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क्षमा और भूलना

 

जिल प्राइस हाइपरथाइमेसिया की स्थिति के साथ पैदा हुई थी: अतीत में उसके साथ हुई हर घटना को असाधारण विस्तार से याद रखने की क्षमता। वह अपने दिमाग में अपने जीवनकाल में हुई किसी भी घटना की सटीक घटना को दोहरा सकती है।

टीवी शो अनफॉरगेटेबल, हाइपरथाइमेसिया से पीड़ित एक महिला पुलिस अधिकारी पर आधारित था - जो उसे सामान्य ज्ञान के खेल और अपराधों को सुलझाने में बहुत मदद करता है। हालाँकि, जिल प्राइस के लिए यह स्थिति इतनी मज़ेदार नहीं है। वह जीवन के उन पलों को नहीं भूल सकती जब उसकी आलोचना की गई थी, नुकसान का अनुभव किया था, या उसने कुछ ऐसा किया था जिसका उसे बहुत पछतावा था। वह अपने दिमाग में उन दृश्यों को बार-बार दोहराती है। 

हमारा परमेश्वर सर्वज्ञानी है (संभवतः एक प्रकार का ईश्वरीय हाइपरथिमेसिया) : बाइबल हमें बताती है कि उसके समझ की कोई सीमा नहीं है। और फिर भी हम यशायाह में एक अत्यंत आश्वस्त करने वाली बात पाते हैं : "मैं वही हूँ जो . . . तेरे अपराधों को मिटा देता हूँ और तेरे पापों को स्मरण न करूँगा। इब्रानियों की पुस्तक इसको पुष्ट करता है: “हम यीशु मसीह . . . के द्वारा पवित्र किए गए हैं . . . [और हमारे] . . . पापों को और . . . अधर्म के कामों को [परमेश्वर] फिर कभी स्मरण न [करेगा]” (इब्रानियों 10:10, 17)।  

जब हम अपने पापों को परमेश्वर के सामने स्वीकार करते हैं, हम उन्हें अपने मन में बार-बार दोहराना बंद कर सकते हैं। हमें उन्हें भूलना चाहिए, जैसा वह करता है: “अब बीती हुई घटनाओं का स्मरण मत करो, न प्राचीनकाल की बातों पर मन लगाओ” (यशायाह 43:18) l अपने अपार प्रेम में, परमेश्वर हमारे विरुद्ध हमारे पापों को याद नहीं रखना चाहता। आइए इसे याद रखें।

—केनेथ पीटरसन

दाग़ से सीखना

फेय ने अपने पेट पर निशानों को छुआ। उसने एसोफैजियल-पेट कैंसर को हटाने के लिए एक और सर्जरी करवाई थी। इस बार डॉक्टरों ने उसके पेट का एक हिस्सा निकाला था और एक दांतेदार निशान छोड़ दिया था, जिससे उनके काम की हद का पता चलता है। उसने अपने पति से कहा, "निशान या तो कैंसर के दर्द या उपचार की शुरुआत को प्रदर्शित करता हैं । मैं अपने निशानों को उपचार के प्रतीक के रूप में चुनती हूँ।"

याकूब को परमेश्वर के साथ पूरी रात कुश्ती लड़ने के बाद इसी तरह के विकल्प का सामना करना पड़ा। ईश्वरीय हमलावर ने याकूब के कूल्हे को मोड़ दिया, जिससे याकूब थक गया और उसे लंगड़ाहट महसूस होने लगी। महीनों बाद, जब याकूब ने अपने निर्बल कूल्हे की मालिश की, तो मुझे आश्चर्य हुआ कि उसने क्या सोचा? क्या वह अपने उन वर्षों के धोखे के लिए पछता रहा था, जिसने उसे इस दुर्भाग्यपूर्ण युद्ध के लिए मजबूर किया?  

ईश्वरीय दूत ने उससे सत्य उगलवा लिया था, और उसे तब तक आशीष देने से इनकार किया जब तक याकूब ने उसे स्वीकार नहीं किया कि वह कौन है। उसने यह स्वीकार किया कि वह याकूब था, "एड़ी पकड़ने वाला" (उत्पत्ति 25:26 देखें)। उसने लाभ प्राप्त करने के लिए अपने भाई एसाव और ससुर लाबान के साथ छल किया और उन्हें धोखा दिया। ईश्वरीय मल्लयोद्धा ने कहा कि याकूब का नया नाम "इस्राएल होगा, क्योंकि तू परमेश्‍वर से और मनुष्यों से भी युद्ध करके प्रबल हुआ है।" (पद.28)।   

याकूब का लंगड़ाना उसके धोखे के पुराने जीवन की मृत्यु, और परमेश्वर के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत को दर्शाता है। याकूब का अंत और इस्राएल का आरंभ। उसके लंगड़ाहट ने उसे परमेश्वर पर निर्भर होने के लिए प्रेरित किया, जो अब उसके अंदर और उसके द्वारा शक्तिशाली रूप से आगे बढ़ रहा था।

—माइक विट्मर

 

मेरा प्रभु निकट है

मनीला में वॉयस (संगीत) प्रशिक्षक लूर्डेस तीस साल से ज़्यादा समय से छात्रों को आमने-सामने पढ़ाती आ रही हैं। जब उनसे ऑनलाइन क्लास लेने के लिए कहा गया, तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने बताया, "मैं कंप्यूटर चलाने में अच्छी नहीं हूँ।" "मेरा लैपटॉप पुराना है और मैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफ़ॉर्म से परिचित नहीं हूँ।" हालाँकि कुछ लोगों को यह छोटी सी बात लग सकती है, लेकिन यह उनके लिए बहुत तनावपूर्ण था।

उन्होंने कहा, "मैं अकेली रहती हूँ, इसलिए मेरी मदद करने वाला कोई नहीं है।" "मुझे चिंता है कि मेरे छात्र पढ़ाई छोड़ देंगे और मुझे आय की ज़रूरत है।" हर क्लास से पहले लूर्डेस अपने लैपटॉप के ठीक से काम करने के लिए प्रार्थना करती थीं। उन्होंने कहा, "फिलिप्पियों 4:5-6 मेरी स्क्रीन पर वॉलपेपर था।" "मैं उन शब्दों से कितनी जुड़ी रही। ।" 

पौलुस हमें प्रोत्साहित करता है कि हम किसी भी बात की चिंता न करें, क्योंकि "प्रभु निकट है" (फिलिप्पियों 4:5)। परमेश्वर की उपस्थिति के वादे को हमें पकड़े रखना है। जब हम उसकी निकटता में आराम करते हैं और प्रार्थना में सब कुछ—बड़ा और छोटा दोनों—उसे सौंप देते हैं उसकी शांति हमारे "हृदय और . . . विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित . . . रखती है” (पद.7)।

लूर्डेस ने कहा, "परमेश्वर ने मुझे कंप्यूटर की गड़बड़ियाँ ठीक करने वाली वेबसाइटों तक पहुंचाया।" “उन्होंने मुझे ऐसे धैर्यवान छात्र भी दिए जो मेरी तकनीकी सीमाओं को समझते थे।” परमेश्वर की उपस्थिति, सहायता और शांति का आनंद लेना हमारे लिए आवश्यक है क्योंकि हम अपने जीवन के सभी दिनों में उसका अनुसरण करना चाहते हैं। हम विश्वास के साथ कह सकते हैं : “प्रभु में सदा आनन्दित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनन्दित रहो!” (पद.4)।

—करेन हुआंग

क्रिसमस दुविधा

डेविड और एंजी को लगा कि उन्हें विदेश जाने के लिए बुलाया गया है, और उसके बाद जो फलदायी मंत्रालय हुआ, उससे यह पुष्टि होती दिखी। लेकिन उनके इस कदम का एक नकारात्मक पहलू भी था। डेविड के बुज़ुर्ग माता-पिता अब क्रिसमस अकेले बिताएंगे। डेविड और एंजी ने क्रिसमस के दिन अपने माता-पिता के अकेलेपन को कम करने के लिए पहले से ही उपहार भेजकर और क्रिसमस की सुबह फोन करके कोशिश की। लेकिन उसके माता-पिता वास्तव में उन्हें चाहते थे। डेविड की आय के कारण वे कभी-कभार ही घर जा पाते थे, तो वे और क्या कर सकते थे? डेविड को बुद्धि की ज़रूरत थी।

नीतिवचन 3 बुद्धि-प्राप्ति का एक क्रैश कोर्स  (तीव्र और गहन अध्ययन)  है, जो हमें यह दिखाता है कि हम अपनी परिस्थितियों को परमेश्वर के पास ले जाकर इसे प्राप्त कैसे करें (पद.5-6), इसके विभिन्न गुणों जैसे प्रेम और विश्वासयोग्यता (पद. 3-4, 7-12), और शांति और दीर्घायु के रूप में इसके लाभ का वर्णन करता है (पद. 13-18)। एक  हृदयस्‍पर्शी (दिल को छू लेने वाला) टिप्पणी में, यह कहा गया है कि परमेश्वर हमें "अपने विश्वास में" लेकर ऐसी बुद्धि देता है (पद. 32)। वह अपना समाधान उन लोगों को धीरे धीरे बोलते हैं जो उसके करीब हैं।

एक रात अपनी समस्या के बारे में प्रार्थना करते हुए, डेविड को एक विचार आया। अगले क्रिसमस के दिन, उसने और एंजी ने अपने सबसे अच्छे कपड़े पहने, मेज को टिनसेल (चमकीले रंगीन काग़ज़ के लंबे फ़ीते (tinsel)) से सजाया, और भुना हुआ रात्रिभोज लाए। डेविड के माता-पिता ने भी ऐसा ही किया। फिर, प्रत्येक टेबल पर एक लैपटॉप रखकर, उन्होंने वीडियो लिंक के द्वारा एक साथ भोजन किया। लगभग ऐसा महसूस हुआ जैसे वे एक ही कमरे में हैं। तब से यह एक पारिवारिक परंपरा बन गई है।

परमेश्वर ने दाऊद को अपने भरोसे में लिया और उसे बुद्धि दी। वह हमारे समस्याओं का रचनात्मक समाधान फुसफुसा कर सुनाना पसंद करता है।

—शेरिडन वोयसी

मसीह में समुदाय

 बहामास के दक्षिण में भूमि का एक छोटा सा टुकड़ा है जिसे रैग्ड आइलैंड(Ragged Island) कहा जाता है। उन्नीसवीं सदी में यहाँ एक सक्रिय नमक उद्योग था, लेकिन उस उद्योग में गिरावट के कारण, कई लोग पास के द्वीपों में चले गए। 2016 में, जब वहां अस्सी से भी कम लोग रहते थे, द्वीप में तीन धार्मिक संप्रदाय थे, फिर भी सभी लोग प्रत्येक सप्ताह आराधना और संगति के लिए एक स्थान पर एकत्र होते थे। इतने कम निवासियों के साथ, समुदाय की भावना उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी।   

आरंभिक कलीसिया के लोगों को भी समुदाय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता और इच्छा महसूस हुई। वे अपने नए विश्वास को लेकर उत्साहित थे जो यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान से संभव हुआ था। लेकिन वे यह भी जानते थे कि वह अब शारीरिक रूप से उनके साथ नहीं हैं, इसलिए उन्हें पता था कि उन्हें एक-दूसरे की ज़रूरत है। उन्होंने खुद को प्रेरितों की शिक्षाओं, संगति और एक साथ भोज साझा करने के लिए समर्पित कर दिया (प्रेरितों के काम 2:42)। “वे प्रार्थना करने और भोजन के लिए घरों में इकट्ठे होते और दूसरों की जरूरतों का ख्याल रखते थे। प्रेरित पौलुस ने कलीसिया का वर्णन इस प्रकार किया : “और विश्वास करनेवालों की मण्डली एक चित्त और एक मन की थी” (4:32)। पवित्र आत्मा से परिपूर्ण, उन्होंने लगातार परमेश्वर की स्तुति की और कलीसिया के जरूरतों को प्रार्थना में उसके पास लाए।  

समुदाय हमारे विकास और सहायता के लिए आवश्यक है। इसे अकेले जीने का प्रयास न करें। जब आप अपने संघर्षों और खुशियों को दूसरों के साथ साझा करेंगे और एक साथ उसके करीब आएंगे तो परमेश्वर समुदाय की भावनाओं को विकसित करेगा।

—ऐनी सीटास