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भाले जो बांधते हैं

“फ्रेंडली फायर” एक सैन्य शब्द है जो इस्तेमाल किया जाता है जब एक सैनिक को दुश्मन से नहीं बल्कि गलती से अपने ही सैनिक द्वारा गोली लग जाती है। जबकि सेना में इसे आकस्मिक माना जाता है। कभी-कभी हम भी “फ्रेंडली फायर” का अनुभव करते है जो जानबूझकर मारे जाते है। दूसरे मसीही भाई-बहन हमारे बारे में निर्दयी और झूठी बातें कहते हैं, और हम ने अनुभव किया है कि उनके तीर और भाले हमारे हृदयों में छेद कर उन्हें चीरते चले जाते हैं।

अब कोशिश करें और इस दृश्य को चित्रित करें। आप यीशु के द्वारा उठाए हुए उनकी बाँहों में उनके दिल के निकट है, जैसे एक पिता अपने बच्चे को उठाता है। जब आप इस स्थिति में है, यदि कोई आपको तीर चलता या एक भाले से बेधने की कोशिश करता है। ( बाइबल आधारित दृश्य उपयोग करने के लिए), जो तीर और भाले आपके हृदय में से होकर जाते हैं, वे उसके में से भी होकर जाते हैं। अन्याय और दर्द आपको तीर और भाले को निकालने और प्रतिकार करने के लिए मजबूर कर सकता है। लेकिन यदि हम ऐसा करने से इंकार करते हैं, वही तीर या भाला जो हमारे और यीशु के दिलों को छेदता है वही हमारे दिलों को उनके दिल से लगाने में मदद करता है। और बंधन गहरा हो जाता है।

इसलिये अगली बार जब कोई आपको गाली देता, अपमान करता या आपके बारे में कोई झूठी या निर्दयी बात कहता है, उस अवसर के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें जो इसे यीशु के साथ हमारे हृदय को करीब लाने दे सकती है और उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना करें जो दुख और पीड़ा दे रहा है।

विश्वास से दृढ़ खड़े रहना

1998 में नोकिया दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली मोबाइल फोन कंपनी बनी और 1999 में लगभग चार अरब डॉलर की वृद्धि मुनाफे में देखी गई। लेकिन 2011 तक बिक्री घट रही थी और जल्द ही असफल फोन ब्रांड को माइक्रोसॉफ्ट द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। नोकिया के मोबाइल विभाजन की विफलता का एक कारक भय आधारित कार्य संस्कृति थी जिसके कारण विनाशकारी निर्णय हुए। नौकरी से निकाले जाने के डर से प्रबंधक नोकिया फोन के घटिया ऑपरेटिंग सिस्टम और अन्य डिजाइन समस्यायों के बारे में सच्चाई बताने के लिए अनिच्छुक थे।

यहूदा का राजा आहाज और उसके लोग भयभीत थे-“ ... ऐसा काँप उठा जैसे वन के वृक्ष वायु चलने से काँप जाते हैं।” (यशायाह 7:2)। वो जानते थे की इस्राएल और आराम (सीरिया) के राजा ने संधि कर ली, और उनकी संयुक्त सेना यहूदा पर अधिकार करने को चढ़ाई कर रही थी (पद 5-6)। भले ही प्रभु ने आहाज को प्रोत्साहित करने के लिए यशायाह का इस्तेमाल किए यह कहकर कि उसके शत्रुओं की शत्रुतापूर्ण योजनाएँ “नहीं होंगी” (पद 7), 

मूर्ख अगुवे ने डर के मारे अश्शूर के साथ मित्रता करना और महाशक्ति के राजा को सौंपना चुना (2 राजा 16:7-8)। उसने परमेश्वर पर भरोसा नहीं किया, जिन्होंने कहा था, “यदि तुम लोग इस बात की प्रतीति न करो; तो निश्‍चय तुम स्थिर न रहोगे।” (यशायाह 7:9)

इब्रानियों का लेखक हमें विचार करने में मदद करता है की आज विश्वास में दृढ़ रहना कैसा होता है: “आओ हम अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामे रहें, क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा की है, वह सच्‍चा है;” (10:23)।  जैसा पवित्र आत्मा हमें यीशु पर भरोसा करने के लिए सामर्थ देता है हम आगे बढ़ेने वाले हो पीछे “हटनेवाले नहीं” (पद 39)।

क्रिसमस का चमत्कार

एक बाजार में, फेंटे गत्ते के डिब्बे में मुझे यीशु के जन्म का एक सेट मिला। जैसे मैंने शिशु यीशु को उठाया, मैंने शिशु के शरीर के बारीक तराशे गए विवरण को ध्यान से देखा। यह नवजात शिशु कंबल में लिपटा आँख बंद किए हुए नहीं था-वह खुली बाँहों, खुले हाथों और फैली हुई उँगलियों के साथ आंशिक रूप से लिपटा और जगा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि वह कह रहा हैं “मैं यहाँ हूँ!”

उस आकृति ने क्रिसमस के चमत्कार को चित्रित किया-की परमेश्वर ने मानवीय शरीर में अपने पुत्र को पृथ्वी पर भेजा। जैसे-जैसे शिशु यीशु का शरीर परिपक्व हुआ, उनके खिलौने से खेलते छोट्टे हाथ, आगे तोरह (मूसा की पुस्तक) को पकड़ते, और फिर उनकी सेवा शुरू होने से पहले फर्नीचर बनाते। उनके पांव, जन्म के समय सिद्ध और गुदगुदे, आगे विकसित होते है की उन्हें सिखाने और चंगाई देने के लिए जगह जगह लेकर जाए, उनके जीवन के अंत में, ये मानवीय हाथ और पांव उसके शरीर को क्रूस पर टँगाए रखने के लिए किलों से छिदे जाते है।

रोमियों 8:3 कहता है, उस शरीर में परमेश्वर ने अपने पुत्र को हमारे पापों के लिए बलि देकर पाप का हम पर से नियन्त्रण का अंत कर दिया। यदि हम यीशु के बलिदान को हमारी सारी गलतियों की कीमत के रूप में ग्रहण करते और अपना जीवन उनको समर्पित करते हैं, हम पाप के दासत्व से छुटकारा पाएंगे। क्योंकि परमेश्वर का पुत्र, हमारे लिए एक वास्तविक ,हिलने-डुलने, लात चलाने वाले शिशु के रूप में पैदा हुआ था, उनके साथ अनन्तकाल का आश्वासन और परमेश्वर के साथ शांति पाने का एक तरीका है।

केवल पर्याप्त

फिल्म फिडलर ऑन द रूफ में, किरदार तेवी, एक गरीब किसान अपनी तीन बेटियों की शादी करने की कोशिश कर रहा परमेश्वर से अर्थशास्त्र के बारे में ईमानदारी से बात करता है, “आपने बहुत से, बहुत से गरीब लोगों को बनाया है। बेशक, मुझे पता है कि गरीब होना कोई शर्म की बात नहीं है। लेकिन यह कोई बड़ा सम्मान भी नहीं है! तो, अगर मेरे पास थोड़ी सी सम्पति होती, तो क्या होता!... यदि मैं एक धनी व्यक्ति होता— क्या वह किसी विशाल, शाश्वत योजना को खराब कर देती?”

लेखक शोलेम एलेकेम के, तेवी की जीभ पर ये ईमानदार के शब्द डालने से सदियों पहले, नीतिवचन की पुस्तक में आगूर ने परमेश्वर से उसी के समान ईमानदार लेकिन कुछ अलग प्रार्थना की। आगूर ने परमेश्वर से उसे न ही निर्धन और न ही धनी बनाने को कहा-केवल उसकी “प्रतिदिन की रोटी” (नीतिवचन 30:8)। उसे पता था की “बहुत अधिक” उसे घमंडी बना देता और परमेश्वर के चरित्र को नकारते हुए-उसे एक व्यावहारिक नास्तिक बना देता। इसके अलावा, उसने परमेश्वर  से “निर्धन” न बनाने को भी कहा क्योंकि वह उसे दूसरों से चोरी करके परमेश्वर के नाम का अपमान करा सकता है (पद 9)। आगूर ने परमेश्वर को अपना एकमात्र प्रदाता माना, और उनसे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कहा। उसकी प्रार्थना ने परमेश्वर की खोज और उस सन्तुष्टि को प्रकट किया जो केवल उसी में पाई जाती है।

हम में आगुर की वृत्ति हो, परमेश्वर को जो कुछ हमारे पास है उसका प्रदाता मानना। और जब हम आर्थिक भण्डारीपन का पीछा करते हैं जो उसके नाम का सम्मान करता है, आइए हम परमेश्वर के सम्मुख संतुष्टि के साथ रहे -वह जो न केवल “पर्याप्त” लेकिन पर्याप्त से अधिक प्रदान करता है।

सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे,…

और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े मे लिपटा हुआ और चरनी में…