उसने मुझे बदल दिया
जब जॉन, जो लन्दन में सबसे बड़ा वैश्यालय चलाता था, को जेल भेज दिया गया, वह झूठे तौर पर विश्वास करता था कि मैं एक अच्छा आदमी हूँ l वहाँ रहते हुए, उसने जेल में बाइबल अध्ययन में भाग लेने का फैसला किया क्योंकि वहां केक और कॉफ़ी मिलती थी, लेकिन वह इस बात से चकित था कि दूसरे कैदी कितने खुश लगते थे l उसने पहले गाने के दौरान रोने लगा और बाद में एक बाइबल प्राप्त की l नबी यहेजकेल की पुस्तक से पढ़ने के कारण वह बदल गया, मानों “उस पर बिजली गिर गयी हो l” उसने पढ़ा, “फिर जब दुष्ट अपने दुष्ट कामों से फिरकर, न्याय और धर्म के काम करने लगे, तो वह . . . इस कारण न मरेगा, जीवित ही रहेगा” (18:27-28) l परमेश्वर का वचन उसके लिए जीवित हो गया और उसने महसूस किया, “मैं एक अच्छा व्यक्ति नहीं था . . . मैं दुष्ट था और मुझे बदलने की ज़रूरत थी l” पास्टर के साथ प्रार्थना करते समय, उसने कहा, “मैंने यीशु मसीह को पाया और उसने मुझे बदल दिया l”
यहेजकेल के ये शब्द परमेश्वर के लोगों से कहे गए थे जब वे निर्वासन में थे l यद्यपि वे लोग परमेश्वर से विमुख हो गए थे, उसकी यह इच्छा थी कि वे अपने अपराध को त्याग दें और “अपने मन और अपनी आत्मा बदल [डालें]” (पद..31) l उन शब्दों ने जॉन को “पश्चाताप [करने]” और “जीवित [रहने दिया]”, जब उसने यीशु का अनुसरण किया, जिसने पापियों को मन फिराने के लिए बुलाया (लूका 5:32) l
हम भी पवित्र आत्मा द्वारा पाप के प्रति कायल किये जाने का प्रत्युत्तर दें, ताकि हम भी क्षमा और छुटकारा का आनंद ले सकें l

साथ में हम जीतते हैं
आधी रात में, पास्टर सैमुएल को एक फोन आया जिसमें उन्हें एक चर्च के सदस्य के घर पर आने के लिए कहा गया l जब वह वहां पहुंचे, तो उन्हें आग से घिरा हुआ एक घर मिला l हलाकि, पिता खुद जल गया था, अपने बच्चे को बचाने के लिए घर में वापस लौट गया था और एक बेहोश बेटी के साथ बाहर आया l इस ग्रामीय गाँव में, हॉस्पिटल 10 किलोमीटर दूर था l कोई परिवहन उपलब्ध नहीं होने से पास्टर और पिता बच्चे को लेकर हॉस्पिटल की ओर दौड़ने लगे l जब उनमें से एक घायल लड़की को गोद में लिए हुए थक जाता था, तो दूसरा उसे सम्भाल लेता था l दोनों ने मिलकर यात्रा पूरी की; पिता और उसकी बेटी का इलाज किया गया और दोनों पूरी तरह से ठीक हो गए l
निर्गमन 17:8-13 में यहोवा ने एक महान विजय प्राप्त की, जिसमें यहोशु का प्रयास भी शामिल था, जिसने युद्ध के मैदान में पुरुषों का नेतृत्व किया; और मूसा, जिसने परमेश्वर की लाठी को पकडे हुए अपने हाथों को उठाए रखा l जब मूसा के हाथ थक गए, तो हारून और हूर ने सूर्य के अस्त होने और शत्रु के पराजय तक मूसा के हाथों को उठाकर रखने में एक दूसरे की मदद की l
परस्पर निर्भरता के मूल्य को कभी भी कम नहीं आँका जा सकता है l परमेश्वर, अपनी दयालुता में, लोगों को पारस्परिक रूप से अच्छे के लिए अपने एजेंट के रूप में प्रदान करता है l सुनने वाले कान और सयायक हाथ; बुद्धिमान, सुकून देने वाले और सुधारने वाले शब्द - ये और अन्य संसाधन हमारे पास और हमारे माध्यम से दूसरों तक पहुँचते हैं l एक साथ हम जीतते हैं और परमेश्वर को महिमा मिलती है!

स्वर्ग के दृष्टिकोण
जब 1970 के दशक में पीटर वेल्च एक युवा लड़का था, तो मेटल डिटेक्टर का उपयोग केवल एक शौक था l लेकिन 1990 के बाद से, वह मेटल डिटेक्टिंग अभियान पर दुनिया भर के लोगों का नेतृत्व कर रहा है l उन्होंने हज़ारों खोजें की हैं – तलवारें, प्राचीन गहने, सिक्के l “गूगल अर्थ,” एक कंप्यूटर प्रोग्राम जो उपग्रह इमेजरी(चित्र) पर आधारित है का उपयोग करते हुए, वे यूनाइटेड किंगडम में खेतों के भूदृश्य में आकृतियों(patterns) की तलाश करते हैं l यह उन्हें दिखाता है कि सदियों पहले कहाँ पर सड़कें, इमारतें और अन्य संरचनाएं थीं l पीटर कहते हैं, “ऊपर से एक परिप्रेक्ष्य में एक पूरी नयी दुनिया खुलती है l”
यशायाह के दिनों में परमेश्वर के लोगों को “ऊपर से एक परिप्रेक्ष्य” की आवश्यकता थी l वे उसके लोग होने पर गर्व करते थे, फिर भी वे अवज्ञाकारी थे और अपने मूर्तियों को त्यागने से इनकार के दिए l परमेश्वर के पास एक और दृष्टिकोण था l उनके विद्रोह के बावजूद, वह उन्हें बाबुल के दासत्व से छुड़ाने वाला था l क्यों? “अपने निमित्त . . . अपनी महिमा मैं दूसरे को नहीं दूंगा” (यशायाह 48:11) l ऊपर से परमेश्वर का दृष्टिकोण है कि जीवन उसकी महिमा और उद्देश्य के लिए है – हमारा नहीं l हमारा ध्यान उस पर और उसकी योजनाओं पर होना चाहिये और दूसरों को भी बताएँ कि वे भी उसकी प्रशंसा करें l
हमारे अपने जीवन के परिप्रेक्ष्य के रूप में परमेश्वर की महिमा एक पूरी नयी दुनिया को खोलता है l केवल वह जानता है कि हम उसके बारे में क्या खोज करेंगे और वह हमारे लिए क्या है l परमेश्वर हमें सिखाएगा कि हमारे लिए अच्छा क्या है और हमें उन रास्तों पर चलाएगा जिनका हमें अनुसरण करना चाहिये (पद.17) l

“अच्छी वस्तु”
माइक के अधिकांश सहकर्मी मसीहियत के बारे में कम ही जानते थे, न ही उन्हें इसकी कोई परवाह थी l लेकिन वे जानते थे कि माइक परवाह करता था l ईस्टर के मौसम के पास एक दिन, किसी ने यूँ ही उल्लेख किया कि उन्होंने सुना है कि ईस्टर का फसह से कुछ लेना-देना था और सोच रहे थे कि उसका ईस्टर से क्या सम्बन्ध था l “अरे, माइक!” उसने कहा l “क्या तुम परमेश्वर की इस अच्छी वस्तु के बारे में जानते हो l फसह क्या है?”
इसलिए माइक ने समझाया कि परमेश्वर ने कैसे इस्राएलियों को मिस्र की गुलामी से बाहर निकाला था l उसने उन्हें उन दस विपत्तियों के बारे में बताया, जिनमें हर घर में पहिलौठे की मृत्यु शामिल थी l उसने बताया कि किस तरह मौत का स्वर्गदूत उन घरों के ऊपर से “गुज़र गया” जिनके चौखटों पर बलिदान किये हुए मेमने का लहू लगा हुआ था l उसके बाद उसने साझा किया कि कैसे यीशु बाद में फसह के मौसम में हमेशा के लिए बलिदान के मेमने के रूप में क्रूस पर चढ़ाया गया था l अचानक माइक ने महसूस किया, अरे, मैं तो साक्षी दे रहा हूँ !
शिष्य पतरस ने परमेश्वर को नहीं जानने वाली एक संस्कृति में एक कलीसिया को सलाह दी l उसने कहा, “जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, उसे उत्तर देने के लिए सर्वदा तैयार रहो” (1 पतरस 3:15) l
इसलिए कि माइक अपने विश्वास के विषय स्पष्ट था, उसे उस विश्वास को स्वाभाविक रूप से साझा करने का अवसर मिला, और वह ऐसा “नम्रता और भय के साथ” कर सका (पद.15) l
हम भी कर सकते हैं l परमेश्वर के पवित्र आत्मा की सहायता से, हम सरल भाषा में समझा सकते हैं कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है – परमेश्वर के विषय वह “वस्तु l”

आनंद के लिए हमारा कारण
जब स्कूल का साल शुरू हुआ, चौदह वर्षीय संदीप हर दोपहर बस से कूदकर उतर जाता और अपने घर की सड़क पर नाचता हुआ जाता l उसकी माँ ने संदीप के स्कूल के बाद के रॉक संगीत के समय का विडियो बनाया और साझा किया l वह नाचता था क्योंकि वह जीवन का आनंद लेता था और हर कदम के साथ “लोगों को खुश करता था l” एक दिन, दो कचरा बीनने वालों ने अपने व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर उस जवान बच्चे के साथ जो दूसरों को अपने साथ नाचने के लिए प्रेरित करता था, पैर घसीट कर चले, पैरों पर तेजी से घूमें और झूमे l यह तिकड़ी ईमानदार और फैलने वाले आनंद की शक्ति को दर्शाती है l
भजन 149 का लिखने वाला स्थायी और शर्तहीन आनंद का श्रोत – परमेश्वर - का वर्णन करता हैं l भजनकार परमेश्वर के लोगों से एक साथ मिलकर “यहोवा के लिए एक नया गीत गाने” को कहता है (पद.1) l वह इस्राएल से “अपने कर्ता के कारण आनंदित” होने और “अपने राजा के कारण मगन” होने के लिए आमंत्रित करता है (पद.2) l वह हमें उसके साथ नाचते हुए उसके नाम की स्तुति करने को कहता है (पद.1-3) l क्यों? क्योंकि “यहोवा अपनी प्रजा से प्रसन्न रहता है; वह नम्र लोगों का उद्धार करके उन्हें शोभायमान करेगा” (पद.4) l
हमारे प्रेममय पिता ने हमें बनाया और इस सृष्टि को संभालता है l वह हममें सिर्फ इसलिए प्रसन्न रहता है क्योंकि हम उसके प्यारे बच्चे हैं l उसने हमें बनाया, हमें जानता है, और हमें अपने साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध बनाने के लिए आमंत्रित करता है l कितना बड़ा सम्मान है! हमारा प्रेमी और जीवित परमेश्वर ही हमारे सदा के आनंद का कारण है l हम उसकी निरंतर उपस्थिति के उपहार में आनंदित हो सकते हैं और हमारे सृष्टिकर्ता द्वारा हमें दिए गए हर दिन के लिए आभारी हो सकते हैं l