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निराशजनक समाधान

सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, विलियम ऑफ़ ऑरेंज ने जानबूझकर अपने देश की अधिकांश भूमि को जलमग्न कर दिया l डच सम्राट ने हमलावर स्पेन के लोगों को खदेड़ने की कोशिश में इस तरह के कठोर उपाय का सहारा लिया l यह काम सफल नहीं हुआ, और खेती योग्य भूमि का एक विशाल महत्वपूर्ण हिस्सा समुद्र में डूब गया l वे कहते हैं, “निराशजनक समय निराशजनक उपायों की मांग करता है l”
यशायाह के दिन में, यरूशलेम निराशजनक उपायों की ओर मुड़ गया जब अश्शूरी सेना ने उन्हें धमकी दी l घेराबंदी सहने के लिए जल भंडारण व्यवस्था बनाने के साथ ही लोगों ने शहर की दीवारों को मजबूत करने के लिए घरों को भी तोड़ दिये l इस तरह के हथकंडे भले ही समझदारी के रहे हों, लेकिन उन्होंने सबसे अहम कदम को नजरअंदाज किया l “तू ने दोनों दीवारों के बीच पुराने पोखरे के जल के लिए एक कुण्ड खोदा l परन्तु तू ने उसके कर्ता को स्मरण नहीं किया, जिसने प्राचीनकाल से उसको ठहरा रखा था, और न उसकी ओर तू ने दृष्टि की” (यशायाह 22:11) l
आज हमारे लिए अपने घरों के बाहर एक असली सेना का सामना करने की संभावना नहीं है । ओसवाल्ड चैम्बर्स ने कहा, “संप्रहार(battering) हमेशा आम तरीकों से और आम लोगों के माध्यम से आते हैं l” फिर भी, इस तरह के संप्रहार वास्तविक खतरें हैं l शुक्र है, वे अपने साथ हमारी ज़रूरत के लिए पहले परमेश्वर की ओर मुड़ने के लिए उसका निमंत्रण लाते हैं l
जब जीवन की चिड़चिड़ाहट और रुकावटें आती हैं, तो क्या हम उन्हें परमेश्वर की ओर मुड़ने के अवसरों के रूप में देखेंगे? या हम अपने निराशजनक समाधान की तलाश करेंगे?

अलग ढंग से सोचना

कॉलेज के दौरान, मैंने वेनेजुएला में गर्मियों का एक बड़ा हिस्सा बिताया l भोजन अद्भुत था, लोग दिलचस्प थे, मौसम और आतिथ्य मनोहर था l पहले या दो दिनों के भीतर, हालांकि, मैंने माना कि समय प्रबंधन पर मेरे विचार मेरे नए दोस्तों द्वारा साझा नहीं किए गए थे l अगर हम दोपहर को भोजन करने की योजना बनाते थे, तो इसका मतलब था 12:00 से 1:00 बजे के बीच कहीं भी l सभाओं या यात्रा के लिए भी उसी तरह : समय सीमा कठोर समय-पालन के बिना सन्निकटन(approximation) थे l मैंने महसूस किया कि “समय पर होने” का मेरा विचार मेरी समझ से कहीं अधिक सांस्कृतिक रूप से बना था l
आमतौर पर हमारे कभी ध्यान दिए बिना, हम सभी अपने चारों-ओर की सांस्कृतिक मूल्यों द्वारा आकार पाते हैं l पौलुस इस सांस्कृतिक बल को “संसार” कहता है (रोमियों 12:2) l यहाँ, “संसार” का अर्थ भौतिक संसार नहीं है, बल्कि यह सोचने के तरीके को संदर्भित करता है जो हमारे अस्तित्व में व्याप्त है l यह निर्विवाद मान्यताओं और मार्गदर्शक आदर्शों को संदर्भित करता है जो हमें केवल इसलिए सुपुर्द किया गया है क्योंकि हम एक विशेष स्थान और समय में रहते हैं l
पौलुस सचेत करता है कि हमें “इस संसार के सदृश” नहीं बनना है l इसके बजाय, “[हमारे] मन के नए हो जाने से [हमारा] चाल-चलन भी बदलता जाए” (पद.2) l निष्क्रिय रूप से सोचने के तरीकों को ग्रहण करना और विश्वास करना जो हमें लपेट लेती है, हमें परमेश्वर के सोचने के तरीके को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने के लिए बुलाया गया है और सीखने के लिए कि कैसे उसकी “भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा” समझें (पद.2) l काश हम हर एक दूसरी आवाज़ की जगह परमेश्वर का अनुसरण करना सीखें l

सादृश्य प्रतिरूप

एक आउटिंग/सैर के दौरान, हमारी मुलाकात एक महिला से हुयी जो मेरे पति के बचपन से ही उसके परिवार को जानती है l उसने ऐलन से लेकर हमारे बेटे, ज़ेवियर तक को देखा l “वह अपने पिता का सादृश्य प्रतिरूप है,” उसने कहा l "वो आँखें l वह मुस्कान l हां l उसके जैसा ही दिखता है l” जब उस महिला ने पिता और पुत्र के बीच इस तरह की मजबूत समानता को स्वीकार करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की, उसने उनके व्यक्तितव में भी समानताएं देखीं l फिर भी, हालांकि, वे कई मायनों में एक जैसे हैं, लेकिन मेरा बेटा अपने पिता को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता है l
केवल एक पुत्र है - यीशु - जो अपने पिता को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करता है l मसीह “अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्टि में पहिलौठा है” (कुलुस्सियों 1:15) l उसी में और उसके द्वारा और उसी के लिए सारी वस्तुएँ सृजी गयी हैं (पद.16) l “वही सभी वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएँ उसी में स्थिर रहती हैं” (पद.17) l
हम प्रार्थना और बाइबल अध्ययन में समय लगाकर, देहधारित परमेश्वर – यीशु को देखकर परमेश्वर का चरित्र समझ सकते हैं l वह हमें उसके प्रेम को कार्यरूप में देखने के लिए आमंत्रित करता है कि हम जांचें कि वह किस प्रकार पवित्रशास्त्र में और हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में अन्य लोगों के साथ बातचीत/व्यवहार करता है l अपने जीवन को मसीह को समर्पित करने और पवित्र आत्मा का उपहार प्राप्त करने के बाद, हम अपने प्रेमी पिता को जानने और उस पर भरोसा करने में बढ़ सकते हैं l वह हमें उसके चरित्र को प्रतिबिंबित करने के लिए बदल देता है, ताकि हम उसके लिए जी सकें l
कितना बड़ा आनंद होगा यदि दूसरे कह सकें कि हम बिलकुल यीशु के समान दिखाई देते हैं!

एक SOS(संकट सन्देश) भेजना

जब अलास्का के एक पहाड़ी क्षेत्र में बसने वाले की झोपड़ी में आग लग गई, तो बसने वाला अमेरिका के सबसे ठंडे राज्य में पर्याप्त आश्रय के बिना और कुछ प्रावधानों के साथ ही रह गया l तीन हफ्ते बाद, उस आदमी को आखिरकार बचा लिया गया जब एक विमान ने उड़ान भरी और उस बड़े SOS(संकट सन्देश) को देख लिया जो उसने बर्फ पर लिखकर उसे कालिख से काला कर दिया था l
भजनकार दाऊद निश्चय ही भयानक कठिनाई में था l वह ईर्ष्यालु राजा शाऊल द्वारा पीछा किया जा रहा था जो उसे मारना चाहता था l और इसलिए वह गत नगर भाग गया, जहाँ उसने अपने जीवन को बचाने के लिए पागल होने का नाटक किया (देखें 1 शमूएल 21) l उन घटनाओं में से भजन 34 का उदय हुआ, जहाँ दाऊद ने परमेश्वर से प्रार्थना की और शांति को प्राप्त किया (पद.4,6) l परमेश्वर ने उसकी विनती सुनी और उसको छुड़ाया l
क्या आप निराशजनक स्थिति में हैं और मदद के लिए पुकार रहे हैं? आश्वस्त रहें कि परमेश्वर आज भी हमारी निराशजनक प्रार्थनाओं को सुनता है और उनका जवाब देता है l जैसे दाऊद के साथ, वह हमारे संकट के पुकार के प्रति चौकस है और हमारे डर को दूर करता है (पद.4) —और कभी-कभी हमें “हमारे कष्टों से [छुड़ा लेता है]” (पद.6) l
पवित्रशास्त्र हमें “अपना बोझ यहोवा पर डाल” देने के लिए आमंत्रित करता है और “वह [हमें] संभालेगा” (भजन 55:22) l जब हम अपनी कठिन परिस्थितियों को परमेश्वर को दे देते हैं, तो हम विश्वास कर सकते हैं कि वह हमें ज़रूर सहायता देगा l हम उसके सक्षम हाथों में सुरक्षित हैं l

कुछ नया

ताजे पानी की कमी वाले क्षेत्रों में खेती मुश्किल है l इस समस्या को हल करने में मदद करने के लिए सीवॉटर ग्रीनहाउस कंपनी ने सोमालीलैंड, अफ्रीका और इसी तरह के जलवायु वाले अन्य देशों में कुछ नया बनाया है : “कूलिंग हाउस l” कुलिंग हाउस नालीदार कार्डबोर्ड से बने दीवारों पर खारा पानी को टपकाने के लिए सौर पंप का उपयोग करते हैं l जैसे ही पानी प्रत्येक पैनल के नीचे जाता है, वह अपना नमक पीछे छोड़ देता है l शेष बचा हुआ ज्यादादर ताजा पानी संरचना के अंदर वाष्पित हो जाता है, जो नमी वाली जगह बन जाती है जहां फल और सब्जी विकसित हो सकती हैं l
यशायाह नबी के द्वारा, परमेश्वर ने “नई बात” करने की प्रतिज्ञा की जब उसने प्राचीन इस्राएल के लिए “निर्जल देश में नदियाँ” [बहायीं] (यशायाह 43:19) l इस नई चीज़ ने पुरानी चीज़ के साथ फर्क दिखाया जो उसने अपने लोगों को मिस्र की सेना से बचाने के लिए किया था l लाल समुद्र की घटना याद है? परमेश्वर चाहता था कि उसके लोग अतीत को याद करें लेकिन उनके जीवनों में उसके वर्तमान भागीदारी को फीका न होने दें (पद.18) l उसने कहा, “देखो, मैं एक नई बात करता हूँ; वह अभी प्रगट होगी, क्या तुम उससे अनजान रहोगे? मैं जंगल में एक मार्ग बनाऊँगा” (पद.19) l
जबकि अतीत को देखना परमेश्वर के प्रबंध में हमारे विश्वास को सहारा देता है, अतीत में रहना वर्तमान में ईश्वर की आत्मा के सभी नए कार्यों के प्रति हमें अंधा बना सकता है l हम परमेश्वर को यह दिखाने के लिए कह सकते हैं कि वह वर्तमान में कैसे बढ़ रहा है - अपने लोगों की मदद करके, फिर से बनाकर, और थामकर l यह जागरूकता हमें दूसरों के साथ निकट और दूर की जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके साथ भागीदार बनाए l