साफ़ कंटेनर्स
“ढोनेवाले कंटेनर में नफरत से जंग लग जाता है l” ये शब्द पूर्व विधायक(Senator) एलन सिम्सन ने जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के अंतिम संस्कार में बोले थे l अपने मित्र की दयालुता का वर्णन करने का प्रयास करते हुए, सीनेटर सिम्सन ने याद किया कि कैसे संयुक्त राज्य अमेरिका के चालीसवें राष्ट्रपति ने अपने पेशवर नेतृत्व और व्यक्तिगत संबंधों में घृणा के बजाय हास्य और प्रेम को अपनाया l
मैं सीनेटर के उद्धरण से सम्बद्ध रखता हूँ, क्या आप नहीं रखते हैं? ओह, मेरी कितनी हानि होती है जब मैंने नफरत को पनाह देता हूँ!
चिकित्सा अनुसन्धान हमारे शरीर को हुए नुक्सान को प्रगट करता है जब हम नकारात्मक क्रोध से चिपके रहते हैं या हम क्रोध का बौछार करते हैं l हमारा रक्त चाप बढ़ जाता है l हमारा हृदय जोर से धड़कने लगता है l हमारी आत्मा बैठती है l हमारे कंटेनर(व्यक्तित्व) बिगड़ने लगते हैं l
नीतिवचन 10:12 में राजा सुलैमान कहता है, “बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढंप जाते हैं l” यहाँ नफरत के परिणामस्वरुप जो संघर्ष होता है, वह विभिन्न जनजातियों और जातियों के लोगों के बीच खुनी संघर्ष है l इस तरह की नफरत बदला लेने के लिए सहज प्रवृति को बढ़ावा देती है ताकि जो लोग एक दूसरे से घृणा करते हैं वे मिल न सकें l
इसके विपरीत, परमेश्वर के प्यार का तरीका ढांपता है – सभी गलतियों - के ऊपर एक पर्दा डालता है, को छुपाता है, या उनको क्षमा करता है l इसका मतलब यह नहीं है कि हम त्रुटियों को अनदेखा करते हैं या गलत काम करनेवाले की सहायता करते हैं l लेकिन हम गलतियों को पोषित नहीं करते हैं कोई सच में पश्च्तापी है l और यदि वे कभी पश्चाताप नहीं करते हैं, इसके बावजूद भी हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर को बताते हैं l (1 पतरस 4:8) l हम जो महः प्रेम करनेवाले को जानते हैं “एक दूसरे से प्रेम [रखें] क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है” (1 पतरस 4:8) l
स्वीकृतियों का धागा
एक क्रिसमस के समय, मेरी दादी ने मुझे सुन्दर मोती का एक हार दिया l वे सुन्दर मोती मेरे गले में चमकते रहे जब तक कि एक दिन धागा टूट नहीं गया l मोती हमारे घर की सख्त लकड़ी के फर्श पर सभी दिशा में उछलने लगे l तख्तों पर रेंगते हुए, मैंने हर एक मोती को बटोर लिया l अपने दम पे, वे छोटे थे l लेकिन ओह, जब वे एक धागे में पिरोए हुए थे, उन्होंने कितना प्रभाव दिखाया था!
कभी-कभी परमेश्वर को मेरी हाँ इतनी बेतुकी लगती है – उन अलग-अलग मोतियों की तरह l मैं यीशु की माँ मरियम के साथ अपनी तुलना करती हूँ, जो बहुत ही आश्चर्जनक रूप से आज्ञाकारी थी l उसने हामी भरी जब उसने मसीहा को अपने कोख में रखने की परमेश्वर की बुलाहट को गले लगाया l “’देख, मैं प्रभु की दासी हूँ, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो’” (लूका 1:38) l क्या वह सब समझ पायी थी जो उससे माँगा जाने वाला था? कि आगे चलकर उसे अपने पुत्र को क्रूस पर छोड़ने की उससे भी बड़ी स्वीकृति?
स्वर्गदूतों और चरवाहों की मुलाकात के बाद, लूका 2:19 हमें बताता है कि मरियम ने “सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही l” रखना अर्थात् “संचित करना” सोचना अर्थात् “एक साथ पिरोना l” यह वाक्यांश मरियम द्वारा लूका 2:51 में दोहराया गया है l वह समय के साथ अनेक हाँ के द्वारा प्रत्युत्तर देने वाली थी l
जैसे मरियम के साथ हुआ, पिता के अनुरोध के प्रति हमारी आज्ञाकारिता की कुंजी अनेक हाँ के साथ एक एक करके मिलेंगी, जब तक कि वे एक समर्पित जीवन का खज़ाना न बन जाए l
खूबसूरती से बोझिल
मैं घोर अँधकार में जागी l मैं तीस मिनट से अधिक नहीं सो पायी थी और मेरे दिल को अहसास हुआ कि नींद जल्दी नहीं आएगी l एक सहेली का पति हॉस्पिटल में पड़ा था, जिसे भयानक खबर मिली थी, “कैंसर वापस आ गया है – मस्तिष्क और अब रीढ़ में l” मेरी सहेली के लिए मेरा सम्पूर्ण व्यक्तित्व दुखित था l कितना भारी बोझ है! और फिर भी, किसी प्रकार प्रार्थना की मेरी पवित्र चौकसी द्वारा मेरी आत्मा उभारी गयी l आप कह सकते हैं कि मैंने खूबसूरती से उनके लिए बोझ महसूस किया l यह कैसे हो सकता है?
मत्ती 11:2-20 में, यीशु हमारी थकी हुयी आत्माओं के लिए आराम देने की प्रतिज्ञा करता है l असाधारण रूप से, उसका विश्राम तब मिलता है जब हम उसके जूए के नीच झुकते हैं और उसके बोझ को ग्रहण करते हैं l पद 30 में वह स्पष्ट करता है, “मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है l” जब हम यीशु को अपनी पीठ से अपना बोझ उठाने की अनुमति देते हैं और फिर अपने आप को यीशु के जूए से बांधते हैं, तब हम उसके साथ जोते जाकर, उसके साथ और जिसकी भी वह अनुमति देता है के साथ कदम मिलाकर चलते हैं l जब हम उसके जूए के नीचे झुकते हैं, हम उसके कष्टों में हिस्सा लेते हैं, जो आख़िरकार हमें उसके आराम में भी हिस्सा लेने की अनुमति देता है (2 कुरिन्थियों 1:5) l
मेरे मित्रों के लिए मेरी चिंता एक भारी बोझ थी l फिर भी मुझे यह आभारी लगा कि परमेश्वर मुझे प्रार्थना में ले जाने अनुमति देंगे l धीरे-धीरे मैं सो गयी और जागी भी – फिर भी खूबसूरती से बोझिल थी लेकिन अब यीशु के साथ चलने के आसान जूए और हलके बोझ के तहत l
दाग़ की कहानियाँ
वह तितली मेरी माँ के पांडा-मुखी पैन्ज़ी फूलों के मध्य फुर्ती से अन्दर बाहर मंडरा रही थी l बालिका होने के कारण, मैं उसे पकड़ना चाहती थी l मैंने अपने पीछे के आँगन से दौड़कर रसोई से एक कांच का जार उठा ली, परन्तु जल्दबाजी में लौटते समय, ठोकर खाई और ठोस आँगन के फर्श से टकरा गयी l जार मेरी कलाई के नीचे चूर-चूर हो गया और एक बदसूरत कटे का दाग छोड़ गया जिसमें लगभग अठारह टाँके लगने थे l आज वह दाग मेरी कलाई पर एक इल्ली की तरह दिखाई देता है, और घायल होने और ठीक होने की कहानी बताता है l
जब यीशु अपनी मृत्यु के बाद अपने शिष्यों के समक्ष प्रगट हुआ, वह अपने दाग़ लेकर आया l युहन्ना बताता है कि थोमा उसके “हाथों में कीलों के दागों” को देखना चाहता था और यीशु ने थोमा को “अपनी ऊंगली . . . लाकर [उसके] हाथों में” और अपना हाथ [उसके] पंजर में” डालने के लिए आमंत्रित किया (युहन्ना 20:25, 27) l यह प्रगट करने के लिए कि वह वही यीशु था, वह अपनी मृत्यु में से दुःख के दागों के साथ जी उठा जो अभी भी दिखाई दे रहा था l
यीशु के दाग़ उसको उद्धारकर्ता प्रमाणित करते हैं और हमारे उद्धार की कहानी बताते हैं l उसके हाथों और पैरों के दाग और उसके पंजर में छेद वह कहानी बताते हैं कि उसने हमारे लिए पीड़ा सही और फिर हमें चंगाई दी l उसने ऐसा इसलिए किया ताकि हम उसके लिए पुनःस्थापित और पूर्ण किये जाएँ l
क्या आपने कभी मसीह के दाग़ द्वारा बतायी गयी कहानी पर विचार किया है?
एक स्थायी विरासत
थॉमस एडिसन ने पहला वास्तविक विद्युत् प्रकाश बल्ब का अविष्कार किया l जोनस सॉक ने एक प्रभावशाली पोलियो वैक्सीन विकसित किया l एमी कारमाइकल ने गीतों की रचना की जो हम आराधना में गाते हैं l परन्तु आपके विषय क्या कहा जाए? आपको पृथ्वी पर क्यों रखा गया है? आप किस प्रकार अपना जीवन निवेश करेंगे?
उत्पत्ति 4 बताता है कि हव्वा ने “गर्भवती होकर कैन को जन्म दिया l” कैन को पहली बार अपने गोद में लेकर, हव्वा ने कहा, “मैं ने यहोवा की सहायता से एक पुरुष पाया है” (पद.1) l पहले जन्म के विषय चकित कर देनेवाले अनुभव को समझने के प्रयास में, हव्वा परमेश्वर के प्रभुत्व पर निर्भर रहनेवाला वाक्यांश उपयोग करती है : “यहोवा की सहायता से l” आख़िरकार, हव्वा के बीज द्वारा, परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक अन्य पुत्र द्वारा बचाव का प्रबंध करनेवाला था (युहन्ना 3:16) l कितनी बड़ी विरासत!
पितृत्व एवं मातृत्व उन अनेक तरीकों में से केवल एक है जिसके द्वारा लोग इस संसार में स्थायी योगदान देते हैं l शायद आपका दान किसी कमरे से फूट निकलेगा जहां आप लिखते हैं या बिनाई करते हैं या पेंट करते हैं l आप किसी और के लिए उदाहरण हो सकते हैं जो पवित्र प्रभाव से वंचित है l या आपका निवेश आपकी मृत्यु के बाद भी आपकी कल्पनाओं से परे कई तरीकों से हो सकता है l यह कोई कार्य हो सकता है जो आप छोड़ जाएंगे या व्यवसाय में ईमानदारी के लिए आपकी नेकनामी हो सकती है l किसी भी मामले में, क्या आपके शब्द हव्वा की परमेश्वर पर निर्भरता को प्रतिध्वनित करेंगे? प्रभु की सहायता से, आप उसके आदर में क्या करेंगे?
हर कहानी उसका नाम फुसफुसाती है
मैंने मनमौजी ढंग से बच्चों की सचित्र बाइबल खोलकर अपने पोते के लिए पढ़ना आरंभ कर दिया l तुरंत ही हम सम्मोहित हो गए जब परमेश्वर के प्रेम और प्रबंध की कहानी गद्य के रूप में खुलने लगी l अंश को चिन्हित करके, मैंने पुस्तक को पलटकर शीर्षक को एक बार फिर पढ़ना चाह : द जीसस स्टोरीबुक बाइबल : हर कहानी उसका नाम फुसफुसाती है l
हर कहानी उसका नाम फुसफुसाती है l हर एक कहानी l
अपने पुनरुत्थान के बाद, यीशु ने अपने दो चेलों से इम्माऊस के मार्ग पर मुलाकात की जिन्होनें उसे नहीं पहचाना और वह अपने संभावित उद्धारकर्ता की मृत्यु पर निराशा से संघर्ष कर रहे थे (लूका 24:19-24) l उनकी “आशा थी कि यही इस्राएल को छुटकारा देगा” (पद.21) l उसके बाद लूका लिखता है कैसे यीशु ने उनको आश्वस्त किया : “तब उसने[यीशु ने] मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ करके सारे पवित्शास्त्र में से अपने विषय में लिखी बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया” (पद. 27) l
हर कहानी उसका नाम फुसफुसाती है, कठिन कहानियाँ भी, क्योंकि वे हमारे संसार की व्यापक बर्बादी और एक छुटकारा देनेवाले की हमारी ज़रूरत दर्शाती हैं l हमें अपने पास वापस लाने के लिए, हर एक कार्य, घटना, हस्तक्षेप उसके अड़ियल प्रिय लोगों के लिए परमेश्वर द्वारा अभिकल्पित छुटकारे की ओर इशारा करते हैं l
यष्टि-चित्र(stick-figure) से सीख
मेरी एक सहेली – ठीक है, वह मेरी परामशदाता थी – ने एक कागज़ पर यष्टि चित्र(stick-figure) बनाया l उसने उसे निजी “व्यक्तित्व” संबोधित किया l उसके बाद उसने उस चित्र के चारोंओर रेखा खिंची, करीब आधा इंच बड़ा, और उसे “सार्वजनिक” व्यक्तित्व संबोधित किया l इन दोनों चित्रों में अंतर, निजी व्यक्तित्व और सार्वजनिक व्यक्तित्व, उस सीमा को दर्शाता है जिसमें हमारे पास ईमानदारी है l
मैं उनके पाठ पर विचार करके आश्चर्यचकित हुयी, क्या मैं सार्वजनिक रूप से वह व्यक्ति हूँ जो मैं व्यक्तिगत तौर से हूँ? क्या मैं ईमानदार हूँ?
पौलुस ने कुरिन्थुस की कलीसिया को पत्र लिखा, यीशु के समान बनने के लिए अपनी शिक्षा में प्रेम और अनुशासन को मिला दिया l जब वह इस पत्री(2 कुरिन्थियों) के अंत में पहुँचा, उसने दोष लगानेवालों को जिन्होनें उसकी सत्यता को चुनौती दी थी यह कहते हुए संबोधित किया कि वह अपने पत्रियों में दृढ़ था परन्तु व्यक्तित्व में निर्बल (10:10) l इन आलोचकों ने अपने श्रोताओं से धन प्राप्त करने के लिए व्यवसायिक भाषणबाज़ी का उपयोग किया l जबकि पौलुस के पास शैक्षणिक कौशल था, वह निष्कपटता और सादगी से बोलता था l “मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभानेवाली वातें नहीं,” उसने पहले की एक पत्री में लिखा था, “परन्तु [उसमें] आत्मा और सामर्थ्य का प्रमाण था” (1 कुरिन्थियों 2:4) l बाद की उसकी पत्री ने उसकी ईमानदारी को उजागर किया : “जो ऐसा कहता है, वह यह समझ रखे कि जैसे पीठ पीछे पत्रियों में हमारे वचन हैं, वैसे ही तुम्हारे सामने हमारे काम भी होंगे” (2 कुरिन्थियों 10:11) l
पौलुस ने अपने को सार्वजनिक रूप में और व्यक्तिगत रूप में एक सा दर्शाया l हमारे विषय क्या है?
भालू का गले लगाना
“भालू” मेरे पौत्र के लिए उपहार था – एक विशाल भरवा पशु फ्रेम में निहित प्रेम का ढेर लगाने वाली सहायता l डी शिशु का प्रतिउत्तर? पहले, आश्चर्य l अगला, एक आश्चर्यचकित विस्मय l उसके बाद, एक साहसी जांच पड़ताल को उकसाने वाली जिज्ञासा l उसने अपनी थुल-थुल ऊँगली भालू के नाक में कोंचा, और जब भालू उसकी बाहों में…
जो परमेश्वर देखता है
एक सुबह, मैं एक पारिवारिक-कमरे की खिड़की को थपथपाती हुयी निकली जहां से हमारे घर के पीछे का निर्जन-क्षेत्र दिखाई देता है l अक्सर, मैं एक बाज़ या एक उल्लू को किसी पेड़ पर बैठे हुए, उस क्षेत्र की निगरानी करते हुए देखती थी l एक सुबह मैं चकित हुयी जब मैंने एक बॉल्ड ईगल (एक ख़ास प्रजाति का चील) को एक ऊंची डाली पर निडरतापूर्वक संतुलित बैठे हुए, उस भू-भाग का अन्वेषण करती हुयी देखी मानो समूचा विस्तार उसी का था l कदाचित वह “नाश्ता” ढूँढ रहा था l उसका सम्पूर्ण ध्यान शानदार था l
2 इतिहास 16 में, हनानी भविष्यद्वक्ता (परमेश्वर का नबी) ने राजा को सूचित किया कि उसके कार्यों पर राजसी नज़र है l उसने यहूदा के राजा, आसा से कहा, “तू ने जो अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा वरन् आराम के राजा ही पर भरोसा रखा है” (पद.7) l तब हनानी ने समझाया, “देख यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिए फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपनी सामर्थ्य दिखाए” (पद.9) आसा के अनुपयुक्त भरोसे के कारण, वह हमेशा युद्ध करता रहेगा l
इन शब्दों को पढ़ते हुए, हमें यह गलत बोध हो सकता है कि परमेश्वर हमारे प्रत्येक गतिविधि पर ध्यान देता है कि वह शिकार करनेवाले एक पक्षी के समान हम पर झपट सकता है l किन्तु हनानी के शब्द सकारात्मक पर केन्द्रित हैं l उसका मकसद है कि हमारा परमेश्वर निरंतर हमपर ध्यान देता है और हमारे लिए इंतज़ार करता है कि हम उसे ज़रूरत पड़ने पर पुकारें l
मेरे पीछे के अहाते में उस बॉल्ड ईगल की तरह, हमें यह गलत बोध हो सकता है, किस प्रकार परमेश्वर की आँखें हमारे संसार में फिरती हैं – अभी भी –आप में और मुझ में विश्वासयोग्यता खोजती है? वह किस प्रकार हमारी ज़रूरत के अनुसार हमें आशा और मदद देगा?