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परमेश्वर अधिक सामर्थी है

एक दक्षिण अफ़्रीकी आखेट निरीक्षक, गाइल्स केल्मैनसन, एक अविश्वसनीय दृश्य का वर्णन करता है : दो बिज्जू (Honey badgers) छः शेरों के समूह का सामना कर रहे थे l संख्या में कम होने के बावजूद, बिज्जू हिंसक परभक्षी शरों से पीछे नहीं हटे जो उनसे आकर में दस गुना बड़े थे l शेरों ने सोचा था शिकार आसान होगा, परन्तु विडिओ फुटेज में बिज्जू कुछ चीज़ को लेकर इठलाते हुए जाते दिखायी दिए l 

दाऊद और गोलियात इससे भी अधिक असम्भव कहानी पेश करते हैं l युवा, अनुभवहीन दाऊद भयंकर पलिस्ती गोलियात का सामना करता हैं l इस युवा योद्धा से अत्यंत प्रचंड, गोलियात के पास शारीरिक शक्ति और बेमिसाल हथियार थे – काँस्य का कवच और घातक, धारदार बरची/भाला (1 शमूएल 17:5-6) l दाऊद, एक अनुभवहीन चरवाहा, के पास केवल एक गोफन था जब वह अपने भाइयों के लिए रोटी और पनीर की टिकियाँ लेकर युद्ध के मैदान में पहुँचा (पद.17-18) l

गोलियात ने इस्राएल को लड़ने के लिए ललकारा, परन्तु कोई भी लड़ने के लिए तैयार नहीं था l राजा शाऊल और “और समस्त [इस्राएली] . . . अत्यंत डर गए” (पद.11) l उस दहशत की कल्पना करें जब दाऊद युद्ध में शामिल हुआ l किस ने उसे वह साहस दीया जो किसी भी इस्राएली योद्धा के पास नहीं था? ज्यादातर सभी के लिए, गोलियात उनकी सोच पर हावी था l हालांकि, दाऊद ने परमेश्वर को देखा l वह दृढ़ता से बोला, “यहोवा [गोलियात] को मेरे हाथ में कर देगा” (पद.46) l जबकि बाकी सभी लोग को भरोसा था कि इस कहानी पर गोलियात का नियंत्रण था, उसका विश्वास था कि परमेश्वर अधिक सामर्थी है l और, दाऊद उस भीमकाय व्यक्ति के माथे पर पत्थर से ऐसा मारा कि वह भीतर घुस गया l इस तरह दाऊद का विश्वास सच्चा साबित हुआ l

हमारे पास यह विश्वास करने की परीक्षा आती है कि “गोलियात” (हमारी परेशानियां) कहानी को संचालित करती हैं l परन्तु, परमेश्वर सामर्थी है l वह हमारे जीवनों की कहानी पर प्रभुत्व करता है l

अभी से

जब मेरी सबसे बड़ी बहन के बायोप्सी(ख़ास चिकित्सीय जाँच) ने फरवरी 2017 के अंतिम दिनों में कैंसर प्रगट कर दिया, मैंने अपनी सहेलियों से कहा, “अभी से शुरू करते हुए - मुझे अपनी बहन कैरोलिन के साथ अधिकाधिक समय व्यतीत करना होगा l” कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि मेरी भावनाएं उस खबर के प्रति एक अनावश्यक प्रतिक्रिया थी l परन्तु दस महीनों के भीतर उनकी मृत्यु हो गयी l और उनके साथ घंटों बिताने के बावजूद, जब हम किसी से प्रेम करते हैं हमारे हृदयों के पास प्रयाप्त प्रेम करने के लिए प्रयाप्त समय कभी नहीं है l

प्रेरित पतरस ने आरम्भिक कलीसिया में यीशु के अनुयायियों को “एक दूसरे से अधिक प्रेम” (1 पतरस 4:8) रखने का आह्वान किया l वह सताव के अंतर्गत दुःख उठा रहे थे और उनके लिए अपने मसीही समुदाय में अपने भाइयों और बहनों से पहले से अधिक प्रेम करना ज़रूरी था l क्योंकि परमेश्वर ने उनके हृदयों में अपना प्रेम उंडेला था, बदले में वे भी दूसरों को प्रेम करना चाहेंगे l उनका प्रेम प्रार्थना, उदार आतिथ्य, और कोमल और सच्चे संवाद द्वारा प्रगट होना था – सबकुछ परमेश्वर द्वारा दी गयी सामर्थ्य में (पद.9-11) l अपने अनुग्रह के द्वारा, परमेश्वर ने उनको लाभहीन तरीके से उसके नेक उद्देश्य के साथ परस्पर सेवा करने का वरदान किया था l ताकि “सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो” (पद.11) l यह परमेश्वर की सामर्थी योजना है जो वह हमारे द्वारा पूरी करता है l

हमें दूसरों की और उनको हमारी ज़रूरत है l हम प्रेम करने के लिए परमेश्वर से जितना भी समय या जितने भी संसाधन प्राप्त किये हैं उनका उपयोग करें – अभी से l

अपने प्रचार का अभ्यास

पासवान और संपादक इयूजीन पीटरसन को स्विट्ज़रलैंड के चिकित्सक और उच्च आदर प्राप्त पास्त्रीय परामर्शदाता पॉल टोर्नियर का व्याख्यान सुनने का अवसर मिला l पीटरसन ने डॉक्टर के कार्यों को पढ़ा था, और चंगाई के प्रति उनके दृष्टिकोण की प्रशंसा की थी l व्याख्यान ने पीटरसन पर एक गहरी छाप छोड़ी l जब वे सुन रहे थे, उनको महसूस हुआ कि टोर्नियर के कथनी और करनी में अंतर नहीं था l पीटरसन ने अपने अनुभव का वर्णन करने के लिए इस शब्द का चुनाव किया : “अनुरूपता l यह सबसे अच्छा शब्द है जो मैं ढूढ़ सकता हूँ l”

अनुरूपता (Congruence) – इसको कुछ लोग ”अपने प्रचार का अभ्यास करना” या “अपनी कथनी को करनी में बदलना” संबोधित करते हैं l प्रेरित यूहन्ना बल देते हैं कि यदि हममें से कोई “यह कहता है कि मैं ज्योति में हूँ और अपने भाई से बैर रखता” है तो वह अब तक “अन्धकार ही में है” (1 यूहन्ना 2:9) l निष्कर्ष यह है, हमारे जीवन और हमारे कार्य बस मेल नहीं खाते हैं l यूहन्ना आगे कहता हैं कि ऐसे लोग “नहीं [जानते] कि कहाँ [जाते] हैं” (पद.11) l यह शब्द जिसका उन्होंने यह बताने के लिए चुनाव किया कि परस्पर-विरोधी हमें किस प्रकार छोड़ जाता है? दृष्टिहीन l

वचन के प्रकाश को हमारे मार्गों को आलोकित करने की अनुमति देने के द्वारा परमेश्वर के साथ निकटता से पंक्तिबद्ध रहकर जीवन जीना हमें दृष्टिहीन होने से बचाता है l परिणाम एक धर्मी दृष्टिकोण होता है जो हमारे दिनों को स्पष्टता देता है और उन्हें केन्द्रित करता है – हमारी कथनी और करनी अनुरूप होते हैं l जब दूसरे यह देखते हैं, प्रभाव आवश्यक रूप से किसी ऐसे व्यक्ति का नहीं है जिसे सभी स्थान की जानकारी है जहाँ वह जा रहा है, परन्तु ऐसे व्यक्ति का है जो स्पष्टता से जानता है वह किसका अनुगामी है l

हर कहानी उसका नाम फुसफुसाती है

मैंने मनमौजी ढंग से बच्चों की सचित्र बाइबल खोलकर अपने पोते के लिए पढ़ना आरंभ कर दिया l तुरंत ही हम सम्मोहित हो गए जब परमेश्वर के प्रेम और प्रबंध की कहानी गद्य के रूप में खुलने लगी l अंश को चिन्हित करके, मैंने पुस्तक को पलटकर शीर्षक को एक बार फिर पढ़ना चाह : द जीसस स्टोरीबुक बाइबल : हर कहानी उसका नाम फुसफुसाती है l

हर कहानी उसका नाम फुसफुसाती है l हर एक कहानी l

अपने पुनरुत्थान के बाद, यीशु ने अपने दो चेलों से इम्माऊस के मार्ग पर मुलाकात की जिन्होनें उसे नहीं पहचाना और वह अपने संभावित उद्धारकर्ता की मृत्यु पर निराशा से संघर्ष कर रहे थे (लूका 24:19-24) l उनकी “आशा थी कि यही इस्राएल को छुटकारा देगा” (पद.21) l उसके बाद लूका लिखता है कैसे यीशु ने उनको आश्वस्त किया : “तब उसने[यीशु ने] मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ करके सारे पवित्शास्त्र में से अपने विषय में लिखी बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया” (पद. 27) l

हर कहानी उसका नाम फुसफुसाती है, कठिन कहानियाँ भी, क्योंकि वे हमारे संसार की व्यापक बर्बादी और एक छुटकारा देनेवाले की हमारी ज़रूरत दर्शाती हैं l हमें अपने पास वापस लाने के लिए, हर एक कार्य, घटना, हस्तक्षेप उसके अड़ियल प्रिय लोगों के लिए परमेश्वर द्वारा अभिकल्पित छुटकारे की ओर इशारा करते हैं l

परमेश्वर के प्रति ईमानदार

मेरे तीन वर्ष के पोते का दिन खराब ढंग से शुरू हुआ l वह अपना पसंदीदा शर्ट ढूढ़ नहीं पा रहा था l जूते जो वह पहनना चाहता था बहुत ही भड़कीला था l वह अपनी दादी से परेशान और उनपर क्रोधित होने के बाद बैठकर रोने लगा l

“तुम इतना परेशान क्यों हो?” मैंने पूछा l हम थोड़े समय तक बाते करते रहे और उसके शांत होने के बाद, मैंने कोमलता से पूछा, “क्या तुम अपनी दादी के लिए अच्छे रहे हो?” वह विचारपूर्वक अपने जुते की ओर देखकर उत्तर दिया, “नहीं, मैं बुरा था, मुझे क्षमा करें l”

मेरा दिल उसके पक्ष में गया l अपने किये का इनकार करने की बजाए, वह ईमानदार था l आनेवाले क्षणों में हम यीशु से क्षमा और बेहतर करने के लिए सहायता मांगे l

यशायाह 1 में, परमेश्वर उन गलतियों के लिए अपने लोगों का सामना करता है जो उन्होंने की थीं l रिश्वत और अन्याय अदालतों में व्याप्त था, और अनाथों और विधवाओं से भौतिक लाभ उठाया जाता था l फिर भी परमेश्वर करुणा से प्रतियुत्तर देकर, यहूदा के लोगों से अपनी गलती मानकर उससे फिरने को कहता है : “आओ हम आपस में वादविवाद करें : तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों तौभी वे हिम के समान उजले हो जाएँगे” (यशायाह 1:18) l

परमेश्वर हमसे चाहता है कि हम अपने पापों के विषय उसके सामने खुले हुए हों l वह प्यार से क्षमा के साथ ईमानदारी और पश्चाताप की ज़रूरत पूरा करता है : “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l इसलिए कि हमारा परमेश्वर करुनामय है, नयी शुरुआत हमारा इंतज़ार कर रही है!