पुराना तौभी नया
2014 में, कनटकी में राष्ट्रीय कोरवेट आजायबघर में अचानक धरती में बना एक बड़ा गड्ढा आठ पुराने, अनमोल शेवेरले कोरवेट स्पोर्ट्स कारों को लील गया l कुछ तो मरम्मत करने लायक ही नहीं रहीं l
1992 में बनी, समूह की सबसे कीमती दस-लाखवां कोरवेट कार पर विशेष ध्यान दिया गया l जो उस सर्वोत्तम कृति के साथ हुआ चिताकर्षक था l विशेषज्ञों ने उस कार के मूल भागों का मरम्मत करके उसको उसके मूल रूप में ला दिया l यद्यपि यह छोटी खूबसूरती बहुत ख़राब आकार में थी, वर्तमान में बिल्कुल नयी दिखाई देती है, मानो अभी बनकर आई हो l
पुराना और टूटा हुआ नया बना दिया गया l
हमारे लिए बड़ी ताकीद है कि यीशु में विश्वसियों के लिए परमेश्वर ने ऐसा ही रखा है l प्रकाशितवाक्य 21:1 में यूहन्ना “नए आकाश और नयी पृथ्वी” की बात करता है l अनेक बाइबिल विद्वान “नयी” पृथ्वी को नूतन पृथ्वी के रूप में देखते हैं, क्योंकि नयी शब्द का उनका अध्ययन बताता है कि उसका अर्थ “नूतन” या “नवीकरण” कर देना है, जब पुराने की खराबी मिटा दी गई है l इस पृथ्वी की विकृति को परमेश्वर ठीक कर देगा और नूतन बनाएगा, फिर भी एक परिचित स्थान जहाँ विश्वासी उसके साथ रहेंगे l
एक नयी, आरामदायक, परिचित, और खुबसूरत पृथ्वी के विषय विचार करना कितनी अद्भुत सच्चाई है l परमेश्वर की हस्तकला की विभूति की कल्पना करें l
अपने बोझ नीचे रख दें
गाँव की सड़क पर एक व्यक्ति अपनी छोटी ट्रक से जाते हुए एक महिला को बोझ उठाकर जाते देखकर, उसे अपने वाहन में बुलाया l महिला धन्यवाद देकर वाहन में सवार हो गई l
कुछ क्षण बाद, उस व्यक्ति ने उस महिला को उसके वाहन में बैठे हुए अभी भी बोझ उठाए हुए पाया! चकित होकर उसने कहा, “कृपया अपना बोझ नीचे रख कर आराम से बैठें l मेरा वाहन आपको और आपकी बोझ को उठाने में सक्षम है l”
हम जीवन के अनेक चुनौतियों के मध्य अक्सर भय, चिंता और घबराहट के बोझ के साथ क्या करते हैं? प्रभु में विश्राम करने की बजाए, मैं कभी-कभी उस महिला की तरह आचरण करता हूँ l यीशु ने कहा, “हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे हुए लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा” (मत्ती 11:28), फिर भी जो बोझ यीशु को देना चाहिए, मैं उठाते देखा जाता हूँ l
हम प्रार्थना में अपने बोझ प्रभु के पास लाकर उतार देते हैं l प्रेरित पतरस कहते हैं, “अपनी सारी चिंता [यीशु] पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है” (1 पतरस 5:7) l क्योंकि वह हमारी चिंता करता है, हम उसमें भरोसा करना सीखते हुए विश्राम करके आराम पाते हैं l हमें दबाने और श्रमित करने वाले को उठाने की जगह, हम उसे प्रभु को उठाने हेतु दें l
हमारे प्रावधान का श्रोत
अगस्त 2010 में, संसार की निगाहें कोपिआपो, चिली के एक खनन दस्ते की ओर थी l 33 खनिक 2,300 फीट धरती के नीचे अँधेरे में फंसे थे l उन्हें सहायता की आशा न थी l 17 दिनों के इंतज़ार के बाद बचाव दल ने, खनिकों तक जल, भोजन और दवाईयाँ पहुँचाने के लिए चार सुराख़ बनाए l खनिक ऊपर धरती से इन वाहिकाओं पर अर्थात् बचाव दल के प्रावधान पर निर्भर थे l उनहत्तरवें दिन, बचाव दल ने अंतिम खनिक को सुरक्षित बाहर निकाला l
हममें से हर कोई इस संसार में खुद की सामर्थ के बाहर के प्रावधान पर निर्भर है l संसार का रचनाकार, परमेश्वर हमारी समस्त ज़रूरतें पूरी करता है l उन खनिकों के लिए उन सुराखों की तरह, प्रार्थना समस्त ज़रूरतों की पूर्तिकर्ता से हमें जोड़ता है l
यीशु ने हमें प्रार्थना करने को उत्साहित किया, “हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे” (मत्ती 6:11) l उनके दिनों में रोटी जीवन का बुनियादी भोजन था अर्थात् लोगों की दैनिक ज़रूरत का चिंत्रण l यीशु हमें केवल भौतिक आवश्यकताओं के लिए नहीं किन्तु समस्त ज़रूरतों के लिए प्रार्थना करने को कहता है-सुख,चंगाई,साहस,बुद्धिमत्ता l
हर क्षण उस तक प्रार्थना द्वारा हमारी पहुँच है, और वह हमारे मांगने से पूर्व हमारी ज़रूरत जानता है (पद.8) l आज आप किस से संघर्षरत हैं? “जितने यहोवा को पुकारते हैं ...उन सभों के वह निकट रहता है” (भजन 145:18) ;
किसी का उत्सव मनाना
चरनी के अनेक दृश्यों में, ज्योंतिषियों को चरवाहों के साथ बेतलहम में यीशु से मिलते दर्शाया जाता है l किन्तु मत्ती के सुसमाचार के अनुसार, ज्योतिषी यीशु से मिलने एक घर में आते हैं l वह एक सराए के गौशाले की चरनी में नहीं था l मत्ती 2:11 हमें बताता है, “उन्होंने उस घर में पहुँचकर उस बालक को उसकी माता मरियम के साथ देखा, और मुँह के बल गिरकर बालक को प्रणाम किया, और अपना-अपना थैला खोलकर उसको सोना, और लोबान, और गंधरस की भेंट चढ़ाई l”
यह जानकार कि ज्योतिषी बाद में यीशु से मिलने आए हमें नया वर्ष आरंभ करते समय एक ताकीद मिलती है l छुट्टियों के बाद जब हम पुनः अपने दिनचर्या में लौटते हैं, हमारे पास अभी भी कोई है जिसके साथ हम उत्सव माना सकते हैं l
यीशु मसीह प्रत्येक मौसम में इम्मानुएल, “परमेश्वर हमारे साथ” है (मत्ती 1:23) l उसने “सदा” (28:20) हमारे साथ रहने का वादा किया है l क्योंकि वह सदा हमारे साथ है, हम अपने हृदयों में उसकी आराधना प्रतिदिन कर सकते हैं और भरोसा कर सकते हैं कि वह आनेवाले वर्षों में भी विश्वासयोग्य रहेगा l जैसे ज्योतिषियों ने उसको खोजा, हम भी उसको अपने स्थान पर खोजें और उपासना करें l
परमेश्वर की सुनना
मेरे युवा पुत्र को मेरी आवाज़ पसंद है, सिवाय इसके कि जब मैं उसका नाम ज़ोर से और कठोरता से इस प्रश्न के साथ पुकारती हूँ, “तुम कहाँ हो?” ऐसा मैं तब करती हूँ, जब वह कुछ नटखटी करके मुझसे छिप रहा होता है l मैं चाहती हूँ कि मेरा बेटा मेरी आवाज़ सुने क्योंकि मैं उसकी भलाई और सुरक्षा चाहती हूँ
आदम और हव्वा परमेश्वर की आवाज़ से परिचित थे l l हालांकि, वर्जित फल को खाकर अनाज्ञाकारिता के बाद, वे उसकी आवाज़ सुनकर, “तुम कहाँ हो?” छिप गए (उत्पत्ति 3:9) l वे गलती करने के कारण परमेश्वर का सामना नहीं कर पा रहे थे-कुछ जिसे उसने माना किया था (पद.11) l
जब परमेश्वर ने आदम और हव्वा को पुकारकर उन्हें बगीचे में पाया, उसके शब्दों में अवश्य ही सुधार और परिणाम था (पद.13-19) l किन्तु परमेश्वर ने उन पर दया दिखाई और उद्धारकर्ता की प्रतिज्ञा में मानवता के लिए आशा भी दी(पद.15) l
परमेश्वर हमें खोजे, यह ज़रूरत नहीं है l उसे ज्ञात है हम कहाँ हैं और हम क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं l किन्तु एक प्रेमी पिता होने के कारण, वह हमारे हृदयों से बातें करना चाहता है और हमें क्षमा और आरोग्यता देना चाहता है l उसकी इच्छा है हम उसकी आवाज़ सुने-और ध्यान दें l
गुणित प्रेम
जब केरेन के चर्च की एक महिला के विषय पता चला कि उसे ALS(amyotrophic lateral sclerosis या Lou Gehrig) नामक जानलेवा बीमारी हो गई है, स्थिति अच्छी नहीं थी l यह क्रूर बीमारी तंत्रिकाओं और मांशपेशियों को प्रभावित करके रोगी को लकवाग्रस्त कर देता है l पारिवारिक बीमा से घर में इलाज संभव नहीं था और उसका पति नर्सिंग होम में इलाज करने की कल्पना भी नहीं कर सकता था l
नर्स होने के कारण केरेन उस महिला की सेवा करने उसके घर जाने लगी l किन्तु जल्द ही वह समझ गई कि अपने मित्र की सेवा करते हुए वह अपने परिवार की देखभाल नहीं कर पा रही थी, इसलिए उसने चर्च में दूसरों को सेवा भाव सीखना आरंभ कर दी l अगले सात वर्षों में बीमारी के बढ़ने पर केरेन ने अपने अलावा इकतीस स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जिन्होंने उस परिवार को प्रेम, प्रार्थना, और व्यावहारिक सहायता दी l
“जो कोई परमेश्वर से प्रेम रखता है [उसे] अपने भाई [और बहन] से भी प्रेम [रखना होगा],” प्रेरित यूहन्ना ने कहा (1 यूहन्ना 4:21) l केरेन उस प्रकार के प्रेम का एक दीप्त उदाहरण देती है l वह कुशल, प्रेमी, और एक चर्च परिवार को एक दुखित मित्र की सेवा हेतु प्रेरित करने वाली थी l एक ज़रूरतमन्द व्यक्ति के लिए उसका प्रेम गुणित व्यावहारिक प्रेम बन गया l
जैसा प्रतीत नहीं होता
डॉन, दक्षिणी लानकशायर, स्कॉटलैंड के एक फार्म में रहनेवाला एक बार्डर कुली है l एक दिन उसका मालिक और वह, एक छोटे वाहन में कुछ पशुओं को देखने गए l टॉम, वाहन में ब्रेक लगाना भूलकर नीच उतार गया l डॉन, चालक के सीट पर बैठा था और वाहन सुरक्षित रुकने से पूर्व, ढलान पर और आगे दो पंक्तियों के यातायात में धीमी चलती गई l मोटर-चालकों को लगा जैसे कोई कुत्ता सुबह की सैर करने निकला है l बिल्कुल, बातें हमेशा जैसी होती हैं, वैसी दिखती नहीं l
ऐसा महसूस हो रहा था जैसे एलिशा और उसके सेवक को गिरफ्तार करके आराम के राजा के पास पहुंचाया जाएगा l राजा की सेना ने शहर को चारों ओर से घेर लिया था जहां एलिशा और उसका सेवक थे l सेवक का मानना था कि मृत्यु निकट है, किन्तु एलिशा ने कहा, “मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह [शत्रु] ... से अधिक हैं” (2 राजा 6:16) l एलिशा की प्रार्थना पश्चात, सेवक स्वर्गिक सेना को उनकी सुरक्षा के लिए अपना मोर्चा संभाले देखा l
स्थितियाँ जो आशाहीन दिखाई देती हैं हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी हमें दिखती हैं l जब हम अभिभूत और संख्या में थोड़े महसूस करते हैं, हम स्मरण रखें परमेश्वर हमारी ओर है l वह “अपने दूतों को [हमारे] निमित्त आज्ञा [देगा] [कि वह हमारी] रक्षा करें” (भजन 91:11) l
पूर्ण उपहार
अमरीका में क्रिसमस के बाद के सप्ताह वर्ष का सबसे व्यस्त समय व्यवसाय के पुनः आरंभ होने का समय जब लोग अनचाहे उपहारों का लेन-देन वास्तविक ज़रुरतों की वस्तुओं से करते हैं l फिर भी शायद आप पूर्ण उपहार देनेवालों को जानते होंगे l उनको कैसे मालूम दूसरे व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण और अवसर के लिए उचित क्या है? सही उपहार देना दूसरों को सुनने और व्यक्ति की रुचि जानने से होती है कि वह किसमें आनंदित और प्रसन्नचित होते हैं l
यह परिवार और मित्रों के साथ सही है l किन्तु परमेश्वर के साथ क्या? क्या परमेश्वर को भेट करने के लिए कुछ अर्थपूर्ण और विशेष है? क्या कुछ है जो उसके पास नहीं है?
रोमियों 11:33-36, परमेश्वर की महान बुद्धिमत्ता, ज्ञान, और महिमा के लिए प्रशंसा के गीत पश्चात उसके प्रति हमारे समर्पण की बुलाहट है l ”इसलिए हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर विनती करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ l यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है” (पद. 12:1) l अपने चारो ओर के संसार के सदृश न बनकर, हमारे “मन के नए हो जाने से [हमारा] चालचलन भी बदलता जाए” (पद.2) l
आज हम कौन सा सर्वोत्तम उपहार परमेश्वर को दे सकते हैं? हम धन्यवाद, दीनता, और प्रेम में सम्पूर्ण रूप से अपने को दें-हृदय,मन,और इच्छा l प्रभु यही हमसे चाहता है l
धन्यवादी जीवन
अपने आत्मिक जीवन में परिपक्व और अधिक धन्यवादी होने की इच्छा से, सु ने धन्यवादी-जीवन मर्तबान बनाया l रोज़ शाम वह एक कागज पर परमेश्वर के प्रति धन्यवाद का विषय लिखकर मर्तबान में डाल देती थी l कुछ दिन उसके पास अनेक प्रशंसा होती थी; दूसरे कठिन दिनों में वह एक ढूँढने के लिए संघर्ष करती थी l वर्ष के अंत में उसने मर्तबान को खाली करके सभी पर्चे पढ़े l उसने अपने को परमेश्वर को उसके हर एक कार्य के लिए धन्यवाद देते हुए पाया l उसने खुबसूरत सूर्यास्त या पार्क में घुमने के लिए ठंडी शाम और दूसरे मौकों पर उसे किसी कठिन समस्या के हल के लिए अनुग्रह या प्रार्थना का उत्तर जैसी सरल आशीषें दी थीं l
सु की खोज मुझे भजनकार दाऊद के अनुभव की ताकीद देती है (भजन 23) l परमेश्वर ने उसे “हरी हरी चराईयों” और “सुखदाई जल” से तरोताज़ा किया (पद.2-3) l उसने उसे मार्गदर्शन, सुरक्षा, और शांति दी (पद.3-4) l दाऊद अंत करता है : “निश्चय भलाई और करुणा जीवन भर मेरे साथ-साथ बनी रहेंगी” (पद.6) l
मैं इस वर्ष धन्यवादी-जीवन मर्तबान बनाउँगी l शायद आप भी l मेरा विचार है हमारे पास परमेश्वर को धन्यवाद देने के अनेक कारण होंगे-मित्र और परिवार और उसके भौतिक, आत्मिक, और भावनात्मक ज़रूरतों के साथ l हम देखेंगे कि परमेश्वर की भलाई और करुणा और प्रेम हमारे साथ जीवन भर रहेंगे l