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दोबारा दोस्त

एक माँ और उसकी छोटी बेटी एक दिन चर्च में बैठे हैं l सेवा के दौरान, लोगों को सार्वजनिक रूप से परमेश्वर की क्षमा प्राप्त करने का अवसर दिया जाता है l हर बार जब कोई ऐसा करने के लिए आगे बढ़ता है, तो छोटी लड़की ताली बजाने लगती है l “मुझे खेद है, ”बाद में माँ ने कलीसिया के अगुआ से कहा, “मैंने अपनी बेटी को समझाया कि पश्चाताप हमें परमेश्वर के साथ फिर से दोस्त बनाता है, और वह केवल सभी के लिए आनंद मनाना  चाहती थी l

माँ के शब्द एक बच्चे के दिमाग के लिए सहज बनाया गया, सुसमाचार की एक अच्छी व्याख्या थी l एक समय परमेश्वर के शत्रु, मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा उससे हमारा मेल हुआ है (रोमियों 5:9-10) lअब हम वास्तव में परमेश्वर के दोस्त हैं l चूँकि हम दोस्ती को तोड़ने वाले थे (पद.8), पश्चाताप बहाली प्रक्रिया को पूरा करने में हमारा हिस्सा है l और छोटी लड़की की प्रतिक्रिया इससे और बेहतर नहीं हो सकती थी l इसलिए कि एक व्यक्ति के पश्चाताप करने पर सम्पूर्ण स्वर्ग ताली बजाता है (लूका 15:10), तो वह अनजाने में उस प्रशंसा को प्रतिध्वनित कर रही थी l

यीशु ने अपने मेल करने के कार्य का समान शब्दों में वर्णन किए l“इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं कि कोई अपने मित्रों के लिए अपने प्राण दे” (यूहन्ना 15:13) l हमारे प्रति मित्रता के इस त्यागपूर्ण कार्य के परिणामस्वरूप, अब हम उसके मित्र हो सकते हैं l “मैं तुम्हें दास न कहूँगा . . . परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है” (15:15) l

एक समय परमेश्वर के शत्रु, अब हम परमेश्वर के मित्र हैं l यह एक अभिभूत करनेवाली सोच है l और ताली के लायक l

गायन क्रांति

एक क्रांति को प्रज्वलित करने में क्या लगता है? बंदूकें? बम? गुरिल्ला युद्ध? 1980 के दशक के अंत के एस्टोनिया में, गानो से क्रांति आई lदशकों तक लोग सोवियत कब्जे के बोझ तले दबे रहने के बाद, देशभक्ति गीतों की श्रृखला के गायन के साथ एक आन्दोलन शुरू हुया l इन गीतों ने “गायन क्रांति “Singing Revolution)” को जन्म दिया, जिसने 1991 में एस्टोनियाई स्वतंत्रता को बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी l

उस आन्दोलन का वर्णन करनेवाली एक वेबसाइट कहती है, “यह एक अहिंसक क्रांति थी जिसने बहुत ही हिंसक कब्जे को उलट दिया l” “लेकिन गायन हमेशा एस्टोनियाई लोगों के लिए एक करनेवाला एक प्रमुख बल था, जब उन्होंने सोवियत शासन के अधीन पचास साल सहन किये l” 

संगीत हमारे अपने कठिन समयों में हमारी मदद करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है l मुझे आश्चर्य है कि शायद इसीलिए हम इतनी आसानी से भजन के साथ पहचान बना लेते हैं l आत्मा की अँधेरी रात थी जब भजनकार ने गया, “हे मेरे प्राण, तू क्यों गिया जाता है ? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है ? परमेश्वर पर आशा लगाए रख; क्योंकि मैं उसके दार्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा” (भजन 42:5) l यह गहरी मायूसी के मौसम में था कि उपासना का अगुआ, आसाप, ने खुद को याद दिलाया, “सचमुच इस्राएल के लिए अर्थात् शुद्ध मनवालों के लिए परमेश्वर भला है” (73:1) l

हमारे अपने चुनौतीपूर्ण समय में, क्या हम भजनकारों के साथ अपने दिलों के लिए गायन क्रांति में शामिल हो सकते हैं l इस तरह की क्रांति निराशा और भ्रम के व्यक्तिगत उत्पीड़न को परमेश्वर के महान प्रेम और विश्वास में विश्वास के पूर्ण भरोसे के साथ पराजित करता है l

पूर्वानुमानकर्ता की गलती

21 सितम्बर, 1938 को दोपहर में, एक युवा मौसम विज्ञानी ने अमरीकी मौसम ब्यूरो को दो अग्र भागों के विषय चेतावनी दी जो एक तूफ़ान को उत्तर की ओर न्यू इंग्लैंड की ओर धकेल रहा है l लेकिन पूर्वानुमान के प्रमुख ने चार्ल्स पियर्स की भविष्यवाणी का मज़ाक बनाया l निश्चय हो एक उष्णकटिबंधीय(tropical) तूफ़ान इतनी दूर उत्तर की ओर हमला नहीं करेगा l 

दो घंटे बाद, 1938 के न्यू इंग्लैंड तूफ़ान ने लॉन्ग आइलैंड पर आक्रमण किया l शाम 4.00 बजे तक वह न्यू इंग्लैंड तक पहुँच गया, जहां जहाज़ पानी में डूब गए और घर टुकड़े-टुकड़े होकर समुद्र में समा गए l छह सौ से अधिक लोग मारे गए l यदि पीड़ितों को पियर्स की चेतावनी मिली होती – ठोस आंकड़ों और उसके विस्तृत नक्शों के आधार पर – उनके बचने की सम्भावना होती l 

यह जानने की अवधारणा कि किसके वचन को माना जाए को पवित्रशास्त्र में अग्रगामी है l यिर्मयाह के दिन में, परमेश्वर ने अपने लोगों को झूठे नबियों के खिलाफ चेतावनी दी थी l “[उनकी ओर] कान मत लगाओं,” उसने कहा l “ये तुमको व्यर्थ बातें सिखाते हैं, ये दर्शन का दावा करके यहोवा के मुख की नहीं, अपने ही मन की बातें कहते हैं” (यिर्मयाह 23:16) l परमेश्वर ने उनके विषय कहा, “यदि ये मेरी शिक्षा में स्थिर रहते, तो मेरी प्रजा के लोगों को मेरे वहां सुनाते” (पद.22) l 

“झूठे नबी” अभी भी हमारे साथ हैं l “विशेषज्ञ” सलाह देते हुए परमेश्वर को पूरी तरह अनदेखा करते हैं या अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसके शब्दों को मोड़ देते हैं l लेकिन उसके वचन और आत्मा से, परमेश्वर ने वह दिया है जो हमें झूठे को सच से शुरू करने की ज़रूरत है l जैसे-कैसे हम उसके व्बचन की सच्चाई से सब कुछ नापते हैं, हमारे अपाने शब्द और जीवन तेजी से दूसरों के लिए उस सच्चाई को दर्शाते हैं l 

देखभाल

गृह सफाई सेवा की मालकिन, डेबी, निरंतर अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए अधिक ग्राहकों की तलाश करती रहती है l एक बुलावे पर उसने एक महिला से बात की जिसका जबाब था, “मैं अभी इतना कैंसर का रोगी वंचित नहीं होगा l उन्हें मुफ्त गृह सफाई सेवा दी जाएगी l” इसलिए 2005 में उसने एक गैपैसा नहीं दे पाऊंगी; मैं कैंसर का इलाज ले रही हूँ l” उसी समय डेबी ने फैसला किया कि “कोई भी र-लाभकारी संस्था शुरू किया, जहां कंपनियों ने कैंसर से जूझ रही महिलाओं को अपनी सफाई सेवाएँ उपहार स्वरुप प्रदान की l ऐसी ही एक महिला ने तीव्र भरोसा महसूस की जब वह एक साफ़ घर में लौटी l उसने कहा, “पहली बार, मुझे वास्तव में विश्वास था कि मैं कैंसर को हरा सकती थी l”

जब हम चुनौती का सामना कर रहे होते हैं, तो देखभाल और समर्थन की भावना हमें बनाए रखने में मदद कर सकती है l परमेश्वर की उपस्थिति और समर्थन के बारे में जागरूकता विशेष रूप से हमारी भावना को प्रोत्साहित करने के लिए आशा ला सकती है l भजन 46, जो परीक्षाओं के बीच से गुज़र रहे लोगों का पसंदीदा भजन है हमें याद दिलाता है : “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक l चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ . . . मैं पृथ्वी भर में महान् हूँ l सेनाओं का यहोवा हमारे संग है” (पद.1,10-11) l 

अपने आप को परमेश्वर के वादों की याद दिलाना और हमारे साथ उसकी उपस्थिति हमारे दिलों को नवीनीकृत करने में मदद करने का एक साधन हो सकती है और हमें कठिन समय में जाने का साहस और आत्मविश्वास प्रदान कर सकती है l 

सहायता करने के योग्य

जो की उसकी नौकरी से आठ सप्ताह की “छुट्टी प्राकृतिक आपदा के शिकार लोगों की मदद करने के कारण,छुट्टी नहीं थी l उसके शब्दों में, यह “फिर से बेघर लोगों के बीचरहना था, उनमें से एक बनना था, याद करना था कि भूखा रहना, थका रहना, और भुला दिया जाना कैसा होता था l” सड़कों पर जो का पहला कार्यकाल नौ साल पहले आया था जब वह शहर में बिना नौकरी या रहने की जगह पहुंचा था l तेरह दिनों तक वह कम भोजन या नींद के साथ सड़कों पर रहा l इसी तरह परमेश्वर ने उसे दशकों तक ज़रुरतमंदों लोगों की सेवा के लिए तैयार किया l

जब यीशु धरती पर आया, तो उसने उन लोगों के अनुभवों को साझा करने का भी चुनाव किया, जिन्हें वह बचाने आया था l “इसलिए जब कि लड़के मांस और लहू के भागी हैं, तो वह आप भी उनके समान उनका सहभागी हो गया, ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात् शैतान” (इब्रानियों 2:14) l जन्म से मृत्यु तक, मसीह के मानवीय अनुभव से कुछ भी नहीं अछूता नहीं था – पाप को छोड़कर (4:15) l क्योंकि उसने पाप पर विजय पा ली, जब हम पाप करने की परीक्षा में पड़ते हैं, वह हमारी मदद कर सकता है l 

और यीशु को हमारी सांसारिक परवाह करने की आवश्यकता नहीं है l जो हमें बचाता है वह हमसे जुड़ा रहता है और हममें गहरी दिलचस्पी रखता है l जीवन जो भी लाता है, हमें आश्वासन मिलता है कि जिसने हमें हमारे सबसे बड़े दुश्मन से बचाया है, अर्थात् शैतान (2:14), हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत के समय में हमारी मदद करने के लिए तैयार है l