सच्ची आज़ादी
ट्रेन में पढ़ते समय, जाह्नवी अपनी किताब के वाक्यों को हाइलाइट करने और किताब के हाशिये (मार्जिन) में नोट्स लिखने में व्यस्त थी। लेकिन पास में बैठी एक मां और बच्चे के बीच हुई बातचीत ने उसे रोक दिया। माँ अपने बच्चे को अपनी लाइब्रेरी की किताब में बेकार के चित्र बनाने को मना कर रही थी। जाह्नवी ने जल्दी से अपनी कलम हटा दी, वह नहीं चाहती थी कि बच्चा जाह्नवी की मिसाल पर चलकर अपनी माँ की बातों को नज़रअंदाज़ करे। वह जानती थी कि बच्चा उधार ली गई किताब को नुकसान पहुंचाने और अपनी खुद की किताब में नोट्स बनाने के बीच के अंतर को नहीं समझेगा।
जाह्नवी के कार्यों ने मुझे 1 कुरिन्थियों 10:23–24 में प्रेरित पौलुस के प्रेरणादायक शब्दों की याद दिला दी: “सब वस्तुयें मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब लाभ की नहीं; सब वस्तुयें मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब वस्तुंओं से उन्नति नहीं। कोई अपनी ही भलाई को न ढूंढे, बरन औरों की भलाई को ढूंढे।” कुरिन्थ की युवा कलीसिया में यीशु के विश्वासियों ने मसीह में अपनी स्वतंत्रता को व्यक्तिगत हितों को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा। परन्तु पौलुस ने लिखा कि उन्हें इसे दूसरों को लाभ पहुँचाने और उनको बनाने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। उसने उन्हें सिखाया कि सच्ची स्वतंत्रता वह करने का अधिकार नहीं है जो वे चाहते हैं, परन्तु परमेश्वर के लिए जैसा उन्हें करना चाहिए वैसा करने की स्वतंत्रता है।
जब हम अपनी स्वतंत्रता का उपयोग खुद की सेवा करने के बजाय दूसरों को बनाने के लिए करते हैं तब हम यीशु का अनुकरण करते हैं ।

एक दूसरे की देख रेख करना
जानकी ने कोयंबटूर के एक गाँव में डॉक्टर के रूप में काम किया। कई साल पहले, उसने एक गर्भवती लड़की का इलाज किया, जिसकी शादी 14 साल की कम उम्र में हो गई थी; और उसने एक लड़की को जन्म दिया था। बालिकाओं के प्रति प्रतिकूल प्रवृत्ति के कारण, उसका परिवार बच्चे को पास की नदी में डुबाना चाहता था। परिवार की क्रूर मंशा जानते हुये जानकी ने चुपके से बच्चे और मां को सुरक्षित निकाल लिया। जानकी ने माँ को अपने घर में आश्रय, सुरक्षा और काम प्रदान किया और वे जानकी के परिवार का हिस्सा बन गए। जानकी ने न केवल बच्चे को बचाया, बल्कि उसने उस बच्चे में भी निवेश किया जो बड़ी होकर डॉक्टर बनी।
यद्यपि पवित्रशास्त्र बार–बार हमें एक दूसरे के प्रति चौकस रहने का निर्देश देता है, लेकिन कभी कभी अपनी स्वयं की चिंताओं से परे देखना कठिन होता है। भविष्यद्वक्ता जकर्याह ने इस्राएल को फटकार लगाई, जो परमेश्वर की आराधना करने या दूसरों की सेवा करने के बजाय “अपने लिए दावतें कर रहे थे“ (जकर्याह 7:6)। अपने साझे साम्प्रदायिक जीवन की उपेक्षा करते हुए उन्होंने अपने पड़ोसियों की आवश्यकता की अवहेलना की। जकर्याह ने परमेश्वर के निर्देशों को स्पष्ट किया— “लोगों का सच्चा न्याय करना, एक दूसरे पर दया और करुणा दिखाओ। और विधवा या अनाथ, परदेशी या कंगाल पर अन्धेर न करना (पद 9:10)।
जबकि हमारी अपनी ज़रूरतों को पूरा करना आसान है, विश्वास हमें दूसरों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बुलाता है। ईश्वरीय अर्थव्यवस्था में सभी के लिए बहुत कुछ है। और परमेश्वर अपनी दया में, उस भरपूर में से कुछ को दूसरों को देने के लिए हमें उपयोग करने के लिए चुनता है।

सर्वश्रेष्ठ टीम
मेलानी और ट्रेवर, दोनों दोस्तों ने मिलकर मीलों पहाड़ की पगडंडियों को पार किया है। कोई एक दूसरे के बिना ऐसा करने में सक्षम नहीं होगा। स्पाइना बिफिडा (रीढ़ की हड्डी का रोग) के साथ पैदा हुई मेलानी व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं। ग्लूकोमा (काला मोतिया) के कारण ट्रेवर की आंखों की रोशनी चली गई। दोनों ने महसूस किया कि वे कोलोराडो जंगल का आनंद लेने के लिए एक दूसरे के आदर्श पूरक थे; जैसे ही वह पगडंडियों पर चलता है, ट्रेवर मेलानी को अपनी पीठ पर बिठाता है, इस बीच वह उसे मौखिक निर्देश देती है। वे खुद को “ड्रीम टीम” के रूप में वर्णित करते हैं।
पौलुस यीशु में विश्वासियों का वर्णन करता है—मसीह की देह के रूप में—उसी प्रकार की एक सर्वश्रेष्ठ टीम। उन्होंने रोमवासियों से यह पहचानने का आग्रह किया कि उनके व्यक्तिगत वरदानों से कैसे बड़े समूह को लाभ हुआ। जिस तरह हमारे भौतिक शरीर कई हिस्सों से बने होते हैं, प्रत्येक अलग–अलग कार्यों के साथ, हम एक साथ एक आध्यात्मिक शरीर बनाते हैं और हमारे वरदान चर्च के सामूहिक लाभ के लिए सेवा में दिए जाने के लिए होते हैं (रोमियों 12:5) । चाहे देने, प्रोत्साहित करने, या सिखाने के रूप में, या किसी भी अन्य आत्मिक वरदान के रूप में, पौलुस हमें निर्देश देता है कि हम स्वयं को और अपने वरदानों को अन्य सभी से संबंधित देखें (पद 5:8)।
मेलानी और ट्रेवर इस बात पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हैं कि उनके पास क्या कमी है, और न ही वे इस बात पर गर्व करते हैं कि उनके पास दूसरे की तुलना में क्या है। इसके बजाय, वे खुशी–खुशी दूसरे की सेवा में अपने वरदान देते हैं, यह पहचानते हुए कि उनके सहयोग से वे दोनों कितने बेहतर हैं। क्या हम भी उन वरदानों को जो परमेश्वर ने हमें दिए हैं स्वतंत्र रूप से अपने साथी सदस्यों के साथ जोड़ सकते हैं —मसीह के लिए।

भोजन जो कहता है कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ
मैंने एक परिवार के जन्मदिन की सभा में भाग लिया जहाँ परिचारिका ने “पसंदीदा चीजों” की थीम को सजावट को, उपहारों, और भोजन में शामिल किया। क्योंकि बर्थडे गर्ल को पनीर और फल और रेड वेलवेट केक पसंद थे, परिचारिका ने पनीर को ग्रिल किया, फलों को काटा और उसके पसंदीदा केक का ऑर्डर दिया। पसंदीदा खाने की चीजें कहती हैं“ मैं तुमसे प्रेम करता हूँ।”
बाइबल में भोजों, दावतों और त्योहारों के कई संदर्भ हैं, जो खाने के शारीरिक कार्य को परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के उत्सव के साथ जोड़ते हैं। दावत देना इस्राएलियों द्वारा प्रचलित आराधना की बलिदान प्रणाली का एक हिस्सा था (गिनती 28:11–31)— फसह के साथ, सप्ताहों का त्योहार, और हर महीने चाँद का पर्व। और भजन संहिता 23:5 में परमेश्वर प्रचुर मात्रा में भोजन के साथ एक मेज तैयार करता है और प्याले दया और प्रेम से भरे हुए हैं। शायद भोजन और दाखरस की सबसे उत्तम जोड़ी जो कभी व्यक्त की गई थी वह उस समय, जब यीशु ने रोटी का एक टुकड़ा तोड़ा और एक कटोरे में दाखरस लिया, जो हमारे उद्धार के लिए क्रूस पर उसकी मृत्यु के उपहार को दर्शाता है। फिर उसने हमें “मेरी याद में ऐसा करने” के लिए चुनौती दी (लूका 22:19)।
आज जब आप भोजन करते हैं, तो उस परमेश्वर पर विचार करने के लिए कुछ समय निकालें, जिसने मुंह और पेट दोनों को बनाया और अपनी वफादारी के उत्सव में अपने प्रेम की भाषा के रूप में आपको भोजन प्रदान किया। हमारा एक ईश्वर है जो विश्वासियों के साथ दावत खाता है, हमारी महान आवश्यकता के साथ अपने पूर्ण प्रावधान को जोड़कर कहता है, “मैं तुमसे प्रेम करता हूँ।”

जल्दी करो और रुको
“हम अपने सभी खाली समय में क्या करेंगे?” यह विचार 1930 में अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स द्वारा प्रकाशित एक निबंध का केंद्र था। इसमें कीन्स ने प्रस्तावित किया कि सौ वर्षों के भीतर, तकनीकी और आर्थिक प्रगति मनुष्य को एक ऐसे बिंदु पर ले आएगी जहाँ हम एक दिन में केवल तीन घंटे, और एक सप्ताह में पंद्रह घंटे काम करेंगे।
कीन्स को अपना प्रसिद्ध निबंध प्रकाशित किए हुए नब्बे साल से अधिक समय हो गया है। लेकिन तकनीक ने और अधिक फुरसत पैदा करने के बजाय हमें पहले से कहीं ज्यादा व्यस्त बना दिया है। हमारे दिन भरे हुए हैं, और जबकि यात्रा और भोजन तैयार करने जैसे रोज़मर्रा के कार्यों में कम समय लगता है, फिर भी हम जल्दी में रहते हैं।
दाऊद के जीवन की एक असाधारण घटना हमें दिखाती है कि जीवन की भागदौड़ में कैसे संतुलित रहना है। जब दाऊद राजा शाऊल जो उसे मारने का यत्न कर रहा था) से भाग रहा था, तो उसने मोआब के राजा से पूछा,“क्या तू मेरे माता पिता को आकर अपने साथ रहने देगा, जब तक मैं यह न जान लूं कि परमेश्वर मेरे लिये क्या करेगा” 1 शमूएल 22:3 (इटैलिक्स जोडे गये)। दाऊद के हाथ भरे हुए थे। वह शाऊल की जानलेवा कोशिशों से बचने की कोशिश कर रहा था और अपने परिवार का भरण–पोषण भी कर रहा था। लेकिन जल्दबाजी में भी उसने परमेश्वर की बाट जोहने के लिये समय निकाला।
जब जीवन की उन्मत्त गति हमें घेर लेती है, तो हम उस पर भरोसा कर सकते हैं जो हमें उसकी शांति में रख सकता है (यशायाह26:3)। दाऊद के शब्द इस बात का सार भली–भाँति प्रस्तुत करते हैं, “यहोवा की बाट जोहता रह, हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे और यहोवा की बाट जोहते रहो” (भजन संहिता 27:14)।