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बेकार चीज़ों से सुन्दरता

मेरी पत्नी मिस्का के पास इथियोपिया का एक हार और छल्लेदार बालियां हैं। उनकी सुन्दर सादगी वास्तविक कला को प्रकट करती है। हालाँकि, इनके बारे में सबसे आश्चर्यजनक बात उनकी कहानी है। दशकों के भीषण संघर्ष और गृह युद्ध के कारण, इथियोपिया का भूगोल बेकार हो चुके तोपखाने के गोलों और कारतूसों से भरा पड़ा है। इथियोपियाई लोग आशा के एक कार्य के रूप में, जली हुई धरती को साफ करना,और रद्दी माल/कूड़ा-कचरा साफ करते हैं। और कारीगर गोले और कारतूसों के बचे हुये हिस्सों से आभूषण बनाते हैं।

जब मैंने यह कहानी सुनी, तो मैंने मीका द्वारा परमेश्वर के वादे की साहसी घोषणा की गूँज सुनी। एक दिन, भविष्यवक्ता ने घोषणा की, लोग "अपनी तलवारें पीटकर हल के फाल, और अपने भालों से हंसिया बनाएंगे" (4:3)। मारने और अपंग करने के लिए बनाए गए उपकरण, परमेश्वर की शक्तिशाली कार्रवाई के कारण, जीवन का पोषण करने के लिए बनाए गए उपकरणों में बदल जाएंगे। परमेश्वर के आने वाले दिन में, भविष्यवक्ता ने जोर देकर कहा, "तब एक जाति दूसरी जाति के विरूद्ध तलवार फिर न चलाएगी और लोग आगे को युद्ध विद्या न सीखेंगे।" (पद.3)।

मीका की घोषणा की उसके समय में कल्पना करना हमारे समय से अधिक कठिन नहीं था। पुराने इस्राएल की तरह, हम हिंसा और युद्ध का सामना करते हैं, और यह असंभव लगता है कि दुनिया कभी भी बदल सकती है। लेकिन परमेश्वर ने हमसे वादा किया है कि उनकी दया और इलाज से, यह आश्चर्यजनक दिन आ रहा है। तो फिर, हम अब इस सत्य को जीना शुरू कर दें l परमेश्वर अब भी अपना काम करने में हमारी मदद करता है, बेकार चीज़ों को सुंदर चीज़ों में बदल कर l विन कोलियर

सही केन्द्रबिंदु

हम खा(Kha-नाम) को एक वर्ष से अधिक समय से जानते हैं। वह चर्च के हमारे उस छोटे समूह का हिस्सा था जहाँ परमेश्वर के बारे में हम जो सीख रहे थे उस पर चर्चा करने के लिए साप्ताहिक बैठक करते थे। एक शाम हमारी नियमित बैठक के दौरान, उन्होंने बताया कि उन्होंने ओलंपिक में भाग लिया था। उनका यह बताना इतना अनौपचारिक था कि मुझे इसका ध्यान ही नहीं रहा। और देखो, मुझे पता चला कि मैं एक ओलंपिक के खिलाड़ी को जानता हूं जिन्होंने मैच में कांस्य पदक प्राप्त किया था! मैं समझ नहीं पाया कि उन्होंने पहले इसका उल्लेख नहीं किया था, लेकिन खा के लिए, जबकि उनकी एथलेटिक उपलब्धि उनकी कहानी का एक विशेष हिस्सा थी, अधिक महत्वपूर्ण चीजें उनकी पहचान के केंद्र में थीं : उनका परिवार, उनका समुदाय और उनका विश्वास।

लूका 10:1-23 की कहानी बताती है कि हमारी पहचान के केंद्र में क्या होना चाहिए। जब बहत्तर लोग जिन्हें यीशु ने दूसरों को परमेश्वर के राज्य के बारे में बताने के लिए भेजा था, अपनी यात्रा से लौट आए, तो उन्होंने उसे बताया कि "दुष्टात्मा भी हमारे वश में हैं"(पद.17)। जबकि यीशु ने स्वीकार किया कि उसने उन्हें जबरदस्त शक्ति और सुरक्षा से समर्थ किया है, उन्होंने कहा कि वे गलत चीज़ पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके आनंदित होने का कारण यह होना चाहिए क्योंकि उनके "नाम स्वर्ग में लिखे गए हैं" (पद.20)।

परमेश्वर ने हमें जो भी उपलब्धियाँ या क्षमताएँ प्रदान की हैं, हमारे आनन्दित होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यदि हमने स्वयं को यीशु को सौंपा है, तो हमारे नाम स्वर्ग में लिखे गए हैं, और हम अपने जीवन में उनकी दैनिक उपस्थिति का आनंद लेते हैं। किर्स्टन होम्बर्

बूँद बूँद करके

सोलहवीं सदी की विश्वासिनी अविला की टेरेसा लिखती हैं, "हर चीज़ में हम परमेश्वर की सेवा के सुखद तरीके तलाशते हैं।" वह उन कई तरीकों पर हृदयस्पर्शी ढंग से विचार करती है जिनसे हम परमेश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की तुलना में आसान, अधिक "सुखद" तरीकों के माध्यम से नियंत्रण में रहना चाहते हैं। हम धीरे-धीरे, अस्थायी रूप से, और यहां तक कि अनिच्छा से अपने आप में उस पर भरोसा करने लगते हैं। और इसलिए, टेरेसा कबूल करती हैं, "यद्यपि हम आपके लिए अपना जीवन एक समय में थोड़ा सा मापते हैं, बूंद-बूंद करके आपके उपहार प्राप्त करने के लिए तो हमें संतुष्ट रहना चाहिए, जब तक हम अपना जीवन पूरी तरह से आपको समर्पित नहीं कर देते।"

मनुष्य के रूप में, हममें से कई लोगों में विश्वास स्वाभाविक रूप से नहीं आता है। इसलिए यदि परमेश्वर के अनुग्रह और प्रेम का अनुभव उस पर भरोसा करने और उसे प्राप्त करने की हमारी क्षमता पर निर्भर होता, तो हम मुसीबत में पड़ जाते!

लेकिन, जैसा कि हम 1 यूहन्ना 4 में पढ़ते हैं, हमारे लिए परमेश्वर का प्रेम पहले आता है (पद.19)। इससे पहले कि हम उससे प्रेम कर पाते, उसने हमसे बहुत पहले प्रेम किया, इतना कि वह हमारे लिए अपने बेटे का बलिदान देने को तैयार था। "यह प्रेम है," यूहन्ना आश्चर्य और कृतज्ञता में लिखता है (पद.10)।

धीरे-धीरे, कोमलता से, थोड़ा-थोड़ा करके, परमेश्वर अपने प्यार को पाने के लिए हमारे हृदयों को चंगा करता है—बूंद-बूंद करके, परमेश्वर का अनुग्रह हमें अपने भय को त्यागने में मदद करता है (पद.18)। बूँद-बूँद करके, परमेश्वर का अनुग्रह हमारे दिलों तक पहुँचता है जब तक कि हम स्वयं उनकी पर्याप्त सुंदरता और प्रेम की वर्षा का अनुभव नहीं कर लेते। मोनिका ला रोज़

परमेश्वर को पुकारना

डॉ. रसेल मूर ने अपनी पुस्तक एडॉप्टेड फॉर लाइफ में एक बच्चे को गोद लेने के लिए अपने परिवार की अनाथालय यात्रा का वर्णन किया है। जैसे ही वे नर्सरी में दाखिल हुए, सन्नाटा चौंका देने वाला था। पालने में रहने वाले बच्चे कभी नहीं रोते थे, और ऐसा इसलिए नहीं था क्योंकि उन्हें कभी किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं होती थी, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्होंने सीख लिया था कि कोई भी इतनी परवाह नहीं करता कि उनके रोने का जवाब दे।

उन शब्दों को पढ़कर मेरा दिल दुख गया। मुझे अनगिनत रातें याद हैं जब हमारे बच्चे छोटे थे। मैं और मेरी पत्नी गहरी नींद में सोये होते थे तभी उनके रोने की आवाज से हमारी नींद खुल जाती : "डैडी, मैं बीमार हूँ!" या "माँ, मुझे डर लग रहा है!" हममें से कोई तुरंत उठता और उन्हें आराम देने और उनकी देखभाल करने की पूरी कोशिश करने के लिए उनके सोने के कमरे में जाता था। अपने बच्चों के प्रति हमारे प्यार ने उन्हें हमारी मदद के लिए पुकारने का कारण दिया।

भजन संहिताों की एक बड़ी संख्या परमेश्वर के लिए पुकार या विलाप है। इस्राएल उसके साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर अपना विलाप उनके पास लाये । ये वे लोग थे जिन्हें परमेश्वर ने अपना "पहिलौठा" कहा था (निर्गमन 4:22) और वे अपने पिता से परिस्थिति के अनुसार कार्य करने के लिए कह रहे थे। भजन संहिता संहिता 25 में ऐसा ईमानदार विश्वास देखा जाता है : "हे यहोवा मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर; क्योंकि मैं अकेला और दीन हूं" (पद.16-17)। जो बच्चे देखभाल करने वाले के प्यार के प्रति आश्वस्त होते हैं वे रोते हैं। यीशु में विश्वासियों के रूप में—परमेश्वर की संतान होने के नाते—उसने हमें उसे पुकारने का कारण दिया है। वह अपने महान प्रेम के कारण सुनता है और परवाह करता है । जॉन ब्लेज़

 

परमेश्वर का सुरक्षात्मक प्रेम

एक गर्मी की रात, हमारे घर के पास पक्षी अचानक गड़बड़ी और शोर वाली आवाजें करने लगे। उनकी चीख.पुकार तेज हो गई जब गानेवाले पक्षियों ने पेड़ों से भेदने वाली आवाजें करीं । आख़िरकार हमें एहसास हुआ कि ऐसा क्यों हो रहा है। जैसे ही सूरज डूबा, एक बड़े बाज़ ने पेड़ की चोटी से झपट्टा मारा, जिससे पक्षी चीखते हुए तितर-बितर हो गए, और उड़ते हुए उन्होंने खतरे की चेतावनी भी दी।

हमारे जीवनों में, आत्मिक चेतावनियाँ पूरी बाइबल में सुनी जा सकती हैं—उदाहरण के लिए, झूठी शिक्षाओं के प्रति चेतावनियाँ। हमें संदेह हो सकता है कि हम यही सुन रहे हैं। हालाँकि, हमारे प्रति उसके प्रेम के कारण, हमारे स्वर्गीय पिता हमें ऐसे आत्मिक खतरों को स्पष्ट करने के लिए बाइबल की स्पष्टता प्रदान करते हैं।

यीशु ने सिखाया, "झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर में वे फाड़नेवाले भेड़िए हैं" (मत्ती7:15)। उसने आगे कहा, "उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे . . . हर अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है, और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।" फिर उसने हमें चेतावनी दी, "उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे" (पद.16-17; 20)।

नीतिवचन 22:3 हमें याद दिलाता है, "चतुर मनुष्य विपत्ति को आते देखकर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़कर दण्ड भोगते हैं।" ऐसी चेतावनियों में परमेश्वर का सुरक्षात्मक प्रेम निहित है, जो हमारे लिए उसके शब्दों में प्रकट होता है।

जैसे पक्षियों ने एक-दूसरे को शारीरिक खतरे के बारे में चेतावनी दी, क्या हम आत्मिक खतरे से बचने और परमेश्वर की शरण में जाने के लिए बाइबल की चेतावनियों पर ध्यान दे सकते हैं। पैट्रिशिया रेबॉन

पैरों का धोना . . . और बर्तन

चार्ली और जेन की शादी की पचासवीं सालगिरह पर, उन्होंने अपने बेटे जोन के साथ एक कैफे में नाश्ता किया। उस दिन, रेस्तरां में बहुत कम कर्मचारी थे, केवल एक प्रबंधक, रसोइया और एक किशोर लड़की थी जो परिचारिका, महिला वेटर और वेटर के सहायक के रूप में काम कर रही थी। जैसे ही उन्होंने अपना नाश्ता ख़त्म किया, चार्ली ने अपनी पत्नी और बेटे से कहा, "क्या अगले कुछ घंटों में आपके लिए कोई महत्वपूर्ण काम है?" उनके पास कुछ भी नहीं था l

इसलिए, मैनेजर की अनुमति से, चार्ली और जेन ने रेस्तरां के पीछे बर्तन धोना शुरू कर दिया, जबकि जोन ने अव्यवस्थित टेबलों को साफ करना शुरू कर दिया। जोन के अनुसार, उस दिन जो हुआ वह वास्तव में उतना असामान्य नहीं था। उनके माता-पिता ने हमेशा यीशु का उदाहरण पेश किया था जो "सेवा कराने नहीं, बल्कि सेवा करने आए था" (मरकुस 10:45)।

यूहन्ना 13 में, हम मसीह द्वारा अपने शिष्यों के साथ साझा किये गये अंतिम भोजन के बारे में पढ़ते हैं। उस रात, गुरु ने उनके गंदे पैर धोकर उन्हें विनम्र सेवा का सिद्धांत सिखाया (पद.14-15)। यदि वह एक दर्जन पुरुषों के पैर धोने का नीचा काम करने को तैयार था, तो उन्हें भी खुशी-खुशी दूसरों की सेवा करनी चाहिए।

हमारे सामने आने वाली सेवा का प्रत्येक मार्ग अलग-अलग दिख सकता है, लेकिन एक बात समान है : सेवा करने में बहुत आनंद है। सेवा के कार्यों के पीछे का उद्देश्य उनको करनेवालों की प्रशंसा करना नहीं है, बल्कि सारी स्तुति हमारे विनम्र, आत्म-त्यागी परमेश्वर की ओर निर्देशित करते हुए प्रेमपूर्वक दूसरों की सेवा करना है । सिंडी हेस कैस्पर

परमेश्वर के पीछे चलने का चुनाव

एक ब्रिटिश अखबार का दावा है, "औसत व्यक्ति अपने जीवनकाल में 7,73,618 निर्णय लेगा," आगे उनका दृढ़ता से कहना है कि हमें "उनमें से 1,43,262 पर पछतावा होगा।" मुझे नहीं पता कि अख़बार इन संख्याओं तक कैसे पहुंचा, लेकिन यह स्पष्ट है कि हम अपने पूरे जीवनकाल में अनगिनत निर्णयों का सामना करते हैं। उनकी वास्तविक मात्रा हमें पंगु बना सकती है, खासकर जब हम मानते हैं कि हमारे सभी विकल्पों के परिणाम होते हैं, कुछ दूसरों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

चालीस वर्षों तक जंगल में भटकने के बाद, इस्राएल के लोग अपनी नई मातृभूमि की दहलीज(threshold) पर खड़े थे। बाद में, देश में प्रवेश करने के बाद, उनके अगुवे यहोशू ने उन्हें एक चुनौतीपूर्ण विकल्प दिया : "यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा . . . करते थे, उन्हें दूर करके यहोवा की सेवा करो" (यहोशू 24:14)। यहोशू ने उनसे कहा, "यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे . . . परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा" (पद.15) ।

जैसे-जैसे हम प्रत्येक नए दिन की शुरुआत करते हैं, संभावनाएं हमारे सामने बढ़ती हैं, जिससे अनेक निर्णय लेने पड़ते हैं, जो अनेक निर्णयों की ओर अग्रसर होते हैं ।परमेश्वर से हमारा मार्गदर्शन करने के लिए समय निकालने से हमारे द्वारा चुने गए विकल्पों पर प्रभाव पड़ेगा। आत्मा की शक्ति से, हम हर दिन उसका अनुसरण करना चुन सकते हैं। बिल क्राउडर

गुरुत्वाकर्षण पहाड़ी

रहस्यों को समझना एक ऐसी चीज़ है जो कई लोगों को आकर्षित करती है, जिनमें मैं भी शामिल हूँ। ऐसा ही एक रहस्य है लेह, लद्दाख के पास एक पहाड़ी जिस पर वाहन नीचे की ओर जाने के बजाय अपने आप ऊपर की ओर लुढ़कते हैं। लोकप्रिय रूप से “ग्रेविटी हिल” के नाम से प्रसिद्ध, लोगों का मानना है कि यह एक दृष्टिभ्रम हो सकता है, या पहाड़ी में एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र हो सकता है या यह कि परिदृश्य एक मानसिक धोखा है। कारण जो भी हो, एक बात तो तय है, यह घटना गुरुत्वाकर्षण के नियमों के विरुद्ध प्रतीत होती है——यह एक रहस्य है। 

प्रेरित पौलुस, जो अपने समय का एक प्रसिद्ध विद्वान था, के पास अपने श्रेष्ठ ज्ञान, बुद्धि और शैक्षणिक प्रतिष्ठा पर घमंड करने का हर कारण था (पद.1-2)। फिर भी वह डरते और कांपते हुए कुरिन्थियों के पास गया क्योंकि वह जिस “रहस्य” का साक्षी था वह उसकी बौद्धिक क्षमता से कहीं अधिक था। यह “रहस्य” मानवजाति को पाप से छुड़ाने के लिए परमेश्वर की अपरिमेय योजना है, और यह उसके पुत्र, यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा प्रकट हुयी। इसका प्रबंध करने में परमेश्वर की बुद्धि एक रहस्य है जिसे केवल पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से ही समझा जा सकता है (पद.5-10)। 

जब हम मसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करते हैं, तो हम इस महान “रहस्य” का हिस्सा बन जाते हैं, जिसे परमेश्वर ने हमारे अंदर स्थापित किया है। परमेश्वर की बुद्धि किसी भी सांसारिक बुद्धि से महान है, और पवित्र आत्मा के द्वारा यह हमारे लिए उपलब्ध है। जीवन के चौराहे पर, जब हम परिवार, मित्रों या साथियों की बुद्धि पर निर्भर होने के लिए लुभाए जाते हैं, तो हमें सभी बुद्धि के अंतिम स्रोत——पवित्र आत्मा (कुलुस्सियों 1:9) का उपयोग करना ही चाहिए l क्योंकि जब मनुष्य की बुद्धि अच्छी है, तो परमेश्वर की बुद्धि उससे भी बेहतर है, और उसकी उपस्थिति हमेशा हमारे साथ रहती है।

रेबेका विजयन 

अत्यधिक अतिप्रवाह

स्कूल में, हमारे तमिल शिक्षकों ने हमारे लिए पोंगल नामक एक तमिल त्यौहार के सांस्कृतिक उत्सव का अनुभव करने का आयोजन किया, जिसे अन्य स्थानों पर लोहरी और मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने एक पारंपरिक चूल्हा स्थापित किया, छोटी लकड़ियाँ जलाईं और उस पर चावल, चीनी और दूध से भरा एक मिट्टी का बर्तन रखा। हम चकित होकर देखते रहे और बर्तन की सामग्री के उबलने पर चिल्लाते रहे। हममें से प्रत्येक ने थोड़ा पोंगल खाने के बाद, हम कक्षा में वापस चले गए। तमिल संस्कृति में, 'पोंगल'जिसका अर्थ है 'अतिप्रवाह' फसल की प्रचुरता का प्रतीक है।

यूहन्ना 7 एक यहूदी त्यौहार के बारे में बात करता है जिसे झोपड़ियों का पर्व कहा जाता है। इस पर्व के अंतिम दिन, यीशु खड़े होकर ऊंची आवाज़ में बोला, "यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आए और पीए" (पद.37)। उसने प्रतिज्ञा की कि जो कोई भी उस पर विश्वास करेगा, उसके "हृदय में से" "जीवन के जल की नदियाँ" बह निकलेंगी (पद.38)। लेखक यूहन्ना कहता है कि यीशु जिस अतिप्रवाह का उल्लेख कर रहा था, वह प्रतिज्ञा किया गया पवित्र आत्मा है जिसे बाद में सभी पर उंडेला जाएगा (पद.39)। यीशु के मरने, पुनरुत्थित होने और स्वर्गारोहण के बाद, उसने एक अन्य त्योहार, पिन्तेकुस्त के दिन, के दौरान इस वादे को पूरा किया (प्रेरितों के काम 2:1)। आत्मा से भरपूर होकर, उसके शिष्यों ने विभिन्न भाषाओं में सुसमाचार का प्रचार किया, अपने संसाधनों को स्वेच्छा से साझा किया और एक देखभाल करने वाला समुदाय बन गए (प्रेरितों के काम 2:3,52)।

यीशु ने हमें अपनी आत्मा दी है ताकि हम अपने भीतर की अपनी आध्यात्मिक प्यास बुझा सकें (यूहन्ना 7:38-39)। आत्मा हमें उत्साहित करता है, हमें शांति और आनंद देता है, और हमें भरपूर मात्रा में भर देता है (पद.38)। और जैसे-जैसे हम भरते हैं, हम दूसरों को भी भरने के लिए भरपूर मात्रा में अतिप्रवाहित होते हैं। ऍन हरिकीर्तन