
खतरनाक सामग्री
साईरन की आवाज़ बढ़कर कानों को चुभने वाली आवाज़ तक बढ़ गयी जब एक आपातकालीन वाहन गति से मेरे कार के निकट से निकली l उसकी चमकती रोशनी ने मेरे कार की विंडशील्ड(कार का हवारोधी शीशा) से होकर चमकते हुए, ट्रक के किनारे पर छपे हुए “खतरनाक सामग्री” शब्दों को प्रकाशित कर दी l बाद में मुझे पता चला कि यह किसी विज्ञान प्रयोगशाला की ओर गति से जा रहा था जहाँ 400 गैलन सल्फ्यूरिक एसिड का कंटेनर(container) रिसना शुरू हो गया था l आपातकालीन श्रमिकों को इसे तुरंत रोकना था क्योंकि यह अपने संपर्क में आनेवाले किसी भी चीज को क्षति पहुँचा सकता था l
जैसे ही मैंने इस समाचार पर विचार किया, मैंने सोचा कि मेरे मुँह से कठोर या आलोचनात्मक शब्द “रिसने” पर यदि हर समय साईरन की तेज़ आवाज़ सुनाई देती है तो क्या हो सकता है? दुर्भाग्यवश, यह हमारे घर के चारों ओर कोलाहलपूर्ण हो सकता था l
नबी यशायाह ने अपने पाप के विषय जागरूकता की इस भावना को साझा किया l जब उसने एक दर्शन में परमेश्वर की महिमा देखी, वह अपनी अयोग्यता से अभिभूत हो गया l उसने पहचान लिया कि वह “अशुद्ध होंठवाला मनुष्य” था और उसी समस्या को साझा करने वाले लोगों के साथ रहता था (यशायाह 6:5) l उसके आगे जो हुआ मुझे आशा देती है l एक स्वर्गदूत ने एक अंगारे से उसके होंठों को छूकर समझाया, “तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए” (पद.7) l
हम पल पल अपने शब्दों के विषय निर्णय कर सकते हैं – लिखित या उच्चारित दोनों l क्या वो “खतरनाक” सामग्री होगी, या हम परमेश्वर की महिमा को हमें दोषी ठहराने देंगे और उसके अनुग्रह को हमें चंगा करने देंगे ताकि हम जो भी व्यक्त करते हैं उसके द्वारा उसकी महिमा हो?

एक ईमानदार धन्यवाद
ज़ेवियर के पहले जॉब इन्टरव्यू की तैयारी में, मेरे पति, एलन ने हमारे बेटे को भावी नियोक्ताओं के साथ मुलाकात के बाद उनको भेजने के लिए उसे धन्यवाद कार्ड का एक पैकेट दिया l फिर उन्होंने किसी को नौकरी पर रखनेवाले साक्षात्कारकर्ता होने का नाटक किया, अपने दशकों के प्रबंधक के अनुभव का उपयोग करते हुए ज़ेवियर से सवाल पूछे l भूमिका निभाने के बाद, हमारे बेटे ने अपने संक्षिप्त विवरण(resume) की कई प्रतियाँ एक फोल्डर में रख लिया l वह मुस्कुराया जब एलन ने उसे कार्ड्स के विषय याद दिलाया l “मुझे मालूम है,” उसने कहा l एक ईमानदार धन्यवाद-नोट मुझे अन्य सभी आवेदकों से अलग कर देगा l”
जब प्रबंधक ने ज़विएर को नौकरी पर रखने के लिए बुलाया, उसने पहले हाथ से लिखे धन्यवाद-कार्ड के लिए आभार व्यक्त किया, जो उसने वर्षों बाद प्राप्त किया था l
धन्यवाद कहना एक स्थायी प्रभाव बनाता है l भजन संहिता की पुस्तक में भजनकारों की हार्दिक प्रार्थनाओं और कृतज्ञ उपासना को संरक्षित किया गया था l हालाँकि एक सौ पचास भजन हैं, ये दो पद कृतज्ञता के सन्देश को दर्शाते हैं : “हे यहोवा परमेश्वर, मैं अपने पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूँगा; मैं तेरे सब आश्चर्यकर्मों का वर्णन करूँगा l मैं तेरे कारण आनंदित और प्रफुल्लित होऊंगा, हे परमप्रधान, मैं तेरे नाम का भजन गाऊँगा” (भजन 9:1-2) l
हम सभी परमेश्वर के अद्भुत कार्यों के लिए अपना आभार व्यक्त करना समाप्त नहीं कर पाएंगे l लेकिन हम अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा ईमानदारी से धन्यवाद की शुरुआत कर सकते हैं, हम कृतज्ञ उपासना की जीवन शैली को विकसित कर सकते हैं, परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए उसके द्वारा किये गए सभी कार्यों को स्वीकार करके और सब कुछ जो वह पूरी करने का वादा करता है l

लालची लोभी
प्राचीन कथा द बॉय एंड द फिल्बर्ट्स(नट्स)The Boy and the Filberts(Nuts) में, एक लड़का अपने हाथ बादाम के जार में डालकर मुठी भर बादाम निकालना चाहता है l लेकिन उसकी मुट्ठी इतनी भरी हुयी होती है कि वह जार में फंस जाती है l अपने इनाम का थोड़ा सा भी हिस्सा खोने के लिए तैयार नहीं होने पर, लड़का रोने लगता है l आखिरकार, उसे कुछ बादाम छोड़ने की सलाह दी जाती है कि उसका हाथ निकल जाए l लालच एक कठोर बॉस हो सकता है l
सभोपदेशक का बुद्धिमान शिक्षक हाथों के विषय एक सबक के साथ इस नैतिकता को दर्शाता है और वह हमारे बारे में क्या कहते हैं l उसने लालची के साथ आलसी की तुलना और विषमता दिखाया जब उसने लिखा : “मुर्ख छाती पर हाथ रखे रहता, और अपना मांस खाता है l चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और मन का कुढ़ना है” (4:5-6) l जबकि आलसी तब तक विलम्ब करते हैं जब तक वे बर्बाद नहीं हो जाते, जो लोग धन का पीछा करते हैं उन्हें एहसास होता है कि उनका प्रयास “व्यर्थ है – एक दुखी व्यवसाय!” (पद.8) l
शिक्षक के अनुसार, अभिलाषित अवस्था लालची लोभी के परिश्रम से अलग होकर जो वास्तव में हमारा है उसमें संतोष प्राप्त करना है l क्योंकि जो हमारा है वह सदैव बना रहेगा l जैसे यीशु ने कहा, “यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा?

वह समझ गया
पास्टर वाट्सन जोन्स को साइकिल चलाना सीखना याद है l उसके पिता छोटे वाट्सन के साथ चल रहे थे जब उसने कुछ लड़कियों को पोर्च पर बैठे देखा l “डैडी, मैं समझ गया!” उसने कहा l उसने नहीं समझा था l उसने बहुत देर से पहचाना कि उसके पिता के स्थिर पकड़ के बिना उसने संतुलन करना नहीं सीखा था l जैसा कि उसकी सोच थी वह बड़ा नहीं हुआ था l
हमारे स्वर्गिक पिता हमारे लिए इच्छा रखते हैं कि हम बड़े हो जाएँ और “एक सिद्ध मनुष्य . . . बन जाएँ और मसीह के पूरे डील-डौल तक . . . बढ़ जाएँ” (इफिसियों 4:13) l लेकिन आध्यात्मिक परिपक्वता प्राकृतिक परिपक्वता से अलग है l माता-पिता अपने बच्चों को आत्मनिर्भर होने के लिए बढाते हैं, उस समय तक जब उनकी आवश्यकता नहीं होती l हमारे दिव्य पिता हमें प्रतिदिन और अधिक उसपर निर्भर होने के लिए हमारी परवरिश करता है l
पतरस अपनी पत्री को इस प्रतिज्ञा के साथ आरम्भ करता है कि “हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शांति तुम में बढती जाए” (2 पतरस 1:2; 3:18) l परिपक्व मसीही यीशु की अपनी ज़रूरत को सदैव महसूस करते हैं l
वाट्सन चेतावनी देते हैं, “हममें से कुछ लोग जीवन के हैंडल से यीशु के हाथों को हटाने में व्यस्त है l” जैसे कि हमें थामने के लिए, हमें उठाने के लिए, और जब हम लड़खड़ाते और विफल होते हैं, तब हमें उसके मजबूत हाथों की ज़रूरत नहीं है l हम मसीह पर अपनी निर्भरता से आगे नहीं बढ़ सकते हैं l हम उसके विषय अपने कृपा और ज्ञान की गहराई में केवल अपने जड़ों को डूबो कर बढ़ते हैं l
