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प्रभु के सामने नाचना

कई साल पहले, मेरी पत्नी और मैं एक छोटे से चर्च में गए जहां आराधना के दौरान एक स्त्री गलियारे में नाचने लगी l जल्द ही दूसरे उसके साथ जुड़ गए l कैरोलिन और मैंने एक-दूसरे को देखा और हमारे बीच एक अनकहा समझौता हुआ : “मैं नहीं!” हम ऐसे चर्च परम्पराओं से आते हैं जो एक गंभीर रीतिरिवाज़ का पक्षधर है, और यह दूसरी प्रकार की आराधना हमारी आरामदेह स्थिति(comfort zone) के कहीं परे थी l

लेकिन यदि मरियम की “बर्बादी” के बारे में मरकुस की कहानी का कुछ भी मतलब है, तो यह सुझाव देता है कि यीशु के लिए हमारा प्यार खुद को उन तरीकों से व्यक्त कर सकता है जो दूसरों को असहज लगते हैं (मरकुस 14:1-9) l मरियम के अभिषेक में एक साल की मजदूरी शामिल थी l यह एक “नासमझ” कार्य था जिसने शिष्यों के तिरस्कार को आमंत्रित किया l मरकुस उनकी प्रतिक्रिया को समझाने के लिए जिस शब्द का उपयोग करता है उसका अर्थ  “सूंघना/सूंघ कर लेना” और तुच्छ समझना और मज़ाक है l यीशु की प्रतिक्रिया से डरकर मरियम घबरा गयी होगी l लेकिन उसने उसकी भक्ति के कार्य की प्रशंसा की और अपने खुद के शिष्यों के विरुद्ध उसका बचाव किया, क्योंकि यीशु ने उस प्रेम को देखा जिसने उसके कार्य को प्रेरित किया, बावजूद इसके कि उसके कार्य के अव्यवहारिक स्वभाव पर कुछ लोग क्या कहेंगे l उसने कहा, “उसे छोड़ दो; उसे क्यों सताते हो? उस ने तो मेरे साथ भलाई की है” (पद.6) l

अलग-अलग प्रकार की आराधना – अनौपचारिक, औपचारिक, शांत, विपुल – यीशु के लिए प्रेम के एक ईमानदार उद्गार का प्रतिनिधित्व करती है l वह सभी आराधना के योग्य है जो प्रेम के हृदय से निकलती है l

शायद मूर्तियाँ

सैम हर दिन दो बार अपना सेवानिवृत्ति खाता देखता है l उसने तीस साल तक बचत की, और एक बढ़ते शेयर बाजार के बढ़ने के साथ अंत में उसके पास रिटायर होने के लिए पर्याप्त है l जब तक स्टॉक डूबता नहीं है l इस डर से सैम को अपने बैलेंस(बाकी रकम) की चिंता रहती है l

यिर्मयाह ने इस बारे में चेतावनी दी : “हे यहूदा, जितने तेरे नगर हैं उतने ही तेरे देवता भी हैं; और यरूशलेम के निवासियों ने हर एक सड़क में उस लज्जापूर्ण बाल की वेदियाँ बनाकर उसके लिए धुप जलाया है” (11:13) l

यहूदा की मूर्तिपूजा उल्लेखनीय है l वे जानते थे कि प्रभु ही परमेश्वर था l वे किसी और की उपासना कैसे कर सकते थे? वे अपने होड़(bet) को सुरक्षित कर रहे थे l उन्हें भविष्य जीवन के लिए परमेश्वर की ज़रूरत थी, क्योंकि केवल सच्चा परमेश्वर ही उन्हें मृतकों में से जी उठा सकता था l लेकिन अब इसका क्या? गैर-यहूदी कथित ईश्वर स्वास्थ्य, धन और बहुतायत का वादा करते थे, इसलिए उनसे भी क्यों नहीं प्रार्थना की जाए, शायद?

क्या आप देख सकते हैं कि यहूदा की मूर्तिपूजा हमारी भी परीक्षा है? प्रतिभा, शिक्षा, और पैसा होना अच्छा है l लेकिन अगर हम सावधान नहीं होते हैं, तो हम अपना विश्वास उनके पास स्थानांतरित कर सकते हैं l हम जानते हैं कि हमारी मृत्यु के समय हमें परमेश्वर की आवश्यकता होगी, और हम उन्हें अभी हमें आशीष देने के लिए कहेंगे l लेकिन हम इन कमतर कथित ईश्वरों पर भी भरोसा करेंगे, शायद l

आपका भरोसा कहाँ है? बैक-अप(सहायक) भी तो मूर्तियाँ ही हैं l परमेश्वर के अनेक उपहारों के लिए धन्यवाद, और उसे बताएं कि आप उनमें से किसी पर भरोसा नहीं कर रहे हैं l आपका विश्वास सम्पूर्ण रूप से उस पर(परमेश्वर) है l

पुनर्निर्माण

यह रात का समय था जब अगुआ घोड़े पर सवार होकर काम का निरीक्षण करने निकल पड़ा जो उसके आगे धरा था l जब वह अपने चारों ओर विनाश का दौरा कर रहा था, तो उसने देखा कि शहर की दीवारें नष्ट हो गयीं थीं और फाटक जो जले हुए थे l कुछ क्षेत्रों में, बहुत अधिक मलबे के ढेर उसके घोड़े को आगे बढ़ने में मुश्किल कर दिए l दुखी होकर, घुड़सवार घर की ओर मुड़ गया l

जब शहर के अधिकारीयों से हानि बताने का समय आया, वह इस तरह बताना आरम्भ किया, “तुम आप देखते हो कि हम कैसी दुर्दशा में हैं” (नहेम्याह 2:17) l उसने बताया कि नगर खंडहर हो गया था, और नगर को सुरक्षित रखने वाले नगर की दीवारें बेकार हो गयीं थीं l

परन्तु उसने एक कथन कहा जिससे परेशान नागरिक उत्साहित हो गए : फिर मैंने उनको बतलाया, कि मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझे पर कैसे हुई l” तुरन्त, लोगों ने उत्तर दिया, “आओ हम कमर बांधकर बनाने लगें” (पद.18) l

एक दूसरे के लिए बनाए गए

“मैं उसकी देखभाल करुँगी l जब वो खुश, तब मुझे ख़ुशी होती है,” स्टेला कहती है l प्रदीप उत्तर देता है, “जब वह मेरे पास होती है मुझे ख़ुशी होती है l प्रदीप और स्टेला की शादी के 79 वर्ष हो चुके हैं l हाल ही में जब प्रदीप को एक नर्सिंग होम में भर्ती किया गया, उसकी हालत दयनीय थी – तो स्टेला उसे आनंदपूर्वक घर ले आई l वह 101, और स्टेला 95 वर्ष की है l यद्यपि वह चलने-फिरने के लिए वॉकर का उपयोग करती है, वह प्रेमपूर्वक अपने पति के लिए वह सब करती है जो वह कर सकती है, जैसे कि उसका पसंदीदा भोजन तैयार करना l परन्तु वह अपने बल पर यह नहीं कर सकती थी l नाती-पोते और पड़ोसी स्टेला की उन बातों में मदद करते हैं जो वह खुद नहीं कर सकती है l

स्टेला और प्रदीप का एक साथ का जीवन उत्पत्ति 2 का एक उदहारण है, जहां परमेश्वर ने कहा है, “आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं, मैं उसके लिए एक ऐसा सहायक बनाऊंगा जो उससे मेल खाए” (पद.18) l कोई भी जीव जिसे परमेश्वर आदम के पास लेकर आया उस वर्णन में ठीक बैठता है l केवल हव्वा में, जो आदम की पसली से बनी थी, आदम ने एक सहायक और सहयोगी प्राप्त किया (पद.19-24) l

हव्वा ही आदम के लिए सही सहयोगी थी, और उनके द्वारा परमेश्वर ने विवाह की स्थापना की l यह केवल व्यक्तियों की आपसी सहायता के लिए नहीं थी बल्कि एक परिवार को शुरू करने और सृष्टि की देखभाल के लिए भी थी जिसमें अन्य लोग शामिल हैं (1:28) l उस पहले परिवार से एक समुदाय आया ताकि चाहे वह विवाहित हो या एकल, वृद्ध या युवा, हममें से कोई भी अकेला नहीं होगा l एक समुदाय के रूप में, परमेश्वर ने हमें “एक दूसरे का भार” (गलतियों 6:2) उठाने का विशेषाधिकार दिया है l

उसने मुझे बदल दिया

जब जॉन, जो लन्दन में सबसे बड़ा वैश्यालय चलाता था, को जेल भेज दिया गया, वह झूठे तौर पर विश्वास करता था कि मैं एक अच्छा आदमी हूँ l वहाँ रहते हुए, उसने जेल में बाइबल अध्ययन में भाग लेने का फैसला किया क्योंकि वहां केक और कॉफ़ी मिलती थी, लेकिन वह इस बात से चकित था कि दूसरे कैदी कितने खुश लगते थे l उसने पहले गाने के दौरान रोने लगा और बाद में एक बाइबल प्राप्त की l नबी यहेजकेल की पुस्तक से पढ़ने के कारण वह बदल गया,  मानों “उस पर बिजली गिर गयी हो l” उसने पढ़ा, “फिर जब दुष्ट अपने दुष्ट कामों से फिरकर, न्याय और धर्म के काम करने लगे, तो वह . . . इस कारण न मरेगा, जीवित ही रहेगा” (18:27-28) l परमेश्वर का वचन उसके लिए जीवित हो गया और उसने महसूस किया, “मैं एक अच्छा व्यक्ति नहीं था . . . मैं दुष्ट था और मुझे बदलने की ज़रूरत थी l” पास्टर के साथ प्रार्थना करते समय, उसने कहा, “मैंने यीशु मसीह को पाया और उसने मुझे बदल दिया l”

यहेजकेल के ये शब्द परमेश्वर के लोगों से कहे गए थे जब वे निर्वासन में थे l यद्यपि वे लोग परमेश्वर से विमुख हो गए थे, उसकी यह इच्छा थी कि वे अपने अपराध को त्याग दें और “अपने मन और अपनी आत्मा बदल [डालें]” (पद..31) l उन शब्दों ने जॉन को “पश्चाताप [करने]” और “जीवित [रहने दिया]”, जब उसने यीशु का अनुसरण किया, जिसने पापियों को मन फिराने के लिए बुलाया (लूका 5:32) l

हम भी पवित्र आत्मा द्वारा पाप के प्रति कायल किये जाने का प्रत्युत्तर दें, ताकि हम भी क्षमा और छुटकारा का आनंद ले सकें l