श्रेणी  |  odb

पूर्व का पश्चिम से मिलन

जब दक्षिण-पूर्व एशिया के विद्यार्थियों की मुलाकात उत्तर अमेरिका के एक शिक्षक से हुई, अतिथि शिक्षक ने एक सबक सीखा l कक्षा को उनका प्रथम बहु-चुनाव परीक्षा देने के बाद, उसको आश्चर्य हुआ कि अनेक प्रश्न अनुत्तरित थे l जाँचा हुआ प्रश्न पत्र वापस करते हुए, उसने सलाह दी कि, अगली बार, उत्तर छोड़ने की जगह उनको अनुमान लगाना चाहिए l चकित होकर एक विद्यार्थी अपना हाथ खड़ा करके पूछा, “यदि उत्तर सही रहा तो? मैं यह मानूंगा कि मैं उत्तर जानता था जबकि यह सच नहीं है l” विद्यार्थी और शिक्षक के पास भिन्न दृष्टिकोण और तरीका था l

नया नियम काल में, पूर्व और पश्चिम की तरह ही मसीह के पास आनेवाले यहूदी और गैर यहूदी के दृष्टिकोण भिन्न थे l जल्द ही वे उपासना के दिन और मसीह के अनुयायी को क्या खाना और क्या नहीं खाना चाहिए जैसे विषयों पर असहमत थे l पौलुस ने उनसे एक ख़ास तथ्य याद रखने का आग्रह किया : हममें से कोई भी किसी पर दोष नहीं लगा सकता l

सह विश्वासियों के साथ समस्वरता के लिए, परमेश्वर हमसे चाहता है कि हम जाने कि सब उसके वचनानुसार और अपने विवेक से कार्य करने के लिए प्रभु के सामने जिम्मेदार हैं l हालाँकि, केवल वो ही हमारे हृदयों के आचरण जांच सकता है (रोमियों 14:4-7) l

आप नहीं हैं

दाऊद ने योजना बनायी, फर्नीचर अभिकल्पित किया, सामग्री इकट्ठा किया, समस्त प्रबंध किया (देखें 1 इतिहास 28:11-19) l किन्तु यरूशलेम का प्रथम मंदिर दाऊद का नहीं, सुलेमान का मंदिर कहलाता है l

क्योंकि परमेश्वर ने कहा था, “तू घर बनवाने न पाएगा” (1 इतिहास 17:4) l परमेश्वर दाऊद के पुत्र सुलेमान को मंदिर बनाने के लिए चुना था, इस इनकार का प्रतिउत्तर अनुकरणीय था l वह परमेश्वर के कार्य पर केन्द्रित रहा (पद.16-25) l उसकी आत्मा धन्वादित थी l उसने सम्पूर्ण प्रयास किया और मंदिर बनाने में योग्य लोगों से सुलेमान की मदद करवायी (देखें 1 इतिहास 22) l

बाइबिल टीकाकार जे. जी, मेक्कोन्विल ने लिखा : “अक्सर हमें स्वीकार करना होगा कि मसीही सेवा के रूप में जो कार्य हम करना पसंद करेंगे, वो नहीं है जिसके लिए हम योग्य हैं, और जिसके लिए परमेश्वर हमें बुलाया है l यह दाऊद की तरह हो सकता है, कार्य का आरंभ, जो भविष्य में और भी भव्य होगा l

दाऊद ने अपनी नहीं, परमेश्वर की महिमा खोजी l उसने परमेश्वर के मंदिर के लिए विश्वासयोग्यता से सब कुछ किया, उसके लिए एक मजबूत नींव डाला जो उसके बाद कार्य को संपन्न करनेवाला था l काश हम भी, उसी तरह, परमेश्वर का चुना हुआ कार्य धन्यवादी हृदय से करें! जाहिर है कि हमारा प्रेमी परमेश्वर  “अधिक भव्य” ही करेगा l

उसका अद्भुत चेहरा

मेरा चार वर्षीय बेटा जिज्ञासु है और निरंतर बातें करता है l मुझे उससे बातें करना पसंद है, किन्तु वह अपनी पीठ मेरी ओर करके बातें करने की खेदजनक आदत बना ली है l मैं अक्सर कहती हूँ, “मैं तुम्हारी सुन नहीं सकती-कृपया मेरी ओर देखकर बातें करो l”

कभी-कभी परमेश्वर हमसे भी यही कहता है-इसलिए नहीं कि वह सुन नहीं सकता, किन्तु हम वास्तव में “उसे देखे बिना” उससे बातचीत करना चाहते हैं l हम प्रार्थना करते समय अपने प्रश्नों में उलझकर और स्वकेन्द्रित रहकर, भूल जाते हैं किससे प्रार्थना कर रहे हैं l मेरे बेटे की तरह, हम उसकी ओर केन्द्रित हुए बिना प्रश्न करते हैं जिससे हम बातचीत कर रहे हैं l

हम, परमेश्वर कौन है और उसने क्या किया है, के विषय खुद को याद दिलाकर अपने अनेक चिंताओं को संबोधित कर सकते हैं l केवल पुनः केन्द्रित होकर, ही हम उसके चरित्र को जानकर सुख पाते हैं : कि वह प्रेमी, क्षमाशील, प्रभु, और अनुग्रहकारी है l

भजनकार का विश्वास था कि हम परमेश्वर का मुख निरंतर निहारें (भजन 105:4) l  दाऊद द्वारा अगुओं को उपासना और प्रार्थना के लिए नियुक्ति पर, उसने लोगों को परमेश्वर के चरित्र की प्रशंसा करने और उसके पूर्व विश्वासयोग्यता की चर्चा करने को उत्साहित किया (1 इतिहास 16:8-27) l

परमेश्वर का खूबसूरत चेहरा निहारने पर, हम सामर्थ्य और सुख पाते हैं जो हमें हमारे अनुत्तरित प्रश्नों के मध्य भी संभालता हैं l

सुख का पलना

मेरी सहेली ने मुझे अपने चार दिन की बेटी को गोद में लेने का सौभाग्य दिया l बच्चावह मेरे गोद में आने के बाद ही हलचल करने लगा l मैंने उसे दुलारा, अपने गाल उसके सिर से लगाया, और उसे चुप करने के लिए हिलाते हुए एक गीत गुनगुनाने लगी l इन प्रयासों के साथ, दस वर्षों के अपने लालन-पालन अनुभव के बाद भी, मैं उसे शांत न कर सकी l मैंने उसे उसकी अधीर माँ के बाहों में डालने तक वह अत्यंत परेशान रही l तुरन ही वह शांत हो गई; उसका रोना बंद हो गया और उसकी बेचैनी उसके भरोसेमंद सुरक्षा में तब्दील हो गई l  मेरी सहेली अपनी बेटी को गोद लेना और उसकी परेशानी दूर करना जानती थी l

परमेश्वर अपने बच्चों को माता की तरह सुख देता है : कोमल, भरोसेमंद, और बच्चे को शांत करने में चिन्ताशील l हमारे थकित अथवा परेशान होने पर, वह हमें अपनी बाहों में उठाता है l हमारा पिता और सृष्टिकर्ता होकर, वह हमें निकटता से जानता है l “जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है” (यशा. 26:3) l

जब हमें संसार का भारी बोझ दबाए, हम इस ज्ञान में सुख पाते हैं कि वह प्रेमी अभिभावक की तरह हमें अर्थात् अपने बच्चों को सुरक्षित रखता और उनके लिए लड़ता है l

आप किस लिए याद किये जाएंगे?

चीन के एक बंदी शिविर के प्रांगन में एक पूर्व जापानी का स्मारक पत्थर खड़ा है जहाँ 1945 में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी l उस पर लिखा है, “एरिक लिडल स्कॉटलैंड वासी माता-पिता से 1902 में तियानजिन में जन्म लिया l उसने 1924 के ओलिंपिक खेलों में 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी जीविका के चरम पर पहुँचा l वह तियानजिन में शिक्षक बनने चीन लौटा ... उसने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव की बेहतरी हेतु सर्वोत्तम सहयोग देने के लिए युवा लोगों को उत्साहित करता रहा l”

अनेक लोगों की दृष्टि में, एरिक की महानतम उपलब्धि स्पोर्ट्स के क्षेत्र में था l किन्तु चीन में तियानजिन, अर्थात् जिस देश में वह जन्म लिया और जिससे वह प्रेम करता था, के युवाओं के प्रति सहयोग के लिए भी जाना जाता है l उसने विश्वास से जीवन बिताया और सेवा की l

हम किस लिए याद किये जाएंगे? हम शैक्षिक उपलब्धियां, काम की पदवी, अथवा आर्थिक सफलता के लिए याद किये जा सकते हैं l किन्तु लोगों के जीवनों में शांति से किये गए कार्य ही होंगे जो हमारे जाने के बाद भी याद रहेंगे l

मूसा को बाइबिल के विश्वास अध्याय में याद किया गया है l इब्रानियों 11, जहाँ उसने मिस्र के भंडार से बड़ा धन परमेश्वर के लोगों का साथ देना समझा (पद.26) l उसने विश्वास से परमेश्वर के लोगों का मार्गदर्शन और उनकी सेवा की l

तरोराजा बसंती वर्षा

अवकाश चाहिए, मैं निकट के पार्क में टहलने गयी l आगे बढ़ने पर ढेर सारी हरियाली ने मुझे आकर्षित किया l मिट्टी से जीवन की कोपलें निकलीं जो कुछ ही सप्ताहों में सुन्दर डैफोडिल फूल बनकर बसंत और गर्माहट की घोषणा कर रहीं थीं l सर्दी का एक और मौसम बीत चुका था l

होशे की पुस्तक पढ़ते समय, कहीं-कहीं कठोर सर्दी दिखाई देती है l इस्राएली लोगों के प्रति सृष्टिकर्ता के प्रेम को दर्शाने के लिए प्रभु ने नबी को एक विश्वासघाती स्त्री से विवाह करने का अपरिहार्य कार्य दिया (1:2-3) l होशे की पत्नी, गोमेर, के विवाह प्रतिज्ञा  तोड़ने के बाद भी होशे ने उसे यह चाहते हुए वापस बुलाया कि वह उससे समर्पित प्रेम करेगी (3:1-3) l इसी तरह परमेश्वर की इच्छा है कि हम शक्ति और समर्पण के साथ उससे प्रेम करें जो सुबह की ओस की तरह गायब न हो जाए l

हम परमेश्वर के साथ कैसा सम्बन्ध रखते हैं? क्या हम उसे केवल संकट में खोजते हैं, दुःख में उत्तर चाहते हैं किन्तु हमारे आनंद के समय उसकी अवहेलना करते हैं? किन्तु हम इस्राएलियों की तरह हैं, अपने समय के मूर्तियों के प्रभाव में चले जाते हैं, जिसमें व्यस्ततता, सफलता, और प्रभाव शामिल है?

आज, पुनः हम स्वयं को प्रभु को समर्पित करें, जो बंसंत के खिलने वाली कलियों की तरह प्रेम करता है l

दौड़ और विश्राम

मुख्य समाचार ने मुझे आकर्षित किया, धावकों के लिए आराम के दिन आवश्यक हैं l” टॉमी मैनिंग के लेख में अमरीकी पर्वत धावक टीम, ने समर्पित धावकों द्वारा कभी-कभी नज़रन्दाज़ करने वाले एक सिद्धांत पर बल दिया-अभ्यास के बाद शरीर को विश्राम और फिर से ताकत पाने के लिए समय चाहिए l मैनिंग ने लिखा, “मनोवैज्ञानिक रूप से, प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप सुधार आराम से ही होता है l इसका अर्थ है, कि काम के बराबर आराम है l”

यह हमारे विश्वास और सेवा में भी उतना ही सच है l अक्रियाशीलता और निराशा से दूर रहने के लिए नियमित आराम चाहिए l अत्यधिक ज़रूरत के समय भी, यीशु अपने पृथ्वी पर के जीवन में आत्मिक संतुलन बनाए रखा l शिष्यों के शिक्षण और चंगाई के ज़ोरदार सेवकाई के बाद लौटने पर, “उसने उनसे कहा, ‘तुम आप अलग किसी एकांत स्थान में चलकर थोड़ा विश्राम करो l’” (मरकुस 6:31) l किन्तु एक बड़ी भीड़ उनके पीछे हो ली, इसलिए यीशु ने उनको उपदेश दिया और केवल पाँच रोटी और दो मछलियों से उन सब को भोजन कराया (पद.32-44) l सभी के चले जाने पर, यीशु “पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया” (पद.46) l

यदि हमारे जीवन काम से परिभाषित हैं, तो हमारे कार्य अत्यधिक प्रभावहीन होते चले जाते हैं l यीशु नियमित रूप से हमसे उसके साथ मिलकर प्रार्थना करने और कुछ विश्राम करने को आमंत्रित करता है l

एक छोटी आग

सितम्बर में एक रविवार की रात, जब सब लोग सो रहे थे, पुडिंग लेन पर थॉमस फेरिनर की बेकरी में छोटी सी आग लगी l जल्द ही आग एक घर से दूसरे घर में फ़ैल गयी और लन्दन 1966 के भयानक आग में घिर गया l इस आग से 70,000 से अधिक लोग बेघर हो गए  जिसने शहर के चार बटे पाँच हिस्से को अपने चपेट में ले लिया l एक छोटी सी आग से कितना अधिक विनाश!

बाइबिल हमें एक और छोटी किन्तु विनाशक अग्नि के विषय चिताती है l याकूब यह लिखते समय, “जीभ भी एक छोटा सा अंग है और वह बड़ी-बड़ी डींगें मारती है l देखो, थोड़ी से आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है” (याकूब 3:5) l

किन्तु हमारे शब्द रचनात्मक  भी हो सकते हैं l नीतिवचन 16:24 ताकीद देता है, “मनभावने वचन मधुभारे छत्ते के सामान प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं l” प्रेरित पौलुस कहता है, “तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो कि तुम्हें हर महुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए” (कुलु. 4:6) l जैसे नमक भोजन को स्वादिष्ट करता है, हमारे अनुग्रही शब्द दूसरों का निर्माण करते हैं l

पवित्र आत्मा की सहायता से हमारे शब्द दुखित लोगों को, विश्वास में बढ़ने को इच्छित, अथवा जिन्हें उद्धारकर्ता के निकट आना ज़रूरी है, को उत्साहित करते हैं l हमारे शब्द आग उत्पन्न करने की जगह आग बुझा सकते हैं l

कुछ ठीक नहीं है

हमारे बेटे, ऐलन, के जन्म पश्चात डॉक्टर ने कहा, “कुछ ठीक नहीं है l” खतरनाक जन्म-दोष के कारण उसे शल्यचिकित्सा हेतु विमान से 700 मील दूर ले जाना ज़रूरी था l

डॉक्टर के आपके बच्चे में कमी बताने पर, आप घबरा जाते हैं l आने वाला डर आपकी आत्मा को पराजित करता है  और आप लड़खड़ाकर परमेश्वर के लिए तड़पते हैं जो बच्चे को संभालने हेतु आपको मजबूत बनाता है l

क्या एक प्रेमी परमेश्वर ऐसा होने देगा?  आप विचारते हैं l क्या उसे मेरे बच्चे की चिंता है? क्या वह उपस्थित है?  उस दिन मुझे ऐसे और दूसरे विचारों ने झकझोर दिया l

डॉक्टर के जाने के बाद, मेरे पति, हिरम बोले, “जोलेन, आओ हम प्रार्थना करें l” हमनें हाँ में अपना सिर हिलाया और उसने मेरे हाथ थामें l “हमें ऐलन दिया, धन्यवाद l परमेश्वर वह आपका है l जन्म से पूर्व आपने उसे प्यार किया, और वह आपका है l हमारी असमर्थता में आप उसके साथ रहें l आमीन l”

हिरम कम बोलने वाला व्यक्ति है l वह बोलने में संघर्ष करता है क्योंकि वह जानता है कि किसी ख़ामोशी को भरने के लिए मेरे पास पर्याप्त शब्द हैं l किन्तु उस दिन मेरा हृदय और  आत्मा निराश थी, और विश्वास गायब l परमेश्वर ने हिरम को बोलने के लिए शब्द दिए l ख़ामोशी में आँसुओं के साथ अपने पति का हाथ थामें हुए, मैंने परमेश्वर को करीब पाया l