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गहरी जड़ें

सिकुआ शंकुधारी वृक्ष, रक्त दारु वृक्ष की तीन प्रजातियों में से एक, विश्व के सबसे अधिक और सबसे टिकाऊ वृक्षों में से है l उसकी ऊँचाई 300 फीट, वजन 2.5 लाख पौंड (11 लाख किलोग्राम) से ऊपर, और उम्र 3,000 वर्ष होती है l किन्तु बड़े सिकुआ वृक्ष का आकार और उम्र भूमि के नीचे क्या है, पर आधारित है l एक एकड़ से भी अधिक भूमि में पसरी हुई 12 से 14 फीट गहरी जड़ों की जाल, वृक्ष की गगनचुंबी ऊँचाई और आश्चर्यजनक वजन को थामें रहती है l

हालाँकि, रक्त दारु वृक्ष की फैली हुई जड़ प्रणाली, यीशु के जीवन को सुदृढ़ बनानेवाली राष्ट्रीय इतिहास, धर्म, और प्रतीक्षा की तुलना में छोटी है l एक मरतबा उसने धार्मिक अगुओं के समूह से कहा कि शास्त्र जिनसे वे प्रेम करते हैं उसकी कहानी बताते हैं (यूहन्ना 5:39) l नासरत की आराधनालय में उसने यशायाह की पुस्तक खोलकर, इस्राएल के उद्धारकर्ता का वर्णन पढ़कर बोला, “आज ही यह लेख तुम्हारे सामने पूरा हुआ है” (लूका 4:21) l

अपने पुनरुत्थान बाद, यीशु ने अपने शिष्यों को समझने में सहायता की कि किस तरह मूसा, और नबियों के शब्द, और इस्राएल के गीत ने प्रगट किया था कि उसके लिए दुःख और मृत्यु सहकर पुनरुथित होना क्यों ज़रूरी था (24:46) l

यीशु को इतिहास और राष्ट्र के शास्त्र में जड़वत देखकर और हमारे जीवनों को उसकी कितनी ज़रूरत है महसूस करना क्या ही मनोहर और शोभनीय है l  

क्या आप तैयार किये जा रहे हैं?

हाई स्कूल में पढ़ते समय लगभग दो वर्षों तक एक रेस्टोरेंट में काम करने के कुछ अंश कठिन थे l ग्राहक क्रोधित होते थे जबकि मैं सैंडविच में चीज़ के लिए खेदित होती थी जो मैंने नहीं बनाया था l यह काम छोड़कर मैंने एक विश्वविद्यालय में कंप्यूटर कार्य हेतु आवेदन डाली l नियोजक मेरे कंप्यूटर कौशल से अधिक मेरे फ़ास्ट-फ़ूड अनुभव में रूचि ले रहे थे l वे जानना चाहते थे कि मुझे लोगों के साथ बर्ताव करना आता था l अप्रिय स्थितियों में मेरे अनुभव ने मुझे एक बेहतर कार्य के लिए तैयार किया!

युवा दाऊद एक अनुभव में निरंतर दृढ़ रहा जिसे हम बखूबी अरुचिकर कह सकते हैं l गोलियत से लड़ने हेतु इस्राएलियों को एक व्यक्ति चाहिए था l केवल दाऊद आगे आया l राजा शाऊल उसे लड़ने को भेजने में हिचकिचाया, किन्तु दाऊद ने कहा कि एक चरवाहा होकर उसने अपनी भेड़ों के लिए सिंह और भालू से लड़ा था (1 शमूएल 17:34-36) l वह दृढ़तापूर्वक  बोला, “यहोवा जिसने मुझे सिंह और भालू दोनों ... से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती ... से भी बचाएगा” (पद.37) l

चरवाहा होकर दाऊद ने आदर नहीं कमाया, किन्तु इससे वह गोलियत से लड़ सका और आख़िरकार इस्राएल का महानतम राजा बना l हम कठिन स्थितियों में हो सकते हैं, किन्तु इनके द्वारा परमेश्वर हमें कुछ बड़ी बात के लिए तैयार कर रहा होगा!

आमने-सामने

यद्यपि संसार आज इलेक्ट्रानिक तरीके से जिस तरह जुड़ा है, पूर्व में कभी नहीं था, व्यक्तिक रूप से बिताया गया समय सर्वोत्तम है l हम सहभागिता और खिलखिलाहट द्वारा-लगभग अनजाने में-अगले व्यक्ति के चेहरे की गत्विधियों को देखकर उसकी भावनाएं जान जाते हैं l जो आपस में प्रेम करते हैं, चाहे परिवार या मित्र, आमने-सामने संगति करना चाहते हैं l

हम इस तरह का आमने-सामने का सम्बन्ध परमेश्वर और उसके लोगों की अगुवाई करने वाले, मूसा के मध्य देखते हैं l मूसा परमेश्वर का अनुसरण करता गया, और लोगों के अक्खड़पन और मूर्तिपूजा के बावजूद उसका अनुसरण करता रहा l लोगों द्वारा प्रभु के बदले सोने के बछड़े की उपासना करने के बाद (देखें निर्ग. 32), मूसा ने परमेश्वर से मुलाकात करने हेतु एक तम्बू लगाया, जबकि लोग दूर ही से देख सकते थे (33:7-11) l जब परमेश्वर की उपस्थिति बादल के खम्बे में तम्बू पर आकर ठहरता था, मूसा उनका प्रतिनिधि होकर बातें करता था l परमेश्वर ने उनके साथ अपनी उपस्थिति का वादा किया (पद.14) l

यीशु की क्रूसित मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण, हमें परमेश्वर से बातें करने के लिए मूसा की तरह व्यक्ति नहीं चाहिए l इसके बदले, शिष्यों के सामने यीशु की पेशकस की तरह, हम मसीह द्वारा परमेश्वर के साथ मित्रता कर सकते हैं (यूहन्ना 15:15) l हम भी उससे मुलाकात कर सकते हैं, प्रभु के साथ मित्र की तरह बातें कर सकते हैं l

अन्तरंग विवरण

सृष्टि आश्चर्यजनक ढंग से भव्य है l इस समय चन्द्रमा हमारे चारों ओर 2,300 मील प्रति घंटे की गति से और पृथ्वी सूर्य के चारों ओर 66,000 मील प्रति घंटे की गति से घूम रही है l हमारा सूर्य असंख्य दूसरे तारों और ग्रहों के तारा समूह में एक है, और वह तारा समूह घूमते हुए असंख्य दूसरे तारा समूहों में एक है l चौंकानेवाला!

इस विस्तृत कायनात की तुलना में, हमारी पृथ्वी एक कंकड़ से बड़ी नहीं है, और हमारे जीवन रेत कण समान हैं l फिर भी वचनानुसार, इन तारों के समूह का परमेश्वर हममें से प्रत्येक सूक्ष्म प्राणी का अन्तरंग जानकारी रखता है l हमारे अस्तित्व से पूर्व उसने हमें देखा (भजन 139:13-16); वह हमारे दिनचर्या को जानता और हर विचार सुनता है (पद. 1-6) l

कभी-कभी यह अविश्वसनीय लगता है l इस छोटे “कंकड़” में युद्ध और अकाल जैसी बड़ी समस्याएँ हैं और हम व्यक्तिगत दुःख में परमेश्वर की देखभाल पर प्रश्न उठा सकते हैं l किन्तु भजन 139 लिखते समय राजा दाऊद स्वयं संकट में था (पद.19-20)l और जब यीशु ने कहा कि परमेश्वर हमारे सिर का एक-एक बाल गिनता है (मत्ती 10:30), वह क्रूसीकरण के युग में था l परमेश्वर की देखभाल से सम्बंधित बाइबिल के विचार मूर्ख अभिलाषा नहीं वास्तविक संसार की सच्चाई है l

जगत को चलानेवाला हमें निकटता से जानता है l यह कठिन समय में हमारी सहायता कर सकता है l

परमेश्वर के निकट जाना

प्रार्थना को इच्छुक एक स्त्री ने एक कुर्सी खींचकर उसके आगे घुटने टेक ली l “रोते हुए, वह बोली, “मेरे स्वर्गिक पिता, मेरे निकट बैठिये; हम दोनों को बात करना ज़रूरी है!” तब, खाली कुर्सी की ओर देखकर, उसने प्रार्थना किया l उसने परमेश्वर के निकट जाने में भरोसा जताया; उसने परमेश्वर को कुर्सी पर बैठे हुए कल्पना करके विश्वास की कि वह उसका निवेदन सुन रहा है l

परमेश्वर के साथ समय एक विशेष क्षण होता है जब हम सर्वशक्तिमान को उसमें शामिल करते हैं l एक आपसी भागीदारी में जब हम परमेश्वर के निकट जाते हैं (याकूब 4:8) l वह भी हमारे निकट आता है l उसने हमें आश्वस्त किया है, “मैं ... सदा तुम्हारे संग हूँ” (मत्ती 28:20) l हमारा स्वर्गिक पिता सदेव हमारा इंतज़ार करके हमारी सुनना चाहता है l

कितनी बार थके, निद्रालु, बीमार, और निर्बल होने के कारण हम प्रार्थना करने में संघर्ष करते हैं l किन्तु यीशु हमारी दुर्बलता और परीक्षाओं में हमसे सहानुभूति रखता है (इब्रा. 4:15) l इसलिए हम “अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बांधकर चलें कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएँ जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे (पद.16) l

यीशु को सौंपना

उनके अनुसार वह “शैतान के पदचिन्ह” हैं l मेसाचुसेट्स, इपस्विच में चर्च के निकट एक पहाड़ के पत्थर पर एक पैर सा निशान है l स्थानीय दन्तकथा अनुसार “पदचिन्ह” 1740 में बना जब प्रचारक जॉर्ज वाइटफील्ड द्वारा शरद् ऋतू के एक दिन प्रबल उपदेश देने पर शैतान चर्च की चोटी से पत्थर पर कूदकर शहर से भागा l

यद्यपि यह एक दन्त कथा है, इसमें परमेश्वर के वचन का उत्साहवर्धक सत्य है l याकूब 4:7 स्मरण दिलाता है, “शैतान का सामना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा l”

परमेश्वर ने हमारे शत्रु और हमारे जीवनों में परीक्षाओं का सामना करने हेतु हमें समर्थ किया है l बाइबिल कहती है कि यीशु मसीह द्वारा परमेश्वर के स्नेही अनुग्रह से “तुम पर पाप की प्रभुता न होगी” (रोमि. 6:14) l परीक्षा के समय यीशु की ओर दौड़ने पर, वह हमें अपनी सामर्थ्य में खड़े होने के योग्य करता है l हमारे द्वारा सामना की जानेवाली कुछ भी उसको पराजित नहीं कर सकती, क्योंकि उसने “संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33) l

जब हम अपने उद्धारकर्ता के समक्ष खुद को समर्पित कर उस क्षण अपनी इच्छा छोड़ कर परमेश्वर के वचन के प्रति आज्ञाकारी होते हैं, वह हमारी मदद करता है l जब हम परीक्षा में न पड़कर, खुद को यीशु को समर्पित करते हैं, वह हमारे युद्ध में मदद करेगा l उसमें हम जय पा सकते हैं l

बच निकलना

शरद ओलंपिक्स 2004 में यूटाह में हुआ था l कनाडा के क्षेत्र-पार स्की करनेवाली बेकी स्कॉट उस समय काँस्य पदक जीती थी l दो अयोग्य खिलाड़ियों को महीनों बाद वर्जित पदार्थ सेवन के कारण अयोग्य होने पर, जून 2004 में, वैंक्यूवर आर्ट गैलरी में, स्कॉट को ओलिंपिक स्वर्ण पदक मिला l

आख़िरकार स्कॉट को अपना स्वर्ण मिल गया, किन्तु वह मंच पर खड़ी होकर राष्ट्रगान बजते हुए सुनने से रह गई l अन्याय का हल नहीं निकला l

अन्याय तकलीफ़देह होते हैं, और मेहनत से जीते गए पदक से वंचित होने से भी बड़े अन्याय हैं l कैन और हाबिल की कथा अन्याय की चरम क्रिया है (उत्प. 4:8) l और प्रथम झलक में ऐसा लग सकता है कि वह भाई की हत्या करके बच गया l आख़िरकार, वह लम्बी आयु और  पूरा जीवन जीकर, एक नगर भी बसाया (पद.17) l

किन्तु स्वयं परमेश्वर ने कैन का सामना किया l उसने कहा, “तेरे भाई का लहू ... चिल्लाकर मेरी दोहाई दे रहा है” (पद.10) l नया नियम कैन के उदाहरण से बचने को कहता है (1 यूहन्ना 3:12; यहूदा 1:11) l किन्तु हाबिल के विषय, “विश्वास ही से हाबिल ... मरने पर भी अब तक बातें करता है” (इब्रा. 11:4) l

परमेश्वर न्याय, निर्बलों का बचाव, और अन्याय को दण्डित करता है l अंत में, अन्याय करके कोई बच नहीं सकता l और विश्वास द्वारा किया गया कार्य परमेश्वर द्वारा पुरस्कृत होता  है l

आनंदित हृदय

मेरी नातिन का पसंदीदा सुर जॉन फ़िलिप सौसा का एक प्रयाण गीत(marching tune) है l 19 वीं शताब्दी में, सौसा, “सेना प्रयाण” का अमरीकी रचयिता और बैंड मास्टर था l मोरियाह प्रयाण बैंड में  नहीं है; वह केवल 20 महीने की है l वह इस सुर को पसंद करती है और कुछ एक सुर को गुनगुनाती भी है l यह उसके लिए आनंदित समय होता है l हमारे पारिवारिक मिलन के समय, हम इस गीत को तालियों और दूसरी प्रबल आवाजों के साथ गुनगुनाते हैं, और नाती-पोते इसके ताल पर नाचते अथवा गोल-गोल घूमकर परेड करते हैं l

हमारे आनंदित स्वर हमें उस भजन का स्मरण कराते हैं जो हमसे “आनंद से यहोवा की आराधना” करने को कहते हैं (भजन 100:2) l जब सुलेमान ने मंदिर का अर्पित किया, इस्राएलियों ने प्रशंसा के साथ उत्सव मनाया (2 इतीहास 7:5-6) l भजन 100 उनका एक गीत  रहा होगा l भजन घोषणा करता है : हे सारी पृथ्वी के लोगों, यहोवा का जयजयकार करो ! ... उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आँगनो में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो ! (पद. 1,4) l क्यों? “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करुणा सदा के लिए [है]! (पद.5) l

हमारा भला परमेश्वर हमसे प्रेम करता है ! कृतज्ञ प्रतिउत्तर में, आइये “जयजयकार” [करें] ! (भजन 100:1) l

विश्राम दिवस

एक रविवार को, मैं एक कलकल नदी के निकट खड़ी थी जो हमारी उत्तरी लन्दन आबादी क्षेत्र की ओर मुड़कर अपनी ख़ूबसूरती भिन्न प्रकार से बसे क्षेत्र को प्रदान करती है l जलप्रपात को देखकर और चिड़ियों की चहचाहट सुनकर मुझे आराम मिला l मैंने रुककर प्रभु को हमारी आत्माओं को विश्राम देने के लिए धन्यवाद दिया l

प्रभु ने सब्त का दिन स्थापित किया-विश्राम और नवीनीकरण का दिन-अपने लोगों के लिए प्राचीन निकट पूर्व क्योंकि उसकी इच्छा थी कि वे जीवित रहें l जैसे कि हम निर्गमन में पाते हैं, वह उनको छः वर्ष खेती करने को और सातवें वर्ष विश्राम करने को कहता है l इसी तरह छः दिन काम और सातवें दिन विश्राम l उसके तरीके ने इस्राएलियों को अन्य राष्ट्रों से अलग किया, क्योंकि केवल वे ही नहीं किन्तु विदेशी और उनके घर के दासों को भी उनके तरीके मानना अनुमत था l

हम विश्राम दिवस में अपेक्षा और रचनात्मकता के साथ उपासना करके अपनी आत्माओं को पोषित कर सकते हैं, जो हमारे चुनावों के अनुसार भिन्न होगा l कोई खेल खेलना पसंद करेंगे; कोई बगीचे में काम; कोई मित्रों और परिजनों के साथ भोजन करेंगे; कोई दोपहर में आराम करेंगे l

हम किस तरह विश्राम दिवस की खूबसूरती और भरपूरी को पुनः खोजेंगे, यदि वह हमारे जीवनों में नहीं है?