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निराशा की तस्वीर

हाल के वर्षों में, एक फोटोग्राफर ने एक किसान की दिल दहला देने वाली तस्वीर ली जिसमें वह उदास और अकेले अपने बर्बाद, सूखे खेत में बैठा था l सूखा और फसल खराब होने के मद्देनज़र किसानों और उनके परिवारों की हताश दुर्दशा से लोगों को अवगत कराने के लिए इस तस्वीर को कई प्रथम पन्नों पर छापा गया था l 

विलापगीत की पुस्तक निराशा की एक और तस्वीर प्रस्तुत करती है – यरूशलेम के विनाश के परिणामस्वरूप यहूदा की l इससे पूर्व कि नबूकदनेस्सर की सेना शहर में घुसकर उसको बर्बाद करती, लोग भुखमरी के कारण पीड़ित थे एक घेराबंदी के लिए धन्यवाद (2 राजा 24:10-11) l यद्यपि उनका कष्ट वर्षों तक परमेश्वर की अवज्ञा का परिणाम था, लेकिन विलापगीत के लेखक ने अपने लोगों की ओर से परमेश्वर को पुकारा (विलापगीत 2:11-12) l 

जबकि भजन 107 का लेखक भी इस्राएल के इतिहास में एक निराशाजनक समय का वर्णन करता है (जंगल में इस्राएल के भटकने के दौरान, पद.4-5), केंद्र-बिंदु कठिन समय में उठाए गए कदम की ओर खिसक जाता है : “तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी” (पद.6) l और क्या ही अद्भुत परिणाम : “और उसने उनको सकेती से छुड़ाया l”

निराशा में हैं? चुप न रहें l परमेश्वर को पुकारें l वह सुनता है और आपकी आशा को बहाल करने के लिए इंतज़ार करता है l हालांकि वह हमेशा हमें कठिन परिस्थितियों से बाहर नहीं निकालता, लेकिन वह हमेशा हमारे साथ रहने की प्रतिज्ञा करता है l 

जिंदादिल

बारह वर्षों से, प्रतिदिन एक सामुद्रिक चिड़िया (seagull) एक व्यक्ति के पास आती रही है जिसने उसके एक टूटे हुए पैर को ठीक करने में उसकी सहायता की l जॉन ने कुत्ते के बिस्कुट के साथ उस चिड़िया को अपनी ओर आने के लिए लुभाया और फिर उसे स्वस्थ करने में मदद की l यद्यपि यह पक्षी केवल गर्मियों में इस छोटे से समुद्र तट शहर में उड़कर आता है, वह और जॉन बहुत सरलता से एक दूसरे को ढूँढ लेते हैं – वह पक्षी हर दिन समुद्र तट पर सीधे उसके पास आता है, यद्यपि वह किसी अन्य व्यक्ति के पास नहीं जाता l यह सुनिश्चित है कि यह एक असामान्य सम्बन्ध है l 

इस पक्षी और जॉन के बीच यह अनोखा बंधन मुझे एक मनुष्य और पक्षी के बीच एक और असामान्य सम्बन्ध की याद दिलाता है l जब परमेश्वर के नबियों में से एक, एलिय्याह को अकाल के समय में, “करीत नाले में” छिपने के लिए जंगले में भेजा गया था, तो परमेश्वर ने कहा कि उसे नाले में का पानी पीना होगा और वह कौवों को उसके लिए भोजन का प्रबंध करने के लिए भेजेगा (1 राजा 17:3-4) l कठिन परिस्थितियों और परिवेश के बावजूद, एलिय्याह की भोजन और पानी की ज़रूरतें पूरी होंगी l कौवे खान-पान का प्रबंध करनेवाले नहीं हो सकते थे – स्वाभाविक रूप से खुद अनुचित भोजन खानेवाले – फिर भी वे एलिय्याह के लिए पोष्टिक भोजन लाते थे l 

शायद यह हमें आश्चर्यचकित नहीं भी करे कि एक आदमी एक पक्षी की मदद करेगा, लेकिन जब पक्षी एक आदमी के लिए “सबेरे और सांझ को . . . उसके पास रोटी और मांस” (पद.6) लेकर आएं तो इसकी व्याख्या केवल परमेश्वर की सामर्थ्य और देखभाल से ही हो सकती है (पद.6) l एलिय्याह की तरह, हम भी अपने लिए ऊसके प्रबंध पर भरोसा कर सकते हैं l 

कारण के लिए धीमा

बीबीसी विडियो सीरीज द लाइफ ऑफ़ मैमल्स(The Life of Mammals) में मेज़बान डेविड एटनबरो एक स्लोथ भालू(एक विशेष प्रजाति का भालू) पर एक विनोदी दृष्टि डालने के लिए एक पेड़ पर चढ़े l संसार का सबसे धीमी गति से चलनेवाले स्तनपायी के साथ सामना होने पर, उन्होंने “बू s s!” कहकर उसे बधाई दी l प्रतिक्रिया पाने में नाकाम, वह बताते हैं कि धीमी गति से जाना ही है जो आप करेंगे यदि आप तीन खुर वाले भालू है जो मुख्य रूप से पत्तियाँ खाता है जो आसानी से पचता नहीं है और बहुत पोष्टिक नहीं है l  

इस्राएल के इतिहास के दुहराव में, नहेम्याह हमें धीमी गति से चलने के लिए एक और उदाहरण और वर्णन की याद दिलाता है (9:9-11), लेकिन यह हास्यपूर्ण नहीं है l नहेम्याह के अनुसार, हमारा परमेश्वर धीमी गति से चलने का परम उदाहरण है – जब क्रोध की बात आती है l नहेम्याह ने याद किया कि परमेश्वर ने अपने लोगों की देखभाल कैसे की, उन्हें जीवन देने वाली व्यवस्था के द्वारा निर्देश दिया, उन्हें मिस्र से बाहर उनकी यात्रा में बनाए रखा और उन्हें वादा किया हुआ देश दिया (पद. 9-15) l यद्यपि इस्राएल ने लगातार विद्रोह किया (पद.16), फिर भी परमेश्वर ने उन्हें प्यार करना कभी नहीं छोड़ा l नहेम्याह की व्याख्या? हमारा सृष्टिकर्ता स्वभाव से “अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करनेवाला, और अतिकरुणामय” (पद.17) है l चालीस साल तक वह क्यों अपने लोगों की शिकायत, अविश्वास और बदगुमानी को इतने धीरज से सहा होगा? (पद.21) l इसकी वजह परमेश्वर की “बड़ी दया” (पद.19) थी l

हमारे बारे में क्या है? एक उग्र स्वभाव ठन्डे दिल का संकेत देता है l लेकिन परमेश्वर के हृदय की महानता हमें धीरज से उसके साथ रहने और प्यार करने के लिए जगह देती है l 

किताब में आनंदित हों

सुन्दोकू(Tsundoku) l एक जापानी शब्द, जो एक पलंग के निकट मेज़ पर पुस्तकों के ढेर को संदर्भित करता है जो पढ़ने के लिए इंतज़ार कर रहा है l पुस्तकें सीखने या किसी दूसरे समय या स्थान पर भागने की क्षमता प्रदान करती हैं, और मैं उन पृष्ठों के भीतर मिलने वाली प्रसन्नता और अंतर्दृष्टि के लिए अत्यधिक लालसा रखता हूँ l इस प्रकार, ढेर पड़ा रहता है l 

यह विचार कि हम पुस्तक में आनंद और मदद पा सकते हैं, पुस्तकों की पुस्तक के लिए और भी सही है – बाइबल l मैं इस्राएल के नव नियुक्त अगुआ यहोशू को पवित्रशास्त्र में परमेश्वर के निर्देशों में अपने आप को तल्लीन करने के लिए प्रोत्साहित देखता हूँ, जिसे इस्राएलियों को दिए गए प्रतिज्ञात देश में ले जाने के लिए नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया गया था (यहोशू 1:8) l 

आगे की कठिनाई को जानकार, परमेश्वर ने यहोशू को आश्वासन दिया, “मैं . . . तेरे संग . . . रहूँगा” (पद.5) l परमेश्वर की सहायता मुख्य रूप से यहोशु द्वारा परमेश्वर की आज्ञाओं को मानने के द्वारा आएगी l इसलिए परमेश्वर ने उसे निर्देश दिया कि “व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना . . . जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी [करना]” (पद.8) l हालाँकि यहोशू के पास व्यवस्था की पुस्तक थी, फिर भी उसे नियमित रूप से यह जानने और समझने की ज़रूरत थी कि परमेश्वर और उसके लोगों के लिए उसकी इच्छा क्या है l 

क्या आपको अपने दिन के लिए निर्देश, सच्चाई या प्रोत्साहन की ज़रूरत है? जब हम पवित्रशास्त्र को पढ़ने, पालन करने, और पोषण प्राप्त करने के लिए समय निकलते हैं, तो हम इसके पृष्ठों में निहित सभी का स्वाद चख सकते हैं (2 तीमुथियुस 3:16) l 

मृत्यु कतार आनंद

1985 में एंथोनी रे हिंटन पर दो रेस्तोरां प्रबंधकों की हत्या करने का आरोप लगाया गया था l यह एक बनायी हुयी बात थी – अपराध होने के समय वह मीलों दूर था – लेकिन उसे दोषी पाया गया और उसे मौत की सजा हुयी l मुक़दमे में, रे ने उन लोगों को माफ़ कर दिया, जिन्होंने उसके बारे में झूठ बोला था, यह कहते हुए कि इस अन्याय के बावजूद उन्हें ख़ुशी थी l उन्होंने कहा, “मेरी मृत्यु के बाद मैं स्वर्ग जा रहा हूँ l आप कहाँ जा रहे हैं?”

मृत्यु कतार में जीवन रे के लिए कठिन था l जब भी बिजली की कुर्सी का उपयोग दूसरों के लिए किया जाता था तो जेल की बत्तियां टिमटिमाती थी, जो आगे क्या होनेवाला है की भयानक याद दिलाती थी l रे ने एक झूठ पकड़ने वाले मशीने की जांच से भी गुज़रा परन्तु उसके परिणामों को नज़रंदाज़ कर दिया गया, कई अन्यायों में से एक जिसका उसने सामना किया जिसमें उसके मुकदमे की पुनः सुनवाई हो सकी l 

आख़िरकार 2015 में गुड फ्राइडे के दिन, रे की सजा को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया l वह लगभग तीस वर्षों से मौत की कतार में था l उसका जीवन परमेश्वर की सच्चाई के प्रति एक साक्षी है l यीशु पर उसके विश्वास के कारण, रे को अपने मुकदमे से परे भरोसा था (1 पतरस 1:3-5) और अन्याय के सामने अलौकिक आनंद का अनुभव हुआ (पद.8) l यह ख़ुशी जो मेरे पास है,” रे ने अपनी रिहाई के बाद कहा, “वे जेल में भी कभी उसे छीन नहीं सके l” इस प्रकार के आनंद ने उसके विश्वास को वास्तविक साबित कर दिया (पद.7-8) l 

मौत की कतार में आनंद? इसे गढ़ना कठिन है l यह हमें एक ऐसे परमेश्वर की ओर इशारा करता है, जो भले ही अनदेखा है और हमारे अपने कठिन अनुभव में थामने के लिए तैयार है l