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प्रेमोत्सव

एक डैनिश फिल्म बैबेट फीस्ट (Babette’s Feast) में, एक तटीय गाँव में एक फ्रांसीसी शरणार्थी दिखाई देता है l समाज के धार्मिक जीवन की अगुआई करनेवाली, दो वृद्ध बहनें, उसे अपने घर के भीतर ले जाती हैं और चौदह वर्ष के लिए बैबेट उनकी सेविका के रूप में काम करती है l जब बैबेट ढेर सारा पैसा कमा लेती हैं वह बारह लोगों की मंडली को अपने साथ असाधारण फ्रांसीसी भोजन और बहुत कुछ और खाने को आमंत्रित करती है l

एक भोजन खाने के बाद दूसरा भोजन खाना आरंभ करते के दौरान, अतिथि सुस्ताते हैं; कुछ लोग क्षमा पाते हैं, कुछ प्रेम को फिर से जागृत पाते हैं, और कुछ लोग उन आश्चर्यक्रमों को याद करने लगते हैं जो उन्होंने देखे थे और सच्चाइयाँ जो उन्होंने बचपन में सीखे थे l “याद करें कि हमें क्या सिखाया गया था?” वे कहते हैं l “छोटे बच्चे, एक दूसरे से प्यार करो l” जब भोजन समाप्त होता है, बैबेट बहनों को बताती है कि उसने भोजन पर अपना सब कुछ खर्च दिया l उसने सब कुछ दे दिया – जिसमें पेरिस में प्रसिद्द रसोइया के अपने पुराने जीवन में लौटने का कोई अवसर भी शामिल था – इसलिए कि भोजन खाने वाले उसके मित्र अपने हृदयों को खुला महसूस कर सकें l

यीशु धरती पर एक अजनबी और सेवक के रूप में आया, और उसने सब कुछ दे दिया ताकि हमारी आत्मिक भूख संतुष्ट हो जाए l युहन्ना रचित सुसमाचार में, वह अपने सुननेवालों को याद दिलाता है कि जब उनके पूर्वज मरुभूमि में भूखे भटक रहे थे, परमेश्वर ने बटेर और रोटी का प्रबंध किया (निर्गमन 16) l उस भोजन ने थोड़े समय के लिए संतुष्ट किया, परन्तु यीशु प्रतिज्ञा करता है कि जो उन्हें “जीवन की रोटी” के रूप में ग्रहण करते हैं “हमेशा तक जीवित रहेंगे” (युहन्ना 6:48, 51) l उसका बलिदान हमारी आत्मिक लालसा को संतुष्ट करता है l

दूसरी श्रेणी नहीं

प्रथम विश्व युद्ध के समापन के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन को पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक के रूप में मान्य्ता दी गयी थी l परन्तु कम ही लोग जानते थे कि 1919 में विनाशकारी हृदयाघात के बाद, यह उनकी पत्नी ही थी जिन्होनें उनके सभी मामलों को प्रबंधित किया, यह निर्धारित करते हुए कि किन मामलों को उनके ध्यान में लाया जाना चाहिए l वास्तव में आधुनिक इतिहासकारों का मानना है कि थोड़े समय के लिए, यह वास्तव में इडिथ विल्सन ही थी जिन्होनें संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में सेवा की थी l

यदि आरंभिक कलीसिया के अगुओं के नाम पूछें जाएँ, तो हममें से अधिकाँश पतरस, पौलुस, और तीमुथियुस को मुट्ठीभर व्यक्तियों के रूप सूचीबद्ध करते हैं जिनके पास प्रलेखित वरदान थे l परन्तु रोमियों 16 में, पौलुस ने विभिन्न पृष्ठभूमि के लगभग चालीस व्यक्तियों को सूचीबद्ध किया है – पुरुष, महिलाएँ, दास, यहूदी, और गैरयहूदी – जिनमें से सभी ने विविध तरीके से कलीसिया के जीवन में योगदान दिया l

और कलीसिया के दूसरे दर्जे के सदस्यों पर विचार करने से दूर, यह स्पष्ट है कि पौलुस ने इन लोगों को सबसे अधिक सम्मान दिया l वह उन्हें प्रेरितों के मध्य उत्कृष्ट बताता है (पद.7) – लोग जिनको यीशु की सेवा करने के लिए सराहा जाना था l

हममें से कई लोग अनुभव करते हैं कि हम कलीसिया में अगुआ बनने के लिए बहुत सामान्य हैं l परन्तु सच्चाई यह है कि हममें से प्रयेक के पास वरदान हैं जिनका उपयोग दूसरों की सेवा और सहायता के लिए किये जा सकते हैं l परमेश्वर की ताकत में, हम अपने वरदानों को उसके आदर के लिए उपयोग करें!

सख्ती और कोमलता

कवि कार्ल सैंडबर्ग ने पूर्व अमेरिकी राष्टपति अब्राहम लिंकन के बारे में लिखा,  “कभी-कभी ही मानव जाति की कहानी में पृथ्वी पर आनेवाला एक व्यक्ति सख्त और कोमल दोनों होता है, . . . जिसके हृदय और मस्तिष्क में भयानक तूफ़ान और बयान से बाहर और सिद्ध शांति का विरोधाभास होता है l” “सख्ती और कोमलता” वर्णन करता है कि किस प्रकार लिंकन ने स्वतंत्रता की लालसा रखनेवाले व्यक्तियों के लिए चिंता के साथ अपने पद की ताकत को संतुलित किया l

सम्पूर्ण इतिहास में केवल एक व्यक्ति ने सामर्थ्य और कोमलता, ताकत और करुणा को पूर्णतया संतुलित किया l वह व्यक्ति यीशु मसीह है l  युहन्ना 8 में, जब धार्मिक अगुओं ने एक दोषी स्त्री को अपराधी ठहराने के लिए यीशु का सामना किया, उसने सख्ती और कोमलता दोनों ही प्रदर्शित किया l उसने रक्त-पिपासु भीड़ की मांगों का विरोध किया, और इसके बदले उनकी आलोचनात्मक दृष्टि को उन्हीं की ओर कर दिया l  उसने उनसे कहा, “तुम में जो निष्पाप हो, वही पहले उसको पत्थर मारे” (पद.7) l उसके बाद यीशु ने स्त्री से यह कहते हुए, “मैं भी तुम पर दण्ड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना” (पद.11) करुणा की कोमलता का नमूना दर्शाया l

पिता का हमें यीशु के समान बनाने के कार्य को हम उसकी “सख्ती और कोमलता” को हमारे अपने प्रत्युत्तर में प्रतिबिंबित करके प्रगट कर सकते हैं l हम संसार को उसका हृदय दिखा सकते हैं जो करुणा की कोमलता और न्याय की सख्ती दोनों ही का भूखा है l

जब हम प्रशंसा करते हैं

जब 2014 में नौ वर्ष का विली उसके सामने के अहाते से अगवा कर लिए गया था, उसने एवरी प्रेज़(Every Praise) अपना प्रिय सुसमाचार गीत बार-बार गया l अपहरणकर्ता द्वारा उसे तीन घंटे यहाँ-वहाँ घुमाने के दौरान, विली ने उसके बार-बार चुप रहने के आदेशों की अनदेखी की l आखिरकार, अपहरणकर्ता ने उसे कार के बाहर सुरक्षित छोड़ दिया l बाद में, विली ने मुठभेड़ का वर्णन करते हुए कहा कि जब उसने अनुभव किया कि उसके भय ने विश्वास के समक्ष हार मान ली है, अपहरणकर्ता गीत से परेशान दिखाई दिया l

विली की अपनी गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया पौलुस और सीलास द्वारा साझा किये गए अनुभव की याद दिलाती है l कोड़े लगाकर जेल में डाल दिये जाने के बाद, वे “प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रह थे, और कैदी उनकी सुन रहे थे l इतने में एकाएक बड़ा भूकंप आया, यहाँ तक कि बंदीगृह की नींव हिल गयी, और तुरंत सब द्वार खुल गए; और सब के बंधन खुल पड़े” (प्रेरितों 16:25-26) l

सामर्थ्य के इस भयानक प्रदर्शन का साक्षी होकर, जेलर ने पौलुस और सीलास के परमेश्वर पर विश्वास किया, और उसका सम्पूर्ण घराना उसके साथ बपतिस्मा लिया (पद.27-34) l प्रार्थना के द्वारा, उस रात भौतिक और आत्मिक दोनों ही जंजीरें टूट गयीं l

हम हमेशा पौलुस और सीलास, या विली की तरह प्रत्यक्ष रूप से नाटकीय बचाव का अनुभव नहीं कर सकते हैं l परन्तु हम जानते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों की प्रशंसा का प्रतिउत्तर देता है! जब वह क्रिया करता है, जंजीरें टूट जाती हैं l

सच : कड़वा या मीठा

मेरे नाक पर साल के काफी समय तक एक दाग था जिस समय मैं डॉक्टर के पास गया l बायोप्सी का रिपोर्ट कुछ दिनों के बाद आया, जो मैं सुनना नहीं चाहता था l त्वचा(skin) कैंसर l यद्यपि यह कैंसर ऑपरेशन के लायक था और जीवन के लिए घातक नहीं था, लेकिन यह निगलने के लिए कड़वी गोली थी l  

परमेश्वर ने यहेजकेल को निगलने के लिए एक कड़वी गोली दी थी – विलाप और शोक की एक पुस्तक (यहेजकेल 2:10; 3:1-2) l उसे “अपनी अंतड़ियां इस से भर” लेनी थी और इस्राएल के लोगों के साथ जिन्हें परमेश्वर “निर्लज्ज और हठीले” लोग समझता था, के साथ  साझा करना था (2:4) l सुधार से भरी एक पुस्तक स्वाद के कोई एक कड़वी गोली की तरह हो सकती है l फिर भी यहेजकेल अपने मुँह में उसे “मधु के तुल्य मीठी” (3:3) होने का वर्णन करता है l  

ऐसा लगता है कि यहेजकेल ने परमेश्वर के सुधार के प्रति स्वाद अर्जित कर लिया था l उसकी ताड़ना को कुछ ऐसी चीज़ के रूप में देखने के बजाए जिससे बचा जा सके, यहेजकेल ने जाना कि जो आत्मा के लिए अच्छा है वह “मीठा है l” परमेश्वर हमें करुणा से सिखाते और सुधारते हुए उसे आदर और प्रसन्नता देने के योग्य जीवन जीने में सहायता करता है l

कुछ सच्चाईयाँ निगलने के लिए कड़वी गोली है जबकि दूसरी मीठी हैं l यदि हम याद करते हैं कि परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करता है, उसकी सच्चाई मधु की स्वाद सी होगी l उसके वचन हमारी भलाई के लिए हैं, दूसरों को क्षमा करने के लिए, व्यर्थ संवाद से बचने के लिए, और दुर्व्यवहार के समय हौसला रखने के लिए बुद्धि और सामर्थ्य देते हैं l हे प्रभु, हमारी मदद कर, कि हम आपकी बुद्धिमत्ता को मीठे परामर्श के रूप में पहचाने जैसा कि वह वास्तव में है!