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Articles by कटारा पैटन

नम्रता पहनना

फ्रोजन ट्रीट्स फ्रैंचाइजी के सीईओ टेलीविजन श्रृंखला अंडरकवर बॉस पर खजांची की वर्दी पहने हुए, गुप्त रूप से गई। फ़्रैंचाइज़ी के दुकानों में से एक में काम करते हुए, उसका विग और श्रृंगार ने उसके पहचान को छुपा दिया क्योंकि वह "नई" कर्मचारी बन गई। उसका लक्ष्य यह देखना था कि अंदर और जमीन पर चीजें वास्तव में कैसे काम कर रही हैं। अपने अवलोकन के आधार पर, वह दुकान के कुछ समस्याओं का हल की जिसका सामना दुकान कर रहा था। 

यीशु ने हमारे समस्याओं का हल करने के लिए अपने आप को " शून्य कर दिया" (फिलिप्पियों 2:7)। वह मानव बना - पृथ्वी पर चला, हमें परमेश्वर के बारे में शिक्षा दिया, और अंततः हमारे पापों के लिए क्रूस पर मरा (पद. 8)। इस बलिदान ने मसीह के नम्रता को उजागर किया क्योंकि उसने आज्ञाकारिता से अपने जीवन को हमारे पापबलि के रूप में दे दिया। उन्होंने मनुष्य के तरह पृथ्वी पर चला और वह अनुभव किया जो हम अनुभव करते हैं—जमीन के स्तर से। 

यीशु में विश्वासियों के रूप में, हम “उसकी स्वभाव” को रखने के लिए बुलाये गये हैं (पद. 5)। परमेश्वर हमें नम्रता पहनने (पद. 3) और मसीह के मानसिकता को अपनाने में मदद करता है (पद. 5)। वह हमें दूसरों के जरूरतों को पूरा करने और मदद के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार रहने वाले सेवकों के रूप में जीने के लिए प्रेरित करता है। जैसे परमेश्वर हमें दूसरों को नम्रता से प्यार करने के लिए अगुआई करता है,हम उनका सेवा करने और जिन समस्याओं का वे सामना करते हैं करुणा पूर्वक समाधान ढूंढने की बेहतर स्थिति में हैं।

सच्चा धर्म

मेरे कॉलेज के दूसरे वर्ष के बाद की गर्मियों में, मेरे एक सहपाठी की अचानक से मृत्यु हो गई। मैंने उसे कुछ दिन पहले ही देखा था और वह ठीक लग रहा था। मेरे सहपाठी और मैं युवा थे और हमने सोचा था कि हम अपने जीवन के सबसे अच्छे और शक्तिशाली दिनों में हैं, और हमने जीवन भर के लिए बहन और भाई बनने का संकल्प लिया था।

लेकिन मुझे अपने सहपाठी की मृत्यु के बारे में जो सबसे ज्यादा याद है वह यह था कि मैं अपने दोस्तों को उस तरह का जीवन जीते देख रहा था जिसे प्रेरित याकूब  “शुद्ध और निर्मल भक्ति” कहते हैं (याकूब 1:27) । अपनी बिरादरी (समूह) के पुरुष,मृतक की बहन के भाई जैसे हो गए। उन्होंने उसकी शादी में भाग लिया और उसके भाई की मृत्यु के वर्षों बाद उसकी गोद भराई के लिये भी गये। एक ने उसे एक सेल फोन भी उपहार में दिया ताकि जब भी उसे कॉल करने की जरूरत हो वह उससे संपर्क कर सके।

याकूब के अनुसार, “शुद्ध और निर्मल भक्ति अनाथों और विधवाओं के संकट में उनकी सुधि लेना है” ( 27) । जबकि मेरे दोस्त की बहन शाब्दिक अर्थों में अनाथ नहीं थी, पर  अब उसका भाई नहीं था। उसके नए भाइयों ने उसके खाली स्थान  को भर दिया।

और यही वह है जो हम सभी जो यीशु में शुद्ध और निर्मल भक्ति  का अभ्यास करना चाहते हैं, कर सकते हैं — “वचन पर चलने वाले बनो” (पद 22)  जिसमें ज़रूरतमंदों की देखभाल करना भी शामिल है (2:14–17) । उस पर हमारा विश्वास हमें कमजोर लोगों की देखभाल करने के लिए प्रेरित करता है क्योंकि हम खुद को दुनिया के नकारात्मक प्रभावों से दूर रखते हैं, क्योंकि वह हमारी मदद करता है। आखिरकार, यही वह शुद्ध और निर्मल भक्ति  है जिसे परमेश्वर स्वीकार करता है।

प्रभु नाम याद रखता है

रविवार के बाद जब मैंने एक कलीसिया में एक युवा अगुवे के रूप में काम करना शुरू किया और कई युवा लोगों से मिला, तो मैंने अपनी माँ के बगल में बैठी एक लडकी से बात की। जैसे ही मैंने उस शर्मीली लड़की का मुस्कराते हुए अभिवादन किया, मैंने उसका नाम बताया और पूछा कि वह कैसी है। उसने अपना सिर उठा लिया और उसकी खूबसूरत भूरी आँखें चौड़ी हो गईं। वह भी मुस्कुराई और धीमी आवाज़ में बोली: "तुमने मेरा नाम याद रखा।" बस उस युवा लड़की को नाम से बुलाकर - एक लड़की जो वयस्कों से भरे चर्च में खुद को महत्वहीन महसूस कर सकती थी - मैंने भरोसे का रिश्ता शुरू किया। उसने देखा और मूल्यवान महसूस किया।

यशायाह 43 में, परमेश्वर भविष्यद्वक्ता यशायाह का उपयोग इस्राएलियों को एक समान संदेश देने के लिए कर रहा है: उन्हें देखा और महत्व दिया गया था। यहां तक कि जंगल में बंधुआई और समय के दौरान, परमेश्वर ने उन्हें देखा और उन्हें "नाम से" जाना (पद. 1)। वे अजनबी नहीं थे; वे उसके थे। भले ही उन्होंने त्यागा हुआ महसूस किया हो, वे "कीमती" थे, और उनका "प्रेम" उनके साथ था (पद. 4)। और इस स्मरण के साथ कि परमेश्वर उन्हें नाम से जानता था, उसने वह सब कुछ साझा किया जो वह उनके लिए करेगा, विशेषकर परीक्षा के समय में। जब वे परीक्षाओं से होकर निकले, तो वह उनके साथ रहेगा (पद 2) । क्योंकि परमेश्वर ने उनके नामों का स्मरण किया, उन्हें डरने या चिंतित होने की आवश्यकता नहीं थी।

परमेश्वर अपने प्रत्येक बच्चे के नाम जानता है — और यह शुभ सन्देश है, विशेष रूप से जब हम जीवन में गहरे, कठिन जल से गुजरते हैं।

जो अच्छा है उससे चिपके रहना

जब हम अपनी कार एक खुले मैदान के पास पार्क करते हैं और अपने घर जाने के लिए उस पार चलकर जाते हैं, लगभग हमेशा हमारे कपड़ों पर कुछ चिपचिपे कँटीला बीजकोष चिपकते हैं- खासकर सर्दियों में। ये छोटे "सहयात्री" कपड़ों, जूतों, या जो कुछ भी गुज़रता है, उससे जुड़ जाते हैं और सवार होकर उनकी अगली मंज़िल तक पहुँच जाते है। यह प्रकृति का तरीका है मेरे स्थानीय क्षेत्र और दुनिया भर में कँटीला बीजकोष को फैलाने का ।

जब मैं चिपके हुए कँटीला बीजकोष को ध्यान से हटाने की कोशिश करता हूं, मैं अक्सर उस संदेश के बारे में सोचता हूँ जो यीशु में विश्वासियों को कहता है “भलाई में लगे रहो ”(रोमियों 12:9)। जब हम दूसरों से प्रेम करने की कोशिश कर रहे होते है, तो यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालाँकि, जब पवित्र आत्मा जो कुछ भी हमारे पास अच्छा है, उसे पकड़े रहने में हमारी सहायता करता है, हम बुराई को दूर कर सकते हैं और अपने प्रेम में "निष्कपट" हो सकते हैं (12:9) क्योंकि वह हमारा मार्गदर्शन करता है।

कँटीला बीजकोष केवल हाथ से हटाने से नहीं गिरते, वे आप पर चिपके रहते हैं। और जब हम परमेश्वर की दया, करुणा और आज्ञाओं को मन में रखते हुए अपना ध्यान अच्छाई पर केंद्रित करते हैं, तब हम भी—उनके सामर्थ्य में—उन लोगों से लिपटे रह सकते हैं जिनसे हम प्रेम करते हैं। वह हमें “भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे से स्‍नेह..” रखने में मदद करता है, और दूसरों की ज़रूरतों को अपनी ज़रूरतों से पहले रखने को याद दिलाता है (पद। 10)।

हाँ, वो कँटीला बीजकोष चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन वे मुझे दूसरों से प्यार में पकड़े रहने और परमेश्वर की सामर्थ्य के द्वारा “जो अच्छा है” उसे कसकर पकड़े रहने के लिए याद दिलाते हैं (पद 9; फिलिप्पियों 4:8-9 भी देखें)।

एक गर्म भोजन

बारबेक्यू चिकन, हरी बीन्स, पास्ता, ब्रेड l अक्टूबर के एक ठन्डे दिन पर, लगभग चौवन(54) बेघर लोगों ने जीवन के चौवन वर्ष का जश्न मनाने वाली एक स्त्री से यह गरमा-गर्म भोजन प्राप्त किया l उस स्त्री ने अपने जन्मदिन पर अपने साथियों के साथ एक रेस्टोरेंट में सामान्य तौर पर जन्मदिन का भोजन न खाकर उसके स्थान पर भोजन बनाकर शिकागो की सड़कों पर के लोगों के लिए परोसा l सोशल मीडिया पर, उसने दूसरों को जन्मदिन के उपहार के रूप में दयालुता का एक अनियत कार्य करने को कहा l 

यह कहानी मुझे मत्ती 25 में यीशु के शब्दों की याद दिलाती है: मैं तुम से सच कहता हूँ कि तुमने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों (और बहनों) में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया” (पद.40) l यह घोषणा करने के बाद कि उसकी भेड़ें उस अनंत राज्य में अपना मीरास पाने के लिए आमंत्रित की जाएंगी, उसने ये शब्द कहे (पद.33,34) l उस वक्त, यीशु यह मान लेगा कि यही वे लोग हैं जिन्होंने उसे भोजन खिलाया और उसे कपडे पहनाए क्योंकि वे उसमें अपना असली विश्वास रखे थे (उन अहंकारी धार्मिक लोगों के विपरीत जो उसपर विश्वास नहीं करते थे (देखें 26:3-5) l यद्यपि “धर्मी लोग” पूछेंगे कि कब उन्होंने यीशु को भोजन खिलाया और उसे कपड़े पहनाए (25:37), वह उन्हें आश्वस्त करेगा कि जो उन्होंने दूसरों के लिए किया वही उसके लिए भी किया था (पद.40) l

भूखे को खाना खिलाना केवल एक तरीका है जिससे परमेश्वर अपने लोगों की देखभाल करने में हमारी सहायता करता है— जिससे की हम उसके लिए अपना प्रेम और उसके साथ अपना सम्बन्ध दर्शा सकें l आज हमें दूसरों की ज़रूरतों को पूरा करने में वह हमारी मदद करे l 

दर्पण परिक्षण

आत्म-पहचान परीक्षण करने वाले मनोवैज्ञानिकों ने बच्चों से पूछा "आईने में कौन है?”। अठारह महीने या उससे कम उम्र में, बच्चे आमतौर पर खुद को आईने में छवि के साथ नहीं जोड़ते हैं। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे समझने लगते हैं कि वे खुद को देख रहे हैं। आत्म-पहचान स्वस्थ विकास और परिपक्वता का एक महत्वपूर्ण चिह्न है।

यीशु में विश्वासियों के विकास के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। याकूब एक दर्पण पहचान परीक्षण की रूपरेखा तैयार करता है। दर्पण परमेश्वर की ओर से “सत्य के वचन” है(याकूब 1:18)। जब हम पवित्र शास्त्र पढ़ते हैं, तो हम क्या देखते हैं? जब वे प्रेम और नम्रता का वर्णन करते हैं तो क्या हम स्वयं को पहचानते हैं? क्या हम अपने कार्यों को देखते हैं जब हम पढ़ते हैं कि परमेश्वर हमें क्या करने की आज्ञा देता है? जब हम अपने दिलों में देखते हैं और अपने कार्यों का परीक्षण करते हैं, तो पवित्रशास्त्र हमें यह पहचानने में मदद कर सकता है कि क्या हमारे कार्य हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हैं या यदि हमें पश्चाताप करने और परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

याकूब हमें चेतावनी देता है कि हम न केवल पवित्रशास्त्र को पढ़ें और फिर मुड़ जाए  “जो अपने आप को धोखा देते है” (पद 22), उसे भूलकर जो हमने ग्रहण किया है। बाइबल हमें परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार बुद्धिमानी से जीने का नक्शा प्रदान करती है। जब हम इसे पढ़ते हैं, उस पर मनन करते हैं, और इसे पचाते हैं, तो हम उन्हें वह अपने हृदय में झाँकने  वाली आंखें और आवश्यक परिवर्तन करने की शक्ति देने के लिए कह सकते हैं।

रोशनी को चालू रहने दे

एक होटल श्रृंखला के विज्ञापन में एक छोटी सी इमारत एक अंधेरी रात के बीच खड़ी थी। आसपास और कुछ नहीं था। दृश्य में एकमात्र प्रकाश इमारत के द्वारमण्डप पर दरवाजे के पास एक छोटे से दीपक से आ रहा था। एक आगंतुक के लिए सीढ़ियों पर चलने और इमारत में प्रवेश करने के लिए बल्ब से पर्याप्त रोशनी आ रही थी। विज्ञापन इस वाक्यांश के साथ समाप्त हुआ, "हम आपके लिए रौशनी को चालू छोड़ रहे है।"

एक द्वारमण्डप की रोशनी एक स्वागत चिन्ह के समान है, जो थके हुए यात्रियों को याद दिलाती है कि एक आरामदायक जगह अभी भी खुली है जहाँ वे रुक सकते हैं और आराम कर सकते हैं। प्रकाश आने-जाने वालों को अंदर आने और अंधेरे, थके हुए सफर से बचने के लिए आमंत्रित करता है।

यीशु कहते हैं कि जो लोग उस पर विश्वास करते हैं उनका जीवन एक स्वागत योग्य प्रकाश के सदृश होना चाहिए। उसने अपने अनुयायियों से कहा, “तुम जगत की ज्योति हो। पहाड़ी पर बसा हुआ नगर छिप नहीं सकता" (मत्ती ५:१४)। विश्वासियों के रूप में, हमें एक अंधेरी दुनिया को रोशन करना है।

जैसा कि वह हमें निर्देश और सामर्थ देता है, "[अन्य] [हमारे] अच्छे कामों को देख सकते हैं और [हमारे] पिता को स्वर्ग में महिमा कर सकते हैं" (व. १६)। और जैसे ही हम अपनी रौशनी को चालू रखते है, तो वे संसार के एक सच्चे प्रकाश—यीशु (यूहन्ना ८:१२) के बारे में अधिक जानने के लिए हमारे पास आने के लिए स्वागत महसूस करेंगे। थके हुए और अंधेरी दुनिया में, उसका प्रकाश हमेशा बना रहता है।

क्या आपने अपनी रोशनी छोड़ दी है? जैसे यीशु आज आपके द्वारा से चमकता है, अन्य लोग भी देख सकें और उसके प्रकाश को प्रकाशित करना शुरू कर सकें।

कम भार के साथ यात्रा करना

जेम्स नाम के एक व्यक्ति ने एक बाइक में अमेरिका के पश्चिमी तट पर 2011 किलोमीटर की एक साहसिक यात्रा की। मेरा एक दोस्त उस महत्वाकांक्षी बाइकर से उसके शुरुआती बिंदु से 1496 किलोमीटर दूर मिला। यह जानने के बाद कि किसी ने हाल ही में जेम्स के कैम्प के कपड़े चुराये हैं, मेरे दोस्त ने उसे कंबल और स्वेटर देने की पेशकश की, लेकिन जेम्स ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्होंने गर्म जलवायु में दक्षिण की यात्रा की, उन्हें अपनी वस्तुओं को छोड़ने की जरूरत थी। और वह अपने गंतव्य के जितना करीब होता गया, उतना ही थक जाता था, इसलिए उसे अपने भार को कम करने की जरूरत थी।

जेम्स का अहसास स्मार्ट था। यह उस बात का प्रतिबिंब है जो इब्रानियों का लेखक भी कह रहा है। जब हम जीवन में अपनी यात्रा जारी रखते हैं, तो हमें हर उस चीज को फेंकना है जो हमें रोकती है “तो आओ, हर एक रोकनेवाली वस्तु और उलझानेवाले पाप को दूर करके, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।”  (12:1)। हमें आगे बढ़ने के लिये कम भार के साथ यात्रा करने की आवश्यकता है।

यीशु में विश्वासियों के रूप में, इस दौड़ को दौड़ने के लिए धीरज (पद 1) की आवश्यकता होती है। और यह सुनिश्चित करने का कि हम चलते रहें, एक तरीका है,  क्षमा न करने,  तुच्छता, और अन्य पापों के भार से मुक्त होना है जो हमें बाधित करेंगे।

यीशु की मदद के बिना हम कम भार की यात्रा नहीं कर सकते और इस दौड़ को अच्छी तरह से नहीं दौड सकते। आइए हम विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले की ओर देखें ताकि हम थके हुए न हों और हियाव न छोड़ें (पद 2–3)।

 

परमेश्वर की चाल

मुझे स्क्रैबल का एक अच्छा खेल पसंद है। एक विशेष खेल के बाद, मेरे दोस्तों ने एक चाल का नाम मेरे नाम पर रखा — इसे "कटारा" कहा। मैं पूरे खेल में पीछे छूट रही थी, लेकिन इसके अंत में - बैग में कोई गोटी (टाइल) नहीं बची थी - मैंने सात-अक्षर का शब्द बनाया। इसका मतलब था कि खेल खत्म हो गया था, और मुझे अपने सभी विरोधियों के बची हुई गोटियों (टाइलों) से पचास बोनस अंक और साथ ही सभी अंक प्राप्त हुए, जिससे मैं अंतिम स्थान से पहले स्थान पर पहुँच गयी। अब जब भी हम खेलते हैं और कोई पीछे चल रहा होता है, तो वे याद करते हैं कि क्या हुआ था और एक "कटारा" की उम्मीद रखते हैं।

अतीत में जो हुआ उसे याद करने से हमारी आत्माएं उभरती हैं और हमें आशा मिलती है। और ठीक यही इस्राएलियों ने फसह मनाते समय किया। फसह स्मरण कराता है कि परमेश्वर ने इस्राएलियों के लिए क्या किया था जब वे मिस्र में थे, फिरौन और उसके दल द्वारा उत्पीड़ित थे (निर्गमन 1:6-14)। परमेश्वर की दोहाई देने के बाद, उसने लोगों को शक्तिशाली तरीके से छुड़ाया। उसने उनसे कहा कि वे अपने दरवाजे की चौखट पर लहू लगा दें ताकि मृत्यु का दूत उनके पहिलौठे लोगों और जानवरों को "पार" कर दे (12:12-13)। तब वें मृत्यु से सुरक्षित रखे जाएंगे।

सदियों बाद, यीशु में विश्वासी नियमित रूप से प्रभुभोज में सहभागी होते हुए क्रूस पर उसके बलिदान को याद करते हुए — हमे वो प्रदान किया गया जो पाप और मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए आवश्यक है (1 कुरिन्थियों 11:23-26)। अतीत में किये परमेश्वर के प्रेमपूर्ण कार्यों को याद करना हमें आज के लिए आशा देता है।