ने  बाद वाला चुना l 1938 में चेकोस्लोवाकिया और जर्मनी के बीच युद्ध क्षितिज पर लग रहा था l निकोलस ने प्राग में शरणार्थी शिविरों का दौरा करने के बाद, जहां कई यहूदी नागरिक भयानक परिस्थितियों में रहते थे, उसने मदद करने की योजना बनाने के लिए विवश हुआ l उसने द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत से पहले ब्रिटिश परिवारों द्वारा देखभाल के लिए प्राग से ग्रेट ब्रिटेन तक सुरक्षित रूप से सैकड़ों बच्चों को पहुंचाने के लिए धन जुटाया l

उसके कार्यों ने भजन 82 में उन लोगों के बारे में उदाहरण प्रस्तुत किया जो “कंगाल और निर्धन का न्याय [चुकाते] है” (पद.3) l इस भजन का लेखक आसफ,  अपने लोगों को इस कारण के लिए प्रवीण बनाना चाहते थे : “कंगाल और निर्धन को बचा लो; दुष्टों के हाथ से उन्हें छुड़ाओ” (पद.4) l जैसे बच्चों को बचाने के लिए निकोलस ने अथक प्रयास किया,  भजनकार ने उन लोगों के लिए बोला जो खुद के लिए नहीं बोल सकते थे - गरीब और विधवा जिन्हें न्याय और सुरक्षा की आवश्यकता थी l

आज हम हर जगह देखते हैं कि हम युद्ध, तूफान और अन्य कठिनाइयों के कारण लोगों को जरूरत को देखते हैं l हालाँकि हम हर समस्या का समाधान नहीं कर सकते हैं,  हम प्रार्थनापूर्वक विचार कर सकते हैं कि हम उन परिस्थितियों में मदद करने के लिए क्या कर सकते हैं जो परमेश्वर हमारे जीवन में लाता है l

आत्मिक ड्राइविंग(चालन)

जब हम अपने ड्राइविंग स्कूल के प्रशिक्षक से ड्राइव करना सीख रहे थे, तो प्रशिक्षक हमेशा कहा करते थे कि हम सड़क को बारीकी से देखें, खतरों की पहचान करें, यह अनुमान लगाने के लिए कि खतरे क्या हो सकते हैं, तय करें कि हम कैसे प्रतिक्रिया करेंगे, और फिर, यदि आवश्यक हो, तो उस योजना को निष्पादित करें l यह दुर्घटनाओं से बचने के लिए जानबूझकर की जाने वाली रणनीति थी l

मैं सोचता हूँ कि यह विचार हमारे आध्यात्मिक जीवन में कैसे स्थानांतरित हो सकता है l  इफिसियों 5 में, पौलुस ने इफिसियों के विश्वासियों से कहा, ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो : निर्बुद्धियों के समान नहीं पर बुद्धिमान के समान चलो” (पद.15) l पौलुस जानता था कि कुछ ख़तरनाक बाधाएँ इफिसियों को पटरी से उतार दे सकते थे - यीशु में उनके नए जीवन के साथ जीवन के पुराने तरीकों का संघर्ष (पद.8, 10-11) l इसलिए उसने उन्नति कर रही कलीसिया को ध्यान देने का निर्देश दिया l

अनुवादित शब्द “ध्यान से देखो, कि कैसी चलते हो” का शाब्दिक अर्थ है “देखें कि आप कैसे चलते हैं l” दूसरे शब्दों में, चारों ओर देखो l खतरों पर ध्यान दें,  और मतवालापन और निरंकुश जीवन (पद.18) जैसे व्यक्तिगत खतरों से बचें l इसके बजाय, प्रेरित ने कहा, हम अपने जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा को खोज सकते हैं (पद.17), जबकि, साथी विश्वासियों के साथ,  हम गाते हैं और उसे(परमेश्वर को) धन्यवाद देते हैं पद.19-20) l

कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस खतरे का सामना करते हैं - और यहां तक ​​कि जब हम ठोकर खाते हैं - हम मसीह में अपने नए जीवन का अनुभव कर सकते हैं जब हम उसकी असीम सामर्थ्य और अनुग्रह पर निर्भरता में उन्नति करते हैं l

खुबसूरत इनाम

अमेरिका में एक शिक्षक डोनेलन, हमेशा एक पाठक(Reader) थी,  लेकिन एक दिन इसका पूरा लाभ मिला l वह अपनी लंबी बीमा पॉलिसी की समीक्षा कर रही थी जब पृष्ठ 7 पर उसे एक अद्भुत इनाम मिला l उनके “It Pays to Read(पढ़ने से मिलता है)” प्रतियोगिता के हिस्से के रूप में,  कंपनी पहले व्यक्ति को उस अनुबंध को इतनी दूर तक पढ़ने के लिए $ 10,000 (लगभग 72 लाख) दे रही थी l  उन्होंने बच्चों की साक्षरता के लिए उसके क्षेत्र के स्कूलों को हजारों डॉलर का दान दिया l वह कहती है,  “मैं हमेशा वह व्यक्ति रही हूं जो अनुबंध(contract) पढ़ती है l मैं सबसे ज्यादा किसी के बाबत हैरान थी!”

भजनकार चाहता था कि उसकी आँखें परमेश्वर के बारे में “अद्भुत बातें” देखने के लिए खुल जाएँ (भजन 119:18) l उसके पास एक समझ ज़रूर थी कि परमेश्वर चाहता है कि वह जाना जाए, और इसलिए वह उसके(परमेश्वर) साथ गहरी निकटता की चाह रखता था l उसकी इच्छा यह देखने की अधिक थी कि परमेश्वर कौन है,  उसने पहले से क्या दिया है,  और उसका अनुसरण और अधिक निकटता से कैसे करें (पद.24,98) l उसने लिखा, "आहा! मैं तेरी व्यवस्था से कैसी प्रीति रखता हूँ” (पद.97) l

हमारे पास भी परमेश्वर, उसके चरित्र और उसके प्रावधानों के बारे में विचार करने और उसके बारे में जानने के लिए समय निकालने का विशेषाधिकार है – उसके विषय में जानना और उसके निकटता में उन्नति करना l परमेश्वर चाहता है कि वह हमें निर्देश दे, मार्गदर्शित करे, और वह कौन है के प्रति हमारे हृदयों को खोल दे l जब हम उसे खोजते हैं,  तो वह हमें अधिक आश्चर्यचकित करता है कि वह कौन है और उसकी उपस्थिति का आनंद क्या है!