प्रार्थना में लगे रहें
केविन ने अपनी आँखों से आंसू पोछा जब वह अपनी पत्नी, कैरी के पढ़ने के लिए कागज़ का एक टुकड़ा लिए हुए था l वह जानता था कि कैरी और मैं अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करते थे कि वह यीशु में पुनः विश्वास करने लग जाए l “यह पर्ची उसकी मृत्यु के बाद मेरी माँ की बाइबल में मिली, और मुझे आशा है कि यह तुम्हें प्रोत्साहित करेगी,” उसने कहा l उस पर्ची के ऊपरी भाग पर ये शब्द थे, “मेरे पुत्र, केविन के लिए l” उन शब्दों के नीचे उसके उद्धार के लिए एक प्रार्थना थी l
केविन ने समझाया, “मैं इस पर्ची को अपनी निजी बाइबल में रखता हूँ l” मेरी माँ ने मेरे उद्धार के लिए पैंतिस वर्षों से अधिक तक प्रार्थना की l मैं परमेश्वर से बहुत दूर था, और अब मैं विश्वासी हूँ l” वह हमारी ओर एक टक देखते हुए अपने आंसुओं में से मुस्कुराया : “अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करने में हार न मानना – चाहे जितना समय लग जाए l”
उसके प्रोत्साहन के शब्दों ने मुझे यीशु द्वारा लूका के सुसमाचार में प्रार्थना के विषय बताई गयी कहानी की भूमिका पर सोचने को विवश किया l लूका इन शब्दों के साथ आरम्भ करता है, “फिर [यीशु ने] इसके विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए, उनसे यह दृष्टांत कहा” (18:1) l
इस कहानी में, यीशु एक “अधर्मी न्यायी” (पद.6) जो केवल इसलिए एक निवेदन को मान लेता है क्योंकि वह आगे को और परेशान नहीं होना चाहता है, की तुलना सिद्ध स्वर्गिक पिता से करता है जो गहराई से हमारी चिंता करता है और इच्छित है कि हम उसके पास आएँ l जब भी हम प्रार्थना करते हैं हम उत्साहित हों कि परमेश्वर सुनता है और हमारी प्रार्थनाओं का स्वागत करता है l
बाइबल का नुस्ख़ा
ग्रेग और एलिज़ाबेथ नियमित रूप से स्कूल जाने वाले अपने चार बच्चों के साथ “चुटकुलों की रात” रखते हैं l हर एक बच्चा अनेक चुटकुले लेकर खाने की मेज़ पर बताने के लिए आता है जो उसने सप्ताह के दौरान पढ़े हैं या सुने हैं (या खुद से बनाए है!) इस परंपरा ने मेज़ के आस-पास बांटे गए आमोद-प्रमोद के आनंददायक यादों को स्थापित किया है l ग्रेग और एलिज़ाबेथ ने अपने बच्चों के लिए हंसी को स्वास्थ्यवर्धक, कठिन दिनों में उनके मनोबल को ऊँचा करने वाला भी महसूस किया है l
भोजन की मेज़ के आस-पास आनंदायक बातचीत के लाभ को सी. एस. लेयुईस ने पहचाना था, जिसने लिखा, “सूर्य भोजन के समय एक हँसते हुए परिवार से अधिक किसी और पर इतना नहीं चमकता है l”
एक आनंदित हृदय को बुद्धि से पोषित करने का वर्णन नीतिवचन 17:22 में मिलता है, जहाँ हम पढ़ते हैं, “मन का आनंद अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियां सूख जाती हैं l” यह नीतिवचन स्वास्थ्य और चंगाई को प्रोत्साहित करने का एक “नुस्ख़ा” पेश करता है – हमारे हृदयों को आनंद से भरने की अनुमति देता है, एक औषधि जिसकी कीमत कम और परिणाम बहुत बड़ा है l
हम सब को बाइबल का यह नुस्ख़ा चाहिए l जब हम अपने बातचीत में आनंद को आने देते हैं, वह हमारे असहमति को सही परिपेक्ष्य में पहुंचता है l यह हमें स्कूल में एक तनावपूर्ण परीक्षा या एक कठिन दिन के कार्य के बावजूद भी शांति का अनुभव करने देता है l परिवार एवं मित्रों के बीच हँसी एक सुरक्षित स्थान बना सकता है जहां हम दोनों जानते एवं अनुभव करते हैं कि हम प्रेम किये गए हैं l
क्या आपको अपने जीवन में अपनी आत्मा के लिए और अधिक “अच्छी औषधि” को सम्मिलित करने की ज़रूरत है? स्मरण रखें, आपको बाइबल से एक आनंदित हृदय को विकसित करने का प्रोत्साहन मिलता है l
संतों और पापियों की
मरुभूमि में रहकर यूहन्ना बप्तिस्मा दाता के पद चिन्हों पर चलने के पूर्व, मिस्र की मेरी (c. AD 344-421) ने अपनी युवावस्था को अनुचित अभिलाषाओं और पुरुषों को बुरे रास्तों पर ले जाने में बिताए l अपने अनैतिक पेशे के शिखर पर, वह तीर्थयात्रियों को भ्रष्ट करने के प्रयास में यरूशलेम गयी l उसके बदले में, उसने अपने पापों के गहरे दोष का अनुभव किया और इसलिए निर्जन प्रदेश में पश्चाताप और एकाकीपन का जीवन व्यतीत किया l मेरी का मौलिक रुपान्तरण परमेश्वर के अनुग्रह का परिमाण और क्रूस के पुनर्स्थापन सामर्थ्य को समझाता है l
शिष्य पतरस ने यीशु का तीन बार इनकार किया l इनकार के कुछ घंटे पूर्व, पतरस ने यीशु के लिए मृत्यु सहने की इच्छा की घोषणा की थी (लूका 22:33), इसलिए उसके पराजय का अहसास एक तीव्र प्रहार था (पद.61-62) l यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के बाद, पतरस कुछ शिष्यों के साथ मछली पकड़ रहा था जब यीशु उनके सामने प्रगट हुआ l यीशु ने तीन बार पतरस को उसके लिए अपने प्रेम को दर्शाने का अवसर दिया – उसके हर एक इनकार के लिए एक बार (यूहन्ना 21:1-3) l तब, हर एक घोषणा के बाद, यीशु ने पतरस से उसके लोगों की देखभाल करने की आज्ञा दी (पद.15-17) l अनुग्रह के इस चकित करनेवाले प्रदर्शन का परिणाम यह था कि पतरस ने कलीसिया निर्माण में मुख्य भूमिका निभायी और अंततः मसीह के लिए बलिदान हुआ l
हममें से किसी की भी जीवनी हमारे पराजय और हार की सूची से आरम्भ हो सकती है l किन्तु परमेश्वर का अनुग्रह हमेशा एक भिन्न अंत की अनुमति देता है l वह अपने अनुग्रह से, हमें छुटकारा देता है और रूपान्तरित करता है l
जीवन की आज़माइशों को समझना
मेरी सहेली के पिता को भयानक रोग का लक्ष्ण पता चला : कैंसर l फिर भी, कीमो(Chemo) उपचार की प्रक्रिया के दौरान, वह यीशु के विश्वासी हो गए और आख़िरकार उनकी बिमारी कम हो गयी l वह अद्भुत अठारह महीनों के लिए कैंसर मुक्त थे, किन्तु बीमारी लौट आई – पहले से और ज्यादा l वह और उसकी पत्नी ने चिंता और प्रश्नों के साथ लौट आए कैंसर की सच्चाई का सामना किए परन्तु परमेश्वर में विश्वासयोग्य भरोसे के साथ इस कारण से कि उसने उन्हें पहली बार दृढ़ रखा l
हम हमेशा नहीं समझ सकेंगे क्यों हम परीक्षाओं से गुज़र रहे हैं l अय्यूब के साथ भी ऐसा ही था, जिसने भयानक और न समझाया जा सकने योग्य कष्ट और हानि का सामना किया l फिर भी उसके अनेक प्रश्नों के बावजूद, अय्यूब 12 में वह घोषणा करता है कि परमेश्वर सर्वशक्तिमान है : “जिसको वह ढाह दे, वह फिर बनाया नहीं जाता” (पद.14) और “उसमें सामर्थ्य और खरी बुद्धि पाई जाती है” (पद.16) l “वह जातियों को बढ़ाता, और उनको नष्ट करता है” (पद.23) l इस विस्तृत सूची में शुरू से अंत तक, अय्यूब परमेश्वर की मनसा या वह क्यों पीड़ा और दुःख की अनुमति देता है का ज़िक्र नहीं करता है l अय्यूब के पास उत्तर नहीं है l किन्तु सब बातों के बावजूद, वह दृढ़तापूर्वक कहता है, “परमेश्वर में पूरी बुद्धि और पराक्रम पाए जाते हैं; युक्ति और समझ उसी में है” (पद.13) l
हम शायद नहीं समझ पाएंगे क्यों परमेश्वर हमारे जीवनों में ख़ास संघर्षों को अनुमत करता है, परन्तु मेरी सहेली के माता-पिता की तरह, हम उसमें अपना भरोसा ला सकते हैं l प्रभु हमसे प्रेम करता है और हमें अपने हाथों में रखता है (पद.10; 1 पतरस 5:7) l बुद्धि, सामर्थ्य, और समझ उसके हैं!
परमेश्वर की सेवानिवृत्ति योजना
पुरातत्वविद डॉ. वॉरविक रॉडवेल सेवानिवृत्त होने की तैयारी कर रहे थे जब उन्होंने इंग्लैंड में लिचफील्ड कैथेड्रल(प्रधान गिरजाघर) में एक असाधारण खोज की l जब निर्माता एक खींचने योग्य आधार बनाने का प्रयास करते समय सावधानीपूर्वक चर्च इमारत के फर्श के एक हिस्से की खुदाई कर रहे थे, उनको महादूत जिब्राएल की एक प्रतिमा मिली, जो 1,200 वर्ष पुरानी मानी जाती है l डॉ. रॉडवेल की सेवानिवृत्ति योजना रोक दी गयी क्योंकि उनकी खोज ने उनको एक रोमांचक और व्यस्त नए अवधि में पहुँचा दिया l
मूसा अस्सी वर्ष का था जब उसने एक अग्निमय खोज की जो उसके जीवन को हमेशा के लिए बदल देने वाला था l एक मिस्री राजकुमारी का दत्तक पुत्र होने के बावजूद, वह अपने इब्री वंशावली को कभी नहीं भूला और अपने नातेदार के विरुद्ध अन्याय को देखकर क्रोधित हुआ (निर्गमन 2:11-12) l जब फिरौन को पता चला कि मूसा ने एक मिस्री की हत्या कर दी है जो एक इब्री को मार रहा है, उसने उसे घात करने की योजना बनायी, जिसके कारण मूसा मिद्यान देश में भाग कर वहाँ रहने लगा (पद.13-15) l
चालीस साल बाद, जब मूसा अस्सी वर्ष का हो गया, वह अपने ससुर की भेड़-बकरियाँ चराने लगा तब “परमेश्वर के दूत ने एक कटीली झाड़ी के बीच आग की लौ में उसको दर्शन दिया; और उसने दृष्टि उठाकर देखा कि झाड़ी जल रही है, पर भस्म नहीं होती” (3:2) l उस क्षण, परमेश्वर ने मूसा को इस्राएलियों को मिस्री दासत्व से निकालने में अगुवाई करने के लिए बुलाया (पद.3-25) l
आपके जीवन के इस क्षण में, परमेश्वर आपको अपने बड़े उद्देश्य के लिए क्या करने के लिए बुला रहा है? उसने आपके मार्ग में कौन सी नयी योजनाएं रखीं है?
खूबसूरती का आनंद उठाना
उस पेंटिंग ने आकाशदीप की तरह मेरी आँखों को आकर्षित कर लिया l एक बड़े सिटी हॉस्पिटल के लम्बे कोरिडोर/गलियारा में प्रगटित, उसके विविध रंगों के गहरे वर्तिका चित्र और नवाजो अमरीकी मूल प्रजाति की आकृतियाँ बहुत ही आकर्षक थीं जिन्हें मैं देखकर अचंभित हुयी और उन्हें घूरने लगी l “वह देखो,” मैंने अपने पति, डैन से कहा l
वे मेरे आगे चल रहे थे किन्तु रुक गए, दीवार पर दूसरी पेंटिंग्स को टालते हुए केवल एक को निहारने लगे l “खुबसूरत,” मैं फुसफुसायी l
जीवन में अनेक चीजें वास्तव में खुबसूरत हैं l प्राकृतिक परिदृश्य l उत्प्रेरित कारीगरी l परन्तु ऐसी ही एक बच्चे की मुस्कराहट है l एक मित्र का हेलो l एक रॉबिन चिड़िया का नीला अंडा l एक सीप का मजबूत आवरण l बोझ को दूर करने के लिए जो जीवन ला सकता है, “[परमेश्वर] ने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं” (सभोपदेशक 3:11) l बाइबल के विद्वान समझाते हैं, ऐसी सुन्दरता में हमें – परमेश्वर के आनेवाले सिद्ध नियम की महिमा सहित - उसकी रचना की पूर्णता की एक झलक मिलती है l
हम ऐसी पूर्णता की मात्र कल्पना कर सकते हैं, इसलिए परमेश्वर हमें जीवन की सुन्दरता के द्वारा एक पूर्वानुभव देता है l इस तरह से, परमेश्वर ने “मनुष्यों के मन में अनादि-अनंत काल का ज्ञान उत्पन्न किया है” (पद.11) l कभी कभी जीवन नीरस और निरर्थक दिखाई देता है l परन्तु परमेश्वर चिंतन के लिए सौभाग्य से सुन्दरता के क्षण देता है l
जिस पेंटिंग को मैं निहार रही थी, उसका कलाकार जिरार्ड कर्टिस डेलानो, उस बात को समझ चुका था l “परमेश्वर ने मुझे सुन्दरता को रचने के लिए गुण [दिया था],” उसने एक बार कहा, “और यह वही है जो वह चाहता था मैं करूँ l”
ऐसी सुन्दरता को देखकर, हम किस प्रकार प्रत्युत्तर दे सकते हैं? हम ठहरकर उस महिमा का आनंद लेते हुए जो हमने पहले देखा है आनेवाले अनंत के लिए धन्यवाद दे सकते हैं l
जो परमेश्वर देखता है
एक सुबह, मैं एक पारिवारिक-कमरे की खिड़की को थपथपाती हुयी निकली जहां से हमारे घर के पीछे का निर्जन-क्षेत्र दिखाई देता है l अक्सर, मैं एक बाज़ या एक उल्लू को किसी पेड़ पर बैठे हुए, उस क्षेत्र की निगरानी करते हुए देखती थी l एक सुबह मैं चकित हुयी जब मैंने एक बॉल्ड ईगल (एक ख़ास प्रजाति का चील) को एक ऊंची डाली पर निडरतापूर्वक संतुलित बैठे हुए, उस भू-भाग का अन्वेषण करती हुयी देखी मानो समूचा विस्तार उसी का था l कदाचित वह “नाश्ता” ढूँढ रहा था l उसका सम्पूर्ण ध्यान शानदार था l
2 इतिहास 16 में, हनानी भविष्यद्वक्ता (परमेश्वर का नबी) ने राजा को सूचित किया कि उसके कार्यों पर राजसी नज़र है l उसने यहूदा के राजा, आसा से कहा, “तू ने जो अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा वरन् आराम के राजा ही पर भरोसा रखा है” (पद.7) l तब हनानी ने समझाया, “देख यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिए फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपनी सामर्थ्य दिखाए” (पद.9) आसा के अनुपयुक्त भरोसे के कारण, वह हमेशा युद्ध करता रहेगा l
इन शब्दों को पढ़ते हुए, हमें यह गलत बोध हो सकता है कि परमेश्वर हमारे प्रत्येक गतिविधि पर ध्यान देता है कि वह शिकार करनेवाले एक पक्षी के समान हम पर झपट सकता है l किन्तु हनानी के शब्द सकारात्मक पर केन्द्रित हैं l उसका मकसद है कि हमारा परमेश्वर निरंतर हमपर ध्यान देता है और हमारे लिए इंतज़ार करता है कि हम उसे ज़रूरत पड़ने पर पुकारें l
मेरे पीछे के अहाते में उस बॉल्ड ईगल की तरह, हमें यह गलत बोध हो सकता है, किस प्रकार परमेश्वर की आँखें हमारे संसार में फिरती हैं – अभी भी –आप में और मुझ में विश्वासयोग्यता खोजती है? वह किस प्रकार हमारी ज़रूरत के अनुसार हमें आशा और मदद देगा?
कल के समान नहीं
जब मेरा नाती जे छोटा था उसके माता-पिता ने उसे उसके जन्मदिन पर एक नया टी-शर्ट दिया l उसने उसे उसी समय पहन लिया और उसे पहन कर गर्व से पूरे दिन घूमता रहा l
दूसरे दिन जब वह सुबह के समय उसी शर्ट में था, उसके पिता ने उससे पूछा, “जे, क्या तुम इस शर्ट से खुश हो?”
“कल की तरह नहीं,” जे ने उत्तर दिया l
सामग्री के अभिग्रहण से यही परेशानी है : जीवन की अच्छी वस्तुएं भी हमें गहरा, स्थायी आनंद नहीं दे सकते जिसकी हम प्रबल इच्छा रखते हैं l यद्यपि हमारे पास बहुत सम्पति हो सकती है, फिर भी हम नाखुश रहेंगे l
यह संसार वस्तुओं के अभिग्रहण के द्वारा आनंद को पेश करती है : नए कपड़े, नयी गाड़ी, एक आधुनिक फ़ोन या घड़ी l किन्तु कोई भी भौतिक अभिग्रहण हमें उतना आनंदित नहीं कर सकता जैसे बीते हुए कल में उससे मिला था l यह इसलिए है क्योंकि हम परमेश्वर के लिए बनाए गए थे और उससे कम से काम नहीं बनेगा l
एक दिन, जब यीशु उपवास कर रहा था और भूख से शिथिल हो गया, शैतान उसके निकट आया और रोटी बनाकर उसकी भूख को मिटाने के लिए उसकी परीक्षा की l यीशु ने उसका सामना व्यवस्थाविवरण 8:3 उद्धृत करते हुए किया, “मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुहँ से निकलते हैं” (मत्ती 4:4) l
यीशु का यह मतलब नहीं था कि हम केवल रोटी ही पर जीवित रहें l वह एक सच्चाई का आरम्भ कर रहा है : “हम आत्मिक प्राणी हैं और इसलिए हम केवल भौतिक वस्तुओं पर जीवित नहीं रह सकते हैं l
वास्तविक संतुष्टि परमेश्वर और उसके बहुतायत से मिलती है l
महत्वहीनों की सेवा
विडियो में एक व्यक्ति को अनियंत्रित आग के दौरान एक वयस्त मार्ग के पास घुटने टेके हुए दिखाया गया l वह हाथों से ताली बजाते हुए किसी चीज़ के आने के लिए निवेदन कर रहा था l वह क्या था? एक कुत्ता? कुछ क्षण बाद एक खरगोश कूदकर तस्वीर में आ गया l उस व्यक्ति ने उस डरे हुए खरगोश को उठाया और गति से दौड़कर उसे सुरक्षित स्थान में ले गया l
किस प्रकार एक छोटे चीज़ का बचाया जाना राष्ट्रीय खबर बन गया? इसीलिए l इनके समान सबसे निर्बल के प्रति करुणा दर्शाने के विषय कुछ प्रीतिकर है l सबसे छोटे प्राणी के लिए जगह बनाने के लिए एक बड़ा दिल चाहिए l
यीशु ने कहा स्वर्ग का राज्य एक व्यक्ति के समान है जिसने एक बड़े भोज का आयोजन किया और आने की इच्छा रखने वाले हर एक के लिए जगह बनायी l केवल प्रभावशाली लोगों के लिए नहीं परन्तु “कंगालों, टुन्डों, लंगड़ों और अन्धों” लिए (लूका 14:21) l मैं धन्यवादित हूँ कि परमेश्वर निर्बलों और कदाचित् महत्वहीन लोगों पर ध्यान देता है, क्योंकि अन्यथा मुझे कोई अवसर नहीं मिलता l पौलुस ने कहा, “परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है कि बलवानों को लज्जित करे; और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्छों को . . . चुन लिया . . . ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के सामने घमण्ड न करने पाए” (1 कुरिन्थियों 1:27-29) l
मुझ जैसे छोटे व्यक्ति को बचाने के लिए परमेश्वर का हृदय कितना बड़ा होगा! प्रतिउत्तर में, मेरा हृदय कितना बड़ा हो गया है? मैं आसानी से बता सकता हूँ, मैं “महत्वपूर्ण व्यक्तियों” को किस प्रकार प्रसन्न करता हूँ के द्वारा नहीं, किन्तु उन व्यक्तियों की सेवा करके जिन्हें समाज शायद अति महत्वहीन समझता है l