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परमेश्वर की रचनात्मकता का उत्सव मनाना

जैसे ही चर्च प्रेक्षालय (auditorium) संगीत से भर गया, रंग के प्रति दृष्टिहीन कलाकार लैंस ब्राउन मंच पर आया l वह एक बड़े सफ़ेद फलक के सामने खड़ा था, उसकी पीठ दर्शकों की ओर थी और उसने अपने ब्रश को काले पेंट में डुबोया l उसने सरलता से फलक पर तूलिका फेरते हुए एक क्रूस बनाया l अपने हाथों और तूलिकाओं का उपयोग करते हुए, इस दृश्य कहानी वाचक ने मसीह के क्रूसीकरण और पुनरुत्थान के अनेक तस्वीरें बना डालीं l उसने फलक के बड़े खण्डों को काले रंग से भर दिया और छः मिनट से भी कम समय में इस अमूर्त चित्रकला में नीला और सफेद रंग भरकर पूरा कर दिया l उसने फलक को उठाकर  उल्टा कर दिया, और एक छिपे हुए चित्र को प्रगट किया – करुणा से पूर्ण चेहरा – यीशु l

ब्राउन ने कहा कि जब उसके एक मित्र ने उससे चर्च आराधना में गति-चित्रकारी करने की सलाह दी वह अनिच्छुक था l फिर भी अब वह अंतर्राष्ट्रीय यात्रा करके आराधना करने में लोगों की अगुवाई करते हुए चित्रकारी करके दूसरों के साथ मसीह को साझा करता है l

प्रेरित पौलुस परमेश्वर द्वारा अपने लोगों को दिए गए विविध वरदानों के महत्त्व और उद्देश्य को अनुमोदित करता है l उसके परिवार का हर एक सदस्य प्रभु की महिमा करने और दूसरों को प्रेम में विकसित करने के लिए सज्जित किया गया है (रोमियों 12:3-5) l पौलुस हमें अपने वरदानों को पहचान कर दूसरों को लाभ पहुंचाने और यीशु की ओर इंगित करते हुए कर्मठता और प्रसन्नता से सेवा करने हेतु उत्साहित करता है (पद. 6-8) l

परमेश्वर ने हममें से हर एक को पूरे मन से परदे के पीछे या सबसे आगे रहकर सेवा करने के लिए आत्मिक वरदान, गुण, कौशल और अनुभव दिए हैं l जब हम उसके रचनात्मकता का उत्सव मानते हैं, वह हमारी अद्वितीयता का उपयोग सुसमाचार फैलाने और प्रेम में दूसरों को निर्मित करने के लिए करता हैं l

“चाहे”

2017 में, अमरीका में हरिकेन हार्वे (प्रचंड तूफ़ान) के बाद लोगों की सहायता करने का अवसर हममें से एक समूह को ह्यूस्टन पहुँचा दिया l हमारा लक्ष्य तूफ़ान से प्रभावित लोगों को उत्साहित करना था l इस प्रक्रिया में, हमारे खुद के विश्वास ने चुनौती का सामना करके  मजबूत हुआ जब हम उनके साथ उनके क्षतिग्रस्त चर्च इमारतों और घरों में खड़े थे l

हार्वे (प्रचंड तूफ़ान) के परिणामस्वरूप अनेक लोगों द्वारा दर्शाया गया दीप्तिमान विश्वास ही वह है जिसे हम हबक्कूक द्वारा ई.पू. सातवीं शताब्दी के अंत के नबूवत में पाते हैं l नबी ने नबूवत की कि कठिन समय आने वाला था(1:5-2:1); स्थिति बेहतर होने से पूर्व बदतर हो जाएगी l नबूवत का अंत उसे पृथ्वी की होनेवाली हानि पर विचार करते हुए पाटा है और शब्द चाहे तीन गुना दिखाई देता है : “चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगे . . .  जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए . . . , भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों” (3:17) l

किस प्रकार हम अपने को अकल्पनीय हानि जैसे अस्वस्थता या बेरोजगारी, किसी प्रिय की मृत्यु, या एक प्राकृतिक आपदा का सामना करते हुए पाते हैं? हबक्कूक का“ कठिन समय का गीत” हमें परमेश्वर, जो आज, कल, और सर्वदा हमारे उद्धार का श्रोत (पद.18), सामर्थ्य, और स्थिरता (पद.19), उसमें निश्चित विश्वास और भरोसा रखने का आह्वान देता है l आखिर में, जो उसपर भरोसा करते हैं कभी निराश नहीं होंगे l

प्रोत्साहन की सामर्थ्य

बचपन में, बेंजामिन वेस्ट अपनी बहन की तस्वीर बनाने की कोशिश की, परन्तु तस्वीर बिगाड़ने में सफल हो गया l उसकी माँ ने उसकी रचना देखी, फिर उसके माथे को चूमकर बोली, “क्यों, यह तो सैली है!” वह बाद में कहनेवाला था कि उस चुम्बन ने उसे एक कलाकार बना दिया – और वह महान अमेरिकी चित्रकार बनने वाला था l प्रोत्साहन एक शक्तिशाल बात है!

पेंट करना सीखनेवाले बच्चे की तरह, पौलुस के पास उसकी आरंभिक सेवा में अधिक विश्वसनीयता नहीं थी, परन्तु बरनबास ने उसकी बुलाहट की पुष्टि की l यह बरनबास का प्रोत्साहन ही था जिसके कारण कलीसिया ने शाऊल को सहविश्वासी स्वीकार कर लिया (प्रेरितों 9:27) l बरनबास अन्ताकिया की मूल कलीसिया को भी प्रोत्साहित करके, उसे प्रेरितों के काम में एक सबसे प्रभावशाली कलीसिया बनने में सहायता की (11:22-23) l और बरनबास के साथ-साथ पौलुस का प्रोत्साहन ही था, जिससे यरूशलेम की कलीसिया ने गैरयहूदी विश्वासियों को मसीही के रूप में अपना लिया (15:19) l इसलिए, अनेक प्रकार से, आरंभिक कलीसिया की कहानी वास्तव में प्रोत्साहन की कहानी है l

यह हमारे जीवनों पर भी लागू होना चाहिए l हमारे विचार में प्रोत्साहन मात्र किसी को कुछ अच्छा कहना हो सकता है l परन्तु यदि हम उस दिशा में सोचते हैं, हम उसकी स्थायी शक्ति को पहचान नहीं पाते हैं l यह एक तरीका है जिससे परमेश्वर हमारे व्यक्तिगत जीवनों के साथ-साथ कलीसिया के जीवन को भी आकार देता है l

हम उन क्षणों के लिए धन्यवाद दें जब हम प्रोत्साहित किये गए और इसे दूसरों तक पहुंचाने की कोशिश करें l

अविनाशी प्रेम

जब हमनें अपने पीछे के आँगन में पानी की धारा देखी, वह गर्मियों की दिनों में चट्टानों के अन्दर से केवल एक पतली रिसाव थी l लकड़ी के भारी तख्तों के सहारे हम सरलता से आना-जाना कर लेते थे l महीनों बाद, हमारे क्षेत्र में अनेक दिनों तक मूसलाधार बारिश हुयी l हमारी छोटी सी नियंत्रित जलधारा चार फीट गहरी और दस फीट चौड़ी तेज़ बहनेवाली बड़ी नदी बन गई! प्रबल जल प्रवाह ने तख्तों को बहाकर अनेक फीट दूर टिका दिया l

तेज़ जलधारा अपने मार्ग में आनेवाली लगभग सभी वस्तुओं पर प्रबल हो जाती है l फिर भी कुछ है जो बाढ़ अथवा अन्य ताकतों के सामने अविनाशी है जो उसे नष्ट करना चाहती है – प्रेम l “पानी की बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता , और न महानदों से डूब सकता है” (श्रेष्ठगीत 8:7) l आमतौर पर रोमांटिक संबंधों में प्रेम की दृढ़ शक्ति और तीव्रता उपस्थित होती है, परन्तु केवल उसी प्रेम में पूरी तौर से अभिव्यक्त है जो परमेश्वर अपने पुत्र, यीशु मसीह में आपने लोगों के लिए रखता है l

जब वे बातें मिट जाती हैं जिन्हें हम मजबूत और भरोसेमंद मानते हैं, हमारी निराशाएं हमारे लिए परमेश्वर के प्रेम की एक नयी समझ का द्वार खोल देती हैं l उसका प्यार इस पृथ्वी पर की किसी भी बात से ऊंचा और गहरा और ताकतवर और टिकाऊ है l हम जिसका भी सामना करते हैं, हम उसके साथ करते हैं जो हमारे निकट है – हमें थामें हुए है, मिलकर सहायता करता है, और याद दिलाता है कि हमें प्रेम किया जाता है l

विशवास की विरासत

निर्णायक क्षण से बहुत पहले जब बिली ग्रैहम सोलह वर्ष की उम्र में मसीह में विश्वास में आए, यीशु के प्रति उनके माता-पिता की भक्ति प्रगट थी l वे दोनों विश्वासियों के एक परिवार में विशवास किये थे और उनका पालन पोषण भी वहीं हुआ था l बिली के माता-पिता ने अपने विवाह के बाद, प्रेमपूर्वक अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के द्वारा उस विरासत को जारी रखा, जिसमें प्रार्थना और बाइबल पठन और बच्चों के साथ विश्वासयोग्यता से चर्च जाना शामिल था l ग्रैहम के माता-पिता द्वारा बिली के लिए दृढ़ बुनियाद रखना ही वह मिटटी थी जिसे परमेश्वर ने उसे विश्वास में लाने के लिए उपयोग किया और, अंततः, एक दृढ़ सुसमाचार प्रचारक की उसकी बुलाहट भी l

प्रेरित पौलुस का युवा शागिर्द तीमुथियुस भी एक मजबूत आत्मिक बुनियाद से फायदा उठाया था l पौलुस ने लिखा, “मुझे तेरे उस निष्कपट विश्वास की सुधि आती है, जो पहले तेरी नानी लोइस और तेरी माता युनिके में था” (2 तीमुथियुस 1:5) l इस विरासत ने तीमुथियुस को तैयार किया और उसके हृदय को मसीह में विश्वास करने की ओर ले चला l

अब पौलुस तीमुथियुस को अपने विशवास की परम्परा को आगे ले चलने का आग्रह करता है (पद.5), “परमेश्वर के . . . वरदान को . . . [पवित्र आत्मा द्वारा जो] “सामर्थ्य” [देता है,  अपने अन्दर] प्रज्वलित कर दे” (पद.6-7) l आत्मा की सामर्थ्य के कारण, तीमुथियुस निर्भय होकर सुसमाचार के लिए जी सकता था (पद.8) l एक मजबूत आत्मिक विरासत गारन्टी नहीं देता है कि हम विश्वास में आ जाएंगे, परन्तु दूसरों का नमूना और सलाह मार्ग प्रशस्त करने में सहायता कर सकता है l और हमारे यीशु को उद्धारकर्ता ग्रहण करने के बाद, आत्मा सेवा में, उसके साथ जीवन जीने में, और दूसरों के विश्वास को पोषित करने में भी हमारी अगुवाई करेगा l