अंधकार में ज्योति
दीज़ आर द जेनेरेशंस (These Are the Generations) पुस्तक में, मिस्टर बे परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और सुसमाचार के सामर्थ्य का वर्णन करते हैं जो अंधकार में प्रवेश कर सकता है l उनके दादा, माता-पिता, और उनके अपने परिवार को मसीह में अपने विश्वास को साझा करने के कारण सताया गया l परन्तु मिस्टर बे के साथ एक रुचिकर घटना हुयी जब एक मित्र को परमेश्वर के विषय बताने के कारण उन्हें जेल में डाला गया : उसका विश्वास बढ़ गया l यही बात उनके माता पिता के लिए भी सच थी जब उन्हें एक बंदी शिविर में भेज दिया गया था – उन्होंने वहाँ भी लगातार मसीह का प्रेम साझा किया l मिस्टर बे ने युहन्ना 1:5 की प्रतिज्ञा को सच पाया : “ज्योति अंधकार में चमकती है, और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया l”
अपनी गिरफ्तारी और क्रूसीकरण से पहले, यीशु ने अपने शिष्यों को उनके सामने आनेवाली मुसीबत के विषय चेतावनी दी l वे लोगों द्वारा त्यागा जाने वाला था जो “ऐसा . . . इसलिए करेंगे कि उन्होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं” (16:3) परन्तु उन्होंने तस्सली के शब्द कहे : “संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है” (पद.33) l
जबकि यीशु के कई विश्वासियों ने मिस्टर बे के परिवार की तरह उनके स्तर तक के सताव का अनुभव नहीं किया है, हम मुसीबत का सामना करने की अपेक्षा कर सकते हैं l परन्तु हमें निराश या आक्रोशित नहीं होना चाहिए l हमारे पास एक सहायक है – पवित्र आत्मा जिसे यीशु ने भेजने का वादा किया था l हम मार्गदर्शन और तसल्ली के लिए उसकी ओर मुड़ सकते हैं (पद.7) l परमेश्वर की उपस्थिति की सामर्थ्य हमें अंधकारमय समय में दृढ़ता से थामे रहेगा l

सड़क जिस पर यात्रा नहीं की गयी हो
लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मेरे पास पंचवर्षीय योजना है l जिस सड़क पर मैंने कभी यात्रा नहीं की है, मैं पांच साल “आगे” की योजना कैसे बना सकता हूँ?
मैं मुड़कर 1960 के दशक में देखता हूँ जब मैं सैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी के मध्य पासबान था l मैं कॉलेज में भौतिक शिक्षा में विशेषता प्राप्त करने गया था और बहुत आनंद किया था, परन्तु मैं विद्वता हासिल नहीं कर सका l अपनी नयी जिम्मेदारी में मैंने खुद को अयोग्य महसूस किया l अधिकाँश दिन मैं परिसर में घूमता रहा, अँधेरे में एक अंधे आदमी की तरह टटोलते हुए, परमेश्वर से पूछता रहा कि मुझे क्या करना है l एक दिन एक विद्यार्थी “अनपेक्षित रूप से” मुझ से अपनी बिरादरी में एक बाइबल अध्ययन में अगुवाई करने को कहा l यही आरम्भ था l
परमेश्वर एक मोड़ पर खड़े होकर रास्ता नहीं बताता है : वह मार्गदर्शक हैं, कोई संकेतचिन्ह नहीं l वह हमारे साथ चलता है, उन रास्तों पर ले चलता है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी l केवल हमें उसके साथ-साथ चलना है l
मार्ग सरल नहीं होगा; मार्ग में “कठिन स्थान” भी होंगे l किन्तु परमेश्वर ने वादा किया है कि वह “अंधियारे को उजियाला” में बदल देगा और हमें “कभी न [त्यागेगा]” (यशायाह 42:16) l वह पूरे रास्ते हमारे साथ रहेगा l
पौलुस कहता है कि परमेश्वर “हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता हैं” (इफिसियों 3:20) l हम योजना बना सकते हैं और कल्पना कर सकते हैं, परन्तु हमारे प्रभु की कल्पना हमारी योजनाओं से परे है l हमें उन्हें बंधनमुक्त रखना चाहिए और देखना चाहिए कि परमेश्वर के मन में क्या है l

एक योद्धा की तरह चलें
अठारह साल की एम्मा विश्वासयोग्यता से सोशल मीडिया पर यीशु के बारे में बात करती है, भले ही धौंस देनेवाले मसीह के लिए उसकी ख़ुशी और उत्साही प्रेम की आलोचना करते हैं l कुछ लोगों ने उसके शारीरिक रूप-रंग के बारे में टिप्पणी करके हमला किया l परमेश्वर में उसकी भक्ति के कारण दूसरों ने कहा कि उसमें बुद्धि की कमी है l यद्यपि कठोर शब्द एम्मा के हृदय में गहरी चोट पहुंचाते हैं, वह दृढ़ विश्वास और प्रेम के साथ यीशु और दूसरों के लिए सुसमाचार फैलाती है l कभी-कभी हालाँकि, वह अपनी पहचान और मूल्य को दूसरों की आलोचना पर निर्धारित मानती है l जब ऐसा होता है, वह परमेश्वर से सहायता मांगती है, अपने सतानेवालों के लिए प्रार्थना करती है, वचन पर चिंतन करती है, और आत्मा-सशक्त साहस और आत्मविश्वास में दृढ़ रहती है l
गिदोन ने भयंकर अत्याचारियों – मिद्यानियों – का सामना किया (न्यायियों 6:1-10) l यद्यपि परमेश्वर ने उसे “शूरवीर सूरमा” संबोधित किया, गिदोन को अपने संदेह, स्वयं द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों, और असुरक्षाओं से बाहर निकलने के लिए संघर्ष करना पड़ा (पद. 11-15) l एक से ज्यादा अवसरों पर, उसने परमेश्वर की उपस्थिति और अपने खुद की योग्यताओं पर संदेह किया, परन्तु आख़िरकार विश्वास करके आत्मसमर्पण कर दिया l
जब हम परमेश्वर पर भरोसा करते हैं, तो हम ऐसे जी सकते हैं जैसे हम विश्वास करते हैं कि वह जो हमारे बारे में कहता है वह सच है l उस समय भी जब सताव हमें हमारी पहचान पर संदेह करने के लिए प्रेरित करता है, हमारा प्रेमी पिता अपनी उपस्थिति की पुष्टि करता है और हमारे पक्ष में लड़ता है l वह इस बात की पुष्टि करता है कि हम पराक्रमी योद्धाओं की तरह लड़ सकते हैं, जो उसके सम्पूर्ण प्रेम से सज्जित है, उसके अनंत अनुग्रह और भरोसेमंद सत्य में सुरक्षित है l

स्ट्रीट टीम में शामिल हों
सैन फ्रैंसिस्को में शहर स्वास्थ्य कार्यकर्ता नशीले पदार्थों (Opioid) के लत से पीड़ित बेघर लोगों के इलाज लिए दवाईयाँ उन तक पहुंचा रहे हैं l यह कार्यक्रम उन बेघर लोगों की बढ़ती संख्या के जवाब में आरम्भ हुआ जो नशेवाली दवा का इंजेक्शन लेते हैं l साधारणतया, डॉक्टर मरीजों के क्लिनिक में आने का इंतज़ार करते हैं l इसके बजाए स्वास्थ्य देखभाल पीड़ितों तक ले जाने से, मरीजों को परिवहन की चुनौतियों को पार करने की अथवा डॉक्टर के साथ नियोजित भेंट याद रखने की ज़रूरत नहीं पड़ती है l
स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकतामंदों के पास जाना मुझे उस तरीके की याद दिलाता है जिस प्रकार यीशु हमारी ज़रूरत में हमारे पास आया l अपनी सेवकाई में, यीशु उन लोगों को तलाशा जिनकी उपेक्षा धार्मिक कुलीन वर्ग कर रहे थे : वह “पापियों और चुंगी लेनेवालों के साथ” भोजन किया (पद.16) l पूछे जाने पर कि क्यों वह ऐसा करता था, यीशु ने उत्तर दिया, “भले चंगों को वैध की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है” (पद.17) l उसने आगे कहा कि उसका इरादा धर्मियों को नहीं, पापियों को उसके साथ सम्बन्ध रखने के लिए बुलाना था l
जब हमें पता चलता है कि हम सभी “बीमार” हैं और डॉक्टर की ज़रूरत है (रोमियों 3:10), हम “पापियों और चुंगी लेनेवालों” अर्थात् हमारे साथ भोजन करने की यीशु की इच्छा को बेहतर ढंग से सराह सकते हैं l बदले में, सैन फ्रैंसिस्को में स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं की तरह, यीशु ने हमें आवश्यकतामंद दूसरों तक उसका बचानेवाला सन्देश ले जाने के लिए “स्ट्रीट टीम” के रूप में नियुक्त किया है l

अनुग्रह के बीज
भारत के एक व्यक्ति ने, अपनी सुखी, रेतीली उसर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए लगभग चार दशक से अधिक, तक मेहनत किया l यह देखते हुए कि अपरदन और परिवर्तनीय परितंत्र(ecosystem) ने नदी के निकट उसके प्रिय द्वीप को किस तरह नष्ट कर दिया था, उसने एक एक करके पेड़ लगाना शुरू किया, बाँस के पौधे फिर कपास के पौधे l वर्तमान में, 1,300 एकड़ से अधिक भूमि हरे-भरे जंगल और पर्याप्त वन्य-जीव से भरपूर है l हालाँकि, उस व्यक्ति का मानना है कि उसके द्वारा पुनर्जीवन संभव नहीं हुआ l प्राकृतिक संसार जिस अद्भुत तरीके से अभिकल्पित है, को पहचानते हुए, वह आश्चर्यचकित होता है कि किस प्रकार बीज वायु द्वारा उपजाऊ भूमि तक पहुँचाए जाते हैं l पक्षी और जानवर भी उन्हें बोने में सहयोग करते हैं, और नदियाँ पौधों और पेड़ों को बढ़ने में योगदान देती हैं l
सृष्टि ऐसे तरीकों से काम करती है जिसे हम समझ नहीं पाते और नियंत्रित नहीं कर पाते हैं l यीशु के अनुसार, यही सिद्धांत परमेश्वर के राज्य पर भी लागू होता है l “यीशु ने कहा, “परमेश्वर का राज्य ऐसा है, जैसे कोई मनुष्य भूमि पर बीज छीटें . . . वह बीज ऐसे उगे और बढ़े कि वह न जाने” (मरकुस 4:26-27) l परमेश्वर हमारे परिचालन के बिना संसार में असली उपहार के रूप में जीवन और चंगाई लाता है l हम वही करते हैं जो परमेश्वर हमें करने को कहता है, और तब हम जीवन को प्रगट होते देखते हैं l हम जानते हैं कि सब कुछ उसके अनुग्रह से ही आता है l
यह विश्वास करना बहकानेवाली बात है कि हम किसी के हृदय को बदलने के लिए जिम्मेदार हैं या अपने विश्वासयोग्य प्रयासों के परिणाम को निश्चित कर सकते हैं l हालाँकि, हमें उस थकानेवाले तनाव के अधीन रहने की ज़रूरत नहीं है l परमेश्वर हमारे समस्त बीजों को बढ़ाता है l यह सब अनुग्रह है l