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प्रोत्साहन का उपहार

“आपकी मधुमक्खियाँ जानेवाली हैं!” मेरी पत्नी मुझे बतायी जो कोई भी मधुमक्खी पालक सुनना पसंद नहीं करता l मैं बाहर जाकर हज़ारों मधुमक्खियों को अपने छत्ते से निकलकर ऊँचे चीड़ पर जाते देखा जो फिर लौटने वाली नहीं थीं l

मैंने संकेत थोड़ी देर से पढ़ी कि मधुमक्खियाँ झुण्ड बनाकर छत्ता छोड़ने वाली थीं; आंधी ने मेरे निरीक्षणों को बाधित कर दिया था l जिस सुबह तूफ़ान थमा, मधुमक्खियाँ जा चुकी थीं l छत्ता नया और स्वस्थ था, और मधुमक्खियाँ वास्तव में एक नयी शुरुआत करने के लिए छत्ते को विभाजित कर रही थीं l एक अनुभवी मधुमक्खी पालक ने मेरी निराशा को देखकर ख़ुशी से बोला, “अपने आप पर कठोर मत बनो l” “यह किसी के साथ भी हो सकता है!”

प्रोत्साहन एक सुखद उपहार है l जब दाऊद निराश हुआ, क्योंकि शाऊल उसको मारने हेतु उसका पीछा कर रहा था, तब शाऊल का पुत्र योनातान ने दाऊद को उत्साहित किया l योनातान ने कहा, “मत डर; क्योंकि तू मेरे पिता शाऊल के हाथ में न पड़ेगा; और तू इस्राएल का राजा होगा, और मैं तेरे नीचे हूँगा; और इस बात को मेरा पिता शाऊल जानता है” (1 शमुएल 23:17) l

ये आश्चर्यजनक रूप से निःस्वार्थ शब्द हैं जो सिंहासन के सीध में खड़े किसी व्यक्ति के हैं l यह संभव है कि योनातान ने पहचाना कि परमेश्वर दाऊद के साथ था, इसलिए उसने विश्वास के विनम्र हृदय से बात की l

हमारे चारों ओर ऐसे लोग हैं जिन्हें उत्साहवर्धन चाहिए l परमेश्वर उनकी सहायता करने में हमारी मदद करेगा जब हम उसके सामने स्वयं को दीन करते हैं और उससे हमारे द्वारा उन्हें प्रेम करने के लिए कहते हैं l

खुले स्थान ढूँढना

अपनी पुस्तक मार्जिन(Margin) में, डॉ. रिचर्ड स्वेन्सन लिखते हैं, “हमारे पास सांस लेने के लिए थोड़ी जगह होनी चाहिए l हमें सोचने के लिए स्वतंत्रता और चंगा करने के लिए अनुमति चाहिए l हमारे रिश्ते वेग/गति से भूखे मर रहे हैं . . . हमारे बच्चे धरती पर घायल हैं, हमारे उच्च गति वाले नेक इरादों से कुचले जा रहे हैं l क्या ईश्वर अब थकान का समर्थक है? क्या वह अब लोगों को शांत जल के पास नहीं ले जाता? अतीत के उन पूर्ण खुले स्थानों को किसने लूटा, और हम उन्हें कैसे वापस ला सकते हैं?” स्वेन्सन कहते हैं कि हमें जीवन में कुछ शांत, उपजाऊ “भूमि” की ज़रूरत है जहाँ हम ईश्वर में विश्राम पाएँ और उससे मिल सकें l

क्या वह गूंजता है? खुली जगहों की तलाश करना मूसा अच्छी तरह से जानता था l “हठीले” लोगों की अगुवाई करते हुए (निर्गमन 33:5), वह अक्सर परमेश्वर की उपस्थिति में विश्राम और मार्गदर्शन के लिए अलग जाता था l अपने “मिलापवाले तम्बू” (पद.7) में “यहोवा मूसा से इस प्रकार आमने-सामने बातें करता था, जिस प्रकार कोई अपने भाई से” (पद.11) l यीशु भी “जंगलों में अलग जाकर प्रार्थना किया करता था” (लूका 5:16) l दोनों ने पिता के साथ अकेले समय बिताने के महत्व को समझा l

हमें भी अपने जीवन में मार्जिन/गुंजाइश बनाना चाहिए, विश्राम में और ईश्वर की उपस्थिति में बिताए कुछ अधिक और खुले स्थान l उसके साथ समय बिताने से हमें बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी—हमारे जीवन में स्वस्थ सीमाएं और हदें ऐसी होंगी ताकि हमारे पास उसे और दूसरों को अच्छी तरह से प्यार करने के लिए बैंडविड्थ/bandwidth उपलब्ध हो l

आइए आज हम खुले स्थानों में ईश्वर की खोज करें l

मसीह की सामर्थ्य

2013 में, लगभग छह सौ प्रत्यक्ष दर्शकों ने कलाबाज निक वॉलेंडा को ग्रैंड कैनियन(Grand Canyon) के पास 1500 फीट चौड़ी खाई के ऊपर एक तंग रस्से पर चलते हुए देखा l उसने 2 इंच मोटी स्टील के रस्से पर कदम रखकर यीशु को धन्यवाद दिया जब उसके मुख्य कैमरा ने नीचे घाटी की ओर इशारा किया l उसने प्रार्थना और यीशु की स्तुति करते हुए रस्से पर इतनी शांति से चला मानो वह फूटपाथ पर टहल रहा हो l हवा के विरुद्ध होने पर, वह रुक कर झुक गया l वह उठा और “उस रस्से को शांत करने” के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हुए अपना संतुलन वापस प्राप्त किया l उस तनी रस्सी पर हर कदम के साथ, उसने मसीह की शक्ति पर अपने भरोसे को तब और अब सुनने वाले हर किसी के सामने प्रदर्शित किया, जैसा कि वीडियों दुनिया भर में देखा जाता है l

जब तूफ़ान ने गलील के समुद्र में शिष्यों को लहरों से घेर लिए, तो सहायता के लिए उनकी याचनाओं में डर दिखाई दिया (मरकुस 4:35-38) l यीशु द्वारा तूफ़ान को शांत करने के बाद, वे जान गए कि वह हवाओं और बाकी सब चीजों को नियंत्रित करता है (पद.39-42) l धीरे-धीरे उस पर उनका भरोसा बढ़ा l उनके व्यक्तिगत अनुभव दूसरों को यीशु की गहरी उपलब्धता और असाधारण ताकत को पहचानने में मदद कर सकते हैं l

जीवन के तूफानों का अनुभव करते समय या दुःख की गहरी घाटियों पर फैले भरोसे की तनी रस्सी पर चलते समय, हम मसीह की शक्ति में विश्वास का प्रदर्शन कर सकते हैं l परमेश्वर हमारे विश्वास-कदम का उपयोग दूसरों को उसमें आशा रखने के लिए प्रेरित करने के लिए करेगा l

आराधना के त्यौहार

किसी बड़े कार्यक्रम में भाग लेना आपको आश्चर्यजनक तरीके से बदल सकता है l यूके और यूएस में अनेक दिनों की सभाओं में 1,200 से अधिक लोगों के साथ बातचीत करने के बाद, शोधकर्ता डेनियल युद्किन और उनके सहयोगियों ने सीखा कि बड़े त्यौहार हमारे नैतिक सीमा को प्रभावित कर सकते हैं और दूसरों के साथ संसाधन साझा करने की हमारी इच्छा को भी प्रभावित कर सकते हैं l उनके शोध में पाया गया कि 63 फीसदी उपस्थित लोगों को त्यौहार में “परिवर्तनकारी” अनुभव मिला, जिसने उन्हें मानवता से अधिक जुड़ा हुआ और मित्रों, परिवार और पूर्ण अजनबियों के प्रति भी अधिक उदार महसूस कराया l

जब हम दूसरों के साथ परमेश्वर की आराधना करने के लिए एकत्रित होते हैं, हालाँकि, हम एक लौकिक त्यौहार के मात्र सामाजिक “रूपांतरण” से अधिक अनुभव कर सकते हैं; हम स्वयं ईश्वर के साथ बातचीत करते हैं l परमेश्वर के लोगों ने बेशक परमेश्वर के साथ उस सम्बन्ध का अनुभव किया जब वे प्राचीन काल में पूरे वर्ष अपने पवित्र पर्वों के लिए यरूशलेम में एकत्रित होते थे l उन्होंने—बगैर आधुनिक सुविधाओं के—अखमीरी रोटी का पर्व, सप्ताहों का पर्व, और झोपड़ियों के पर्व के लिए मंदिर में उपस्थित होने के लिए वर्ष में तीन बार यात्राएँ की (व्यवस्थाविवरण 16:16) l ये समारोह परिवार, सेवकों, विदेशियों, और दूसरों के साथ “परमेश्वर यहोवा के सामने” (पद.11) पवित्र स्मरण, उपासना, और आनंद करने के समय थे l  

आइए हम दूसरों के साथ आराधना के लिए एकत्रित हों ताकि परस्पर सहायता कर सकें ताकि उसका आनंद लेते रहें और उसकी विश्वासयोग्यता पर भरोसा रखें l

ब्राण्ड एम्बेसडर से कहीं अधिक

इन्टरनेट के युग में प्रतियोगिता भयंकर हो गयी है l तेजी से, कंपनियाँ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए रचनात्मक तरीके विकसित कर रही हैं l जैसे सुबारू वाहन ले लें l सुबारू के मालिक प्रसिद्ध रूप से भरोसेमंद हैं, इसलिए कंपनी ने वाहनों के “ब्राण्ड एम्बेसडर” बनने के लिए “सबबी सुपरफैन/Subbie superfans(उपठेकेदारों)” को आमंत्रित किया है l

कंपनी की वेबसाइट कहती है, “सुबारू एम्बेसडर ऊर्जावान व्यक्तियों का एक विशेष समूह है जो सुबारू के विषय बात फैलाने और ब्राण्ड के भविष्य को संवारने में सहायता करने के लिए अपने उत्साह और जोश को स्वेच्छा से रखते हैं l” कंपनी चाहती है कि सुबारू का स्वामित्व लोगों की पहचान का हिस्सा बन जाए—ऐसा कुछ जिसके बारे में वे इतने उत्साही हैं कि साझा करने से चूकते नहीं l  

2 कुरिन्थियों 5 में, पौलुस एक अलग “राजदूत” कार्यक्रम का वर्णन करता है, जो दूसरों को यीशु का अनुसरण करने के लिए आमंत्रित करता है l “इसलिए प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं” (पद.11) l पौलुस आगे कहता है “उस ने मेल-मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है l इसलिए, हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा विनती कर रहा है l हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं कि परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप कर लो” (पद.19-20) l

कई उत्पाद हमें गहरी ज़रूरतों को पूरा करने, ख़ुशी, पूर्णता, और उद्देश्य की भावना देने की प्रतिज्ञा करते हैं l लेकिन केवल एक सन्देश—यीशु में विश्वासियों के रूप में हमें सौंपा गया मेल-मिलाप का सन्देश—वास्तव में अच्छी खबर है l और हमें हताश संसार को वह सन्देश देने का सौभाग्य मिला है l