हमें एक दूसरे की ज़रूरत है
जब मैं अपने बच्चों के संग लम्बी पैदल यात्रा कर रही थी, हमें रौशनी दिखाई दी, पगडण्डी पर छोटे गुच्छों में उगते हुए लचीले हरे पौधे l संकेतचिन्ह के अनुसार, सामान्य तौर पर इस पौधे को डिअर मोस(एक प्रकार का शैवाल/घास) कहा जाता है, किन्तु वास्तव में वह शैवाल है ही नहीं l यह एक प्रकार की काई(lichen) है l…
परमेश्वर के अद्भुत हाथ
न्यू यॉर्क से सैन अंटोनियो के विमान पर सवार हुए केवल बीस मिनट हुए थे, विमान का रूप बदल गया जब शांति के स्थान पर कोलाहल मच गया l जब विमान का एक इंजन ख़राब हो गया, इंजन का मलबा विमान की एक खिड़की को तोड़कर भीतर आ गया जिससे केबिन का दबाव घट गया l दुर्भाग्यवश, कई यात्री घायल…
भालू का गले लगाना
“भालू” मेरे पौत्र के लिए उपहार था – एक विशाल भरवा पशु फ्रेम में निहित प्रेम का ढेर लगाने वाली सहायता l डी शिशु का प्रतिउत्तर? पहले, आश्चर्य l अगला, एक आश्चर्यचकित विस्मय l उसके बाद, एक साहसी जांच पड़ताल को उकसाने वाली जिज्ञासा l उसने अपनी थुल-थुल ऊँगली भालू के नाक में कोंचा, और जब भालू उसकी बाहों में…
जब सबकुछ खोया हुआ लगे
केवल छः महीनों में जेरल्ड का जीवन टुकड़े-टुकड़े हो गया l एक आर्थिक संकट ने उसके कारोबार और धन-दौलत को बर्बाद कर दिया, जबकि एक दुखद दुर्घटना ने उसके पुत्र की जान ले ली l आघात से अभिभूत, उसकी माँ की हृदयाघात से मृत्यु हो गयी, उसकी पत्नी विषाद में चली गयी, और उसकी दो तरुण बेटियाँ शोकाकुल बनी रहीं…
एक दयालु आलोचक
परिदृश्य चित्रकारी कक्षा में, शिक्षक ने, जो एक उच्च अनुभवी व्यवसायिक कलाकार थे, मेरे प्रथम नियत कार्य की जांच की l वे अपनी ठुड्डी के नीचे हाथ रखकर, चित्रकारी के सामने खड़े हो गए l ये रहा, मैंने सोचा l वे शायद कहनेवाले हैं यह बेकार है l
किन्तु उन्होंने ऐसा नहीं कहा l
उन्होंने कहा उनको रंगों की पद्धति और स्पष्टता की भावना अच्छी लगी l तब उन्होंने उल्लिखित किया कि दूर के वृक्षों में अधिक हल्के रंग भरे जा सकते थे l घासपात के गुच्छों को सोम्य किनारा चाहिए थी l उनके पास परिदृश्य और रंग के नियमों पर आधारित मेरे काम की आलोचना करने का अधिकार था, फिर भी उनकी आलोचना ईमानदार ओर हितकर थी l
यीशु, जो लोगों को उनके पाप के कारण दोषी ठहराने में पूर्णरूपेण योग्य था, एक सामरी स्त्री को जिससे उसने प्राचीन कुँए पर मुलाकात की, दोषी ठहराने के लिए दस आज्ञा का उपयोग नहीं किया l उसने केवल थोड़े से शब्दों का उपयोग करके कोमलता से उसके जीवन की समीक्षा की l परिणाम यह निकला कि उसने महसूस किया कैसे संतुष्टता के लिए उसकी खोज उसे पाप में ले गयी थी l इस अभिज्ञता पर बल देते हुए, यीशु ने खुद को अनंत संतुष्टता का एकमात्र श्रोत बताते हुए प्रगट किया (युहाना 4:10-13) l
इस परिस्थिति में यीशु द्वारा उपयोग किया गया अनुग्रह और सच्चाई का मेल ही है जिसका अनुभव हम उसके साथ हमारे सम्बन्ध में करते हैं (1:17) l उसका अनुग्रह हमें हमारे पाप के द्वारा अभिभूत होने से रोकता है, और उसकी सच्चाई हमें यह सोचने से रोकती है कि यह एक गंभीर विषय नहीं है l
क्या हम यीशु को हमारे जीवनों में उन क्षेत्रों को दर्शाने के लिए आमंत्रित करेंगे जहाँ हमें उन्नति की ज़रूरत है ताकि हम उसके समान और अधिक बन सकें l
पत्थर एक लालसा
फर्नान्डो पेस्सोआ की पुर्तगाली कविता “ओडे मारीटीमा” की एक पंक्ति कहती है, “आह, हर घाट पत्थर की लालसा है!” पेस्सोआ की घाट भावनाओं का प्रतिरूप है जिसका हम अनुभव करते हैं जब एक जलयान धीरे-धीरे हमसे दूर जाता है l यह जलयान कूच कर जाता है परन्तु घाट वहीं रहता है, आशा और स्वप्न, वियोग और चाह की स्थायी स्मारक l हम खोयी हुयी वस्तुओं के लिए लालायित होते हैं, और उन बातों के लिए जिन तक हमारी पहुँच नहीं l
पुर्तगाली शब्द (saudade) जिसका अनुवाद “लालसा” है अतीत के लिए लालायित होने का सदर्भ देता है जो हम अनुभव करते हैं – एक गहरी लालसा जो परिभाषा को चुनौती देती है l कवि अवर्णनीय का वर्णन कर रहा है l
हम कह सकते हैं कि नबो पहाड़ मूसा की “पत्थर की लालसा” थी l नबो पहाड़ से उसने टकटकी लगाकर प्रतिज्ञात देश को देखा – एक देश जहां वह नहीं पहुंचनेवाला था l मूसा के लिए परमेश्वर के शब्द – “मैं ने इसको तुझे साक्षात् दिखला दिया है, परन्तु तू पार होकर वहाँ जाने न पाएगा” (व्यवस्थाविवरण 34:4) – कठोर प्रतीत हो सकते हैं l परन्तु यदि हम केवल यही देखते हैं, हम घटना के केंद्र से चूक जाते हैं l परमेश्वर मूसा से अत्यधिक आराम की बातें बोल रहा है : “जिस देश के विषय में मैं ने अब्राहम, इसहाक, और याकूब से शपथ खाकर कहा था, कि मैं इसे तेरे वंश को दूँगा वह यही है” (पद.4) l जल्द ही, मूसा नबो से कुछ करके कनान से कहीं बेह्तार देश में जानेवाला था (पद.5) l
जीवन हमें घाट पर खड़ा हुआ पाता है l प्रिय लोग चले जाते हैं; आशा धूमिल हो जाती है; स्वप्नों का अंत हो जाता है l इन सबके मध्य हम अदन की प्रतिध्वनि और स्वर्ग की झलक का अनुभव करते हैं l हमारी लालसाएं हमें परमेश्वर की ओर इंगित करती हैं l वही हमारी पूर्णता है जिसकी हम लालसा करते हैं l
प्रेम रुकेगा नहीं
जब मैं उन्नीस वर्ष की हो गयी, और वर्षों पहले जब मेरे पास पेजर या मोबाइल फ़ोन नहीं था, मैं अपनी माँ से कई सौ मील से अधिक की दूरी पर रहने चली गयी l एक दिन सुबह के समय, फोन पर नियोजित बातचीत का समय भूलकर, मैं बहुत सुबह रोज के काम के लिए निकल गयी l उस रात को, दो पुलिस वाले मुझसे मिलने आए l माँ चिंतित थी क्योंकि मैंने उनसे बात करने का मौका कभी नहीं छोड़ा था l बार-बार पुकारने के बाद और व्यस्त संकेत मिलने पर, उन्होंने अधिकारियों को सूचित कर उनसे मेरे विषय पता लगाने का निवेदन किया l उनमें से एक अधिकारी ने मेरी ओर मुड़कर कहा, “यह जानना आशीषमय है कि प्रेम आपको ढूँढने में नहीं रुकेगा l”
जब मैंने अपनी माँ को पुकारने के लिए फ़ोन उठाया, मैंने जाना कि मैंने भूल से रिसीवर को उसके उपयुक्त स्थान से अलग रख दिया था l मेरे क्षमा मांगने के बाद, उन्होंने कहा कि यह खुशखबरी परिवार और मित्रों को बताना ज़रूरी हैं जिन्हें उन्होंने हमारे गुम होने के विषय सूचित किया था l मैंने यह सोच कर फ़ोन रख दिया कि वह थोड़ा अति प्रतिक्रिया करेगी, यद्यपि यह अधिक प्रेम किया जाना अच्छा महसूस हुआ l
बाइबल परमेश्वर का जो प्रेम है, एक खुबसूरत तस्वीर बनाती है, जो लगातार अपने भटकनेवाले बच्चों को अपने निकट बुलाता है l एक अच्छे चरवाहा की तरह, वह हमारी चिंता करता है और हर एक खोयी हुयी भेड़ को ढूंढता है, परमेश्वर के हर एक प्रिय बच्चे की बहुमूल्य कीमत की पुष्टि करता है (लूका 15:1-7) l
प्रेम हमें कभी भी ढूंढना नहीं छोड़ता है l वह हमारा पीछा हमारे उसके पास लौटने तक करेगा l हम दूसरों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं जिन्हें जानना है कि प्रेम – परमेश्वर – भी उनको ढूँढना नहीं छोड़ता है l
प्रभु प्रबंध करेगा
मेरे पूर्वस्नातक और स्नातक पाठ्यकर्मों के बीच गर्मियों में मेरी घबराहट बढ़ गयी l मुझे सब कुछ नियोजित रखना पसंद है, और राज्य से बाहर जाने का विचार और नौकरी के बिना स्नातक स्कूल में प्रवेश ने मुझे बेचैन कर दिया l हालाँकि, कुछ दिन पहले मैंने अपनी गर्मियों की नौकरी छोड़ दी, मुझे दूर से/घर से ही कंपनी में काम जारी रखने के लिए कहा गया l मैंने स्वीकार कर ली और मुझे शांति मिली क्योंकि परमेश्वर मेरी चिंता कर रहा था l
परमेश्वर ने प्रबंध किया, परन्तु अपने समय में, मेरे समय में नहीं l अब्राहम की स्थिति अपने पुत्र इसहाक के साथ कहीं ज़्यादा कठिन थी l उससे अपने पुत्र को ले जाकर उसे उसके लिए पहाड़ पर बलिदान करने को कहा गया था (उत्पत्ति 22:1-2) l बगैर हिचकिचाहट के, अब्राहम ने आज्ञा मानी और इसहाक को वहाँ ले गया l क्या तीन दिनों ने अब्राहम को अपना मन बदलने के लिए प्रयाप्त समय नहीं दिया, परन्तु उसने नहीं बदला (पद.3-4) l
जब इसहाक ने अपने पिता से प्रश्न किया, अब्राहम का उत्तर था, “परमेश्वर होमबलि के लिए भेड़ का उपाय आप ही करेगा” (पद.8) l मुझे आश्चर्य है कि क्या हर कदम के साथ अब्राहम की घबराहट बढ़ती जा रही होगी जब वह इसहाक को वेदी पर बाँधा होगा और अपनी छुरी इंच- इंच करके उठाया होगा (पद.9-10) l स्वर्गदूत द्वारा उसे रोकने पर उसे कितना आराम मिला होगा! (पद.11-12) l परमेश्वर ने वास्तव में एक बलिदान, एक मेढ़ा का प्रबंध किया, जो एक झाड़ी में फंसा हुआ था (पद.13) l परमेश्वर ने अब्राहम के विश्वास की जांच की, और उसने उसे विश्वासयोग्य ठहराया l और बिलकुल सही समय पर, परमेश्वर ने प्रबंध किया (पद.14) l
अकेलापन का मंत्री
अपने पति की मृत्यु के बाद, बेट्सी ने ज़्यादातर दिन अपने घर में टेलीविजन देखकर और अपने लिए चाय बनाकर व्यतीत किया है l वह अपने एकाकीपन में अकेले नहीं है l 90 लाख से अधिक ब्रिटेनवासियों(जनसंख्या का 15 फीसदी) का कहना है कि वे अक्सर या हमेशा अकेलापन का अनुभव करते हैं, और ग्रेट ब्रिटेन ने क्यों और कैसे सहायता की जा सकती है के लिए एकाकीपन का एक मंत्री नियुक्त किया है l
एकेलापन के कुछ कारण सबको पता हैं : अक्सर हम जड़ों को गहराई में ले जाने के लिए प्रयास करते हैं l हम भरोसा करते हैं कि हम अपनी चिंता कर सकते हैं, और हमारे पास बातचीत करने के लिए कारण नहीं है l हम तकनीक से अलग-थलग है – हममें से हर एक अपने खुद के अस्थिर चित्रपटों में मगन है l
मैं अकेलापन का अंधकारमय खतरा महसूस करता हूँ, और आप भी करते होंगे l इसीलिए हमें भी संगी विश्वासियों की आवश्यकता है l इब्रानियों हमें एक दूसरे के साथ नियमित रूप से इकठ्ठा होने के लिए उत्साहित करते हुए यीशु के बलिदान की अपनी गहरी परिचर्चा समाप्त करता है (10:25) l हम परमेश्वर का परिवार हैं, इसलिए हमें “भाईचारे की प्रीति” बनाए रखना है और “अतिथि-सत्कार करना नहीं भूलना [है] (13:1-2) l यदि हममें से हर एक प्रयास करेंगे, सभी लोग देखभाल का अनुभव करेंगे l
अकेले लोग संभतः हमारी दयालुता को लौटा नहीं पाएंगे, किन्तु हार मानने का यह कारण हो नहीं सकता है l यीशु ने हमें कभी नहीं छोड़ने की प्रतिज्ञा की है (13:5), और हम उसकी मित्रता का उपयोग दूसरों के लिए अपने प्रेम को बढ़ने के लिए कर सकते हैं l क्या आप अकेले हैं? आप परमेश्वर के परिवार की सेवा करने के लिए ढूँढ कौन से तरीके ढूँढ सकते हैं? आप जो मित्रता यीशु में करते हैं वो अनंत हैं, इस जीवन में और उसके बाद भी l