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मूल्यवान

“माई प्रेशियस (My Precious-काल्पनिक फिल्म) . . . l” अपने सनकी जुनून में “शक्ति के प्रेशियस/मूल्यवान अंगूठी के साथ” दुर्बल प्राणी गोल्लुम की छवि को टोलकिंस के लार्ड ऑफ़ द रिंग्स नाटकत्रय में सबसे पहले दिखाया गया था, जो आज लालच, जुनून, और पागलपन का भी चिन्हात्मक प्रारूप है l

यह कठिनाई से बताने योग्य एक छवि है l अंगूठी और खुद के साथ अपने प्रेम-घृणा के उत्पीड़ित सम्बन्ध में, गोल्लुम की आवाज़ हमारे अपने हृदयों की भूख की प्रतिध्वनि है l चाहे वह ख़ास तौर पर एक वस्तु की ओर निर्देशित हो, अथवा “और अधिक” की धुंधली लालसा ही हो हम निश्चित हैं कि हम आखिरकार अपना “प्रेशियस/मूल्यवान प्राप्त करने के बाद ही संतुष्ट होंगे l परन्तु इसके बदले, हमें सम्पूर्ण बनाने की हमारी सोच हमें पहले से अधिक खाली महसूस कराती है l

जीने का एक बेहतर तरीका है l जिस प्रकार भजन 16 में दाऊद व्यक्त करता है, जब हमारे हृदयों की लालसा हमें संतुष्टता की निराशाजनक, व्यर्थ खोज में पहुंचाने के लिए डराती हैं (पद.4), हम आश्रय के लिए परमेश्वर की ओर मुड़ना याद रखें (पद.1), खुद को याद दिलाते हुए कि उसके सिवा हमारे पास कुछ नहीं है (पद.2) l

और जब हमारी आँखें “वहां पर” संतुष्टता के लिए देखना बंद करके बदले में परमेश्वर की सुन्दरता पर टकटकी लगा ले (पद.8), हम अपने को आखिरकार सच्ची संतुष्टता का स्वाद चखते पाएंगे – [परमेश्वर की] उपस्थिति का आनंद उठाने वाला जीवन, “जीवन के मार्ग” में उसके साथ हर क्षण चलना – अभी और हमेशा तक (पद.11) l

फंदे से बाहर

द वीनस फ्लाईट्रैप(एक मांसाहारी पौधा) नार्थ कैरोलिना में हमारे घर से थोड़ी दूर बलुवा जलमयभूमि वाले एक छोटे क्षेत्र में सबसे पहले खोजा गया l इन पौधों को देखना दिलचस्प है क्योंकि वे मांसाहारी हैं l

वीनस फ्लाईट्रैप पौधे खिले फूल की तरह दिखाई देनेवाले रंगीन फंदों में मीठा-सुगंध वाला मकरंद छोड़ते हैं l उसमें कीट का प्रवेश, बाहरी किनारों के संवेदकों को सक्रीय कर देता है, और फंदा एक क्षण से भी कम समय में बंद हो जाता है जिससे शिकार पकड़ लिया जाता है l फंदा आगे और भी बंद होकर एंजाइम छोड़ता है और अपने शिकार को खा लेता है, जिससे पौधे को पोषण मिलता है जो बलुआ मिटटी नहीं देती है l

परमेश्वर का वचन एक और फंदे के विषय बताती है जो अचानक पकड़ लेती है l प्रेरित पौलुस ने अपने उत्तरजीवी तीमुथियुस को चिताया : “जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा और फंदे और बहुत सी व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा दी हैं l क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए बहुतों ने विशवास से भटककर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है” (1 तीमुथियुस 6:9-10) l

धन और भौतिक वस्तुएं सुख की प्रतिज्ञा करते हैं, परन्तु जब वे हमारे जीवनों में प्रथम स्थान ले लेते हैं, हम खतरनाक भूमि पर होते हैं l हमारे लिए मसीह के द्वारा परमेश्वर की भलाइयों पर केन्द्रित होकर हम धन्यवादी, दीन हृदयों के साथ जीवन जी कर इस फंदे से बच सकते हैं – “पर संतोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है” (पद.6) l

हमें परमेश्वर की तरह इस संसार की अस्थायी वस्तुएं कभी भी संतुष्ट नहीं कर सकती हैं l सच्ची, स्थायी संतोष केवल उसके साथ हमारे सम्बन्ध में ही पायी जाती है l

जीवित रंगों में

अपने दसवें जन्मदिन पर चाची सेलेना द्वारा भेजा गया चश्मा लगाकर ज़ेवियर मेक्युरी रो पड़ा l रंग दृष्टिहीन जन्मा, ज़ेवियर ने संसार को केवल स्लेटी, सफ़ेद, और काले रंग में ही देखा था l अपने एनक्रोमा चश्मे(विशेष प्रकार का चश्मा) से, हालाँकि, ज़ेवियर ने पहली बार रंग देखा l अपने चारों ओर की ख़ूबसूरती को देखकर उसके उल्लास और उन्माद ने उसके परिवार को महसूस कराया मानो उन्होंने आश्चर्यकर्म देखा हो l

परमेश्वर की रंगीन चमक ने प्रेरित यूहना के भीतर भी शक्तिशाली प्रतिक्रिया उत्पन्न कर दी (प्रकाशितवाक्य 1:17) l पुनरुथित मसीह की सम्पूर्ण महिमा का सामना करने के बाद, यूहन्ना ने देखा कि “एक सिंहासन स्वर्ग में रखा है, और उस सिंहासन पर कोई बैठा है l जो उस पर बैठा है वह यशब और माणिक्य-सा दिखाई पड़ता है, और उस सिंहासन के चारों ओर मरकत-सा एक मेघधनुष दिखाई देता है . . . उस सिंहासन में से बिजलियाँ और गर्जन निकलते हैं” (प्रकाशितवाक्य 4:2-5) l

किसी और समय, यहेजकेल ने भी इसी प्रकार का दर्शन देखा जिसमें “नीलम का बना हुआ सिंहासन था,” जिसके ऊपर मनुष्य के समान कोई दिखाई दे रहा था जो “कमर से लेकर ऊपर की ओर . . . झलकाया हुआ पीतल-सा दिखाई पड़ा, और उसके भीतर और चारों ओर आग-सी दिखाई” पड़ती थी (यहेजकेल 1:26-27) l इस तेजस्वी आकृति के चारों ओर मेघधनुष-सा प्रकाश था (पद.28) l

एक दिन हम आमने-सामने पुनरुथित मसीह के साथ मुलाकात करेंगे l ये दर्शन हमें उस वैभव की एक हलकी झलक देते हैं जो हमारा इंतज़ार कर रही है l जब हम यहाँ पर और अभी परमेश्वर की रचना की ख़ूबसूरती का उत्सव मनाते हैं, काश हम प्रगट होनेवाली महिमा की बाट जोहते हुए अपना जीवन बिताएं l

परमेश्वर के लिए खूबसूरत

अपने प्रेमी से डेटिंग करते समय डेनिसी ने पतली आकृति और वस्त्र को सुरुचिपूर्ण बनाकर रखने का प्रयास किया, यह भरोसा करते हुए कि वह उसके लिए उस तरह से अधिक आकर्षक लगेगी l आखिरकार, स्त्रियों की सभी पत्रिकाएँ इन्हीं की सलाह देती हैं l यह केवल बहुत बाद में पता चला कि उसके मन में क्या था : “जब तुम अधिक वजनदार थी तब भी मैंने तुम्हें उतना ही पसंद किया और तुम्हारे वस्त्र के विषय चिंता नहीं की l”

डेनिसी को एहसास हुआ कि “खूबसूरती” कितना आत्मगत(subjective) थी l दूसरों के द्वारा खूबसूरती के विषय हमारा दृष्टिकोण कितनी सरलता से प्रभावित होता है l यह आंतरिक ख़ूबसूरती के मूल्य को भूल कर अक्सर बाह्य स्वरुप पर केन्द्रित होता है l परन्तु परमेश्वर हमें केवल एक ही तरीके से देखता है – अपने सुन्दर, प्रिय बच्चों की तरह l मैं सोचना चाहता हूँ कि जब परमेश्वर ने इस सृष्टि की रचना की, वह सर्वोत्तम को अंत के लिए छोड़ दिया अर्थात् हमें! उसने सबकुछ सुन्दर बनाया, परन्तु हम अधिक विशेष हैं क्योंकि हम परमेश्वर के स्वरुप में बनाए गए हैं (उत्पत्ति 1:27) l

परमेश्वर हमें खूबसूरत मानता है! कोई आश्चर्य की बात नही कि भजनकार विस्मय से भर गया जब उसने प्रकृति की महानता की तुलना मनुष्य से की l “उसने पुछा, “तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?” (भजन 8:4) l फिर भी परमेश्वर ने नश्वर को महिमा और आदर दी जो और किसी के पास नहीं था (पद.5)

यह सच्चाई हमें उसकी प्रशंसा करने का आश्वासन और कारण देता है (पद.9) l चाहे दूसरे हमारे विषय कुछ भी सोचें – या हम अपने विषय क्या सोचते हैं – यह जान लें : हम परमेश्वर के लिए खूबसूरत है l

पुत्र के अनुगामी

संसार में सूरजमुखी पौधा लापरवाह/बेफिक्र रीति से अंकुरित होते हैं l मधुमक्खियाँ इन पौधों में परागन करती हैं, ये राजमार्गों के किनारे, पक्षियों को आकर्षित करते हैं, और खेतों, खलिहानों, और घास के मैदाओं में उगते हैं l फसल उगाने के लिए, हालाँकि, सूरजमुखी को अच्छी मिटटी की ज़रूरत होती है l किसानों की विवरण पुस्तिका के अनुसार, “जैविक पदार्थ या प्राकृतिक उर्वरक के साथ,” शुष्क, थोड़ी अम्लीय, पौष्टिक मिटटी, अंततः सूरजमुखी के स्वादिष्ट बीज, असली तेल, और सूरजमुखी उगानेवाले मेहनती किसानों के लिए जीविका उत्पन्न करते हैं l

हमें भी आत्मिक उन्नति के लिए “अच्छी भूमि” की ज़रूरत है (लूका 8:15) l जिस प्रकार यीशु ने एक बीज बोने वाले के दृष्टान्त में सिखाया, परमेश्वर का वचन पथरीली या कांटेदार भूमि में भी उग सकते हैं (देखें पद.6-7) l हालाँकि, यह केवल, “ईमानदार, उत्तम मन वाले लोगों के हृदय रूपी मिटटी में उगता है जो वचन को सुनकर उसे मन में संभाले रहते हैं, और धीरज से फल लाते हैं” (पद.15) l

सूरजमुखी के छोटे पौधे भी इसी प्रकार अपनी उन्नति में धीरज धरते हैं l पूरे दिन सूरज की चाल का अनुसरण करते हुए, वे प्रतिदिन सुर्यानुवर्तन(heliotropism) की प्रक्रिया में सूर्य की ओर उन्मुख होते हैं l पूर्ण विकसित पौधे भी उसी तरह इच्छित होते हैं l वे पूर्व की ओर स्थायी रूप से मुड़ जाते हैं, जिससे फूल का चेहरा गर्म होता है और इसके द्वारा परागन करनेवाली मधुमखियों का आना बढ़ जाता है l इस प्रकार बड़ा फसल मिलता है l

सूरजमुखी की देखभाल करनेवालों की तरह, हम भी वचन को पकड़े रहकर और उसके पुत्र का अनुकरण करके परमेश्वर के वचन की उन्नति के लिए एक समृद्ध माध्यम बन सकते हैं – हमें परिपक्व बनाने के लिए ईमानदारी और परमेश्वर के वचन के लिए उत्तम मन विकसित कर सकते हैं l काश हम पुत्र का अनुकरण करें और उन्नति करते जाएं l