चरवाहे की आवाज को पहचानना
जब मैं अमेरिका के एक खेत में रहने वाला लड़का था, तो मैं अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ घूमते हुए शानदार दोपहरें बिताता था। हम जंगलों में घूमते, घोड़ों की सवारी करते, दौड़ के मैदान में जाते और खलिहान में जाकर पशुपालक को घोड़ों पर काम करते देखते। लेकिन जब भी मैंने अपने पिताजी की सीटी सुनी— वह स्पष्ट ध्वनि हवा और अन्य सभी गड़गड़ाहटों को चीरती हुई— मैं सब काम छोड़ कर घर की ओर चला जाता था। संकेत अचूक था और मैं जानता था कि मेरे पिता मुझे बुला रहे हैं। दशकों बाद, मैं आज भी उस सीटी को पहचान लूँगा।
यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि वह चरवाहा था, और वे भेड़ें थीं। "भेड़ें उसका[चरवाहा] शब्द सुनती हैं", उन्होंने कहा," वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है।" (यूहन्ना 10:3) ऐसे समय में जब कई धर्मगुरु और शिक्षकों ने अपने अधिकार का दावा करके मसीह के शिष्यों को भ्रमित करने की कोशिश की, उन्होंने घोषणा की कि उनकी प्रेमपूर्ण आवाज अभी भी स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है, अन्य सभी से अधिक स्पष्ट। "भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं, क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं।"(पद 4)
आइए हम यीशु की आवाज़ सुनते समय सावधान रहें और इसे मूर्खतापूर्ण ढंग से अनदेखा करने से बचें, क्योंकि सच तो यह है: चरवाहा स्पष्ट बोलता है, और उसकी भेड़ें उसकी आवाज़ सुनती हैं। शायद बाइबल के कोई पद के माध्यम से, किसी विश्वासी मित्र के शब्दों के माध्यम से, या आत्मा की प्रेरणा के माध्यम से—यीशु बात करता हैं, और हम सुनते हैं।

बर्बादी का सर्वनाश
“कल चिड़िया के बच्चे उड़ निकलेंगे!” हमारे आंगन में टांगी गई एक टोकरी में चिड़िया के परिवार के प्रगति को देख मेरी पत्नी केरी, बहुत ही उत्सुक थी। जब चिड़िया अपने बच्चों के लिए भोजन लेकर आती है तो मेरी पत्नी प्रत्येक दिन उसकी तस्वीरें खींचती है।
अगली सुबह मेरी पत्नी चिड़िया के परिवार को देखने के लिए जल्दी उठी। जब उसने चिड़िया के बच्चों को देखने के लिए घोंसले पर से हरियाली हटाया तो चिड़िया के बच्चों की आंखों की बजाए उसे साँप की आंखें दिखाई पड़ी। सांप दीवार पर से होता हुआ घोंसले में गया और चिड़िया के सब बच्चे खा गया।
यह देख केरी का हृदय टूट गया। मैं शहर से बाहर था तो उसने एक मित्र को बुलाकर सांप को बाहर निकलवाया। परंतु क्षति हो चुकी थी।
वचन एक और साँप के बारे में बताता है जिसने अपने मार्ग में विनाश छोड़ दिया। अदन की वाटिका में साँप ने उस पेड़ के बारे में हव्वा को धोखा दिया जिसके फल खाने के प्रति परमेश्वर ने उसे चेतावनी दी थी। “तुम निश्चय न मरोगे!" उसने झूठ बोला “वरन् परमेश्वर आप जानता है कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आँखें खुल जाएँगी और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।”(उत्पत्ति 3:4-5)।
हव्वा और आदम की परमेश्वर के प्रति अवज्ञा के परिणामस्वरूप पाप और मृत्यु दुनिया में आया, और "पुराने साँप, जो शैतान है" द्वारा दिया गया धोखा आज भी जारी है (प्रकाशितवाक्य 20:2)। लेकिन यीशु "शैतान के कामों का नाश" करने के लिए आये (1 यूहन्ना 3:8), और उसके माध्यम से हमारे परमेश्वर के साथ रिश्ता पुनर्स्थापित होता है। एक दिन, वह "सब कुछ नया" कर देगा (प्रकाशितवाक्य 21:5)।

प्रयत्नशील पिज़्ज़ा
12 वर्ष की आयु में इब्राहिम पश्चिमी अफ्रीका से इटली में रहने के लिए पहुंचा। उस समय उसे वहां की भाषा का एक शब्द भी नहीं आता था वह अटक अटक कर बोलता जिसकी वजह से उसे आवास-विरोधी बातें सुननी पड़ती थीं। इन सब बातों ने उस 20 वर्षीय जवान का हौसला न तोड़ा और वह कठिन परिश्रम करके इटली के ट्रेनटो शहर में एक पिज़्ज़ा दुकान खोलने पाया। उनके छोटे से व्यवसाय ने संदेह करने वालों का दिल जीत लिया और उसे दुनिया के शीर्ष पचास पिज़्ज़ेरिया में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
तब उनकी आशा इतालवी सड़कों पर भूखे बच्चों को खाना खिलाने में मदद करने की थी। इसलिए उन्होंने वहा के परंपरा का विस्तार करके "सहानुभूति पिज्जा” शुरू की—जहां ग्राहक जरूरतमंद लोगों के लिए अतिरिक्त कॉफी (कैफ़े सोस्पेसो) — पिज़्ज़ा (पिज्जा सोस्पेसा) खरीदते हैं। उन्होंने आप्रवासी बच्चों से पूर्वाग्रह से परे देखने और हार न मानने का भी आग्रह किया।
इस तरह की दृढ़ता गलातियों को सभी को लगातार अच्छा करने की पौलुस की सीख की याद दिलाती है। "हम भले काम करने में साहस न छोड़ें, क्योंकि यदि हम ढीले न हों तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।" (गलातियों 6:9)। आगे लिखते है, "इसलिये जहाँ तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें, विशेष करके विश्वासी भाइयों के साथ। (पद10)।
इब्राहिम, एक परदेसी था जिसने लोगों के तिरस्कार और भाषा न आने के तनाव के बावजूद के बावजूद भी भले काम करने का अवसर बनाया।। भोजन सहनशीलता और समझ की ओर ले जाने वाला "एक पुल" बन गया।। ऐसी दृढ़ता से प्रेरित होकर, हम भी अच्छा करने के अवसरों की तलाश कर सकते हैं। तब, प्रभु को महिमा मिलती है क्योंकि वह हमारे निरंतर प्रयास के माध्यम से कार्य करता है।

परमेश्वर द्वारा घर में स्वागत
शर्मन स्मिथ ने जब डेलैंड मैककुल्लौघ को मियामी यूनिवर्सिटी, अमेरिका के लिए खेलने का चयन किया तो वह उससे बहुत प्रेम करने लगे और उसके लिए एक पिता समान बन गए जो डेलैंड के पास न था। डेलैंड शर्मन का बहुत बड़ा प्रशंसक था और वह उसकी तरह ही बनना चाहता था । एक दशक के बाद जब डेलैंड को अपनी जन्म देने वाली माँ का पता चला तो उसकी मां ने उसे एक खबर सुना कर चौका दिया की, "तुम्हारे पिता का नाम शर्मन स्मिथ है" हां यह वही शर्मन स्मिथ । कोच शर्मन स्मिथ यह जानकर चौक गए कि उनके पास एक पुत्र है, और डेलैंड भी यह जानकर हैरान हो गया कि जिसे वह अपने पिता के समान देखता आया था वह वास्तव में उसका पिता ही था!
अगली बार जब मिले तो शर्मन डेलैंड को गले लगाते हुए कहा, "मेरे बेटे" । डेलैंड ने ऐसा कभी किसी पिता से नहीं सुना था वह जानता था कि शर्मन किस स्थान से खड़े होकर कह रहे थे, "मैं तुझ पर गर्व करता हूं, यह मेरा पुत्र है" और वह आनंद से भर गया।
हमें भी अपने स्वर्गीय पिता के सिद्ध प्रेम को जानने के बाद आनंद से भर जाना चाहिए । यूहन्ना लिखता है, "देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएँ!” (1 यूहन्ना 3:1) हम डेलैंड की तरह स्तब्ध हैं, जिसने यह सोचने की हिम्मत नहीं की कि शर्मन जैसा कोई व्यक्ति उसका पिता हो सकता है। क्या यह सचमुच सच है? यूहन्ना जोर देकर कहते हैं, हाँ,"हम हैं भी" (पद 1)।
यदि तुम यीशु पर विश्वास करते हो तो उसके पिता तुम्हारे भी पिता है । आप अनाथ और दुनिया में अकेला महसूस कर सकते हैं। परंतु सच्चाई यह है कि तुम्हारा एक पिता है और वही एकमात्र सिद्ध है और वह आपको अपना बच्चा कहने में गर्व महसूस करता है।

परमेश्वर का छुटकारा
एक करुणामय स्वयंसेवक को उसके बहादुरी के कार्य हेतु उसे एक “संरक्षक दूत” (guardian angel) कहके संबोधित किया गया। जेक मन्ना अपने काम के स्थान पर सोलर पैनल लगा रहा था जब वह एक लापता पांच वर्षीय लड़की को ढूंढने के लिए तत्काल खोज में शामिल हो गया। जब पड़ोसियों ने अपनी गराजों और आंगनों में ढूंढा । मन्ना भी लड़की को ढूंढने के लिए एक नजदीकी मार्ग पर सीधा निकल गया जब वह एक जंगली क्षेत्र पर पहुंचा तो उसने वहां पर लड़की को कमर तक कीचड़ में फंसे हुए देखा उसने बड़ी ही सावधानी से उस गंदी दलदल से उसे बाहर निकाला और उसे किसी भी क्षति के बिना उसकी धन्यवादी माँ को लौटा दिया।
उस छोटी बच्ची की तरह, दाऊद ने भी छुटकारे का अनुभव किया। भजनकार भी अपनी पीड़ा में परमेश्वर को पुकार कर उसकी करुणा के लिए "धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा की" (भजन संहिता 40:1)। और परमेश्वर ने किया, उसने उसकी पुकार की ओर अपनी दृष्टि की और सहायता देते हुए उसे उस कीचड़ रूपी परिस्थिति से बाहर निकाला (पद 2)—दाऊद के जीवन को स्थिर किया। बीते समय की दलदल से जब परमेश्वर ने उसे बचा निकाला तब उसके हृदय में स्तुति के भजन गाने लगा, जिससे भविष्य की परिस्थितियों में परमेश्वर को अपना भरोसा बनाए और अपनी कहानी दूसरों के साथ साझा कर सके (पद 3-4)।
जब हम स्वयं को जीवन की चुनौतियों जैसे आर्थिक मंदी, विवाहित परेशानियां और अयोग्य महसूस करने जैसी परिस्थितियों से घिरा हुआ पाते हैं, तो हम परमेश्वर की ओर अपनी आवाज को उठाएं और बड़े धीरज के साथ उसके प्रत्युत्तर की अपेक्षा करें (पद 1)। वह वहाँ है, हमारी ज़रूरत के समय में हमारी मदद करने और हमें खड़े होने के लिए एक स्थाई जगह देने के लिए तैयार है।।