सर्वदा सर्वोत्तम सौदा
कितना पर्याप्त है? हम उस दिन यह प्रश्न पूछ सकते हैं जब अनेक विकसित देश खरीददारी में बिताते हैं l अमरीकी धन्यवाद अवकाश दिन के बाद, काला शुक्रवार, में अनेक दूकान सबेरे खुल जाते हैं और सस्ते में सौदा करते हैं; यह दिन दूसरे देशों में फ़ैल गया है l कुछ ग्राहक सिमित श्रोत के कारण सस्ते में खरीदना चाहते हैं l किन्तु दुर्भाग्यवश, दूसरों के लिए यह लालच ही प्रेरणा है और मोल-तोल हिंसक हो जाती है l
“उपदेशक” (सभो. 1:1) के रूप में पुराने नियम की बुद्धिमत्ता का लेखक उपभोगतावाद की सनक जिसका सामना हम दूकानों में–और अपने हृदयों में करते हैं, का उपचार बताता है l उसके अनुसार, धन प्रेमियों के पास कभी भी प्रयाप्त नहीं होगा और धन उन पर शासन करेगा l और फिर भी, वे धन विहीन मरेंगे : “जैसा वह माँ के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा” (5:15) l प्रेरित पौलुस तीमुथियुस की पत्री में उपदेशक की बात दोहराता है, रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, और कि हमें “संतोष सहित भक्ति” (1 तीमु. 6:6-10) का पीछा करना चाहिए है l
बहुतायत अथवा अभाव में, हम अपने परमेश्वर द्वारा आकार दिए हुए अपने हृदयों को अस्वास्थ्यकर वस्तुओं से भरने के तरीके खोज सकते हैं l किन्तु शांति और स्वास्थ्य हेतु प्रभु को देखने पर, वह इसे भलाई और प्रेम से भर देगा l
धन्यवाद का खेल
कोर्नरस्टोन यूनिवर्सिटी में हम प्रत्येक शरद ऋटू में एक शानदार धन्यवादी भोज आयोजित करते हैं l विद्यार्थी को पसंद है l पिछले वर्ष एक विद्यार्थी समूह ने एक खेल खेला l उन्होंने तीन सेकंड या उससे कम में परस्पर चुनौती दिया कि वे किस लिए धन्यवादित थे-और उन्हें दूसरे की कही हुई बात दोहरानी भी नहीं थी l चुप रहनेवाला खेल से बाहर होता था l
विद्यार्थी जांच, निर्धारित तिथियाँ, नियम, और कॉलेज के प्रकार की बातों के विषय शिकायत कर सकते हैं l किन्तु इन विद्यार्थियों ने धन्यवाद देने का चुनाव किया l यदि शिकायत का चुनाव करते तो इसकी तुलना में मेरा अनुमान है कि इस खेल के पश्चात उन्होंने बेहतर महसूस किया l
शिकायत करने की बातें हमेशा रहेंगी, किन्तु ध्यान से देखें तो धन्यवाद की आशीषें हमेशा रहेंगी l मसीह में हमारी नवीनता का वर्णन करते समय पौलुस ने, “धन्यवाद” का वर्णन एक से अधिक बार है l वास्तव में तीन बार l “धन्यवादी बने रहो,” उसने कुलुस्सियों 3:15 में कहा l “अपने अपने मन में अनुग्रह[धन्यवाद] के साथ” परमेश्वर के लिए ... आत्मिक गीत गाओ (पद.16) l जो कुछ भी करो ... उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो l (पद.17) l धन्यवाद देने का पौलुस का निर्देश चकित करता है जब हम विचारते हैं कि उसने यह पत्री कैद से लिखी l
आज, हम धन्यवाद का मनोभाव रखने का चुनाव करें l
व्यर्थ नहीं
मेरा परिचित एक वित्तीय सलाहकार इस तरह पैसा निवेश की सच्चाई का वर्णन करता है, “सर्वोत्तम की आशा करें और सबसे अधिक नुक्सान के लिए तैयार रहें l” जीवन में हमारे प्रत्येक निर्णय में परिणाम के विषय अनिश्चितता है l फिर भी हम एक मार्ग का अनुसरण हर परिस्थिति में कर सकते हैं, हम जानते हैं कि हमारी मेहनत व्यर्थ नहीं होगी l
नैतिक भ्रष्टाचार के लिए प्रसिद्ध शहर, कुरिन्थुस में, प्रेरित पौलुस, यीशु के अनुयायियों के संग एक वर्ष बिताया l अपने जाने के बाद, कार्य की निरंतरता में उसने उनको लिखा कि वे न निराश हों और न ही मसीह के लिए अपनी साक्षी को व्यर्थ समझें l उसने उनको आश्वस्त किया कि एक दिन आनेवाला है जब प्रभु आएगा और मृत्यु भी जय द्वारा पराजित होगी (1 कुरिन्थियों 15:52-55) l
यीशु के प्रति ईमानदार रहना, कठिन, निराश करनेवाला, और खतरनाक भी हो सकता है, किन्तु यह व्यर्थ और बेकार नहीं है l प्रभु के संग चलकर उसकी उपस्थिति और सामर्थ्य का साक्षी बनकर, हमारे जीवन व्यर्थ नहीं हैं! हम इससे आश्वस्त हों l
प्रसिद्धि और विनम्रता
हममें से कितने प्रसिद्धि से आसक्त हैं-या तो खुद की प्रसिद्धि से अथवा प्रसिद्ध लोगों के जीवनों के विषय प्रत्येक जानकारी रखकर l अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक या फ़िल्मी दौरे l देर-रात्रि कार्यक्रम में उपस्थिति l ट्विटर पर लाखों प्रसंशक l
अमरीका में एक हाल ही के अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने इन्टरनेट पर छाए हुए एक विशेष विधि द्वारा प्रसिद्ध व्यक्तियों को श्रेणीबद्ध किया l यीशु इतिहास के सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति के रूप में सर्वोत्तम रहा l
फिर भी यीशु में प्रसिद्धि की चिंता कभी नहीं थी l उसने पृथ्वी पर रहते हुए प्रसिद्धि नहीं चाही (मत्ती 9:30; यूहन्ना 6:5)-यद्यपि प्रसिद्धि ने उसको ढूंढ लिया जब गलील के क्षेत्र में उसके विषय खबर फ़ैल गई (मरकुस 1:28; लूका 4:37) l
जहाँ भी यीशु गया भीड़ उसके चारों ओर थी l उसके आश्चर्यकर्मों ने लोगों को उसकी ओर खींचा l किन्तु लोंगों द्वारा उसको राजा बनाने की अवस्था में, वह वहाँ से चला गया (यूहन्ना 6:15) l अपने पिता से संयुक्त उद्देश्य में, वह निरंतर पिता की इच्छा और समय की ओर उन्मुख हुआ (4:34; 8:29; 12:23) l “[वह] यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ, क्रूस की मृत्यु भी सह ली” (फ़िलि. 2:8) l
प्रसिद्धि यीशु का लक्ष्य नहीं था l उसका उद्देश्य सरल था l परमेश्वर पुत्र के रूप में, वह विनम्रता, आज्ञाकारिता, और खुद से हमारे पापों के लिए अपने को बलिदान किया l
घर की चाह
मेरी पत्नी ने कमरे में आकर मुझे बड़ी घड़ी की आलमारी में झांकते देखा l “आप क्या कर रहे हैं?” उसने पुछा l इस घड़ी की महक मेरे माता-पिता के घर जैसी है,” मैंने दरवाज़ा बंद करते हुए सुस्ती से जवाब दिया l “मेरा अनुमान है आप सोचते होंगे मुझे घर की याद आ रही थी l”
गंध प्रबल यादें जगाता है l हम उस घड़ी को 20 वर्ष पहले अपने माता-पिता के घर से लाए थे, किन्तु उसके अन्दर की लकड़ी की खुशबू आज भी मुझे मेरे बचपन की याद दिलाती है l
इब्रानियों का लेखक दूसरों के विषय बताता है जो और ही तरीके से घर की चाह रखते थे l अतीत में झाँकने की जगह, वे विश्वास से स्वर्गिक घर की ओर देख रहे थे l यद्यपि उनकी आशा बहुत दूर थी, उनका भरोसा था कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा को पूरी करते हुए उनको ऐसे स्थान में ले जाएगा जहाँ वे उसके साथ सर्वदा रहेंगे (इब्रा. 11:13-16) l
फिलिप्पियों हमें याद दिलाता है कि “हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है,” और हमें “एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहाँ से आने की बाट [जोहना है] l” यीशु को देखने की और परमेश्वर की प्रतिज्ञानुसार उससे सब कुछ प्राप्त करने की चाह हमें केन्द्रित रखे l हमारे लिए भविष्य में रखी बातों से अतीत या वर्तमान की तुलना नहीं हो सकती!
और आप?
एमिली मित्रों को परिवार के संग धन्यवाद देना सुन रही थी l गैरी ने कहा, “हम बारी-बारी परमेश्वर के प्रति धन्यवाद का कारण बताते हैं l”
एक अन्य मित्र ने पारिवारिक धन्यवाद भोज और प्रार्थना समय का वर्णन करते हुए अपने पिता की मृत्यु पूर्व उनके साथ का समय याद किया, “यद्यपि पिता मनोभ्रंश(Dementia) पीड़ित थे, उनकी धन्यवाद की प्रार्थना स्पष्ट थी l” रैंडी ने बताया, “मेरा परिवार छुट्टी के दिन गाने का विशेष समय आयोजित करता है l मेरे दादा गाते चले जाते हैं!” अपने परिवार के विषय एमिली की उदासी और इर्ष्या बढ़ती गई, उसकी शिकायत थी : “हमारी परंपरा केवल पेरू पक्षी खाना, टेलेविज़न देखना होता है l”
एमिली ने अपने व्यवहार में असहजता महसूस करके खुद से पुछा, “तुम उस परिवार का हिस्सा हो l तुम दिन को बदलने के लिए क्या कुछ अलग कर सकती हो? दिन आने पर, उसने सब को अलग से धन्यवाद दिया कि वे उसकी बहन, भांजी, भाई, या पौत्री हैं l उन्होंने प्रेम अनुभव किया l यह कठिन था क्योंकि उसके परिवार में यह स्वाभाविक संवाद नहीं था, किन्तु ऐसा करके वह आनंदित हुई l
पौलुस ने लिखा, “तुम्हारे मुँह से ... आवश्यकता के अनुसार वही निकले जो उन्नति के लिए उत्तम हो, ताकि उससे सुननेवालों पर अनुग्रह हो” (इफिसियों 4:29) l हमारे धन्यवाद के शब्द दूसरों को हमारे और परमेश्वर के प्रति महत्व का ताकीद देंगे l
बलिदानी विश्वास
रविवार की सुबह है, मैं चर्च की फुलवारी में जहाँ मेरे पति पासवान हैं बैठी हूँ l मुझे फ़ारसी भाषा में प्रशंसा और आराधना संगीत सुनाई दे रहा है l लन्दन के मेरे चर्च में एक जोशपूर्ण ईरानी मंडली इकट्ठी होती है, और हम मसीह के लिए उनके उत्साह से दीन महसूस करते हैं जब वे सताव की कहानियाँ बताते हैं, जैसे अपने वरिष्ठ पासवान के भाई की विश्वास की खातिर शहादत l ये विश्वासी प्रथम शहीद, स्तिफनुस के क़दमों पर चल रहे हैं l
आरंभिक कलीसिया में नियुक्त अगुओं में से एक, स्तिफनुस, ने “बड़े-बड़े अद्भुत काम और चिन्ह” दिखाकर यरूशलेम में ध्यान अर्जित की (प्रेरितों 6:8) और वह यहूदी अधिकारियों के समक्ष लाया गया कि अपने कार्यों का बचाव कर सके l आरोपियों की निर्दयता दर्शाने से पूर्व उसने विश्वास का जोशपूर्ण बचाव किया l किन्तु पश्चाताप करने की बजाए, वे “उसपर दांत पीसने लेगे” (7:54) l उनहोंने उसे नगर से बाहर ले जाकर उसको पत्थरवाह किया-यद्यपि वह उनकी क्षमा हेतु प्रार्थना कर रहा था l
स्तिफनुस और वर्तमान शहीदों की कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि लोग मसीह के सन्देश के प्रति क्रूर हैं l अपने विश्वास की खातिर सताए नहीं जाने पर भी हम विश्व की सतायी जानेवाली कलीसियाओं के लिए प्रार्थना करें l और हम कभी भी सताए जाने पर , उससे अनुग्रह पाकर जिसने हमारे लिए अत्यधिक सहा विश्वासयोग्य रहें l
आसमान देखनेवाला
अपने कार्य और घर के मसलों से परेशान, मैट घूमने निकला l शाम की बसंती हवा आलोकित थी l अनंत आसमान नीले से काला हुआ, घने कुहरे ने धीरे-धीरे घास को ढक दिया l तारे और पूरब में पूर्ण चाँद दिखा l वह क्षण, मैट के लिए अत्याधिक आत्मिक था l वह वहाँ है, उसने सोचा l परमेश्वर वहाँ है, और यह उसका है l
रात में कुछ लोग आकाश में केवल प्रकृति देखते हैं l दूसरे बृहस्पति गृह की तरह एक दूरस्त और ठंडे ईश्वर को देखते हैं l किन्तु वही परमेश्वर जो “ऊपर आकाशमंडल पर विराजमान है ... गणों को गिन गिनकर, ... नाम ले लेकर बुलाता है” (यशायाह 40:22,26) l वह अपनी सृष्टि को घनिष्ठता से जानता है l
यही व्यक्तिगत परमेश्वर ने अपने लोगों से पुछा, “हे इस्राएल, तू क्यों बोलता है, “मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिंता नहीं करता? उनके लिए दुखित, परमेश्वर ने उनको उसे ढूंढने की बुद्धिमत्ता याद दिलाया l “क्या तुम नहीं जानते? क्या तुमने नहीं सुना? ... वह थके हुए को बल ... और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ्य देता है” (पद.27-29) l
परमेश्वर को भूलने की परीक्षा आती है l घूमने से समस्या नहीं जाएगी, किन्तु हमें विश्राम और निश्चयता मिलेगी कि परमेश्वर अपनी भली इच्छा पूरी कर रहा है l “मैं यहाँ हूँ,” वह कहता है l तू मेरा है l”
असीमित प्रेम
1900 में चीन में बोक्सर विद्रोह के दौरान, टाई युआन में एक घर में कैद मिशनरियों के जीवित रहने की एकमात्र आशा उस भीड़ में होकर दौड़कर निकलने की थी जो उनकी मौत चाहते थे l अपने हाथों में हथियारों के साथ वे तात्कालिक खतरे से बच गए l हालाँकि, एडिथ कूमब्स ने, यह जानकार खतरे में वापस गई क्योंकि उसके दो घायल विद्यार्थी भाग नहीं पाए हैं l उसने एक को बचा लिया, किन्तु दूसरे को बचाते समय मारी गयी l
इस बीच, सिन चाऊ जिले में मिशनरी अपने चीनी मित्र हो सुन केवी के साथ ग्रामीण इलाके में छिपे हुए थे l किन्तु अपने छिपे मित्रों के लिए बचने का रास्ता खोजते समय वह गिरफ्तार किया गया और उनके छिपने का स्थान नहीं बताने के कारण मारा गया l
हम एडिथ कूमब्स और सुन केवी में संस्कृति या राष्ट्रीय चरित्र से बढ़कर प्रेम देखते हैं l उनका बलिदान हमें हमारे उद्धारकर्ता का बृहद् अनुग्रह और प्रेम देखते हैं l
यीशु अपनी गिरफ़्तारी और मृत्यु का इंतज़ार करते हुए गंभीरता से प्रार्थना की, “हे पिता, यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले l” किन्तु उसने अपने निवेदन को साहस, प्रेम, और बलिदान के कठोर उदहारण से समाप्त किया : “तौभी मेरी नहीं परन्तु तेरी इच्छा पूरी हो” (लूका 22:42) l उसकी मृत्यु और पुनरुत्थान ने हमारे अनंत जीवनों को संभव किया l