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साहसपूर्वक बोलिए!

बानू ने रेस्तरां में अपने सहकर्मी से कहा, “वह आदमी है! वह आदमी है!” वह मेल्विन का जिक्र कर रही थी, जिसने भिन्न परिस्थितियों में पहली बार उसका सामना किया l जब वह अपने चर्च के लॉन में काम कर रहा था, तब आत्मा ने उसे एक स्त्री के साथ बातचीत शुरू करने के लिए कहा, जो एक वेश्या जान पड़ती थी l चर्च में आमंत्रित करने पर उसका जवाब था : “क्या तुम जानते हो कि मैं क्या करती हूँ? वे मुझे वहां पसंद नहीं करेंगे l” जब मेल्विन ने उसे यीशु के प्यार के बारे में बताया और उसकी सामर्थ्य के विषय उसे आश्वस्त किया जो उसकी जिंदगी बदल सकती थी, उसके चेहरे पर आंसू बह निकले l अब, कुछ हफ्ते बाद, बानू एक नए वातावरण में काम कर रही थी, जो जीवन को बदलने के लिए यीशु की सामर्थ्य का जीवित प्रमाण था l

विश्वासियों को प्रार्थना के लिए समर्पित करने के लिए प्रोत्साहित करने के संदर्भ में, प्रेरित पौलुस ने एक दुहरा अनुरोध किया : “हमारे लिए भी प्रार्थना करते रहो कि परमेश्वर हमारे लिए वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिसके कारण मैं कैद में हूँ, और उसे ऐसा प्रगट करूँ, जैसा मुझे करना उचित है” (कुलुस्सियों 4:3-4) l

क्या आपने यीशु के लिए साहसपूर्वक और स्पष्ट रूप से बोलने के अवसरों के लिए प्रार्थना की है? कितनी सटीक प्रार्थना है! ऐसी प्रार्थनाएँ मेल्विन की तरह उनके अनुयायियों को अनापेक्षित स्थानों और अनापेक्षित लोगों से उसके विषय बात करने में मार्गदर्शन कर सकती हैं l यीशु के लिए बोलना असहज लग सकता है, लेकिन पुरस्कार - परिवर्तित जीवन - हमारी असुविधाओं की भरपाई कर सकते हैं l

अतार्किक भय

इसका कोई तार्किक अर्थ नहीं है, लेकिन जब मेरे माता-पिता तीन महीने की अवधि के भीतर मर गए, तो मुझे डर था कि वे मुझे भूल जाएंगे l बेशक वे अब धरती पर नहीं थे, लेकिन इसने मुझे बड़ी अनिश्चितता के साथ छोड़ दिया l मैं एक युवा, अविवाहित वयस्क थी और सोचता थी कि उनके बिना जीवन को कैसे चलाऊंगी l वास्तव में अविवाहित और अकेला महसूस करते हुए, मैंने परमेश्वर को तलाशा l

एक सुबह मैंने उसे अपने तर्कहीन भय और उसके द्वारा लाई गई उदासी के बारे में बताया (भले ही वह उसे पहले से जानता था) l उस दिन मैंने ध्यान के लिए पवित्रशास्त्र का जो पाठ पढ़ा था, वह यशायाह 49 था : “क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपीते बच्चे को भूल जाए . . . ? हाँ, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता” (पद.15) l परमेश्वर ने यशायाह के द्वारा अपने लोगों को आश्वस्त किया कि वह उन्हें नहीं भूला है और बाद वह अपने पुत्र यीशु को भेजने के द्वारा उन्हें अपने पास पुनर्स्थापित करने का वचन दिया l लेकिन ये शब्द मेरे दिल को भी भा गए l माता या पिता के लिए अपने बच्चे को भूलना दुर्लभ है, फिर भी यह संभव है l लेकिन परमेश्वर? बिल्कुल नहीं l “मैंने तेरा चित्र अपनी हथेलियों पर खोदकर बनाया है,” उसने कहा l

मेरे लिए परमेश्वर का जवाब अधिक भय ला सकता था l लेकिन उसने खुद मुझे याद किया  जिससे मुझे शांति मिली, और वह वही था जिसकी मुझे जरूरत थी l यह इस खोज की शुरुआत थी कि परमेश्वर किसी माता-पिता या किसी और से भी अधिक निकट है, और वह हमें हर चीज से मदद करने का तरीका जानता है - यहां तक ​​कि हमारे अतार्किक भय भी l

फुस्फुसनेवाला गुम्बज(Whispering Gallery)

लंदन के सेंट पॉल कैथेड्रल(प्रधान गिरजाघर) के विशाल गुम्बज में, आगंतुक फुस्फुसानेवाला गुम्बज(Whispering Gallery) तक पहुंचने के लिए 259 सीढ़ियाँ चढ़ सकते हैं l वहाँ आप फुसफुसा सकते हैं और वृत्ताकार पथ में कहीं भी लगभग एक सौ फीट की दूरी पर भी बड़े फासले के पार दूसरा व्यक्ति आपको सुन सकता है l इंजीनियर्स इस विषमता को गुम्बज के गोलाकार आकार और एक फुसफुसाहट की कम तीव्रता वाली ध्वनि तरंगों का परिणाम बताते हैं l

हम इस बात के लिए कितना अधिक निश्चित होना चाहते हैं कि परमेश्वर हमारे कष्टदायी फुसफुसाहट को सुनता है! भजन इस बात से भरे पड़े हैं कि वह हमारी पुकार, प्रार्थना, सुनता है – और फुसफुसाता है l दाऊद लिखता है, अपने संकट में मैंने यहोवा परमेश्वर को पुकारा; मैंने अपने परमेश्वर की दोहाई दी” (भजन 18:6) l बार-बार, उन्होंने और अन्य भजनकार अनुनय करते हैं, “मेरी प्रार्थना सुन ले” (4:1), मेरी वाणी (5:3), [मेरा] कराहना (102:20) l कभी-कभी अभिव्यक्ति एक फुसफुसाहट से अधिक होती है, “मेरी ओर कान [लगा] (77:1), जहाँ पर “हृदय में ध्यान” और “आत्मा खोज . . . करती है” (77:6 Hindi – C.L.) l

इन दलीलों के जवाब में, भजनकार - दाऊद की तरह भजन 18:6 में – प्रगट करते हैं कि परमेश्वर सुन रहा है : “उसने अपने मंदिर में से मेरी बातें सुनी; और मेरी दोहाई उसके पास पहुंचकर उसके कानों में पड़ी l” चूँकि वास्तविक मंदिर अभी तक नहीं बनाया गया था, हो सकता है कि दाऊद परमेश्वर द्वारा अपने स्वर्गीय निवास में सुनने का सन्दर्भ दे रहा हो?

पृथ्वी के ऊपर स्वर्ग के अपने “फुसफुसाने वाले गुम्बज” से, परमेश्वर हमारी गहरी मंद ध्वनि, हमारी फुसफुसाहट की ओर भी झुकता है, और सुनता है l

मिलकर दुःख उठाना

2013 में, ब्रिटिश शाही नौसैनिक दिग्गज सत्तर वर्षीय जेम्स मैककोनेल का निधन हो गया l  मैककोनेल का कोई परिवार नहीं था, और उनके वृद्धाश्रम के कर्मचारियों को डर था कि कोई भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होगा l मैककोनेल की यादगार(memorial) सेवा को संचालित करने के लिए नियुक्त किए गए एक व्यक्ति ने एक फेसबुक संदेश पोस्ट किया : “इस दिन और इस उम्र में यह काफी दुखद है कि किसी को भी इस दुनिया को छोड़ना है जिनकी मृत्यु पर कोई शोक करने वाला नहीं है, लेकिन यह व्यक्ति एक परिवार था . . . यदि आप इसके अंतिम संस्कार में अपना सम्मान देने के लिए उपस्थित हो सकते हैं जो पूर्व नौसैनिक था तो कृपया ज़रूर उपस्थित हों l” दो सौ शाही सैनिक उपस्थित हुए!

इन ब्रिटिश हमवतन लोगों ने एक बाइबिल सत्य दिखाया : “देह में एक हो अंग नहीं परन्तु बहुत से हैं,” पौलुस कहता है (1 कुरिन्थियों 12:14) l हम अकेले नहीं हैं l ठीक इसके विपरीत : हम यीशु में बंधे हुए हैं l पवित्रशास्त्र जैविक अंतरसंबंध का खुलासा करता है : यदि एक अंग दुःख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दुःख पाते हैं” (पद.26) l यीशु के विश्वासियों के रूप में, परमेश्वर के नए परिवार के सदस्य, हम मिलकर पीड़ा में, दुःख में, उन अँधेरे स्थानों में, जहाँ हम अकेले जाने से डरेंगे, ओर बढ़ते हैं l लेकिन शुक्र है कि हम अकेले नहीं जाते l

शायद दुख का सबसे बुरा हिस्सा वह है जब हम महसूस करते हैं कि हम अकेले ही अंधेरे में डूब रहे हैं l हालाँकि, परमेश्वर एक नया समुदाय बनाता है जो मिलकर दुःख उठता है l एक नया समुदाय जहां किसी को अंधेरे में नहीं छोड़ा जाना चाहिए l

दास सुनता है

अगर वायरलेस रेडियो चालू होता,  तो उन्हें पता चल जाता कि टाइटैनिक  डूब रहा है l  एक अन्य जहाज के रेडियो ऑपरेटर सिरिल इवांस ने टाइटैनिक  के रेडियो ऑपरेटर जैक फिलिप्स को एक संदेश भेजने की कोशिश की थी - उन्हें बताने के लिए कि वे बर्फ के एक बड़े तैरते टुकड़े का सामना कर चुके हैं l  लेकिन टाइटैनिक का रेडियो ऑपरेटर यात्रियों के संदेशों को आगे भेजने में व्यस्त था और उसने उसे रुखाई से चुप रहने को कहा l  इसलिए दूसरे ऑपरेटर ने अनिच्छा से अपने रेडियो को बंद कर दिया और सोने चला गया l  दस मिनट बाद,  टाइटैनिक  ने बर्फ के एक चट्टान से टकराया l उनके संकट के संकेत के कोई उत्तर नहीं मिले  क्योंकि कोई भी नहीं सुन रहा था l

1 शमूएल में हमने पढ़ा कि इस्राएल के याजक भ्रष्ट थे और राष्ट्र के खतरे में पड़ने के कारण उनकी आध्यात्मिक दृष्टि और सुनने की शक्ति ख़त्म हो गए थे l  “उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था, और दर्शन कम मिलता था” (1 शमूएल 3:1) l  फिर भी परमेश्वर  अपने लोगों को नहीं छोड़ने वाला था l  उसने शमूएल नाम के एक युवा लड़के से बात करनी शुरू की,  जिसका पालन पोषण  याजक के घर में किया जा रहा था l  शमूएल के नाम का अर्थ है “परमेश्वर सुनता है” – परमेश्वर द्वारा उसकी माँ की प्रार्थना सुनने का स्मारक l लेकिन शमूएल को सीखना था कि परमेश्वर को कैसे सुनना होगा l

“कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है l” (पद.10) l यह दास ही है जो सुनता है l हम भी सुनने और पवित्रशास्त्र में परमेश्वर द्वारा प्रगट बातों को माने l आइये हम उसको अपना जीवन समर्पित करें और दीन सेवकों की तरह व्यवहार करें  - जिनके “रेडियो” चालू हैं l