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कीमत जो भी हो

पॉल, एपोसल ऑफ़ क्राइस्ट(Paul, Apostle of Christ)) फिल्म कलीसिया के आरंभिक दिनों के सताव पर एक निर्भीक अवलोकन है l फिल्म के बाल कलाकार भी प्रगट करते हैं कि यीशु का अनुसरण करना कितना खतरनाक था l नेकनामियों में सूचीबद्ध इन भूमिकाओं पर विचार करें : स्त्री जिसे पीटा गया; पुरुष जिसे पीटा गया; मसीही पीड़ित व्यक्ति 1, 2, और 3 l

मसीह के साथ पहचान अक्सर एक ऊंची कीमत मांगती है l और संसार के अधिकतर भाग में, यीशु का अनुसरण करना अभी भी खतरनाक है l आज कलीसिया में अनेक लोग उस प्रकार के सताव से सम्बंधित हो सकते हैं l हालाँकि, हममें से कुछ एक, समय से पूर्व ही “सताए हुए” महसूस कर सकते हैं – जब भी हमारे विश्वास का उपहास होता है हम क्रोधित होते हैं या हम शंकित होते हैं कि हमारे विश्वास के कारण हमें पदोन्नति नहीं दी गयी l

जाहिर है, सामाजिक प्रतिष्ठा का त्याग और हमारे जीवन का बलिदान करने के बीच भारी अंतर है l वास्तविक रूप से, हालांकि, स्व-हित, वित्तीय स्थिरता और सामाजिक स्वीकृति हमेशा गहन मानव प्रेरक रही है l हम इसे यीशु के कुछ आरंभिक विस्वासियों के कार्यों में देखते हैं l प्रेरित युहन्ना बताता है कि, यीशु के क्रूसीकरण से कुछ दिन पहले, यद्यपि अनेक इस्राएली अब तक उसका तिरस्कार कर रहे थे (युहन्ना 12:37), बहुत से “अधिकारियों में से बहुतों ने उस पर विस्वास किया” (पद.42) l हालाँकि, “[वे] प्रगट रूप में नहीं मानते थे . . . क्योंकि मनुष्यों की ओर से प्रशंसा उनको परमेश्वर की ओर से प्रशंसा की अपेक्षा अधिक प्रिय लगती थी” (पद. 42-43) l

आज भी हम मसीह में अपने विश्वास को छुपाए रखने के लिए सामाजिक तनाव का सामना करते हैं (और उससे भी अधिक) l कीमत कुछ भी हो, हम ऐसे समाज के रूप में एक साथ खड़े रहें जो मनुष्य की प्रशंसा से अधिक परमेश्वर के अनुमोदन के खोजी हों l

जो भी हम करते हैं

सी. एस. लयूईस ने सरप्राइज्ड बाई जॉय(Surprised by Joy) पुस्तक में स्वीकार किया कि झटकारते हुए, संघर्ष-अनुक्रिया करते हुए, क्रोधित, और बच निकलने के लिए हर दिशा में देखने के बाद तैतीस वर्ष की उम्र में उन्होंने मसीहियत को ग्रहण किया l लयूईस के अपने व्यक्तिगत प्रतिरोध, उसकी गलतियाँ, और जिन बाधाओं का उन्होंने सामना किया था, के बावजूद, प्रभु ने उन्हें विश्वास का साहसी और रचनात्मक समर्थक बना दिया l लयूईस परमेश्वर की सच्चाई और प्रेम को शक्तिशाली लेखों और उप्नयासों के द्वारा घोषित किया जो आज भी पढ़े और अध्ययन किया जाते हैं, और उनकी मृत्यु के पचपन वर्षों से अधिक के बाद भी साझा किये जाते हैं l उनका जीवन उनके विश्वास को प्रतिबिंबित करता है कि एक व्यक्ति “एक और लक्ष्य निर्धारित करने या एक नया दर्शन/स्वप्न देखने के लिए कभी भी बहुत बूढ़ा नहीं होता है l”

जब हम योजना बनाते हैं सपनों का पीछा करते हैं, परमेश्वर हमारे उद्देश्यों को शुद्ध कर सकता है और हम जो भी करते हैं उनको उसे समर्पित करने के लिए हमें सशक्त बनाता है (नीतिवचन 16:1-3) l सबसे साधारण कार्यों से लेकर महानतम चुनौतियों तक, हम अपने सर्शक्तिमान सृष्टिकर्ता की महिमा के लिए जीवन जी सकते हैं, जिसने “सब वस्तुएँ विशेष उद्देश्य के लिए बनाई हैं” (पद.4) l हर एक कार्य, हर एक शब्द, और हर एक विचार हृदय को छू जानेवाली आराधना का प्रगटीकरण हो सकता है, हमारे प्रभु के आदर में एक त्यागपूर्ण उपहार, जब वह हमारी हिफाजत करता है (पद.7) l

परमेश्वर हमारी सीमाओं, हमारी शर्तों, या तय करने या छोटे सपने देखने की हमारी प्रवृति द्वारा सीमित नहीं किया जा सकता है l जब हम – उसके प्रति समर्पित और उसपर निर्भर होकर –उसके लिए जीने का निर्णय करते हैं वह हमारे लिए अपनी योजनाएं पूरी करेगा l जो हम करने में सक्षम हैं उसके साथ, उसके लिए, और केवल उसके कारण किये जा सकते हैं l

जीभ को नियंत्रित करने वाले

वेस्ट विथ द नाईट(West with the Night) पुस्तक में लेखिका बेरिल मार्खैम एक अत्यंत शक्तिशाली घोडा, कैमसिसकैन के विषय विस्तार से बताती है जिसे उसे प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी मिली थी l उसे उसकी ही तरह जोड़ीदार कैमसिसकैन मिल गया था l हर प्रकार की रणनीति अपनाने के बावजूद भी, वह उस अक्खड़ घोड़े को पूरी तौर से वश में न कर सकी, और केवल उसकी अड़ियल इच्छा पर विजय पा सकी l

हममें से कितने लोग अपने जीभ को वश में करने के लिए संघर्ष करते हुए ऐसा अनुभव करते हैं? जबकि याकूब जीभ को घोड़े के मुँह में लगाम या जहाज के पतवार से तुलना करता हैं (याकूब 3:3-5), और वह खेद प्रगट करते हुए कहता है, “एक ही मुँह से धन्यवाद और शाप दोनों निकलते हैं l हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए” (पद.10) l

इसलिए, किस प्रकार हम जीभ पर विजय प्राप्त कर सकते हैं? प्रेरित पौलुस जीभ पर नियंत्रण प्राप्त करने की सलाह देता है l पहली बात केवल सच बोलना है (इफिसियों 4:25) l हालाँकि, यह कष्टपूर्वक कुंठित होना नहीं है l पौलुस आगे कहता है, “कोई गन्दी बात तुम्हारे मुँह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वह निकले जो उन्नति के लिए उत्तम हो” (पद.29) l हम कूड़े को भी हटा सकते हैं : “सब प्रकार की कड़वाहट, और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निंदा, सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए” (पद.31) l क्या यह सरल है? यदि हम अपने बल पर करें तो यह संभव नहीं है l हम धन्यवादी हैं, हमारे पास पवित्र आत्मा है जो हमारी मदद करता है यदि हम उस पर निर्भर होते हैं l

जिस प्रकार मार्खैम ने सीखा, इच्छा की लड़ाई में कैमसिसकैन के साथ सामंजस्य की ज़रूरत थी l इसी प्रकार जीभ के नियंत्रण में भी होता है l

सदा से बेहतर

पेरिस में नोट्रे डेम कैथेड्रल(प्रधान गिरजाघर) एक भव्य ईमारत है l उसकी शिल्पकारी मंत्रमुग्ध करनेवाली है, और उसकी खिडकियों के रंगीन कांच एवं खुबसूरत आंतरिक विशेषताएँ असाधारण हैं l शताब्दियों से पेरिस के परिदृश्य में गगनचुंबी, उसे नवीनीकरण की आवश्यकता पड़ी – जो उस समय आरम्भ हुआ जब एक विनाशकारी आग ने उस शानदार पुराने इमारत को अत्यंत हानि पहुंचाई l

इसलिए इस आठ शताब्दी पुरानी ऐतिहासिक स्थल से प्रेम करनेवाले लोग इसे बचाने के लिए आ रहे हैं l इस इमारत के नवीनीकरण के लिए दस खरब डॉलर से अधिक बटोरा गया है l पत्थर की इस संरचना को दृढ़ करने की ज़रूरत है l क्षतिग्रस्त आंतरिक भाग और उसकी अभिलाषित शिल्पकृति की मरम्मत ज़रूरी है l यद्यपि, प्रयास उचित है, क्योंकि यह पुराना कैथेड्रल अनेक लोगों के लिए आशा का प्रतीक है l

जो इमारतों के लिए सच है वह हमारे लिए भी सच है l इस पुराने चर्च की तरह, हमारे शरीर, आख़िरकार धारण करने के लिए थोड़ा और खराब दिखाई देने लगेंगे! परन्तु जिस प्रकार प्रेरित पौलुस समझाता है, समाचार अच्छा है : जबकि हमारी जवानी की शारीरिक गूंज शनै-शनै कम होती जाएगी, हमारे व्यक्तित्व का सार/मूल –हमारा आत्मिक व्यक्तित्व – निरंतर नया होता जाता है और उन्नति करता है (2 कुरिन्थियों 4:16) l

जब हम पवित्र आत्मा पर हमें भरने और हमें नवीन बनाने के लिए “उसे भाते [रहने का लक्ष्य बनाते हैं]” (5:9), हमारी आत्मिक उन्नति को ठहरने की ज़रूरत नहीं है – चाहे हमारी “ईमारत” कैसी भी दिखाई दे l

मैं हानि से नहीं डरूंगा

1957 में, मेल्बा पेटिलो बील्स  “लिटिल रॉक नाइन(Little Rock Nine),”  के एक सदस्य के रूप में चुनी गयी, जो नौ अफ्रीकन अमेरिकन विद्यार्थियों का एक समूह था जिन्होनें अरकंसास, लिटिल रॉक के सेंट्रल हाई स्कूल को सबसे पहले श्वेतों और अश्वेतों दोनों ही के लिए अनिवार्य कर दिया और जो पूर्व में केवल श्वेत लोगों के लिए था l अपने 2018 के वृतांत, आई विल नॉट फियर : माई स्टोरी ऑफ़ ए लाइफटाइम ऑफ़ बिल्डिंग फैथ अंडर फायर (I Will Not Fear: My Story of a Lifetime of Building Faith under Fire), में बील्स उस अन्याय और उत्पीड़न का एक मर्मस्पर्शी वर्णन करती है जिसका सामना वह पंद्रह वर्ष की छात्रा के रूप में प्रतिदिन संघर्ष करते हुए साहस के साथ करती थी l

परन्तु उसने परमेश्वर में अपने गहरे विश्वास के विषय भी लिखा l अपने सबसे अंधकारपूर्ण पलों में, जब भय ने उसे पूर्ण रूप से पराजित करना चाहा, बील्स ने बाइबल के लोकप्रिय पदों को दोहराया जो उसने बचपन में अपनी दादी से सीखे थे l उनको दोहराते समय, उसे अपने साथ परमेश्वर की उपस्थिति याद आई, और वचन ने उसे दृढ़ रहने के लिए साहस दिया l

बील्स अक्सर भजन 23 को दोहराती थी, “चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुयी तराई में होकर चलूँ, तौभी हानि से न [डरूंगी]; क्योंकि तू मेरे साथ रहता है” (पद.4) और इसे अंगीकार करके आराम पाती थी l उसकी दादी का प्रोत्साहन उसके कानों में गूंजता था और उसे आश्वासन देता था कि परमेश्वर “अति निकट है, और तुम केवल उससे ही सहायता मांग सकती हो l”

यद्यपि हमारी ख़ास स्थितियाँ भिन्न हो सकती हैं, कदाचित हम सब कठिन संघर्षों एवं अभिभूत करनेवाली स्थितियों को सहन करेंगे जो हमें भयभीत करके आसानी से हार मानने के लिए उत्प्रेरित करेंगी l आपका हृदय इस सच्चाई में उत्साहित हो कि परमेश्वर की सामर्थी उपस्थिति हमेशा हमारे साथ है l