Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by एलिसा मॉर्गन

क्या परमेश्वर सुन रहा है?

जब मैंने अपने चर्च की मंडलीय देखभाल टीम में सेवा की, तो मेरा एक कर्तव्य सेवाओं के दौरान पेंसिल से लिखी बेंच कार्ड्स पर दिए गए अनुरोधों पर प्रार्थना करना था l एक आंटी के स्वास्थ्य के लिए l एक जोड़े के वित्त के लिए l एक पुत्र की ईश्वर की खोज के लिए l शायद ही मैंने इन प्रार्थनाओं के परिणाम सुने l अधिकाँश अनाम थे, और मेरे पास यह जानने का कोई तरीका नहीं था कि परमेश्वर ने कैसे प्रतियुतर दी l मैं स्वीकार करता हूँ कि कई बार मुझे आश्चर्य  हुआ कि क्या वह वास्तव में सुन रहा था? क्या मेरी प्रार्थनाओं के परिणामस्वरूप कुछ हो रहा था?

हमारे जीवनकाल में, हम में से अधिकांश सवाल करते हैं, “क्या परमेश्वर मेरी सुनता है?” मुझे एक बच्चे के लिए अपनी हन्ना जैसी अनुनय याद है जो सालों तक अनुत्तरित रही l और मेरी दलीलें थीं कि मेरे पिता विश्वास किये, फिर भी बिना किसी स्पष्ट अंगीकार के उनकी मृत्यु हो गयी l 

सहस्त्राब्दियों में सर्वत्र असंख्य उदाहरण अंकित है कि परमेश्वर के कान सुनने के लिए झुके रहे : दासत्व में इस्राएलियों की कराहना सुनी (निर्गमन 2:24); सीनै पर्वत पर मूसा की सुनी (व्यवस्थाविवरण 9:19); गिलगाल में यहोशू की सुनी (यहोशु 10:14); संतान के लिए हन्ना की प्रार्थना सुनी (1 शमूएल 1:10-17); शाऊल से बचाव के लिए दाऊद की पुकार सुनी (2 शमूएल 22:7) l 

पहला यूहन्ना 5:14 उत्कर्ष है, “यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो वह हमारी सुनता है l” शब्द “सुनता है” का मतलब ध्यान देना है और सुना गया है के आधार पर प्रत्युत्तर देना है l 

जब हम आज परमेश्वर के पास जाते हैं, हमें उसके सुनने के कान का भरोसा हो जो उसके लोगों के इतिहास में सर्वत्र पाया जाता है l

अच्छी तरह विश्राम करें

घड़ी ने सुबह की 1.55 बजायी l देर रात तक एक टेक्स्ट(text) बातचीत से बोझिल, नींद नहीं आ रही थी l मैंने अपनी चादरों को जो ममी(mummy) जैसी लिपटी हुई   थी खोलकर उन्हें तह करके पलंग पर रख दी l मैं यह जानने के लिए कि नींद आने के लिए क्या करना है गूगल की लेकिन इसके स्थान पर मुझे यह मिला कि क्या नहीं करना है : झपकी न लें या कैफीन वाला पेय न लें अथवा दिन में देर तक काम करें l चेक करें l अपने टेबलेट पर आगे पढ़ते हुए, मुझे “स्क्रीन टाइम” बहुत देर तक उपयोग नहीं करने की भी सलाह दी गयी l उफ़ l टेक्स्ट करना एक अच्छा विचार नहीं था l जब अच्छी तरह से आराम करने की बात आती है, तो सूचियाँ क्या नहीं करने की है l 

पुराने नियम में, परमेश्वर ने विश्राम करने के लिए सब्त के दिन क्या न करें, से सम्बंधित नियम दिए थे l नये नियम में, यीशु ने एक नया तरीका पेश किया l नियमों पर जोर देने के बजाय, यीशु ने शिष्यों को रिश्ते में बुलाया l “हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे हुए लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा” (मत्ती 11:28) l इससे पहले वाले पद में, यीशु ने अपने पिता के साथ अपने स्वयं के निरंतर सम्बन्ध के बारे में बताया──जिसे उसने हमारे सामने प्रगट किया l यीशु ने पिता से निरंतर सहायता के प्रबंध का आनंद लिया, यही वह है जिसका अनुभव हम भी कर सकते हैं l 

जबकि हम ख़ास अतीत से बचना चाहते हैं जो हमारी नींद में खलल डाल सकती है, मसीह में अच्छी तरह आराम करने की सार्थकता नियम से अधिक रिश्ते से है l मैंने अपने रीडर(reader) को बंद कर दिया और यीशु के निमंत्रण के तकिये पर अपना बोझिल हृदय रख दिया : “मेरे पास आओ . . . l” 

बुद्धि जो हमें चाहिए

मेघा ने कूरियर खोला और एक बड़ा लिफाफा प्राप्त किया जिस पर उसके प्रिय मित्र का वापसी पता लिखा हुआ था l अभी कुछ ही दिन पहले, उसने उस मित्र के साथ एक संबंधपरक संघर्ष के बारे में बताया था । उसने उत्सुकता से पैकेज खोला और उसमें  साधारण जूट की डोरी में रंग-बिरंगी मोतियों से सजा हार पाया l इन शब्दों के साथ एक कार्ड भी था “परमेश्वर के मार्ग खोजो l” मेघा उसे अपने गले में पहनते समय मुस्कुरायी l 

नीतिवचन की पुस्तक बुद्धि की बातों का एक संकलन है──कई सुलैमान के द्वारा लिखी हुई हैं, जो अपने युग का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति के रूप में प्रशंसित था (1 राजा 10:23) । मूलभूत सन्देश नीतिवचन 1:7 “यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है” से शुरू होकर  उसके 31 अध्याय पाठक को बुद्धि की सुनने और मूर्खता से बचने का आह्वान करते हैं l बुद्धि──जानना कि कब क्या करना है──परमेश्वर के मार्ग को खोजने के द्वारा उसे आदर देने से मिलती है l आरंभिक पदों में, हम पढ़ते हैं, “अपने पिता की शिक्षा पर कान लगा, और अपनी माता की शिक्षा को न तज; क्योंकि वे मानो तेरे सिर के लिये शोभायमान मुकुट, और तेरे गले के लिये कन्ठ माला होंगी” (पद.8-9) l 

मेघा के मित्र ने उसे उस बुद्धि के श्रोत की ओर मार्गदर्शित किया था जो उसकी ज़रूरत थी : “परमेश्वर के मार्ग खोजो l” उसका उपहार मेघा के ध्यान को उस मदद की खोज करने की 

ओर केन्द्रित किया जो उसे चाहिए था । 

जब हम परमेश्वर का आदर करते हैं और उसका मार्ग ढूंढते हैं, तो हम जिन्दगी के सभी मामलों का सामना करने के लिए वह बुद्धि प्राप्त करेंगे जो हमें चाहिए । प्रत्येक और हर एक । 

हमारे पिता की देखभाल

थवाक! मैंने उपर देखा और उस आवाज की तरफ अपना कान लगाया । खिड़की के फलक पर एक धब्बा देखकर, मैं बाहर झाँकी और चिड़िया का धड़कता-शरीर देखा । मेरा हृदय दुखित हुआ । मैं नाजुक पंख वाली चिड़िया की मदद करने के लिए ललायित हो गई ।

मत्ती 10 में, जब यीशु अपने चेलों को आसन्न खतरे के बारे में आगाह किया, उसने उनको दिलासा देने के लिए गौरेयों के लिए अपने पिता की देखभाल का वर्णन किया l उसने बारहों को निर्देश दिया जब उसने, उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया कि उन्हें निकालें और सब प्रकार की बीमारियों और सब प्रकार की दुर्बलताओं को दूर करें” (पद.1) l जबकि ऐसे सामर्थ्य के काम करना चेलों को बहुत अच्छा लग रहा होगा, अनेक उनका विरोध करने वाले थे, जिसमें शासकीय अधिकारी, उनके अपने परिवार, और दुष्ट की फुसलानेवाली पकड़ शामिल थी (पद.16-28) l

फिर 10:29-31 में, यीशु ने उनसे किसी का भी सामना करने में भयभीत नहीं होने के लिए कहा क्योंकि वे कभी भी अपने पिता की देखभाल से बाहर नहीं होने वाले थे l उसने पूछा, “क्या पैसे में दो गौरेयें नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्छा के बिना उनमें से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती . . . इसलिए डरो नहीं; तुम बहुत गौरेयों से बढ़कर हो l”

मैंने दिन भर उस पक्षी की जाँच की, हर बार उसे जीवित देखा लेकिन शांत l फिर, देर शाम वह उड़ गयी थी l मैंने प्रार्थना की कि वह बच जाए l निश्चित रूप से अगर मैं इस चिड़िया की इतनी परवाह कर रही थी, परमेश्वर इससे भी अधिक देखभाल करता है l कल्पना कीजिये कि वह आपकी और मेरी कितनी परवाह करता है!

जो कुछ वह कर सकी, उसने किया

उसने वाहक पट्टा(conveyor belt) पर कपकेक के प्लास्टिक के डिब्बे को रखकर खजांची की ओर भेजा l इसके बाद जन्मदिन कार्ड और चिप्स के विभिन्न पैकेट थे l उसके बाल पोनीटेल(ponytail) से बाहर, उसके थके माथे पर फैले हुए थे l उसका नन्हा बच्चा ध्यान देने के लिए चिल्ला रहा था l क्लर्क ने कुल जोड़ बताया और माँ का चेहरा उतर गया l “ओह,  मुझे लगता है कि मुझे कुछ वापस करना होगा l लेकिन ये उसकी पार्टी के लिए हैं,  उसने अपने बच्चे को देखते और अफ़सोस जताते हुए गहरी साँस ली l

उसके पीछे लाइन में खड़े,  एक अन्य ग्राहक ने इस माँ के दर्द को पहचान लिया l यह दृश्य बैतनिय्याह की मरियम के लिए यीशु के शब्दों में जाना-पहचाना है : “जो कुछ वह कर सकी, उसने किया” (मरकुस 14:8) l मरियम ने उसकी मृत्यु और गाड़े जाने से पहले बहुमूल्य इत्र से उसका अभिषेक किया, जिसके बाद शिष्यों ने उसका उपहास किया l यीशु ने उसके द्वारा किये गए कार्यों का जश्न मनाकर अपने शिष्यों को सुधारा l उसने यह नहीं कहा,  "उसने वह सब किया जो वह कर सकती थी,” बल्कि, उसने कहा, “जो कुछ वह कर सकी, उसने किया l” इत्र की अत्यधिक लागत उसका मतलब नहीं था l यह मरियम के प्रेम का उसके कार्य द्वारा दर्शशाया जाना था जो मायने रखता था l यीशु के साथ रिश्ता प्रतिक्रिया में परिणित होता है l

उसी क्षण,  माँ के एतराज करने से पहले,  दूसरा ग्राहक आगे झुककर अपने क्रेडिट कार्ड को कार्ड रीडर में डालकर, खरीद के लिए भुगतान कर दिया l यह एक बड़ा खर्च नहीं था,  और उस महीने उसके पास अतिरिक्त धन था l लेकिन उस माँ के लिए,  यह सब कुछ था l शुद्ध प्रेम का एक भाव-प्रदर्शन उसकी आवश्यकता के क्षण में प्रगट हो गया l

विश्वास की उपलब्धि

हाथ में हाथ लिए हुए,  मेरा पोता और मैं एक विशेष जन्मदिन उपहार खोजने के लिए पार्किंग के उस पार निकल गए l अब एक शिशु विद्यालय का छात्र(preschooler),  वह सब कुछ के बारे में उत्साहित था,  और मैं उसकी खुशी को आनंद में सुलगाने के लिए दृढ़ थी l मैंने अभी-अभी निम्न शब्द छपे हुए एक मग देखा था, “नानी/दादी बहुत अधिक “उपलब्धियों वाली माताएँ हैं l” उपलब्धियाँ मज़ा, दीप्ति, खुशी के बराबर हैं! उसकी नानी के रूप में यही मेरे काम का वर्णन है, है न? वह . . . और अधिक l

अपने आध्यात्मिक पुत्र तीमुथियुस को लिखे गए अपने दूसरे पत्र में, पौलुस उसके निष्कपट विश्वास की सराहना करता है─और फिर इसका श्रेय तीमुथियुस की नानी, लोइस और उसकी माँ, यूनीके को देता है (2 टिमोथी 1:5) l ये स्त्रियाँ अपने विश्वास को इस तरह जीती थीं कि तीमुथियुस भी यीशु पर विश्वास करने लगा l निश्चित रूप से,  लोइस और यूनीके तीमुथियुस को प्यार करती थीं और उसकी जरूरतों के लिए प्रबंध करती थीं l लेकिन स्पष्ट रूप से,  उन्होंने और अधिक किया l पौलुस उस विश्वास की ओर संकेत करता है जो उनमें वास करता था और बाद में तीमुथियुस में विश्वास के स्रोत के रूप में जीवित था l

एक नानी के रूप में मेरी जिम्मेदारी में जन्मदिन उपहार की “उपलब्धि” क्षण शामिल है l  लेकिन इससे भी अधिक,  जब मैं अपना विश्वास साझा करती हूँ तो मुझे उपलब्धि के क्षणों में बुलाया जाता है : चिकन बिरयानी के ऊपर अपने सिर झुकाकर खाना l परमेश्वर की कला के कार्य के रूप में आकाश में दिव्य बादल रचनाओं पर ध्यान देना l टेलीविजन पर यीशु के बारे में एक गीत के साथ चहकना l आइए यूनीके और लोइस जैसी माताओं और नानी/दादी के उदाहरण से आकर्षित होकर अपने विश्वास को जीवन में उपलब्धि बनने दें  ताकि जो हमारे पास है अन्य लोग उसे चाहें l

देखभाल की पत्रियाँ

दशकों पहले, डॉ. जेरी मोटो ने एक “देखभाल पत्र” की शक्ति की खोज की l उनके शोध ने पाया कि जिन रोगियों ने पहले आत्महत्या का प्रयास किया था, उनको देखभाल का एक पत्र भेजने से, पुनरावृत्ति की दर आधे से कम हो गयी l हाल ही में, स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं ने “देखभाल” इबारतें(texts), पोस्टकार्ड्स, यहां तक ​​कि सोशल मीडिया मेम्स(memes-एक विचार या व्यवहार जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है) को अनुवर्ती उपचार के रूप में भेजते हुए इस शक्ति को फिर से खोजा है l
बाइबल में इक्कीस “किताबें” वास्तव में पत्र हैं—सन्देश पत्र(epistles)--पहली सदी के विश्वासियों को लिखे गए जो विभिन्न कारणों से संघर्षरत थे। पौलुस, याकूब, और यूहन्ना ने विश्वास और आराधना की मूल बातें समझाने, और कैसे झगड़े का समाधान किया जाए और एकता का निर्माण किया जाए को समझाने के लिए पत्र लिखे l
हालाँकि, प्रेरित पतरस ने, विशेष रूप से उन विश्वासियों को लिखा था, जिन्हें रोमन सम्राट, नीरो द्वारा सताया जा रहा था l पतरस ने उन्हें 1 पतरस 2:9 में उनका इस तरह का वर्णन करते हुए, “तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो” परमेश्वर के लिए उनके असली मूल्य की याद दिलायी l इसने उनके ध्यान को उनके संसार में उनके लिए परमेश्वर के महान उद्देश्य की ओर ले गया : “कि उसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो l
हमारे महान परमेश्वर ने स्वयं हमें प्रेरित करने वाले पत्रों से भरी एक पुस्तक लिखी है--प्रेरित पवित्रशास्त्र--कि हमारे पास हमेशा उस आदर्श का एक रिकॉर्ड हो जो वह हमें अपना मानकर सौंपता है l हम उसके पत्रों को प्रतिदिन पढ़ें उन्हें दूसरों के साथ साझा करें जिन्हें यीशु द्वारा दी जाने वाली आशा की आवश्यकता है l

प्रेम की गहराईयाँ

तीन साल का एक लड़का, हाल ही में तैरना सीखा था जब वह अपने दादा के पिछवाड़े के आँगन में एक चालीस फुट गहरे, पत्थर की दीवार वाले कुएं में एक ढके हुए सड़े प्लाईवुड के पुट्ठे से फिसलकर गिर गया । वह दस फीट पानी में तब तक रहने में कामयाब रहा जब तक कि उसके पिता उसे बचाने के लिए नहीं उतरे । अग्निशामकों ने लड़के को निकालने के लिए रस्सियाँ लाईं,  लेकिन पिता अपने बेटे के बारे में इतना चिंतित था कि पहले से निश्चित करने के लिए कि उसका बेटा सुरक्षित है वह फिसलन वाली चट्टानों से नीचे उतर गया l

ओह, एक माता-पिता का प्यार! ओह, वह लंबाई (और गहराई) जहाँ तक हम अपने बच्चों के लिए जाएंगे!

जब प्रेरित यूहन्ना आरम्भिक कलीसिया में विश्वासियों को लिखता हैं जो अपने विश्वास के लिए पैर जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे जब उनके चारोंओर झूठी शिक्षा व्याप्त थी,  तो उसने इन शब्दों को एक जीवन-रक्षक की तरह पहुँचाया : “देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है कि हम परमेश्वर की संतान कहलाएं; और हम हैं भी” (1 यूहन्ना 3:1) l यीशु में विश्वासियों को परमेश्वर की “संतान” संबोधित करना एक अंतरंग और कानूनी नाम-पत्र लगाना था जो उन सभी के लिए वैधता लाया जो उस पर भरोसा करते हैं l

ओह, वह लंबाई और गहराई जहाँ तक परमेश्वर अपने बच्चों के लिए जाएगा!

ऐसे कदम होते हैं जो माता-पिता केवल अपने बच्चे के लिए उठाते हैं – जैसे कि यह पिता जो अपने बेटे को बचाने के लिए कुएँ में उतरता है l और हमारे स्वर्गिक पिता के अंतिम कार्य की तरह, जिसने अपने इकलौते बेटे को हमें अपने हृदय के करीब लाने के लिए भेजा और हमें अपने साथ जीवन देने के लिए किया (पद.5-6) l

हरे की तलाश करें

कर्कश आवाज़ वाले कप्तान ने एक और विलम्ब की घोषणा की । मैं विमान में अपनी खिड़की वाली सीट में कसी बैठी थी जो दो घंटे से एक ही जगह खड़ा था l  मैं हताशा में खिज रही थी l  एक लम्बा कार्य-सप्ताह के कारण बाहर रहने के बाद,  मैं आराम और घर के विश्राम के लिए तरस गयी थी । और कितनी देर?  जब मैंने वर्षा के बूंदों से आच्छादित खिड़की से बाहर देखा,  मैंने ध्यान दिया कि सीमेंट की दरार में हरी घास का एक अकेला त्रिकोण बढ़ रहा है जहाँ हवाई पट्टियां मिल रही थी l उस ठोस कंक्रीट के बीच में ऐसा विचित्र दृश्य ।

एक अनुभवी चरवाहे के रूप में,  दाऊद अच्छी तरह से जानता था कि विश्राम से भरी हरी चराइयां उसकी भेड़ों की ज़रूरत थी l भजन 23 में, उसने एक महत्वपूर्ण सबक दिया,  जो उसे इस्राएल के राजा के रूप में अग्रणी दिनों में आगे ले जाने वाला था l “यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी l वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है . . . वह मेरे जी में जी ले आता है”  (पद.1-3) l

एक हवाईअड्डा की पक्की कंक्रीट जंगल पर, अपने गंतव्य में विलंबित और आराम और विश्राम रहित महसूस करते हुए, परमेश्वर, मेरा अच्छा चरवाहा, मेरा ध्यान उस हरे रंग के टुकड़े की ओर ले गया l उसके साथ संबंध में,  मैं जहाँ भी हूँ,  उसके आराम के निरंतर प्रावधान को देख सकती हूँ - अगर मैं ध्यान दूँ और उसमें प्रवेश करूँ ।

यह पाठ वर्षों से कायम रहा है : हरा ढूंढ़ते रहें l वह वहां है l जब हमारे जीवन में परमेश्वर का साथ है, तो हमें कुछ भी घटी नहीं है l वह हमें हरी हरी चराइयों में बैठाता है l वह मेरे जी में जी ले आता है l