Month: मई 2026

सही प्रतिक्रिया दें

गौरव अपनी आँखों पर भरोसा नहीं कर पा रहा था, “क्यों वे इस सफ़ेद पोशाक वाले अच्छे अंकल को पीट रहे थे,” उसने सोचा, जब उसने यीशु जैसे वस्त्र पहने एक व्यक्ति को सड़कों पर ले जाते हुए देखा, जिसके शरीर से नकली खून टपक रहा था और सैनिकों की पोशाक पहने हुए लोग उसे कोड़े मार रहे थे। यह एक चर्च का गुड फ्राइडे जुलूस था। लेकिन गौरव के लिए यह दृश्य बहुत वास्तविक था। गौरव डाउन सिंड्रोम(Down Syndrome-एक बीमारी) से पीड़ित था, और उसकी स्थिति ने उसे बाकी लोगों की तुलना में अधिक चिंतित और दयालु बना दिया था। अपनी माँ की साड़ी में अपना चेहरा छिपाते हुए, उसका हृदय करुणा से भर गया, और वह रोते हुए बोला, “मम्मी, कृपया उन्हें ऐसा करने से रोकें!”

हमें गौरव की तरह दयालु बनने के लिए कहा जाता है। जबकि कुछ लोगों के अन्दर करुणा आसानी से आ सकती है, हममें से बाकी लोगों को इसके लिए मेहनत करना चाहिए। कुलुस्से की कलीसिया को अपने पुराने जीवन के तरीके से “छुटकारा” पाने के लिए दृढ़ता से आग्रह किया गया था। गंदे और मैले कपड़े को उतार के फेंकने की तरह, उन्हें अपने सांसारिक स्वभाव को त्यागने के लिए कहा गया था, जिसमें क्रोध, रोष, बैरभाव, निंदा और मुँह से गालियाँ बकना” शामिल है (पद.8)। इसकी जगह, बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और सहनशीलता (पद.12) के गुणों को धारण करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जो उनके सृष्टिकर्ता को दर्शाते हैं जो “अनुग्रहकारी और दयालु” है (भजन संहिता 145:8)। आज के संसार में करुणा, अनुग्रह, नम्रता और दयालुता को अक्सर कमज़ोरी माना जाता है। फिर भी दूसरों को हममें यही देखना और अनुभव करना चाहिए (पद.12)। सहकर्मियों, पड़ोसियों, दोस्तों और परिवार के साथ हमारे दैनिक व्यवहार में, इन गुणों के साथ प्रतिक्रिया करना हमेशा आसान नहीं होता है। लेकिन हमें परिस्थितियों के बावजूद सही प्रतिक्रिया करने का जानबूझकर संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि इस तरह संसार को पता चलेगा कि हम मसीह के शिष्य हैं। —रेबेका विजयन

 

एक आत्मिक विरासत छोड़ना

किशोरावस्था में, मैं और मेरी बहन यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करने के मेरी माँ के फैसले को नहीं समझ पाए, लेकिन हमने उनमें जो बदलाव देखे, उन्हें हम नकार नहीं सकते थे। उनमें अधिक शांति और आनंद था और वह विश्वासयोग्यता से कलीसिया में सेवा करने लगी। उनमें बाइबल का अध्ययन करने की ऐसी भूख थी कि उन्होंने मदरसा में दाखिला लिया और ग्रेजुएट भी हुई। मेरी माँ के फैसले के कुछ साल बाद, मेरी बहन ने यीशु मसीह को ग्रहण किया और उनकी सेवा करने लगी। और उसके कुछ साल बाद, मैंने भी यीशु पर भरोसा रखा और उसकी सेवा करना शुरू कर दिया। कई वर्षों के बाद, मेरे पिता भी उस पर विश्वास करने में हमारे साथ शामिल हो गए। मसीह के लिए मेरी माँ के फैसले ने हमारे समीप और विस्तारित परिवार के बीच जीवन बदलने वाला प्रभाव पैदा किया।

जब प्रेरित पौलुस ने तीमुथियुस को अपना अंतिम पत्र लिखा और उसे यीशु में अपने विश्वास पर कायम रहने के लिए प्रोत्साहित किया, तो उसने तीमुथियुस की आत्मिक विरासत पर विख्यात किया। "मुझे तेर उस निष्कपट विश्वास की सुधि आती है, जो पहले तेरी नानी लोइस और तेरी माता यूनीके में था, और मुझे निश्चय हुआ है, कि तुझ में भी है" (2 तीमुथियुस 1:5)। माताओं और दादियों/नानियों, आपके निर्णय पीढ़ियों को प्रभावित कर सकते हैं।

यह कितना सुंदर है कि तीमुथियुस की माँ और नानी ने उसके विश्वास को पोषित करने में मदद की ताकि वह वह व्यक्ति बन सके जिसके लिए परमेश्वर में उसकी बुलाहट थी। इस मातृ दिवस और उसके बाद, आइए उन माताओं का सम्मान करें जिन्होंने यीशु का अनुसरण करने का निर्णय लिया है। आइए अपने प्रियजनों के लिए एक आत्मिक विरासत भी छोड़ें।नैन्सी गैविलेन्स

 

जीवन, प्रेम और पोषण

मेरी नानी की मृत्यु की सालगिरह पर, मैं और मेरे पति उनकी कब्र पर गए और उनकी कब्र के पास गुलाब के फूल रखे। मेरे पति उनसे कभी नहीं मिले थे। इसलिए, जब उन्होंने मुझसे उनके बारे में पूछा, तो मैंने उनके पसंदीदा भजन संहिता गाए, उनके विस्तृत क्रिसमस भोजन के बारे में बात की और मुस्कुराते हुए बताया कि उन्हें जंगली मशरूम की तलाश करना आता था । भले ही वे अब हमारे साथ शारीरिक रूप से नहीं थीं, लेकिन उनकी कब्र पर जाना और उनकी कहानियाँ साझा करना मेरे मन में उनके प्यार, जीवन और भोजन की यादों से भरा हुआ है ।  
यीशु अपनी मृत्यु से पहले, अपने शिष्यों के साथ एक विस्तृत फसह का भोज साझा किया। उसने उनसे कहा कि वे जल्द ही दुःख उठाएंगे और मृत्यु सहेंगे (पद.15)। वास्तव में, उसकी गिरफ़्तारी उसी रात होगी (लूका 22:54)। इस स्थिति में, यीशु ने रोटी ली, परमेश्वर को धन्यवाद दिया, उसे तोड़ा और उन्हें देते हुए कहा, "यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिए दी जाती है; मेरे स्मरण में यही किया करो" (पद.19)। उन्होंने उन्हें दाखरस का प्याला भी देते हुए कहा, "यह प्याला मेरे उस लहू में जो तुम्हारे लिए बहाया जाता है नई वाचा है”(पद.20)।  
अगले दिन यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया गया। तीन दिन बाद वह जी उठा और अंततः स्वर्ग लौट गया l फिर भी, आज, हम, जो उसके शिष्य हैं, उसकी याद में रोटी तोड़ते हैं और दाखरस साझा करते हैं क्योंकि यह यीशु द्वारा स्वयं स्थापित एक सुंदर स्मारक है और उसके फिर से आने का एक शाश्वत प्रतिज्ञा है (पद.15-18)। हम यीशु को शारीरिक रूप से देख या छू नहीं सकते, लेकिन हम जानते हैं कि वह जीवित हैं और हर दिन हमारे साथ हैं और हमें अपने प्रेम, जीवन और पोषण से भर रहा है l जब हम रोटी तोड़ते हैं, तो हमें यीशु के वादे को याद रखना चाहिए और उन्हें हमारे अंदर काम करने देना चाहिए, हमें भीतर से उनके जैसा बनने के लिए रूपांतरित होने देना चाहिए।—ऍन हरिकीर्तन 

खुद को बचाने की कोशिश

कई साल पहले, न्यूयॉर्क शहर द्वारा "सुरक्षित रहें, रुके रहें " विज्ञापन अभियान शुरू किया गया जिसके द्वारा लोगों को शिक्षित किया जा सके कि कैसे वें लिफ्ट में फंसने पर शांत और सुरक्षित रह सके। विशेषज्ञों ने बताया कि फंसे हुए कुछ यात्रियों की तब मौत हो गई जब उन्होंने लिफ्ट के दरवाजे खोलने की कोशिश की या किसी अन्य माध्यम से बाहर निकलने का प्रयास किया। सबसे अच्छी कार्य योजना यह है कि मदद के लिए कॉल करने के लिए अलार्म बटन का उपयोग करें और आपातकालीन उत्तरदाताओं के आने की प्रतीक्षा करें।

प्रेरित पौलुस ने एक बहुत ही अलग प्रकार की बचाव योजना बताई - पाप के नीचे की ओर खिंचाव में फंसे लोगों की मदद करने के लिए। उसने इफिसियों को उनकी पूरी तरह से असहाय आत्मिक दशा की याद दिलाई - वास्तव में "[उनके] पापों में" . . मरी हुई दशा” (इफिसियों 2:1)। वे फंस गए थे, शैतान की आज्ञा मान रहे थे (पद 2), और परमेश्वर के प्रति समर्पण करने से इनकार कर रहे थे। इसके परिणामस्वरूप वें परमेश्वर के क्रोध के पात्र थे। लेकिन उसने उन्हें आत्मिक अंधकार में फंसा नहीं छोड़ा। और जो लोग यीशु पर विश्वास करते हैं, उनके लिए प्रेरित ने लिखा, "अनुग्रह से" . . बचा लिए गए हैं ” (पद 5, 8)। परमेश्वर की बचाव पहल की प्रतिक्रिया का परिणाम विश्वास होता है। और विश्वास का मतलब है कि हम खुद को बचाने की कोशिश करना छोड़ दें और अपने बचाव के लिए यीशु को पुकारें।

परमेश्वर के अनुग्रह से, पाप के जाल से बचाया जाना हमारे द्वारा नहीं शुरू किया गया। यह केवल यीशु के द्वारा से "परमेश्वर का दान" है (पद 8)। मर्विन विल्लियम्

खिलते रेगिस्तान

एक सदी पहले इथियोपिया के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से में हरे-भरे जंगल थे, लेकिन आज यह लगभग 4 प्रतिशत रह गया है। फसलों के लिए रकबा साफ़ रहते हुए पेड़ों की रक्षा करने में विफल होने से पारिस्थितिक संकट पैदा हो गया। हरे रंग के शेष छोटे-छोटे हिस्सों का अधिकांश हिस्सा चर्चों द्वारा संरक्षित है। सदियों से, स्थानीय इथियोपियाई रूढ़िवादी तेवाहिडो चर्चों ने बंजर जंगल के बीच में इन मरूद्यानों का पोषण किया है। यदि आप इसकी हवाई छविये देखें, तो आपको भूरे रेत से घिरे हरे-भरे द्वीप दिखाई देंगे। चर्च के अगुवे इस बात पर जोर देते हैं कि पेड़ों की देखभाल करना परमेश्वर की रचना के प्रबंधक के रूप में उनकी आज्ञाकारिता का हिस्सा है।

भविष्यवक्ता यशायाह ने इस्राएल को लिखा, जो एक मरू भूमि में रहते थे जहां नंगे रेगिस्तान और क्रूर सूखे का खतरा था। और यशायाह ने भविष्य की परमेश्वर की योजना का वर्णन किया, जहां “जंगल और सूखी भूमि आनन्दित होगी; जंगल आनन्दित और फूलेगा”(यशायाह 35:1)। परमेश्वर की यह मंशा है कि वह अपने लोगों को चंगा करे, लेकिन वह पृथ्वी को भी चंगा करना चाहता है। वह "नए आकाश और नई पृथ्वी का सृजन करेगा" (65:17)। परमेश्वर की नवीकृत दुनिया में, "रेगिस्तान फूलों से खिल उठेगा" (35:2)।

सृष्टि के प्रति परमेश्वर की देखभाल - जिसमें लोग भी शामिल हैं - हमें भी इसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करती है। हम उसकी परम योजना के साथ तालमेल बिठाकर जी सकते हैं जो की एक चंगा और निरोग संसार है - उसकी सृष्टि के रखवाले बनकर। हम सभी प्रकार के रेगिस्तानों को जीवन और सुंदरता से भरपूर बनाने में परमेश्वर के साथ शामिल हो सकते हैं। विन् कोलियर

 

देखने वाली आँखें

जॉय अपने रिश्तेदार सैंडी के लिए चिंतित थी, जो वर्षों से शराब और मानसिक-स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था। जब वह सैंडी के अपार्टमेंट में गई, तो दरवाजे बंद थे और वह खाली लग रहा था। जैसे ही उसने और अन्य लोगों ने सैंडी को ढूँढने की योजना बनाई, जॉय ने प्रार्थना की, "परमेश्वर, मुझे वह देखने में मदद करें जो मैं नहीं देख पा रही हूँ।" जैसे ही वे जा रहे थे, जॉय ने पीछे मुड़कर सैंडी के अपार्टमेंट की ओर देखा और उसे पर्दे की हल्की सी हलचल दिखाई दी। उस क्षण, वह जान गयी की सैंडी जीवित है। हालाँकि उस तक पहुँचने के लिए आपातकालीन सहायता की आवश्यकता थी, लेकिन जॉय को प्रार्थना का उत्तर मिलने से खुशी हुई।

भविष्यवक्ता एलीशा परमेश्वर से उसकी वास्तविकता प्रकट करने के लिए कहने की शक्ति को जानता था। जब सीरियाई सेना ने उनके शहर को घेर लिया, एलीशा का सेवक डर से कांप उठा। हालाँकि, वह परमेश्वर का जन नहीं था, फिर भी परमेश्वर की सहायता से उसने अदृश्य की झलक देखी। एलीशा ने प्रार्थना की थी कि वह सेवक भी देखे, और "यहोवा ने उस सेवक की आंखें खोल दीं" और उसने "अग्निमय घोड़ों और रथों से भरी पहाड़ियां" देखीं (2 राजा 6:17)।

परमेश्वर ने एलीशा और उसके सेवक के लिए आत्मिक और भौतिक संसारो के बीच का पर्दा हटा दिया। जॉय का विश्वास करना कि परमेश्वर ने उसे पर्दे की छोटी सी झिलमिलाहट देखने में मदद की, उससे उसे आशा मिली। हम भी उससे हमारे आस-पास क्या हो रहा है, यह समझने के लिए आत्मिक दृष्टि पाने की प्रार्थना करे, चाहे हमारे प्रियजनों के साथ या हमारे समुदायों में। और हम भी उसके प्रेम, सत्य और करुणा के दूत बन सकते हैं। एमी बाउचर पाइ

 

हमारी आत्माओं को बचा लीजिए

तमिल संस्कृति में पत्तियाँ और पौधे विशेष रूप से उत्सवों के दौरान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेहमानों के स्वागत के लिए विवाह स्थलों के प्रवेश द्वार पर टिमटिमाती रोशनी से लदे केले के पेड़ लगाए जाते हैं। आम के पत्तों को आपस में जोड़कर दरवाजों को सजाया जाता है। केले के पत्तों का उपयोग रंगीन, विभिन्न प्रकार का भोजन परोसने के लिए प्लेट के रूप में किया जाता है। और नारियल के पत्तों का उपयोग सजावट के रूप में किया जाता है।

यहूदा में भी, ऐसा लगता है कि पत्तियों ने उनके उत्सव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब यीशु गधे पर सवार होकर यरूशलेम में दाखिल हुआ, तो फसह का पर्व चल रहा था। यह वह समय था जब दुनिया भर के यहूदी मिस्र से मिले छुटकारे का जश्न मनाने के लिए एकत्र होते थे। उत्सव और एकता के संकेत के रूप में खजूर की पत्तियों का उपयोग करना एक परंपरा थी। रोम के कठोर शासन के नीचे, यहूदी एक मसीह(Messiah) की लालसा रखते थे जो उन्हें एक बार फिर से बचाएगा जैसे मूसा ने बहुत पहले किया था। इसलिए, जब नासरत का आश्चर्यकर्म करनेवाला यीशु गधे पर सवार होकर आया, तो इसने आशा को प्रज्वलित किया (पद.37)। भीड़ खजूर की डालियाँ लेकर, लहराते हुए और “होसन्ना!” चिल्लाती हुई निकली l जिसका अर्थ है “हमें बचाओ” (मत्ती 21:8-9)। परमेश्वर ने सचमुच अपने पुत्र, आत्माओं के उद्धारकर्ता के द्वारा उनकी ‘आत्माओं को बचाने’ की इच्छा पूरी की।

हम अक्सर इस बात से अनजान होते हैं कि हमें किससे बचाये जाने की ज़रूरत है। हम सोच सकते हैं कि अगर हमारी वित्तीय, शारीरिक या भावनात्मक समस्याएँ हल हो जाती हैं, तो हम बच जाते हैं। लेकिन हमें जिस वास्तविक बचाव की ज़रूरत है, वह हमारी आत्माओं का है। यीशु हमें अपनी बचाने वाली सामर्थ्य और प्रेम दिखाने के लिए मनुष्य रूप में आया (लूका 19:10)। उन्होंने क्रूस पर अपने बलिदान के द्वारा हमारी आत्मा को बचाया, ताकि हमारे माध्यम से, वह दूसरों की आत्माओं को बचा सकें जिन्हें उद्धारकर्ता की ज़रूरत है। —रेबेका विजयन

 

प्रेमपूर्ण आज्ञाकारिता

हमारे विवाह समारोह के दौरान, हमारे पादरी ने मुझसे कहा, "क्या आप वादा करती है कि जब तक मृत्यु अलग न करे आप अपने पति से प्रेम करेंगी, उनका सम्मान करेंगी और उनकी आज्ञा मानेंगी?" अपने मंगेतर की ओर देखते हुए, मैं फुसफुसाई, "आज्ञा मानूंगी?" हमने अपना रिश्ता प्रेम और सम्मान पर बनाया है - अंध आज्ञाकारिता पर नहीं, जैसा की शादी की कसमे जता रहीं है। मेरे पति के पिता ने उस विस्मयकारी क्षण को फिल्म में कैद कर लिया जब मैंने आज्ञापालन शब्द को संसाधित किया और कहा, "मैं मानूंगी।"

इन वर्षों में, परमेश्वर ने मुझे दिखाया है कि आज्ञापालन शब्द के प्रति मेरे प्रतिरोध का, पति और पत्नी के बीच जो अविश्वसनीय रूप से पेचीदा रिश्ता है उससे कोई लेना-देना नहीं है। मेरी समझ से आज्ञापालन का अर्थ "वशीभूत" या "जबरन समर्पण" था, जिसका समर्थन पवित्रशास्त्र नहीं करता। बल्कि, बाइबल में आज्ञापालन शब्द उन कई तरीकों को व्यक्त करता है जिनसे हम परमेश्वर से प्रेम कर सकते हैं। जैसा कि मेरे पति और मैं अब शादी के तीस साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, पवित्र आत्मा की शक्ति के द्वारा से हम अभी भी यीशु और एक-दूसरे से प्रेम करना सीख रहे हैं।

जब यीशु ने कहा, "जो मेरी आज्ञाओं को मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है" (यूहन्ना 14:15), उन्होंने हमें दिखाया कि पवित्रशास्त्र का पालन करना उनके साथ निरंतर प्रेमपूर्ण और घनिष्ठ संबंध का परिणाम होगा (पद 16-21) । 

यीशु का प्रेम निःस्वार्थ, बिना शर्त है और कभी भी जबरदस्ती या अपमानजनक नहीं है। जैसे ही हम अपने सभी रिश्तों में उसका अनुसरण करते हैं और उसका सम्मान करते हैं, पवित्र आत्मा हमें उसके प्रति हमारी आज्ञाकारिता को विश्वास और आराधना के एक बुद्धिमान और प्रेमपूर्ण कार्य के रूप में देखने में मदद कर सकता है । सोचितल डिक्सॉन

 

खुशी के आंसू

एक सुबह घर से निकलते समय, डीन को कुछ दोस्त गुब्बारे लेकर इंतज़ार करते हुए मिले। उनका दोस्त जोश आगे बढ़ा। डीन को एक लिफाफा सौंपने से पहले उन्होंने कहा, "हमने आपकी कविताओं को एक प्रतियोगिता में शामिल किया था।" अंदर एक कार्ड था जिस पर लिखा था ''प्रथम पुरस्कार'' और जल्द ही हर कोई खुशी के आंसू रोने लगे। डीन के दोस्तों ने उसकी लेखन प्रतिभा की पुष्टि करते हुए एक सुंदर काम किया था।

खुशी के लिए रोना एक असत्याभास अनुभव है। आँसू आम तौर पर दर्द की प्रतिक्रिया होते हैं, खुशी के नहीं; और खुशी आम तौर पर हंसी के साथ व्यक्त की जाती है, आंसुओं के साथ नहीं। इतालवी मनोवैज्ञानिकों ने नोट किया है कि खुशी के आँसू गहरे व्यक्तिगत अर्थ के समय आते हैं - जैसे जब हम गहराई से प्रेम महसूस करते हैं या कोई बड़ा लक्ष्य प्राप्त करते हैं। इससे वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि खुशी के आंसू हमारे जीवन के अर्थ की ओर संकेत करते हैं।

मैं कल्पना करता हूं कि यीशु जहां भी गए वहां खुशी के आंसू फूट पड़े। कैसे हो सकता है कि उस जन्म से अंधे व्यक्ति के माता-पिता खुशी के आंसुओ के साथ न रोए होंगे जब यीशु ने उसे ठीक किया (यूहन्ना 9:1-9), या मरियम और मार्था जब उसने उनके भाई को मृत्यु से उठाया (11:38-44) ? जब परमेश्वर के लोगों को पुनर्स्थापित दुनिया में लाया जाएगा, तो “उनके चेहरे पर खुशी के आँसू बहेंगे,” परमेश्वर कहते हैं, “और मैं उन्हें बड़ी देखभाल के साथ घर ले आऊंगा” (यिर्मयाह 31:9 एनएलटी)।

यदि ख़ुशी के आँसू हमें हमारे जीवन का अर्थ बताते हैं, तो आने वाले उस महान दिन की कल्पना करें। जैसे ही हमारे चेहरे से आँसू बहेंगे, हम बिना किसी संदेह के जान लेंगे कि जीवन का अर्थ हमेशा उसके साथ घनिष्ठता से रहना रहा है।शेरिडन वॉयसे