जल वहाँ जहाँ हमें ज़रूरत है
विश्व की सबसे गहरी झील, बैकल झील, विशाल और भव्य है l एक मील गहरी और लगभग 400 मील (636 किमी) लम्बी और 49 मील (79 किमी) चौड़ी इसकी माप है l इसमें संसार के सभी सतही ताजा जल का पांचवां (20 फीसदी) हिस्सा है l लेकिन यह पानी काफी हद तक पहुँच से बाहर है l बैकल झील साइबेरिया में स्थित है─रूस के सबसे दूरदराज के क्षेत्रों में से एक l हमारे ग्रह के काफी हिस्से में पानी की इतनी सख्त जरूरत के साथ, यह असंगत है कि जल का इतना विशाल भंडार एक ऐसे स्थान पर है, जहाँ बहुत लोग इसका उपयोग नहीं कर सकते l
यद्यपि बैकल झील बहुत दूर हो सकती है, लेकिन जीवनदायक जल का एक अंतहीन स्रोत है, जो उन लोगों के लिए उपलब्ध और सुलभ है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है l जब सामरिया के एक कुएँ पर, यीशु ने एक महिला से बातचीत करते हुए, उसकी गहरी आध्यात्मिक प्यास की तीव्रता को जांचा l उसकी सबसे प्रमुख आवश्यकता का समाधान? स्वयं यीशु l
जिस कुएँ से वह पानी भरने आयी थी, के विपरीत, यीशु ने कुछ बेहतर पेश किया : “जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा, परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनंतकाल तक प्यासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनंत जीवन के लिए उमड़ता रहेगा” (यूहन्ना 4:13–14) l
बहुत सी चीजें संतुष्टि का वादा करती हैं लेकिन कभी भी हमारे प्यासे हृद्यों को पूरी तरह से तृप्त नहीं करती हैं l यीशु ही हमारी आध्यात्मिक प्यास को वास्तव में संतुष्ट कर सकता है, और उसका प्रावधान हर किसी के लिए, हर जगह उपलब्ध है l

सुरक्षित उस पार
पापुआ न्यू गिनी में, कैंडास जनजाति ने अपनी भाषा में मुद्रित नया नियम बाइबल के आगमन का उत्साह के साथ इंतजार किया l हालाँकि, गाँव तक पहुँचने के लिए, किताबों को लाने वाले लोगों को छोटी नावों में समुद्र की यात्रा करनी पड़ी l
किसने उन्हें विशाल समुद्र की यात्रा करने का साहस दिया? उनकी नाविकविद्या, जी हाँ l लेकिन वे यह भी जानते थे कि समुद्र को किसने रचा है l वह ही है जो हमारे जीवन के अशांत तरंगों और गहरे जल के पार हममें से हर का मार्गदर्शन करता है l
जैसा कि दाऊद ने लिखा है, “मैं तेरे आत्मा से भागकर कहाँ जाऊँ?” (भजन 139:7) l “यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहाँ है . . . यदि मैं . . . समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा” (पद.8-10) l
ये शब्द कैंडास जनजाति के साथ गहराई से प्रतिध्वनित होंगे, जो एक द्वीप राष्ट्र पर रहते हैं जिनके उष्णकटिबंधीय(tropical) तटों, घने वर्षावनों(rainforests) और बीहड़ पहाड़ों को “अंतिम अज्ञात/The Last Unknown” कहा जाता है l फिर भी वहां के और हर जगह के विश्वासी जानते हैं कि कोई भी जगह या समस्या परमेश्वर के लिए बहुत दूरस्थ नहीं है l भजन 139:12 कहता है, “अंधकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिए अंधियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं l”
इसलिए, प्रचण्ड आंधी से, हमारा परमेश्वर बोलता है, “शांत रह, थम जा!” और आंधी थम गई और बड़ा चैन हो गया (मरकुस 4:39) l इसलिए, आज जीवन के गहरे या अशांत आंधी से मत डरिये l हमारा परमेश्वर हमें सुरक्षित रूप से उस पार ले चलेगा l

चलें, दौड़ें नहीं
मैं उसे हर दिन सुबह का स्वागत करते हुए देखता हूँ l वह हमारी स्थानीय तेज गति से चलनेवाली(power walker) थी l जब मैं अपने बच्चों को स्कूल ले जाता था, वह सड़क के किनारे होती थी l एक बड़ा हेडफ़ोन लगाई हुई और घुटने तक ऊँचे, रंगीन मोज़े, पहनी हुई वह हाथों और पैरों को बारी-बारी से चलाती हुई, और हमेशा एक पैर को धरती के संपर्क में रखते हुए चलती थी l यह खेल दौड़ने या धीरे-धीरे दौड़ने(jogging) से अलग है l पावर वॉकिंग में जानबूझकर संयम, दौड़ने के लिए शरीर के स्वाभाविक इच्छा पर प्रबल होना शामिल है l हालाँकि यह ऐसा नहीं लगता है, लेकिन दौड़ने या जॉगिंग करने में जितनी ऊर्जा, फोकस और शक्ति शामिल है, उतनी ही इसमें है l लेकिन यह नियंत्रण में है l
ताकत नियंत्रण में─यही कुंजी है l बाइबल की विनम्रता, पावर वॉकिंग की तरह, अक्सर कमजोरी के रूप में देखी जाती है l सच यह है, यह वैसी नहीं है l विनम्रता हमारी ताकत या क्षमताओं को कम करना नहीं है, बल्कि उन्हें सुबह-सुबह चलने वाले पावर वॉकर के दिमाग द्वारा निर्देशित बाहों और टांगों और पैरों की तरह बहुत अधिक नियंत्रित करने की अनुमति देता है l
मीका के शब्द “नम्रता से” चलना परमेश्वर के आगे जाने की हमारे प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए एक आह्वान हैं l वह कहता है, “तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे” (6:8), और वह अपने साथ कुछ करने की और जल्दी करने की इच्छा उत्पन्न कर सकता है l यह न्यायसंगत है क्योंकि हमारे संसार में दैनिक अन्याय अत्यधिक अभिभूत करने वाला है l लेकिन हम परमेश्वर द्वारा नियंत्रित और निर्देशित हों l हमारा लक्ष्य यह है कि इस धरती पर उसके राज्य के आगमन में उसकी इच्छा और उद्देश्य पूरे हों l

जो कुछ वह कर सकी, उसने किया
उसने वाहक पट्टा(conveyor belt) पर कपकेक के प्लास्टिक के डिब्बे को रखकर खजांची की ओर भेजा l इसके बाद जन्मदिन कार्ड और चिप्स के विभिन्न पैकेट थे l उसके बाल पोनीटेल(ponytail) से बाहर, उसके थके माथे पर फैले हुए थे l उसका नन्हा बच्चा ध्यान देने के लिए चिल्ला रहा था l क्लर्क ने कुल जोड़ बताया और माँ का चेहरा उतर गया l “ओह, मुझे लगता है कि मुझे कुछ वापस करना होगा l लेकिन ये उसकी पार्टी के लिए हैं, उसने अपने बच्चे को देखते और अफ़सोस जताते हुए गहरी साँस ली l
उसके पीछे लाइन में खड़े, एक अन्य ग्राहक ने इस माँ के दर्द को पहचान लिया l यह दृश्य बैतनिय्याह की मरियम के लिए यीशु के शब्दों में जाना-पहचाना है : “जो कुछ वह कर सकी, उसने किया” (मरकुस 14:8) l मरियम ने उसकी मृत्यु और गाड़े जाने से पहले बहुमूल्य इत्र से उसका अभिषेक किया, जिसके बाद शिष्यों ने उसका उपहास किया l यीशु ने उसके द्वारा किये गए कार्यों का जश्न मनाकर अपने शिष्यों को सुधारा l उसने यह नहीं कहा, "उसने वह सब किया जो वह कर सकती थी,” बल्कि, उसने कहा, “जो कुछ वह कर सकी, उसने किया l” इत्र की अत्यधिक लागत उसका मतलब नहीं था l यह मरियम के प्रेम का उसके कार्य द्वारा दर्शशाया जाना था जो मायने रखता था l यीशु के साथ रिश्ता प्रतिक्रिया में परिणित होता है l
उसी क्षण, माँ के एतराज करने से पहले, दूसरा ग्राहक आगे झुककर अपने क्रेडिट कार्ड को कार्ड रीडर में डालकर, खरीद के लिए भुगतान कर दिया l यह एक बड़ा खर्च नहीं था, और उस महीने उसके पास अतिरिक्त धन था l लेकिन उस माँ के लिए, यह सब कुछ था l शुद्ध प्रेम का एक भाव-प्रदर्शन उसकी आवश्यकता के क्षण में प्रगट हो गया l

अंधकार का सामना
1960 के दशक के मध्य में, दो लोगों ने मानव मानस पर अंधेरे के प्रभावों पर शोध में भाग लिया l उन्होंने अलग-अलग गुफाओं में प्रवेश किया, जबकि शोधकर्ताओं ने उनके खाने और सोने की आदतों पर नज़र रखी l एक 88 दिनों तक, दूसरा 126 दिनों तक पूर्ण अंधेरे में रहा l प्रत्येक ने अनुमान लगाया कि वे कितने समय तक अंधेरे में रह सकते हैं और महीनों तक परे रहे l एक ने सोचा कि वह केवल एक झपकी ले रहा था, केवल यह जानने के लिए कि वह 30 घंटे तक सोया l अंधेरा गुमराह करता है l
परमेश्वर के लोगों ने खुद को आसन्न निर्वासन के अंधेरे में पाया l इस बात से अनिश्चित रहकर, उन्होंने इंतजार किया कि क्या होनेवाला था l यशायाह ने उनके भटकाव के लिए रूपक के तौर पर और परमेश्वर के न्याय के बारे में बोलने के तरीके के रूप में अंधेरे का उपयोग किया (यशायाह 8:22) l इससे पहले, मिस्रियों पर एक महामारी के रूप में अंधेरा आया था (निर्गमन 10:2129) l अब इस्राएल ने खुद को अंधेरे में पाया l
लेकिन एक रोशनी आनेवाली थी l “जो लोग अंधियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी” (यशायाह 9:2) l उत्पीड़न समाप्त होनेवाला था, और भटकाव खत्म होनेवाला था l एक बालक सब कुछ बदलने और एक नया दिन लाने के लिए आनेवाला था─क्षमा और छुटकारे का दिन (पद. 6) l
सचमुच यीशु आया! और यद्यपि संसार का अंधकार गुमराह करनेवाला हो सकता है, हम मसीह में मिलने वाले क्षमा, छुटकारा, और ज्योति में आराम का अनुभव करें l